Kaam Vaasna

कुछ पुरानी PDF कहानियाँ Download Kahani App
दीप के स्वप्नदोष का उपचार-2

दीप के स्वप्नदोष का उपचार-2

कह कर मैं चुप हो गई और उसकी मुठ मारती रही ! लगभग दस मिनट मुठ मारने के बाद दीप आह्ह… आह… आह्ह्ह… करने लगा और उसका बदन अकड़ने लगा, उसकी आँखें बंद हो गई और फिर इसने एक झटके के साथ लौड़े में से रस की फुहार छोड़नी शुरू कर दी!

डॉक्टर

डॉक्टर

ऑपरेशन के थोड़ी देर में ही मरीज मर गया।

कमाल की हसीना हूँ मैं-16

कमाल की हसीना हूँ मैं-16

वो अब मेरे दोनों मम्मों को अपनी मुठ्ठी से मसलते हुए मेरी चूत में धक्के मार रहे थे, हर धक्के के साथ उनका लंड एकदम टोपे तक बाहर आता और फिर अगले ही पल पूरा अंदर समा जाता।

कमाल की हसीना हूँ मैं-17

कमाल की हसीना हूँ मैं-17

“खूबसूरत जिस्म पर पहनने के लिये गहना भी वैसा ही होना चाहिये। इसकी रौनक तो तुम्हारे गले से लिपट कर बढ़ गई है।”

कमाल की हसीना हूँ मैं-18

कमाल की हसीना हूँ मैं-18

“अब इसका खड़ा होना मुश्किल है। आज शाम से काफी काम करना पड़ा ना, इसलिये बेचारा मुरझा गया है।” फिरोज़ ने अपने लंड की तरफ़ इशारा करते हुए कहा।

कमाल की हसीना हूँ मैं-19

कमाल की हसीना हूँ मैं-19

मुझ पर किसने चादर ढक दी थी, पता नहीं चल पाया। वैसे यह तो लग गया था कि ये फिरोज़ के अलावा कोई नहीं हो सकता है।

शराबी

शराबी

वेटर ने पूछा- इसे चार पीस में काटूँ या आठ पीस में?

कमाल की हसीना हूँ मैं-20

कमाल की हसीना हूँ मैं-20

“फिर क्या कहा आपने? वो तैयार हो गये? अरे परेशान क्यों होते हो… हम लोग इस तरह की किसी औरत को ढूँढ लेंगे। जो दिखने में सीधी-साधी घरेलू औरत लगे।”

कमाल की हसीना हूँ मैं-21

कमाल की हसीना हूँ मैं-21

जब वो मुझे देख कर हाथ जोड़ कर हंसा तो ऐसा लगा मानो काले बादलों के बीच में चाँद निकल आया हो।

कमाल की हसीना हूँ मैं-22

कमाल की हसीना हूँ मैं-22

रस्तोगी ने मेरे जिस्म के पीछे से लिपट कर मुझे अपने गुप्ताँगों को छिपाने से रोका। उसने मेरी बगलों के नीचे से अपने हाथों को डाल कर मेरे दोनों मम्मे थाम लिये और उन्हें अपने हथेलियों से ऊपर उठा कर स्वामी के सामने करके एक भद्दी सी हंसी हंसा।

सन्ता जीतो

सन्ता जीतो

दीवार कच्ची थी तो उनकी चुदाई के धक्कों से दीवार गिर गई और वे दोनों भी पीछे बने बगीचे में गिर पड़े।

कमाल की हसीना हूँ मैं-23

कमाल की हसीना हूँ मैं-23

मुझे उसने सेंटर टेबल के ऊपर लिटा दिया। मैं इस तरह लेटी थी कि मेरी चूत जावेद के सामने थी। मेरा चेहरा दूसरी तरफ़ होने की वजह से मुझे पता नहीं चल पाया कि मुझे इस तरफ़ अपनी चूत को पराये मर्द के सामने खोल कर लेटे देख कर मेरे शौहर के चेहरे पर किस तरह के भाव थे।

मालिक नौकर

मालिक नौकर

नौकर ने पूछा- मेम साहब, आपका भी दूध निकालूं?

कमाल की हसीना हूँ मैं-24

कमाल की हसीना हूँ मैं-24

उसके लंड को अपनी चूत के अंदर सरकता ना पाकर मैंने अपने मुँह से ‘गूँऽऽऽ गूँऽऽऽ’ करके उसे और देर नहीं करने का इशारा किया। कहना तो बहुत कुछ चाहती थी लेकिन उस मोटे लंड के गले तक ठोकर मारते हुए इतनी सी आवाज भी कैसे निकल गई, पता नहीं चला।

कमाल की हसीना हूँ मैं-25

कमाल की हसीना हूँ मैं-25

मैं दर्द से दोहरी होकर चीख उठी, “उफफऽऽऽ माँऽऽऽ मर गईईऽऽऽऽ।”

कमाल की हसीना हूँ मैं-26

कमाल की हसीना हूँ मैं-26

तभी पीछे से किसी की उँगलियों की छुअन मेरे नितंबों के ऊपर हुई। मैं उसे देखने के लिये अपने सिर को पीछे की ओर मोड़ना चाहती थी लेकिन मेरी हरकत को भाँप कर स्वामी ने मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिये और मेरे निचले होंठ को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा।