Kaam Vaasna

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मैं दोनों में से किसकी बात मानूँ?

मैं दोनों में से किसकी बात मानूँ?

मेरी शादी हुए 5 वर्ष हो चुके हैं, करीब 9 वर्ष से मै एक लड़के से प्यार करती हूँ, मैं अब शादी के बाद भी उस लड़के से प्यार करती हूँ।
मेरे पति को भी मेरे अफेयर के बारे में पता है।
हम दोनों ने मेरी शादी के बाद कई बार सेक्स किया है जिसका पता मेरे पति को भी चल गया था।
पहले तो वो बहुत गुस्सा हुए पर बाद में उन्होंने ही मुझे अकेली उस लड़के के पास कई बार भेजा।
मेरे पति मुझसे बहुत प्यार करते हैं, वो मेरा दर्द समझते हैं कि प्यार करने वालों के लिए जुदाई क्या होती है इसलिए ही वो मुझे उस लड़के के से मिलने भेज देते हैं क्योंकि उन्होंने भी किसी लड़की से बहुत प्यार किया था।
लेकिन कुछ दिनों से मेरे पति एक बात की जिद पर अड़े हुए है- अबकी बार तुम उस लड़के के साथ सेक्स मेरे सामने करोगी तभी मिलने भेजूँगा !
पर वो लड़का इस बात के लिए राजी नहीं हो रहा है, वो कहता है कि चाहे जिन्दगी भर न मिलो, पर मैं किसी और के सामने तुम्हारे साथ सेक्स नहीं कर सकता।
अब मैं क्या करूँ?
मैं दोनों में से किसकी बात मानूँ?
जबकि मैं दोनों में से किसी के बिना भी नहीं रह सकती।
अब आप लोग ही मुझे कोई उपाय बताएँ।

बहन की चूत चुदाई की हवस

बहन की चूत चुदाई की हवस

जब वो रोटी बनाती है तो उसकी कुर्ती में से झांकते हुए मम्मे मुझे दीवाना बना देते हैं।

जिया की बहन को चोद कर माँ बनाया

जिया की बहन को चोद कर माँ बनाया

अल्ताब पठान
नमस्ते दोस्तो, मैं अल्ताब एक बार फिर हाजिर हूँ अपनी और एक नई कहानी लेकर।
मेरी पिछली कहानी में मैंने जैसा बताया कि कैसे मैंने जिया की सील तोड़ी।
इस कहानी को पढ़ कर मुझे काफी मेल आए। मैंने सारे मेल्स का जवाब देने की पूरी कोशिश की मगर मैं किसी के मेल का जवाब नहीं दे पाया होऊँ तो उसके लिये माफी चाहता हूँ।
और मेरे कहानी को इतना पसंद करने के लिये धन्यवाद करता हूँ।
पिछले कहानी में मुझसे एक गलती हो गई। मैंने आपको यह नहीं बताया कि जिया हर बार संभोग के बाद आई-पिल लेती थी तो प्रेगनेन्सी का कोई खतरा नहीं था।
यह सब मैं आपको इसलिए बता रहा हूँ क्योंकि बहुत से लोगों को यह लगा कि जिया प्रेगनेन्ट हो गई है।
प्रेगनेन्ट तो हुई मगर जिया की बहन रेशमा।
आप सोच रहे होंगे कि वो कैसे?
वो आपको कहानी पढ़ते समय पता चल जाएगा।
पहले मैं रेशमा के बारे में बता दूँ।
रेशमा मुझसे चार साल बड़ी है, कद 5’4″, गोरा रंग, संगमरमर सा बदन, गुलाब की पंखुड़ी से होंठ, काले नागिन से लहरदार रेशमी काले बाल। फिगर 36-34-37 का होगा, कुल मिलाकर उसे किसी अप्सरा से कम आँकना उसकी सुंदरता की तौहीन होगी। बल्कि अगर रंभा, उर्वशी तथा मेनका को एक ओर रख कर दूसरी और रेशमा को रखा जाए और इनमें स्पर्धा की जाए तो जीत अवश्य ही रेशमा की ही होगी।
यह कुछ ज्यादा नहीं हो गया…!
मगर क्या करूँ दोस्तो, रेशमा की जितनी तारीफ करूँ उतनी कम ही लगती है।
रेशमा के परिवार में रेशमा उसका पति तथा सास रहती है, उसके ससुर का दो साल पहले किसी बीमारी की वजह से देहांत हो गया था।
रेशमा के शादी को 3 साल हो गए हैं मगर अब तक उसकी कोई औलाद नहीं है।
अब कहानी पर आते हैं।
एक बार सम्भोग करते समय जिया ने मुझे बताया कि रेशमा घर आई हुई है और वो काफी उदास रहने लगी है।
मेरे पूछने पर उसने बताया कि उसका पति कभी बाप नहीं बन सकता।
मैं- तो यह सब तुम मुझे क्यों बता रही हो?
जिया- अगर तुम…!
मैं- तुम पागल तो नहीं हो गई..? मैं तुमसे प्यार करता हूँ।
जिया- तो मैं कौन सा तुम्हें रेशमा दीदी से शादी करने को कह रही हूँ?
मैं- तुम कुछ भी कहो, मगर मैं ऐसा नहीं कर सक्ता।
इस बात पर हमारी बहुत देर तक बहस हुई, आखिरकार हारकर वो रूठ कर चली गई, उसने मुझसे 5 दिनों तक बात नहीं की।
आखिर मैंने उसकी जिद के आगे घुटने टेक दिए।
आप तो जानते ही हो दोस्तो, लड़की की जिद के आगे हर बार लड़कों को ही झुकना पड़ता है, तो भला मैं कैसे टिक पाता…!
मैंने उससे कहा- तुमने मुझे तो मना लिया मगर अपने दीदी को कैसे मनाओगी?
इस पर जिया ने मुझसे कहा- तुम उसकी फिकर मत करो, यह आईडिया दीदी का ही तो है और इसके लिये जीजाजी भी तैयार हैं।
अब तो मानो मेरा सर चकराने लगा।
“मतलब तुम्हारे दीदी को हमारे बारे में सब पता है…!”
“हाँ… मैं अपने दीदी से कुछ नहीं छुपाती।”
उसके बाद मैंने रेशमा से बात की, तो उसने मुझसे कहा- देखो अल्ताब… मेरे पति में हारमोन्स की गड़बड़ी की वजह से वो कभी बाप नहीं बन सकते। तो हम दोनों की राय है कि मैं किसी और से बच्चा पैदा करूँ, ताकि यह ज़ालिम दुनिया मुझे बांझ ना कहे।
क्योंकि तुम जिया से प्यार करते हो इसलिये मुझे तुम पर पूरा भरोसा है, कि तुम मुझे बदनाम नहीं करोगे।
तो मैंने कहा- ठीक है मैं तैयार हूँ, मगर ये सब होगा कैसे?
इस पर रेशमा ने कहा- सब इंतजाम हो गया है। मेरे पति काम का बहाना बनाकर एक महीने के लिए बाहर चले जायेंगे, फिर तुम एक महीने के लिये हमारे घर चलना।।
दोस्तो, मैं आपको बता दूँ कि रेशमा का घर हमारे घर से 3-4 किलो मीटर दूर होगा और मेरा विद्यालय रेशमा के घर से कुछ एक किलोमीटर दूर है, तो मुझे कोई परेशानी नहीं थी। मगर सवाल यह था कि मेरे मम्मी-पापा को कौन मनाएगा।
इस पर जिया ने कहा- वो तुम मुझ पर छोड़ दो, अंकल और आंटी को मैं मना लूँगी।
तो सब तय हुआ, फिर उसी शाम जिया हमारे घर आई और उसने मेरे मम्मी-पापा को यह बहाना बताया कि उसके जीजाजी किसी काम से एक महीने के लिए बाहर जा रहे हैं और मेरी दीदी और उसकी सास घर पर अकेले हैं, तो क्या आप अल्ताब को मेरे साथ रेशमा के घर भेज सकते हो?
थोड़ी ना-नुकुर के बाद मेरे मम्मी-पापा मान गए। जैसे-तैसे सुबह हुई और मैं जल्दी उठ कर तैयार होकर जिया और रेशमा का इंतजार करने लगा, अब वक्त काटे नहीं कट रहा था।
आखिर इंतजार की घड़ियाँ खत्म हुईं, 9.30 बजे वो दोनों आईं। आते ही मेरा पहला सवाल ये था कि तुम दोनों ने इतनी देर क्यों लगा दी?
इस पर जिया इतराते हुये बोली- क्या बात है दीदी से ज्यादा जल्दी तो तुम्हें है बाप बनने की…!
इस पर मैं बौखलाते हुये- नन…नहीं एएए…ऐसी तो कोई बात नहीं है।
मेरी हालत देख कर वो दोनों खिलखिला कर हँसने लगीं।
फिर हम लोगों ने एक साथ नाश्ता किया। फिर हमने मेरे मम्मी-पापा से इजाजत लेकर रेशमा के घर के लिए रवाना हुए।
रेशमा के घर जाकर हम लोगों ने थोड़ी देर आराम किया और फिर… छोडो ना यार, हमने क्या खाया, क्या पिया वगैरह-वगैरह इससे क्या फरक पड़ता है। अगर मैं यही बताता रहा तो आप लोग बोर हो जाओगे और आप मेरी कहानी नहीं पढ़ोगे। इसलिये मैं सीधा मुद्दे पर आता हूँ।
रात हुई और हमने रात का खाना खाया और फिर रेशमा ने मीठे में नींद की गोली मिला कर अपने सास को दे दी, जो पहले से तय था।
फिर क्या था दोस्तो… आंटी तो सो गईं, मगर रेशमा की प्यास जाग गई, हम तीनों रेशमा के कमरे में गए, अन्दर जाते ही रेशमा मुझ पर भूखी शेरनी की तरह टूट पड़ी।
मैं बोला- दरवाजा तो बंद कर लो…!
इस पर रेशमा- ऐसे भी कौन देखने वाला है… माँ जी तो सुबह तक उठने वाली है नहीं..!
और फिर मुझे चूमने लगी।
थोड़ी देर यूं खड़े-खड़े चुम्मा-चाटी के बाद मैंने रेशमा को गोद में उठा कर बेड पर पटक दिया और उसके ऊपर चढ़ गया और होंठ चूसने लगा।
ये सब जिया एक तरफ कुर्सी पर बैठकर बिना पलकें झपकाए देख रही थी और कपड़ों के ऊपर से ही अपनी योनि सहला रही थी।
मैंने बिना देर किए अपने और रेशमा के सारे कपड़े उतार दिए और उसके स्तनों पर टूट पड़ा।
रेशमा के स्तन काफी सख्त हो गए थे, मैं बारी-बारी से स्तनों को चूसने लगा, मैं कभी दाएं स्तन को चूसता और बाएँ स्तन को हाथ से दबाता तो कभी बाएँ स्तन को चूसता और दाएं स्तन को हाथ से दबाता।
रेशमा मेरा सर अपने स्तनों पर ऐसे दबा रही थी जैसे पूरा स्तन मुझे खिला ही देगी।
रेशमा की आँखें खुशी के मारे बंद हो रही थीं और उसके मुँह से कामुक सिसकारियाँ निकलने लगीं- आऊऊऊ… शिशश… आह्ह्ह्ह्ह… आईईईई..!
जिसे सुन कर मुझे और जोश आ रहा था।
यह कहानी आप कामवासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं।
थोड़ी देर चूसने के बाद मैं थोड़ा नीचे आकर उसके पेट पर चूमने लगा। अब तक जिया अपने सारे कपड़े उतार चुकी थी और अपने योनि में ऊँगली कर रही थी। मैं थोड़ा और नीचे आकर रेशमा के पेट पर चूमने लगा। चूमते-चूमते मैं एक हाथ से उसकी योनि को सहलाने लगा और झटके से एक उंगली योनि में उतार दी। शायद रेशमा इसके लिये पहले से तैयार नहीं थी और वो ‘चिहुंक’ उठी।
अब तक जिया स्खलित हो चुकी थी और कुर्सी पर करीब-करीब लेट ही गई।
फिर मैं थोड़ा और नीचे आते हुये रेशमा की योनि पर चूमने लगा और ऊँगली अन्दर-बाहर करने लगा।
थोड़ी देर में ही रेशमा भी स्खलित हो गई और मैंने उसका सारा रस पी लिया उसका स्वाद कसैला सा था। फिर रेशमा उठी और मेरे लिंग को चूसने लगी।
यकीन मानिए दोस्तो, रेशमा लिंग चूसने में काफी माहिर थी। वो मेरे लिंग को ऐसे चूस रही थी, जैसे कोई छोटा बच्चा लॉलीपॉप चूस रहा हो।
इतने माहिर तरीके से तो जिया ने भी आज तक नहीं चूसा था, इसी वजह से मैं ज्यादा देर टिक नहीं पाया और 5-10 मिनट में ही मेरा लावा फूट पड़ा।
रेशमा मेरा सारा रस पी गई और मेरा लिंग चाट कर साफ कर दिया।
फिर जिया मेरे पास आई और मेरे होंठों पर चूमने लगी। दूसरी तरफ रेशमा अपने कोमल हाथों से मेरा लिंग सहला रही थी।
इसका असर भी जल्द ही दिखने लगा, मेरे लिंग में कड़ापन आना शुरू हो गया और देखते ही देखते मेरा लिंग अपने पूरे आकार में आ गया।
फिर मैंने रेशमा को पीठ के बल लेटा कर अपने लिंग को उसके योनि पर लगा कर एक जोर का झटका दिया। मेरा आधा लिंग योनि में प्रवेश कर गया।
रेशमा के चेहरे पर दर्द की लकीरें साफ नजर आ रही थीं। मैं थोड़ी देर ऐसे ही रूका रहा और फिर एक झटका दिया, इस बार रेशमा की चीख ही निकल जाती, मगर जिया ने फुर्ती से रेशमा के मुँह पर हाथ रख दिया। थोड़ी देर रूक कर, मैंने धक्के लगाना शुरू किए।
अब रेशमा को भी मजा आ रहा था और वो मजे से सिसकारियाँ लेने लगी। ना जाने क्या-क्या बड़बड़ाने लगी, “और जोर सेऽऽ….! हाँ ऐसे ही आऽऽऽऽ…! हाँ बह्ह्होत मजा आऽऽऽ रहा है थोड़ा और जोरऽऽऽ… से..! आऊ…! या….ह..!”
यह सुन कर मुझे और भी जोश आ गया और मैं और जोर से धक्के लगाने लगा और वो और जोर से सिसकारियाँ लेने लगी।
थोड़ी देर इस आसन में संभोग करने के बाद मैंने आसन बदल कर उसे घोड़ी बना कर पीछे से लिंग प्रवेश करा दिया। हमारी काम-क्रीड़ा देख कर जिया काफी गरम हो चुकी थी और वो रेशमा के सामने आकर लेट गई और दोनों ने आँखों-आँखों में न जाने क्या इशारे किए और रेशमा तुरंत जिया की योनि चूसने लगी।
इधर मैं भी तेज धक्के लगा रहा था। यह खेल थोड़ी देर ऐसे ही चलता रहा। फिर रेशमा स्खलित हो गई और थोड़ी देर बाद जिया भी ढेर हो गई। मगर मेरा अब भी बाकी था तो मैं लगा रहा।
मगर रेशमा अब थक चुकी थी। तो उसने कहा- बस मुझमें अब और सहने की ताकत नहीं है।
तो मैंने उसे छोड़ कर जिया की तरफ रूख किया।
वो जैसे तैयार ही थी, जिया तुरंत पैर फैला कर लेट गई, मैंने सीधे जिया की योनि पर लिंग रखकर झटका दिया।
मेरा लिंग एक ही झटके में पूरा जड़ तक योनि में उतर गया।
उसके बाद मैंने कुछ 20-25 झटके दिए और मैं भी स्खलित हो गया। फिर मैं जब तक वहाँ रहा तब तक हम तीनों ने खूब मजे किए। अब खबर आई है कि रेशमा प्रेगनेंट है।
दोस्तो, मैंने जो कुछ किया, अपने प्यार के लिए किया।
आपको क्या लगता है..! मैंने सही किया या गलत…! मुझे ईमेल करके जरूर बताइएगा।
altabpathan.ap@gmail.com

जूही और आरोही की चूत की खुजली-22

जूही और आरोही की चूत की खुजली-22

पिंकी सेन
हैलो दोस्तो, मज़ा आ रहा है न.. आरोही और जूही की चुदाई में..
आपकी राय के अनुसार ही मैंने बड़े आराम से चुदाई पेश की है और आगे के कुछ और भागों में भी यह चुदाई चालू रहेगी। आप बस मज़ा लेते रहिए और मेल करते रहिए। आपके ईमेल ही मेरी कलम की साँसें हैं।
कुछ दोस्तों ने कहा कि रात को नींद भी नहीं आती कि अब आगे क्या होगा यही सोचते रहते हैं.. अगला भाग जल्दी पोस्ट किया करो।
तो मैं उन दोस्तों को बहुत ‘थैंक्स’ कहती हूँ।
आज का भाग नए ट्विस्ट के साथ.. आनन्द लीजिए।
अब तक आपने पढ़ा…
जूही को रेहान पर शक हो जाता है क्योंकि नशे की हालत में उसने सचिन को देख लिया था और उधर राहुल और आरोही चुदाई की तैयारी में थे, पर राहुल को सील पैक चूत ना मिलने का अफ़सोस था, तब आरोही उसे एक नहीं दो सील तोड़ने के लिए बोलती है। राहुल बहुत खुश हो जाता है।
अब आगे…
आरोही अपने भाई से वादा मांगती है कि ये बात मॉम-डैड को नहीं पता चलनी चाहिए।
राहुल- ओके बहना वादा रहा.. अब जल्दी बताओ ना यार प्लीज़…!
आरोही- भाई, मेरी गाण्ड अभी तक कुँवारी है, आप चाहो तो इसका मज़ा ले सकते हो और जूही की भी कुँवारी है क्योंकि रेहान आज उसकी चूत को ही ढीला करेगा इसलिए आप गाण्ड मार लो आपको मज़ा भी आएगा और आपका अरमान भी पूरा हो जाएगा।
राहुल खुश होकर बैठ गया।
राहुल- ओह वाउ.. यार यह तो मेरे दिमाग़ में आया ही नहीं.. अब तो मज़ा आ जाएगा, चलो जल्दी से घोड़ी बन जाओ आज तुमको घोड़ी बना कर बड़े प्यार से तेरी गाण्ड मारूँगा।
आरोही घोड़ी बन कर राहुल को आराम से करने के लिए बोली।
राहुल- फिकर मत कर बहना, बड़े आराम से थूक लगा कर तेरी गाण्ड मारूँगा, जैसे सिमरन की मारी थी।
यह बात सुनते ही आरोही सन्न रह गई और जल्दी से सीधी होकर राहुल के पास बैठ गई।
आरोही- भाई अपने भी सिमरन के साथ किया था..! ओ माई गॉड पर आप तो वहाँ थे ही नहीं फिर ये सब कैसे और कब हुआ? प्लीज़ बताओ ना भाई?
यह कहानी आप कामवासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !
राहुल- बहना याद है… जब उस रात तुम गुस्से में तोड़-फोड़ कर रही थीं..! तब जूही ने तुमको आइडिया दिया था कि कमरे में बन्द कर दो सिमरन को और मैंने उसकी बात काट कर दूसरा आइडिया दिया था।
आरोही- हाँ याद है.. मगर मैंने अंकित और संजू के साथ मिलकर दूसरा प्लान बनाया था। तुम तो थे ही नहीं वहाँ पर…!
राहुल- हाँ जानता हूँ तुमने प्लान बनाया था मगर मुझे डर था कहीं तुम किसी मुसीबत में ना फँस जाओ.. इसलिए मैं तुम्हारे पीछे था और तुम्हारे जाने के बाद मैं अन्दर गया और मौका देखकर सिमरन की गाण्ड में लौड़ा डाल दिया था। साली बहुत ज़ोर से चीखी थी ही ही ही ही…!
आरोही- बदमाश कहीं के पहले बोल देते तो उसकी सील ही तुड़वा देती तुमसे.. वो बड़े प्यार से चुदवा लेती अपनी चूत को तुमसे ! हा हा हा हा हा…!
राहुल- अब उस कुतिया की बात रहने दो.. आओ तुम मेरे लौड़े की प्यास मिटाओ…बन जाओ घोड़ी… आज अपनी बहन की गाण्ड बड़े प्यार से मारूँगा मैं…!
दोस्तो, दो मिनट के लिए हम ऊपर के कमरे में चलते हैं.. सॉरी हाँ लेकिन यह जरूरी है…!
साहिल- यार सचिन, यह साली जूही तो बहुत सवाल पूछ रही है रेहान को टेन्शन में डाल दिया.. चल स्क्रीन दो लगा देखते हैं.. वो दोनों भाई-बहन क्या कर रहे हैं..!
सचिन दूसरी स्क्रीन लगा देता है।
साहिल- अबे ये देख, यह साला बहनचोद तो अपनी बहन को घोड़ी बना कर चोदेगा, हा हा हा… लगता है.. गाण्ड मारेगा साला.. देख कैसे गाण्ड पर थूक लगा रहा है हा  हा हा…!
बस दोस्तो, अब वापस नीचे चलो यहाँ लाने की वजह यही थी कि राहुल और आरोही ने जो सिमरन के बारे में बात की वो रिकॉर्ड तो हो गई.. पर इन दोनों ने सुनी नहीं.. तब ये रेहान को लाइव देख रहे थे। मैंने इसलिए आपको बताया ताकि आपके दिमाग़ में यह बात ना आए कि इनका राज तो खुल गया कि बात क्या थी, यह सब बाद में पता चलेगा। अब आप आरोही की गाण्ड चुदाई का मज़ा लो !
आरोही घोड़ी बन गई और राहुल ने अपने लौड़े पर अच्छे से थूक लगाकर गाण्ड के सुराख को ऊँगली से खोलकर उसमें भी थूक लगाया  और लौड़ा टिका कर हल्के से दबाया तो लौड़ा फ़िसल कर ऊपर निकल गया।
आरोही- हा हा हा हा.. तुमसे नहीं होगा भाई हा हा हा…!
राहुल ने गुस्से में दोबारा लौड़ा सुराख पर रख कर जोरदार झटका मारा तो आधा लंड गाण्ड में घुस गया, दर्द के मारे आरोही बेड पर लेट  गई और उसके साथ साथ राहुल भी उसकी पीठ पर ढेर हो गया। ज़ोर से बेड पर गिरने के कारण पूरा लौड़ा गाण्ड में घुस गया।
आरोही- एयाया एयाया आआ… निकालो उ बहुत दर्द हो रहा है… आआ… यह कोई तरीका आअहह.. है एक साथ पूरा आ..हह…. डाल दिया…!
राहुल- आ..हह…. सुकून आ गया… अपने लौड़े को गाण्ड में कितना टाइट महसूस कर रहा हूँ और इसमें मेरी क्या गलती.. तुम क्यों नीचे झटके से लेटीं.. मुझे भी साथ लेटना पड़ा और पूरा लौड़ा अन्दर एकदम से घुस गया।
आरोही- आ..हह….. ओके.. ठीक आ है.. पर अई अभी हिलना मत बहुत दर्द है उफ्फ आ…!
राहुल कहाँ मानने वाला था, वो लौड़े को आगे-पीछे करने लगा और आरोही तड़पती रही। दस मिनट बाद उसकी चूत में झनझनाहट होने लगी, अब उसको दर्द भी कम था।
आरोही- अई आह मारो भाई.. आ आज अपनी बहन की गाण्ड भी आ मारो उफ्फ आ..हह.. मेरी चूत में भी आ..हह.. खुजली हो रही है.. अई आह ज़ोर से करो आ उफ़…!
राहुल फुल स्पीड से लौड़ा पेलने लगा, आरोही नीचे से उछल-उछल कर गाण्ड मरवा रही थी और राहुल भी खूब मज़े से गाण्ड मार रहा था।
राहुल- उउउ उहह उउउ उहह बहना उहह तेरी गाण्ड बहुत गर्म उहह है आ आ मज़ा आ गया अया आह…!
आरोही- अई आआ आह मारो आ..हह.. उफ्फ मेरी चूत आ..हह.. भाई उफ्फ प्लीज़ दो मिनट के लिए आ..हह.. चूत में भी डालो न… आ..हह.. उई मेरा पानी निकलने वाला है आ…!
राहुल- उहह उहह ओके आ..हह.. मैं लौड़ा निकालता हूँ.. जल्दी से घोड़ी बन जाना.. उफ्फ आ ले रानी आ..हह….!
राहुल झटके से उठा और आरोही भी स्पीड से उठकर घुटनों पर आ गई।
राहुल ने धप्प से लौड़ा चूत में पेल दिया।
आरोही- आ सस्स ससस्स फक मी आह फक हार्ड अई आ गो डीप.. आ..हह.. या या या उईईइ आह आह आई एम कमिंग आ आह ह…!
राहुल स्पीड से लौड़ा चूत में पेलने लगा आरोही की बातों से उसका जोश बढ़ गया।
आरोही भी गाण्ड को पीछे धकेल रही थी लौड़ा पूरा चूत की गहराई तक जा रहा था।
राहुल- उहह उहह उ र सो सेक्सी आ ई फक यू आ ले ले ले आ..हह.. आ…!
आरोही- आआआ एयाया उईईइ चोदो आह डाल दो पूरा… आ म म मेरा पानी एयाया आहह गया है…!
आरोही चूत भींच कर झड़ने लगी, कभी चूत खोलती कभी भींचती… राहुल भी चूत की गर्मी से बच ना सका और स्पीड से दो-तीन झटके मार कर झड़ने लगा।
राहुल- अई आह अई लो आ मेरा भी अई आ पानी निकल गया…!
झड़ने के बाद राहुल बेड पर लेट गया और आरोही भी वहीं उसके पास ढेर हो गई थी।
दोस्तो, आरोही की गाण्ड का तो मुहूर्त हो गया, चलो अब जूही का भी देख लें.. रेहान उसके सवालों का क्या जवाब देता है..? आप भी सोच रहे होंगे कि अब क्या होगा तो चलो उनके रूम में चलते हैं क्या हो रहा है…!
रेहान बीयर की पूरी बोतल एक साथ पी गया।
जूही- क्या हुआ रोनू.. किस सोच में पड़ गए हो तुम.. बताओ न.. सच क्या है प्लीज़ यार…!
रेहान- जान मैं तुमको सरप्राईज देना चाहता था, पर तुम हो कि नहीं मानोगी…! तुमने सही कहा वो आदमी रूम में आया था और जानती हो वो कौन है…!
जूही- मैंने कहा था न.. किसी को देखा है पर आप मुझे टाल रहे थे.. अब बताओ कौन है वो और क्यों आया था यहाँ पर और कैसा सरप्राईज…!
रेहान- जान वो सचिन था, जिस फिल्म में आरोही काम कर रही है उसका सेकेंड हीरो, उसके लिए मैंने तुम्हें हिरोइन चुना है और तुम हो कि शक कर रही हो…!
जूही- क्या रियली वो हीरो था.. ओह माई गॉड आप मुझे भी चान्स दे रहे हो फिल्म में.. थैंक्स थैंक्स थैंक्स…!
दोस्तो, इसे कहते है बेवकूफ़ इंसान, पता नहीं इन दोनों बहनों को फिल्म का इतना क्या क्रेज है कि अपनी चूत का भोसड़ा बनवा रही हैं पर इनके दिमाग़ में यह बात नहीं आ रही कि रेहान इनके साथ क्या खेल खेल रहा है।
ओके फ्रेंड्स, अब आज का भाग यहीं समाप्त करती हूँ और उम्मीद करती हूँ कि आपको मज़ा आया होगा।
आपके कुछ सवालों के जवाब तो आपको मिल ही गए होंगे।
अब बस आप जल्दी से मेरी आईडी pinky14342@ gmail. com पर मेल करना है और बताना है आज के इस भाग के बारे में..
ओके जल्दी मिलते हैं…
बाय।

चंदा रानी की कुंवारी बहन की नथ-3

चंदा रानी की कुंवारी बहन की नथ-3

चूतनिवास
मैंने लंड को चूत के मुंह पर सटाया हल्के से धक्का मारा।
टोपा जाकर उसकी चूत के पर्दे से टकराया और वो दर्द से चीख पड़ी।
घबराहट से चूत का जूस ही निकालना बंद हो गया।
उसका पर्दा बहुत सख्त था और तगड़े धक्के से ही फटेगा, दर्द भी उसे ज़्यादह होगा, परंतु कोई इलाज था ही नहीं !
मैंने चंदा रानी से कहा- रानी इसकी चूत की झिल्ली बहुत कड़ी है… ज़ोर का धक्का ही मारना पड़ेगा… दर्द से चिल्लाएगी तो सम्भाल लियो !
इतना बोल के मैंने एक गहरी सांस ली और धड़ाम से ज़बरदस्त धक्का पेला।
लंड झिल्ली को फाड़ता हुआ धम्म से उसके बच्चेदानी से जाके भिड़ा- हाय… रे… हाय.. मैं मर गई… दीदी बचाओ… मैं… मरी… अब ना बचूंगी… हाय… उई मां… अरे मार डाला !
खून की धारा बह चली, उसके गरम गरम, गाढ़े, चिपचिपे लहू ने चूत भर दी। लंड मानो उबलते हुए तेल में घुसा हो।
बहुत ज़्यादह खून निकला क्योंकि झिल्ली बहुत मोटी और सख्त थी।
चंदा रानी ने बार बार उसके माथे पे चूमा और उसे तसल्ली दिलाती रही। नन्दा रानी ने चंदा रानी को बड़े ज़ोर से जकड़ रखा था। आँसुओं की धारा उसके आँखों से बहे जा रही थी और वो हाय हाय करके कराह रही थी।
चंदा रानी उसे चूम के, सहला के, थपका थपका के और पुचकार पुचकार के बहला रही थी।
‘बस मेरी रानी बेटी… बस… बस… सब ठीक हो जायेगा… .एक बार तो ये पीड़ा हर लड़की को सहनी पड़ती है… चुप जा मेरी रानी… अब चुप हो जा… अभी देख कितना मज़ा आयेगा… बस… बस… बस !’
मैं लंड चूत में घुसाये बिल्कुल बिना हिले डुले पड़ा था। नन्दा रानी की कुमारी चूत बेहद टाइट थी। लंड उसमें फंसा हुआ था और ऐसा लगता था कि लौड़े को मुठ्ठी में दबाके मुट्ठी को कस लिया गया हो।
यारो, इतनी संकरी चूत को लेने का मज़ा भी बेइंतिहा आता है। और यह चूत तो एक अठारह साल की नवयुवती की थी तो इसके तो क्या कहने !
जब देखा कि नन्दा रानी शांत होने लगी है तो मैंने उसे बड़े प्यार से चूमना शुरू किया, उसके होंठ चूमे, चेहरा जगह जगह पर चूमा, कान की लौ मुंह में लेकर चूसी, गर्दन पर जीभ फिराई और फिर दोबारा होंठ चूसे।
इतनी चूमा चाटी से उसका डर और दर्द दोनों काम होने लगे और उसके बदन ने प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी।
नन्दा रानी के चेहरे पर एक मुस्कान सी दीखने लगी और बुर में फिर से रस बहने लगा जिससे लंड को भी मज़ा आने लगा।
काफी देर ऐसा प्यार करने के बाद मैंने बहुत धीमे धीमे धक्के मारने आरंभ किये।
पहले तो वह फिर कुछ दर्द से कराही लेकिन फिर चूत में आते हुए मज़े ने उसको सब दर्द भुला दिया। अब वह भी चुदाई का आनन्द उठा रही थी।
मैंने अपना मुंह उसकी चूचियों पर जमा दिया और एक एक करके चूसने लगा।
क्या मस्त चूचुक थे ! सम्भोग की प्यास ने उनको सख्त कर दिया था इसलिये अब मैं चूची चूसते हुए दान्त भी गाड़ने लगा और दूसरी चूची को नींबू की भांति निचोड़ने लगा।
अब उसके मुंह से चीत्कार नहीं बल्कि सीत्कार की आवाज़ें आ रही थीं, उसके नितंब भी अपने आप ऊपर नीचे होने लगे थे।
चंदा रानी उसे लगातार उत्साह बढ़ाने वाली बातें करे जा रही थी, नन्दा रानी का सिर सहला के बोली- नन्दा मेरी बेटी… अब कम हो गया ना दर्द… अब हल्का हल्का मज़ा भी आ रहा है ना !
नन्दा रानी ने धीरे से सिर हिलाकर हाँ में जवाब दिया।
‘देख, मैंने कहा था ना मज़ा आयेगा… अभी देखे जा… कितना ज़्यादह मज़ा आने वाला है।’
मैंने पूरे ज़ोर से उसकी दोनों मम्‍मों को दबाया, अपने अंगूठे और उंगलियाँ चूचुक में गड़ा दीं, फ़िर उनको सहलाया और बारी बारी से चूसने का काम चालू दिया। मैं लगातार धक्के भी हौले हौले लगाये जा रहा था, मैंने नन्दा रानी के फिर से होंठों को चूसा।
इस दफा उसने भी अपनी जीभ मेरे मुंह में घुसा दी, उसके लब चूसते चूसते ही मैंने धक्कों की रफ़्तार थोड़ी सी तेज़ की। चूत में खून और चूत के रस के कारण बड़ी पिच पिच हो रही थी और हर धक्के पर फच फच की आवाज़ आती।
नन्दा रानी ने अपने चूतड़ ऊपर नीचे हिला हिला के धक्कों में मेरा साथ देना शुरू कर दिया था, उसने अपनी टांगें मेरी जाँघों पर कस कर लपेट ली थीं।
उसकी चूचुक मेरी छाती में गड़े जा रहे थे लेकिन उनको मैंने जो अच्छे से निचोड़ा था इसलिये उनकी अकड़न अब घट चुकी थी, सिर्फ निप्पल सख्ताये हुए थे क्योंकि नन्दा रानी पर अब चुदास पूरी तरह चढ़ चुकी थी और चुदासी लड़की के निप्पल सख्त हो ही जाते हैं, जब स्खलित होगी तो दुबारा मुलायम हो जायेंगे, यह सबसे पक्की निशानी है कि लड़की गर्म हो गई है या नहीं।
मेरे लंड की गर्मी भी अब बहुत ज़्यादह बढ़ गई थी। मैं जानता था कि इतनी देर से उत्तेजित लौड़ा अब झड़ने की राहत मांग रहा है। मैंने धक्के और भी तेज़ स्पीड से मारने शुरू किये, मैं लंड को सुपारी तक बाहर खींचता और फिर धमाक से वापस चूत में घुसा देता। एक बड़े ज़ोर से फच की आवाज़ होती और साथ ही लौड़े का टोपा चूत के आखिर में नन्दा रानी की बच्चेदानी में जाके ठुकता।
बुर अब दबादब रस का प्रवाह करे जा रही थी, इसलिये लंड अब बड़े आराम से इतनी तंग चूत में भी अंदर बाहर हो रहा था।
नन्दा रानी बहुत कसमसा रही थी, उसका सुन्दर मुखड़ा कामवासना के तीव्र आवेश में लाल हो गया था, माथे पे पसीने की बूंदें छलक आयीं थीं, उसके नाखून मेरी पीठ पे गड़े जा रहे थे और वह बार बार सी सी कर रही थी।
उत्तेजना से भरपूर नन्दा रानी अपना मुंह कभी दायें करती और कभी बायें।
मैंने थोड़ा सा अपने को उठाया और एक बार फिर से उसकी मस्त चूचुक कस के मसलने कुचलने लगा।
मैंने दोनों निप्प्लों को अंगूठे और उंगली के बीच में जकड़ कर बड़े ज़ोर से उमेठा, एक गहरी हिचकी उसके मुंह से निकली और फिर उसने अपने नितंब बहुत तेज़ तेज़ ऊपर नीचे किये।
चूत कई बार लपलपाई और फिर झड़ गई, रस की एक फुहार मेरे लंड पे सब तरफ से गिरी, और नन्दा रानी ने मुझे पूरी ताक़त से भींच डाला।
उसके बाद वो धड़ धड़ करके अनेक बार झड़ी। मेरा लंड तो काफी देर से झड़ना चाहता था जिसे मैंने बड़ी मुश्किल से कंट्रोल किया हुआ था।
मैंने उसके कंधे पकड़े और दनादन बीस पचीस धक्के बहुत तेज़ी से मारे, लंड बड़े ज़ोर से झड़ा, मेरा गर्म गर्म लावा बड़े बड़े थक्कों के रूप मे निकला और काफी देर तक निकलता रहा।
मुझे ऐसा लगा जैसे मेरी रीढ़ की हड्डी पिघल गयी हो और मैं मूर्छित सा होकर नन्दा रानी के ऊपर ढेर हो गया, वो भी झड़ के बेसुध सी पड़ी थी।
‘बधाई हो नन्दा… मेरी प्यारी बहन… आज तेरी नथ खुल गई… आज तेरी ज़िंदगी का एक महान दिन है… बहुत बहुत बधाई… ईश्वर करे कि तुझे जीवन भर इसी प्रकार तगड़े लंड मिलें… चल मैं तुम दोनों के लिये मीठा लेकर आती हूँ… .मेरी बहन की नथ खुली है… मीठा मुंह तो होना चाहिये न !’ इतना कह कर नंगी चंदा रानी कमरे से बाहर चली गई।

मेरी चालू बीवी-51

मेरी चालू बीवी-51

मैं- ओके डार्लिंग… बाय..
सलोनी- बाय जानू…

क्या गुदा मैथुन सही है?

क्या गुदा मैथुन सही है?

साथ ही मैंने सुना है कि गाण्ड मरवाने में बहुत दर्द होता है?

चेली की चूत खोली

चेली की चूत खोली

वो हमेशा शाम को ही आती थी, लेकिन छुटटी के दिन वो 11 बजे आ जाती थी।

आपकी झलक

आपकी झलक

अर्जुन
कामवासना पर कहानी पढ़ने वाले सभी दोस्तों को मेरा नमस्कार।
कामवासना पर मेरी दो कहानियाँ ‘…बस एक बार’ तथा ‘शीशे का ताजमहल’ पाठक/पाठिकाओं को पसंद आई तथा इस बारे में मुझे बहुत सारे मेल मिले। मैं उन सभी का हृदय से आभारी हूँ।पाठक/पाठिकाओं की फरमाईश पर मैं एक नई कहानी ’उपकार’ प्रस्तुत कर रहा हूँ।
आशा है अपनी पसंद-नापसंद तथा कहानी के संबंध में अपनी जीवंत प्रतिक्रिया से मुझे जरूर अवगत करायेंगे।
मैं अमरावती से छः माह के लिए डेपुटेशन पर दिल्ली आया हुआ था। दिल्ली में एक बार के पास निर्मल से मुलाकात हो गई… अकस्मात् ही !
वो नशे में धुत्त था।
हम वर्षों बाद मिले थे।
उसने इतनी अधिक पी रखी थी कि चल नहीं पा रहा था।
मैंने उसे सहारा दिया और उसे उसके घर तक छोड़ देने की पेशकश की।
बड़ी मुश्किल से मैंने उसे उसके घर तक छोड़ा।
दरवाजा दीपा ने खोला था… उसकी पत्नी !
दीपा लगभग 28 साल की अत्यंत खूबसूरत महिला है।
निर्मल की हालत देखकर उसके चेहरे पर उदासी छा गई। उसने प्रश्नवाचक निगाहों से मेरी ओर देखा।
मैंने अपना परिचय दिया- मैं निर्मल के बचपन का मित्र हूँ। आज अचानक उससे मुलाकात हो गई। उसे इस हालत में देखकर घर तक छोड़ने आया हूँ।
वो आश्वस्त हुई… मुझे अभिवादन किया और फिर से आने का औपचारिक आमंत्रण देकर अंदर चली गई।
मैं वापस अपने गेस्ट हाउस जहाँ मेरे रहने की व्यवस्था थी, लौट आया।खाना खाकर सोया तो निर्मल और दीपा के जीवन के बारे में सोचने लगा और ना जाने कब मुझे नींद लग गई।
दो तीन दिन तक अपने कार्य में व्यस्त रहने के कारण मैं दीपा और निर्मल को भूल चुका था।
उस दिन रविवार था, अवकाश का दिन, सुबह के दस बजे थे, मैं निर्मल के घर जाने के लिए निकला।
दरवाजा निर्मल ने ही खोला और आत्मीयता से मेरा स्वगत किया।
यह एक निम्न मध्यम वर्गीय परिवार था, घर साफ सुथरा और सजा संवरा हुआ था।
मैं और निर्मल अपने बचपन के दिनों में खो गये, पुरानी बातें, संगी साथियों की बातें।
हम काफी देर तक बतियाते रहे। इस बीच दीपा चाय और नाश्ता ले आई।
निर्मल ने दीपा से मेरा परिचय कराया।
मैंने ध्यान से दीपा को देखा। मुझे वह अत्यंत खूबसूरत लगी। कद ज्यादा नहीं पर शरीर गठा हुआ था, चेहरा हंसमुख था।
उस दिन उन्होंने मुझे दोपहर का भोजन बिना किये आने नहीं दिया।
निर्मल ने मुझे दिल्ली में रहने तक प्रतिदिन उसके यहाँ खाना खाने के लिए कहा तो मैंने असुविधा के कारण मना कर दिया।
उन्होंने मुझे रात का खाना उनके यहां खाने के लिए राजी कर लिया।
अब मैं प्रतिदिन आफिस के बाद उनके यहाँ चले आता था और खाना खाकर रात साढ़े नौ-दस बजे लौटता था।
अब तक दीपा से मेरी घनिष्ठता हो गई थी जिसका एक कारण यह भी था कि वो नागपुर की रहने वाली थी।
हम देर देर तक बैठकर बातें किया करते।
निर्मल को पीने की बुरी लत थी, वो अक्सर पीकर देर से लौटता।
दीपा ने मुझे बताया था कि शादी के सात साल बाद भी उन्हें कोई संतान नहीं है, इसी कुंठा में निर्मल दो तीन साल से अधिक शराब पीने लगा था, इस कारण घर पर अशांति भी होती थी। कभी-कभी मेरे ही सामने निर्मल शराब पीकर दीपा से अभद्र व्यवहार करता तो मुझे बीच बचाव करना पड़ता।
मैं शालीन था या मुझमें कोई ऐसी बात थी कि निर्मल मेरी बातों को बुरा नहीं मानता था, वो मुझ पर विश्वास करता था।
दीपा भी निर्मल को लेकर या अन्य कोई समस्या होती तो मुझे ही बताती थी।
मैं निर्मल को शराब पीना कम करने के लिये को काफी समझाता परंतु मेरे सामने तो वो आईंदा ना पीने की बात कहता पर शाम होते ही उसके पांव अनायास किसी बार की ओर चले जाते और वो नशे में धुत्त होकर घर लौटता।
इस तरह से मैं दीपा के काफी करीब आता जा रहा था, हमारे संबंध भावनात्मक थे, दोनों एक दूसरे के प्रति आकर्षित थे।
एक दिन मैंने दीपा से कहा कि मेरे एक परिचित वैद्य हैं जिनकी दी हुई दवा से अनेक निःसंतान दंपत्तियों को लाभ हुआ है। यदि वो लोग चाहें तो मैं उन्हें वह दवा मंगाकर दे सकता हूँ।
दीपा ने निर्मल से इस बारे में बात की तो निर्मल भी राजी हो गया।
एक सप्ताह बाद मैंने वह दवा मंगाकर उन्हें दे दी।
वह आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों से निर्मित चूर्ण जैसी दवा थी जिसे प्रतिदिन सुबह एक चम्मच खाली पेट खाना था।
निर्मल ने दवा का नियमित सेवन प्रारंभ कर दिया।
दिन बीतते गये, मुझे दिल्ली में चार माह हो गये थे, हमारे संबंधों में प्रगाढ़ता आ गई थी, निर्मल ने भी पीना कुछ कम कर दिया था।
मुझे दफ्तर के काम से दो तीन दिनों के लिए नागपुर जाना था, मैंने दीपा से भी साथ चलने को पूछा तो वो राजी तो हो गई पर इसके लिए निर्मल की अनुमति जरूरी थी।
मैंने निर्मल से कहा कि दीपा को भी मेरे साथ नागपुर भेज दे, वो अपने मम्मी-पापा से मिल आयेगी।
निर्मल दीपा से बहुत प्यार करता था। उसने थोड़ी ना-नुकुर के बाद इस शर्त पर हामी भर दी कि दीपा दो तीन दिन के बाद मेरे साथ ही वापस आ जायेगी।
दीपा खुश हो गई। एक तो मेरा साथ और दूसरे काफी अर्से बाद वो अपने मम्मी-पापा से मिलने जा रही थी।
मैंने नागपुर जाने और आने का ए.सी. फर्स्ट क्लास के एक ही कूपे के चारों टिकट बुक करा लिए।
निर्मल हमें स्टेशन तक छोड़ने आया था। उसे यह मालूम नहीं था कि फर्स्ट क्लास के उस कूपे का चारों टिकट मेरे ही पास है।
नियत समय पर हल्के से हिचकोले लेते हुए ट्रेन ने स्टेशन छोड़ा, निर्मल और दीपा ने हाथ हिला-हिलाकर एक दूसरे से विदा ली।
ट्रेन के स्टेशन छोड़ते ही मैंने कूपे का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया।
उस दिन दीपा पहले से ज्यादा खूबसूरत लग रही थी। उसने यात्रा की सुविधा के लिए गहरे नीले रंग का कुरता जिस पर सफेद धागे से खूबसूरत कढ़ाई की गई थी, और सफेद रंग की सलवार पहन रखी थी।
उसके बड़े बड़े स्तन कुरते को चीरकर बाहर आने को बेताब लग रहे थे। कुरते की बांह छोटी होने से उसकी सुडौल गोरी बांहें उसके सेक्स अपील को और अधिक बढ़ा रही थी।
उसने गहरे नीले रंग की चूड़ियाँ पहन रखी थी जो उसकी हल्की सी हरकत पर खनखना उठती थी।
उसके सफेद और गाढ़े नीले रंग के झुमके उसकी गालों से टकरा रहे थे।
उसने नीले रंग की बड़ी सी बिंदी लगा रखी थी जिस पर एक छोटा सा नग जड़ा हुआ था।
उसका मंगल सूत्र उसकी वक्ष-रेखा में लटक रहा था।
खुशमिजाज तो वह है ही… उस दिन कुछ ज्यादा ही बेतकल्लुफ हो गई थी।
मैं उसके बगल में उससे सटकर बैठ गया, उसने कोई विरोध नहीं किया।
मैंने उसके पीछे से हाथ ले जाकर उसके बाहों पर रखा और अपनी ओर खींच लिया, वो मेरे सीने से चिपक गई।
मेरा लिंग सख्त हो रहा था, मेरे हाथ उसके स्तनों पर चले गये और उसकी गोलाइयों से खेलने लगे।
उसने आँखें बंद कर ली और मुझे कस कर पकड़ लिया।
मैंने उसके होठों पर अपने होंठ रख दिए और उसके होंठों को चूमना-चूसना शुरू कर दिया।
उसने भी मेरा साथ देना शुरू कर दिया। वह अपना सर उठाकर अपने चेहरे के हर उस भाग को मेरे होंठों के सामने कर देती जहाँ उसे चुम्बन की जरूरत होती।
मैं उसकी बाहों को अपने होंठों से सहलाता हुआ उसकी उंगलियों तक ले आता। ट्रेन एक के बाद एक स्टेशन पार करती जा रही थी।
मैंने दीपा के कुरते को ऊपर उठाना चाहा तो दीपा ने अपने दोनों हाथों को ऊपर उठा दिया।
मैंने कुरते को उसके शरीर से अलग कर दिया, उसने खुद ही अपनी ब्रा उतार दी।
उसके शरीर का उपरी हिस्सा बिल्कुल नग्न हो चुका था।
मैंने उसके सलवार की गांठ खोलनी चाही तो दरवाजे पर दस्तक हुई, हम हड़बड़ाकर अलग हुए।
दीपा चादर से अपने शरीर के उपरी हिस्से को ढक कर किनारे खिड़की के पास बैठ गई।
मैंने दरवाजे को थोड़ा सा खोलकर बाहर झांका तो टी.टी.ई. खड़ा था।
मैंने उसे टिकट दिखाया, उसने टिकट को गौर से देखा और अंदर झांका… अंदर का दृश्य देखकर उसे सब कुछ समझने में दिक्कत नहीं हुई।
एक अर्थपूर्ण मुस्कान के साथ उसने टिकट मुझे वापिस किया और चला गया।
मैं दरवाजा बंद कर अंदर आया।
मैंने उसके शरीर से चादर हटाया तो देखा कि दीपा खुद ही अपनी सलवार औंर पैंटी उतारकर संपूर्ण नग्न हो चुकी है।
वो जन्नत की परी लग रही थी।
उसने मुझे भी अपने वस्त्र उतारने को कहा तो मैंने भी अपने सारे कपड़े उतार दिए।
मेरे तने हुए लंबे चौड़े लिंग को देखकर उससे रहा नहीं गया। उसने मुझे दोनों जांघों को फैलाकर सीट पर बैठने का इशारा किया और खुद मेरे जांघों के बीच फर्श पर बैठकर मेरे लिंग को अपने मुंह में लेकर जोर जोर से चूसने लगी।
चलते हुए ट्रेन की हिचकोलों से हमें आनन्द आ रहा था। मैं अपनी उंगलियों को फैलाकर उसके कान के पास से बालों को सहलाने लगा। अब वो सीट पर बैठ गई और मैं नीचे उसके दोनों पैंरों के बीच फर्श पर बैठ गया।
उसने अपनी दोनों मांसल जांघों को उठाकर मेरे कंधे पर रख दिया, उसकी योनि मेरे मुंह के सामने थी, मैंने उसकी जांघों को अपने बाहों में लपेटकर उसकी योनि को चाटना शुरू कर दिया।
उसकी योनि फैल चुकी थी इसलिए मेरी जीभ उसकी योनि के भीतर तक जा रही थी।
ट्रेन थिरक रही थी, वो भी थिरक रही थी।
उसने मेरे बालों को कस कर पकड़ रखा था, वो चीख रही थी और मैं कुत्ते की तरह गुर्राता हुआ उसकी योनि को चाट रहा था।
थोड़ी देर में वो शान्त हो गई, उसे आर्गेस्म हो चुका था।
लगभग पांच मिनट सहलाने के बाद वो फिर से तैयार हो गई, उसकी योनि मेरे लंबे-चौड़े लिंग को आत्मसात करने के लिए मचलने लगी।
मैंने उसे फर्श पर लिटा दिया और उसकी जांघों को फैलाकर उनके बीच आ गया।
उसने अपने दोनों पैर उपर उठा लिए उसकी योनि थोड़ी फैल गई तो मैंने अपने भारी भरकम लिंग को योनि के मुख पर रखकर अंदर धकेल दिया।
आनन्द की अतिरेकता में उसकी आँखें फैल गईं, वो चीख उठी।
मैंने लिंग को थोड़ा बाहर निकालकर पुनः एक जोरदार धक्का मारा तो मेरा लिंग पूरा का पूरा उसमें समा चुका था।
मैं उसके दोनों पंजों को अपनी हथेलियों से बांधकर जोर जोर से संभोग में लीन हो गया।
वह भी अपने नितम्बों को उठा उठाकर मेरा सहयोग कर रही थी।
मेरी रफ़्तार बढ़ गई।
उसने मेरे बालों को कस कर पकड़ लिया और उसे जोर जोर से खींचने लगी।
मैं उसके दोनों स्तनों को पकड़कर उससे संभोग करने लगा।
वो चिल्ला रही थी, उसने अपनी जांघों को फैला लिया था और… मैंने जोर जोर से चिंघाड़ते हुए अपने पौरूष द्रव से उसके योनिपात्र को लबालब भर दिया।
लगभग आधे धंटे तक हम यूं ही पड़े रहे, मुझे लगभग नींद सी आ गई थी।
अचानक मुझे उत्तेजना सी महसूस होने लगी, मुझे मेरे शरीर पर कोमल अंगों का स्पर्श महसूस होने लगा।
मेरा लिंग सख्त होने लगा, दीपा अपने सख्त हो चुके उरोजों से मेरे शरीर को सहला रही थी।
वह मेरे गालों को पकड़कर मेरे होठों को चूमने लगी। उसने अपनी जीभ मेरे मुंह में डाल दी और फिर अपने लबों को मेरे लबों के भीतर डालकर चूसने लगी।
मैं भी पूर्ण उत्तेजित हो चुका था, मैंने उसे अपने बाहों में समेटा और उसके लबों का रसपान करने लगा।
वह मेरे ऊपर थी, उसके स्तन मेरे सीने पर थे, मैंने उसे कसकर जकड़ लिया।
वह कसमसाई।
दीपा उत्तेजित हो चुकी थी और फिर से चुदने के लिये बेकरार…
वह उठी और मेरे उत्तेजित और अप्रत्याशित रूप से मोटे और सख्त हो चुके लिंग पर अपना योनिमुख को रखकर धीरे-धीरे दबाना शुरू कर दिया।
मेरा लिंग दीपा के गर्म योनि में प्रवेश करता जा रहा था, मुझसे रहा नहीं गया, अचानक मैंने एक झटके से अपने नितम्बों जोर से उछालकर पूरे के पूरे लिंग को उसकी योनि में प्रवेश करा दिया।
वह चिल्ला उठी उईईईईई आआहहह… हहहहहह…
अब वह बार बार मेरे लिंग को अपनी योनि से बाहर निकाल कर ज्यों ही अंदर लेती, मैं अपने नितम्बों को उछाल देता और मेरा लिंग एक झटके से उसकी चूत में बहुत अन्दर तक समा जाता।
यह क्रिया अब हम एक लय से करने लगे बार-बार… देर… तक…
उसके कंठ से उत्तेजना पूर्ण सीत्कारें निकल रही थी… उंउंउंहह… उंउंहहह…आआआहहह… आआआहहह…
अब मैंने उसे एक झटके से नीचे कर दिया और उसके नितम्बों के नीचे एक तकिया रख दिया, उसके दोनों पैंरों को फैलाकर अपना लंड उसकी रतिगुहा में डाल दिया और जोर जोर से चोदने लगा।हर झटके में मेरा लिंग उसके योनि के बहुत अंदर तक उसके गर्भाशय से टकराने लगा।
वो छटपटाने लगी, मैंने उसके बालों को कस कर पकड़ा और लगभग खींचते हुए उसके भीतर स्लखित हो गया।
ट्रेन अपने गति से दौड़ रही थी और हम फर्श पर पूर्णतः नग्नावस्था में एक दूसरे से लिपटे हुए बेसुध पड़े हुए थे।
थोड़ी देर बाद हम उठे और फिर शुरू हो गये।
ट्रेन स्टेशन बदल-बदल कर आगे बढ़ रही थी और हम आसन बदल-बदल कर एक दूसरे को परितृप्त कर रहे थे जैसे वर्षों की प्यास बुझाने के लिए हमें ऊपर वाले ने बस एक ही मौका दिया गया था।
उस रात हमने विभिन्न मुद्राओं में पांच बार संभोग किया।
नागपुर में मैंने उसे उसके घर तक छोड़ा और अपने काम में व्यस्त हो गया।
उसे मैंने जाते समय ही बता दिया था कि कब और किस ट्रेन से लौटना है, वो नियत समय पर स्टेशन पर आ गई।
लौटती यात्रा में भी हमने तीन बार यौन सुख का परम आनन्द प्राप्त किया।नई दिल्ली स्टेशन पर निर्मल हमें लेने आया था, दीपा उसके साथ चली गई।
मैं अपने कमरे में आकर दीपा के साथ बिताए गये उन मधुर पलों को याद करता रहा।
मैं निर्मल के यहाँ पहले की तरह ही आता-जाता रहा, हमारे संबंध भी पहले जैसे ही थे। हाँ, इतना जरूर है कि मैं निर्मल की आँखों में आँखें डालकर बात करने से कतराने लगा था।
मेरे जाने के दिन नजदीक आ गये, दस दिन के बाद मेरी डेपुटेशन की अवधि समाप्त होने वाली थी।
दीपा उदास हो गई थी, निर्मल भी दुखी था।
देखते देखते दस दिन बीत गये, मैं वापस अमरावती चला आया।
मुझे अमरावती आए लगभग दस माह बीत चुके थे, अचानक मुझे एक खत मिला, खत दीपा का था, उसने लिखा था- …काफी दिनों से आपकी कोई खबर नहीं। मैं जानती हूँ आप मुझे भूले नहीं होंगे… भूल भी कैसे सकते हैं। हम आपको हमेशा याद करते रहते हैं। मैं भी… निर्मल भी… आपको यह जानकर खुशी होगी कि मुझे एक प्यारी सी बिटिया हुई है, अभी तीन माह की है, सब कहते हैं वो मुझ पर गई है पर मुझे उसमें आपकी झलक दिखाई देती है। निर्मल ने पीना बिल्कुल छोड़ दिया है, बिटिया पर जान छिड़कते हैं। उन्हें लगता है कि आपकी दी हुई दवा ने काम किया है पर मैं जानती हूँ कि वो दवा आपने उनके शराब की बुरी लत छुड़ाने के लिए दी थी। ट्रेन में आपके साथ बिताए हुए वे पल मैं कभी नहीं भूल सकती…
आपकी कृपा से अब हमारा परिवार खुशहाल है, आपने हम पर जो ‘उपकार’ किया है उसे हम जीवन भर नहीं भूल पाएँगे।
हो सके तो अपनी बिटिया से मिलने जरूर आईयेगा…
दीपा
खत को तह करके मैंने अपनी जेब में रखा और आसमान की ओर ताकता हुआ ‘उपकार’ और ‘विश्वासघात’ के बीच की महीन लकीर को ढूँढने लगा।
यह कहानी आपको कैसी लगी, अपनी प्रतिक्रिया मेरे ईमेल आई डी ar.parth@gmail.com पर भेज सकते हैं।
अर्जुन

जूही और आरोही की चूत की खुजली-23

जूही और आरोही की चूत की खुजली-23

पिंकी सेन
हाय दोस्तो, हाऊ आर यू… लो मैं आपके लिए कहानी का नया भाग लेकर आ गई।
पिछले भाग में आपको लगा कि कोई दो नई सील पैक लड़कियाँ आयेंगी, लेकिन आरोही तो गाण्ड मारने की बात कर रही थी।
दोस्तो, मुझे उम्मीद है कि आप कहानी का मज़ा ले रहे होंगे। आज का ट्विस्ट थोड़ा अलग है।
अब कहानी को क्लाइमैक्स तक ले जाने का समय आ गया है, बहुत जल्द सारे राज सामने आ जाएँगे।
आप बस बने रहो कहानी के साथ, मैं वादा करती हूँ कि आपका मज़ा टूटने नहीं दूँगी, आखिरी तक आपको भरपूर मज़ा मिलता रहेगा। अब आप कहानी का आनन्द लीजिए।
अब तक अपने पढ़ा…
राहुल बड़े प्यार से आरोही की गाण्ड मारता है और सिमी के बारे में भी पता चलता है कि उसके साथ क्या हुआ था। इधर जूही को सके होता है, तब रेहान उसको बेवकूफ़ बना देता है कि उसको भी हिरोइन बना देगा।
अब आगे…
ये बात सुनकर जूही एकदम खुश हो गई और रेहान से लिपट गई। रेहान उसके बाल पकड़ कर उसके होंठों पर चुम्बन कर देता है और उसे बाँहों में लेकर बेड पर लेट जाता है।
जूही- आ…हह..आ.. रोनू- आप कितने अच्छे हो…!
रेहान उसके होंठों को पागलों के जैसे चूसने लगता है। उसके मम्मों को दबाने लगता है।
जूही- आ…हह..आ.. उफ्फ उई… आराम से आ करो न.. उफ अई आउच उफ़फ्फ़…!
रेहान पाँच मिनट तक उसको चूसता रहता है, वो एकदम गर्म हो जाती है। रेहान- जानेमन देखो मेरा लौड़ा कैसे झटके खा रहा है… आ जाओ इसको चूसो न…उस समय तो नशे में थीं.. पर अब पूरे होश में लौड़ा चूसो, मज़ा आएगा।
जूही- हाँ मेरे साजन… अभी लो, आप भी मेरी चूत चाटो न… बहुत दर्द कर रही है।
रेहान- ओके मेरी रानी… आ जाओ तुम लौड़ा चूसो मैं चूत को चाट कर इसका दर्द कम करता हूँ।
दोस्तों मैं आपको बता दूँ कि इस कमरे में 4 कैमरे लगे हैं, एक जो मेन कैमरा था उसको रेहान ने बन्द कर दिया था। बाकी तीन चालू थे, ये सब रेकॉर्ड हो रहा था। अब उसको मास्क की जरूरत नहीं थी। क्योंकि बाकी के वीडियो उसके काम के नहीं थे। उसको तो बस जूही की सील टूटने का वीडियो चाहिए था, तो आप ये सोचेंगे अब मास्क क्यों नहीं लगाया है। आप कहानी पढ़ते रहिए, सब साफ़ हो जाएगा। दोनों 69 के पोज़ में आ जाते हैं।
जूही बड़े प्यार से लौड़ा चूसने लगती है। हालांकि उसके मुँह में लौड़ा नहीं के बराबर जा रहा था, पर फिर भी वो चूस रही थी और रेहान अपनी जीभ से उसकी चूत को चाट रहा था, जो सूजी हुई थी। जूही को दर्द भी हो रहा था और मज़ा भी आ रहा था। दस मिनट की इस चुसाई के कारण जूही अपना आपा खो बैठी, वो बहुत गर्म हो गई थी। उसने लौड़ा मुँह से निकाला।
जूही- आ…हह..आ.. उफ रोनू आ…हह..आ.. मेरी चूत में आग लग रही है… उफ जल्दी से इसे ठंडा करो न… आ…हह..आ.. प्लीज़ उफ..!
रेहान उसकी हालत समझ जाता है और उसे लेटा कर दोनों पैर कंधे पर रख लेता है।
रेहान- जान बस एक बार और दर्द सह लो अबकी बार चूत को पूरा लूज कर दूँगा, उसके बाद मज़े ही मज़े हैं।
जूही- आ…हह..आ.. आ…हह..आ.. डाल दो उफ अब जो होगा एयेई हो जाएगा आ…हह..आ…..!
रेहान का लौड़ा जूही ने चूस-चूस कर पूरा गीला कर दिया था। रेहान ने चूत पर टोपी टिकाई और धीरे से लौड़ा अन्दर सरका दिया। 3″ लौड़ा तो आराम से घुस गया, पर जूही को दर्द भी बहुत हुआ।
जूही- अएयाया एयाया उ मा.. आ…हह..आ.. रोनू अईए बस ऐसे ही धीरे-धीरे डालना दर्द तो हो रहा है, पर मज़ा भी आ रहा है।
रेहान 3″ लौड़े को आगे-पीछे करने लगा, जैसे ही जूही मस्ती में आती, वो थोड़ा और अन्दर कर देता। फिर उतने से चोदता फिर थोड़ी देर बाद जूही का दर्द कम होता गया। वो और आगे डाल देता, ऐसा करते-करते पूरा 9″ लौड़ा चूत में समा गया। अब रेहान आराम से आगे-पीछे हो रहा था।
जूही- आ आ…हह..आ.. उ रोनू उफ्फ कितना बड़ा है तुम्हारा… आ…हह..आ.. चूत की तो जान निकाल दी इसने… आ…हह..आ.. उई हाँ ऐसे ही आ…हह..आ.. धीरे-धीरे आ…हह..आ.. मज़ा आ रहा है… उफ्फ आ…हह..आ.. थोड़ा और डाल दो आ…हह..आ.. अब दर्द कम है आ…हह..आ.. उई…!
रेहान- जान मैंने पूरा डाल दिया है, अब और कहाँ से डालूँ उहह उहह हा..अब तो बस स्पीड बढ़ा सकता हूँ उहह उहह…!
जूही- आआ आआ उईईइ सच में आ…हह..आ.. पूरा चला गया अई आ आ…हह..आ.. कितने आराम से डाला आ…हह..आ.. मुझे दर्द तो है आ आआ आआ पर इतना नहीं जितना पहले हुआ था… उफ्फ.. अब तो मज़ा भी आ आआ आ रहा है आ…हह..आ.. बढ़ाओ स्पीड उफ्फ आह…!
रेहान अब स्पीड से झटके मारने लगा था। लौड़ा अब भी टाइट ही जा रहा था। जूही को दर्द तो हो रहा था, पर वो ओर्गज्म पर आ गई थी। वो दर्द को भूल कर चुदाई का मज़ा ले रही थी।
जूही- आआ एयाया आआ फास्ट…फास्ट अई आ आ उ आ ई व्हाट ए बिग कोक आ…हह..आ.. सो हॉट यू फक मी.. रोनू आ फास्ट आ…हह..आ.. मेरी चूत आह उ बहुत गुदगुदी आआ आआ हो रही है अई म म एमेम मेरा अई प्प पानी अई नि निकलने ओ वा..वाला है उफ्फ…!
रेहान जानता था कि पानी निकलते समय कितना भी दर्द हो, ये सह लेगी और वो एकदम स्पीड से लौड़ा अन्दर-बाहर करने लगता है। जूही कमर को उठा-उठा कर झड़ने लगती है। पाँच मिनट बाद जूही एकदम शान्त पड़ गई, लेकिन रेहान तो अब भी लौड़ा पेलने में लगा हुआ था।
अब जूही की चूत में जलन होने लगी थी। उसको दर्द का अहसास भी हो रहा था, मगर वो रेहान का साथ दे रही थी और दस मिनट तक रेहान लौड़ा पेलता रहा। अब जूही दोबारा गर्म हो गई थी।
जूही- आ…हह..आ.. आ आह अब मज़ा आ रहा है… फक मी आ…हह..आ.. फक मी हार्ड आ…हह..आ.. आह उ उईईइ आआ आआ…!
रेहान की कमर दुखने लगती है, कितने समय से वो झटके मार रहा था। वो जूही पर लेट जाता है और लौड़ा निकाले बिना, उसको अपने ऊपर ले आता है। खुद नीचे लेट जाता है।
रेहान- जान अब तुम मेरे लौड़े पर झटके दो मज़ा आएगा तुमको…!
दोस्तों जूही हिम्मत वाली लड़की थी, वो इतने दर्द को सहन कर रही थी और अब लौड़े पर भी कूदने लगी थी।
पाँच मिनट तक जूही कूदती रही, मगर उसको ज़्यादा अनुभव नहीं था, तो रेहान को मज़ा नहीं आ रहा था। रेहान ने उसको उतारा।
जूही- अई.. क्या हुआ मज़ा आ रहा था रोनू…!
रेहान- जान जल्दी से घोड़ी बन जाओ, अब मेरा पानी निकालने वाला है, तुम धीरे-धीरे कूद रही थीं, अब देखो कैसे तुम्हें घोड़ी बना कर सवारी करता हूँ।
जूही घोड़ी बन जाती है, रेहान उसकी गोरी गाण्ड पर हाथ फेरता है।
रेहान- वाह जान.. तुम्हारी गाण्ड भी बहुत मस्त मुलायम है, इसको भी मारने में मज़ा आएगा, फिलहाल तो तेरी चूत का मज़ा ले लूँ।
रेहान ने लौड़ा चूत में पेल दिया और जूही के बाल पकड़ कर सटा-सट शॉट मारने लगा।
जूही- आआआआआ आआआआअ आआआअ एयाया आराम से आ उ आ उफ़फ्फ़ सस्सस्स आह धीरे आ आ…!
रेहान- थोड़ा उहह उहह उहह.. सब्र कर ले जान उहह आह उहह उहह मेरा पानी निकलने वाला है ह..उहह अब स्पीड कम नहीं होगी आ…हह..आ.. क्या मस्त घोड़ी बनी है.. आ मज़ा आ गया आ…!
जूही भी इतने तेज़ झटकों को सह नहीं पाई और उसकी चूत का बाँध भी टूटने लगा। अब दोनों चुदाई को एन्जॉय कर रहे थे।
जूही- आआ आआ आ…हह..आ.. फक मी आ म मेरा भी आआ प..प..पानी आ न..नि निकाल आ आ…हह..आ.. र रहा है उफ्फ आ…!
करीब तीन मिनट तक ये तूफ़ान चलता रहा और दोनों एक साथ झड़ गए। जूही की पूरी चूत पानी से भर गई थी। अब उसमें जरा भी ताक़त नहीं थी, वो उसी हालत में बेड पर ढेर हो गई। रेहान भी उसके पास लेट गया और दोनों हाँफने लगे।
चलो दोस्तों इनका भी कार्यक्रम खत्म हुआ अब वापस आरोही के पास चलते हैं। उन दोनों का अब तक रेस्ट पूरा हो गया होगा।
राहुल- आरोही तुम बहुत मस्त हो यार… कितने अच्छे से चुदवाती हो… अब तो बता दो वो कौन है, जिसने तुम्हारी सील तोड़ी थी.. मुझको तो साले से जलन होने लगी है।
आरोही- भाई समय आने पर बता भी दूँगी और मिला भी दूँगी.. अब खुश अब थोड़ा आराम करने दो यार बहुत थक गई हूँ।
राहुल- अभी कहाँ थकी हो यार.. थोड़ी देर रुक जाओ मेरा पप्पू फिर खड़ा होगा और चालू हो जाएँगे। मैं अबकी बार पानी गाण्ड में ही निकालूँगा।
आरोही- नहीं भाई आपने बहुत बुरी तरह से गाण्ड मारी है, बहुत दर्द हो रहा है, मेरी गाण्ड ठीक से टिक भी नहीं रही है।
राहुल- अबकी बार आराम से मारूँगा, आज मेरा पप्पू बहुत पावर में है।
आरोही- हाँ भाई कर लेना, मैंने कब मना किया है, आज तो आपका पप्पू पास हो गया हा हा हा हा हा…!
दोनों खिल-खिला कर हँसने लगते हैं।
आरोही- भाई भूख लगी है, चलो रेहान के पास चलते हैं, इसी बहाने जूही को भी देख लेंगे।
राहुल- हाँ ये ठीक रहेगा।
दोनों वैसे ही अन्दर बिना कुछ पहने, कपड़े पहन कर रेहान के रूम की ओर चल पड़ते हैं।
रूम के पास जाकर आरोही नॉक करती है, तो रेहान उठ कर डोर खोल देता है। वो वैसे ही नंगा वापस आकर बेड पर लेट जाता है और एक चादर अपने और जूही पर डाल लेता है।
आरोही अन्दर आती है, उसके पीछे-पीछे राहुल भी अन्दर आ जाता है।
जूही उन दोनों को देख कर मुस्कुरा रही थी।
राहुल- अरे वाह जूही रानी.. उस समय तो आँखों में आँसू थे और अब होंठों पर मुस्कान क्या बात है..!
आरोही- भाई ये सब रेहान का कमाल है, जादूगर है वो ये देखो…!
इतना बोलकर आरोही चादर खींच लेती है और वो दोनों नंगे उनकी आँखों के सामने आ जाते हैं। जूही शरमा जाती है और अपने पैर मोड़ कर चूत छुपा लेती है और हाथों से मम्मों को ढक लेती है।
राहुल- वाउ यार.. जूही तुम तो बिना कपड़ों के मस्त लग रही हो… उस समय तो खून की वजह से मैंने ध्यान नहीं दिया और ये शरमा क्यों रही हो, मुझे भी तो दिखाओ अपनी जवानी।
जूही- भाई प्लीज़ मुझे शर्म आ रही है।
आरोही- ओये..होये.. मेरी छोटी बहना को शर्म आ रही है.. क्या बात है…!
राहुल- क्यों जब रेहान के साथ नंगी बैठी है उससे चुदाई की है तब शर्म नहीं आई तुमको..! अब शर्म आ रही है…!
रेहान- अरे तुम दोनों क्यों बेचारी को छेड़ रहे हो.. तुम दोनों भी कपड़े निकाल दो, तब इसको शर्म नहीं आएगी, सही है ना जूही…!
जूही ने मुस्कुराते हुए ‘हाँ’ कही।
फिर क्या था वो दोनों भी नंगे होकर बेड पर आ गए। आरोही सीधे रेहान के पास जाकर लेट गई और राहुल जूही के पास लेट गया।
रेहान- अरे आरोही क्या बात है.. सीधे मेरे पास आ गई… तेरे भाई ने मज़ा नहीं दिया क्या…!
आरोही- आज तो पता नहीं भाई को क्या हो गया… बहुत मज़ा दिया मुझे…!
जूही- सच्ची दीदी… भाई ने मज़ा दिया आपको…!
राहुल बड़े प्यार से जूही के मम्मों को सहलाता हुआ बोला- मेरी रानी अब मज़ा लेने की तेरी बारी है, देख कैसे तुझे चोदता हूँ आराम से…!
जूही शरमा कर अपना हाथ चेहरे पर लगा लेती है।
राहुल- हय हय… तेरा ये शरमाना.. क्या गजब है रानी.. अपनी चूत तो दिखाओ ना…!
जूही पैर खोल कर राहुल के साथ बैठ जाती है, आरोही भी चूत को देखती है। चूत एकदम क्लीन थी और लौड़े की ठाप से गोरी चूत एकदम लाल हो रही थी, सूजी हुई भी थी।
राहुल- यार रेहान तुमने तो जूही की चूत का हाल बिगाड़ दिया, कैसे सूजी हुई है ये…!
रेहान- थैंक्स बोल मुझको, इसको चुदने के काबिल बना दिया मैंने… अब तू देख कितना मज़ा आता है तुझको, मैंने तो रास्ता बनाया है बस गाड़ी तो तू चलाएगा, अब जितना तेरी मर्ज़ी उतना स्पीड से गाड़ी चलाना।
ये सुनकर आरोही ज़ोर से हँसने लगती है, उसके साथ सब हँसने लगते है। राहुल जूही के निप्पल को चूसने लगता है। रेहान बेड से उतर कर टेबल की दराज से एक गन निकाल कर राहुल पर तान देता है।
रेहान- नहीं राहुल.. अभी नहीं नीचे उतरो बेड से जल्दी।
राहुल- अर र रेहान ये क्या है… नीचे करो इसे ये कैसा मजाक है…!
रेहान- नीचे आता है, या चला दूँ इसे…!
राहुल बिना कुछ बोले बेड से उतर जाता है दोनों बहने भी उतरने लगती हैं। उनकी तो जुबान ही बन्द हो गई थी।
रेहान- तुम दोनों नहीं, वहीं बेड पर रहो… आओ राहुल तुम मेरे पास आओ…!
रेहान राहुल के सर पर गन लगा देता है। राहुल को कुछ समझ नहीं आता है कि ये क्या हो रहा है।
रेहान- एक गोली और तेरा भेजा बाहर हा हा हा हा…!
राहुल को एसी रूम में भी पसीना आने लगता है।
बस दोस्तों आज का भाग यहीं तक, मैंने जल्दी-जल्दी भाग दिए हैं पर मुझे आपका रेस्पॉन्स बहुत कम मिला है। कोई बात नहीं मेरे कुछ दोस्तों ने बहुत मेल किए हैं। आपको मालूम है कि आपके कमेंट्स से ही लेखक की कलम चलती है सो प्लीज़ जल्दी से मेल कीजिए। अब आगे क्या होता है, क्या आज राहुल का आखरी दिन है, जूही को बिना चोदे बेचारा मर जाएगा, अचानक ये क्या हो गया, इन सब सवालों का जवाब आपको अगले भाग में मिलेगा, जिसके लिए थोड़ा सब्र करना होगा और इस सस्पेंस का कोई आइडिया है तो वो भी बताईए।
दोस्तों अब आज के इस भाग के लिए जल्दी से मेरी आईडी pinky14342@gmail.com पर मेल करो और बताओ कि मज़ा आ रहा है या नहीं..!
ओके बाय।

चंदा रानी की कुंवारी बहन की नथ-4

चंदा रानी की कुंवारी बहन की नथ-4

चूतनिवास
‘बधाई हो नन्दा… मेरी प्यारी बहन… आज तेरी नथ खुल गई… आज तेरी ज़िंदगी का एक महान दिन है… बहुत बहुत बधाई… ईश्वर करे कि तुझे जीवन भर इसी प्रकार तगड़े लण्ड मिलें… चल मैं तुम दोनों के लिये मीठा लेकर आती हूँ… मेरी बहन की नथ खुली है… मीठा मुँह तो होना चाहिये न !’ इतना कह कर नंगी चंदा रानी कमरे से बाहर चली गई।
मैं भी उठकर पीछे गया फ्रिज से कोल्ड ड्रिंक लाने के लिये। चंदा घर से रबड़ी लेकर आई थी जिसे वो एक तश्तरी में डाल रही थी।
मैंने उसे लिपटा कर चूमा और कहा- रानी… रबड़ी के बाद मैं तो तेरा दूध पियूंगा और ये कोल्ड ड्रिंक आखिर में !
‘हाँ… हाँ… राजे दोनों को दूध पिलाऊँगी… फिकर ना कर… मेरे राजे बेटे !’
मैंने जब लाइट जलाई तो देखा नन्दा रानी गहरी नींद में थी। उसकी टांगें चौड़ी फैली हुई थीं और तमाम चूत के आस पास का बदन, झांटें खून में लिबड़ा हुआ था।
यहाँ तक कि उसकी जाँघों तक भी खून के बड़े बड़े धब्बे थे। खून वाकई में अधिक मात्रा में बहा था।
मैंने गर्दन झुका कर अपने आपको देखा तो मेरा भी बदन लण्ड के सब तरफ खून में लथपथ था।
मैं जल्दी से एक तौलिया बाथ रूम से भिगो कर लाया और नन्दा रानी को भली भांति साफ किया और फिर अपने बदन की सफाई की। नन्दा रानी के चूतड़ों के नीचे बिछा हुआ तौलिया भी खून में सन गया था, मैंने धीरे से खींच के तौलिये को बाहर निकाला, इसकी चार चार तहें पार करके लहू का एक छोटा सा दाग तकिये पर भी लग गया था।
‘राजे… लगता है बहुत ही तगड़ी झिल्ली थी… देख तो कितना खूनमखून हो गया है… तभी तो सो रही है… अच्छा राजे… अब उसे और मत चोदियो आज रात… सोने दे उसे !’
‘अरे चंदा रानी उसे सोने दूंगा… अब तुझे भी तो चोदना है या नहीं !’
चंदा रानी ने नन्दा रानी को हिला के जगाया और एक चम्मच रबड़ी उसे मीठा मुँह करने को दी।
नन्दा रानी ऊम्म ऊँह ऊँह करके जागी और बड़ी धीमी आवाज़ में बोली- दीदी सोने दो ना… क्यों तंग करती हो… बहुत नींद आ रही है… बड़ी थकान लग रही है।
‘हाँ हाँ मेरी रानी बेटी… आराम से सो… बस मैं तो तेरा मीठा मुँह करने को जगा रही थी। अभी अभी तेरी नथ खुली है… अब तू लड़की से औरत बन गई है… चल जल्दी से थोड़ी सी रबड़ी खा और फिर सो जा।’
नन्दा रानी ने लेट लेटे ही मुँह खोल दिया। चंदा रानी ने उसके मना करते करते पांच छह बड़े चम्मच रबड़ी उसे खिला ही दी।
एक घूँट कोल्ड ड्रिंक का पीकर नन्दा रानी वापस गहरी नींद में ढेर हो गई।
‘चंदा रानी… अब ये तो गई सुबह तक… इतना खून बहा है… कमज़ोरी आ गई होगी… कल तक ठीक हो जायेगी… फिर रोज़ चुदाई मांगा करेगी… अब हम खेलें इक्का दुक्की का खेल?’ कह कर मैंने चंदा रानी को दबोच लिया।
वो भी अपनी बहन को चुदते देख कर खूब गरम हो गई थी, उसने कहा- बस एक मिनट तसल्ली रख… देख मैं तुझे जन्नत के नजारे दिखाती हूँ।
चंदा रानी अलग होकर बिस्तर पर बैठ गई और ढेर सारी रबड़ी को अपनी चूचियों पर, अपनी नाभि पर, अपनी झांटों और अपने पैरों पर लगाया और बोली- अब राजे… तू भी मीठा मुँह कर मुझे चाट चाट के… फिर मैं तेरे लण्ड पर लगा कर अपना भी मुँह मीठा करूँगी।
इतना कह कर चंदा रानी बिस्तर पर सीधी लेट गई।
मस्ती से मैं एकदम बेहाल हो गया। चंदा रानी का सामने का पूरा शरीर, चूची से पैर तक, रबड़ी से लिबड़ा हुआ था। मेरा लौड़ा फौरन तन्ना गया।
मैंने चंदा रानी को कुत्ते की तरह जीभ निकाल के चाटना शुरू किया। सबसे पहले उसके पैर चाटे, हर एक उंगली व अंगूठा मुँह में लेकर चूसा, फिर उसकी टांगें चाट चाट के सारी रबड़ी खाई, उसका पेट चाट चाट कर बिल्कुल साफ कर डाला और आखिर में उसके दोनों मम्मे चाटे।
मम्मे चाटते हुए मुझे उसका दूध भी पीने को मिला। चंदा रानी ने सचमुच मुझे जन्नत के नज़ारे दिखा दिये।
जन्नत में इस से ज्यादह क्या मज़ा मिलता होगा।
चंदा रानी के ज़ायकेदार बदन का स्वाद जब रबड़ी से मिला तो चाटने का आनन्द पराकाष्ठा पर जा पहुँचा।
वो भी इस तरह से बदन चटवा के ठरक से मतवाली हो चली थी। उसके मम्मे अकड़ गये थे और वो बारम्बार कसमस कसमस करती हुई आहें भरने लगी थी।
उसका एकदम ताज़ा दूध रबड़ी से मिल के मेरे जिस्म में आग भड़का रहा था।
चंदा रानी अब अपनी जांघें बार बार खोलने बन्द करने लगी, उसके मुँह से अब तेज़ सी सी आने लगी थी, बोली- राजे अब न तरसाओ… नन्दा को तूने चोदा तब ही से मेरा हाल खराब है… तेरी ज़ुबान तो ज़ालिम मुझे कत्ल ही कर डालेगी… अब चल मेरा राजा बेटा… अब चोद ही दे… मैं तो जल के खाक हो जाऊँगी।
हालांकि तड़प तो मैं भी रहा था, फिर भी थोड़ा सा और मज़ा लेने के लिये मैंने उसके चूची में दांत गाड़ दिये, दूध की एक तीव्र धारा मेरे मुँह में गिरी और वो बेतहाशा ठरक से बेबस होकर कराही।
उसने ज़ोरों से छटपटाना शुरू कर दिया और फंसी फंसी सी अवाज़ में बोली- राजे… रहम कर… अब मर गई तो क्या करेगा? बिल्कुल सबर नहीं हो रहा… बस जान जाने को है।
बिना कुछ बोले, मैंने उसके घुटने मोड़े और जाँघें चौड़ी करीं, फिर मैं उन रेशमी मुलायम जाँघों के बीच घुटनों के बल बैठ गया और अपना टन टन करते लण्ड चूत के होंठों पर रखा।
उई उई की आवाज़ निकालते हुए चंदा रानी ने अपने चूतड़ उचकाये और मैंने धम्म से पूरा का पूरा लण्ड उसकी रसदार चूत में पेल दिया।
एक चीख उसके मुँह से निकली और मेरा सिर कस के जकड़ती हुई चंदा रानी एसे झड़ी जैसे किसी डैम के गेट खोल के पानी छोड़ दिया गया हो।उसने बड़ी तेज़ी से कई दफा अपने नितंबों को ऊपर नीचे किया और झड़े चली गई। उसने अपने पैर मेरे कंधों पर टिका दिये और फिर से झड़ने की इच्छा से चुदने लगी।
इस पोज़ में हर धक्के मे लण्ड चंदा रानी की भगनासा को ज़ोर से रगड़ता हुआ जाता था जिससे उसका मज़ा ख़ूब बढ़ जाता था।
प्यार से मेरी आँख से आँख मिलते हुए वो बोली- राजे… तू कितना ज़बदस्त चोदू है… इतनी जल्दी मैं कभी भी नहीं झड़ती जितना कि तेरे से चुदते हुए… राजे… राजे… राजे… हाय राम… इतना मज़ा… हाय मैं मर जाऊँ… मैं बहुत रश्क करने लगी हूँ तेरी बीवी से जो रोज़ाना तुझ से चुदाई का आनन्द उठाती है… बस अब थोड़ा तेज़ धक्के लगा… हाँ… हाँ… राजे… हाँ… हाँ… चीर फाड़ के रख मेरी हरामज़ादी बुर को… अब बना दे इसका कचूमर… हाँ… चोदे जा राजा…
मैंने धकाधक धक्के पेलने शुरू कर दिये, लण्ड एसे अंदर बाहर हो रहा था जैसे रेल के इंजन का पिस्टन आगे पीछे जाता है- धक… धक… धक… धक…
अचानक से मुझे यूँ महसूस हुआ कि मेरे अंदर कहीं तेज़ गर्मी की एक लहर सिर से नीचे की तरफ और नीचे तो सिर की ओर बड़ी रफ़्तार से आ जा रही है।
उधर चंदा रानी आहें पर आहें भरे जा रही थी। ठरक से मतवाली यह चुदासी औरत कमर उछाल उछाल कर चुदा रही थी।
झड़ने को आतुर होकर ज्यों ही मैंने लण्ड ठोकने की गति ज़्यादह तेज़ की, तो वो फिर से अनेकों बार चरम सीमा के पार चली गई।
बड़ी मुश्किल से अपनी चीख को रोकता हुआ मैं तब धड़ाके से स्खलित हुआ।
लण्ड से ढेर सा सफेद लावा निकला और उसकी चूत से तो रस का प्रवाह ज़ोरों से चल ही रहा था।
झड़कर हम दोनों बेसुध से होकर पड गये। मैं ऊपर और वो नीचे।
हम काफी देर तक ऐसे ही पड़े रहे और एक दूसरे से एक मस्त चुदाई करने के बाद लिपटे रहने का मज़ा भोगते रहे।
चंदा रानी ने फिर मेरे लण्ड को और उसके आस पास के सारे प्रदेश को चाट चाट के साफ किया।
चंदा रानी ने कहा- अब राजे मैं भी तो मुँह मीठा कर लूं अपनी बहन की नथ खुलवाने के मौके पर !
‘हाँ हाँ… तुझे तो सबसे पहले मुँह मीठा करना चाहिये था… तूने ही तो सारा प्रोग्राम सेट किया है !’ मैं बोला।
चंदा रानी ने रबड़ी की तश्तरी उठाई और चम्मच भर भर के मेरे बैठे हुए लुल्ले पर लगाई। पूरा लुल्ला, दोनों टट्टे रबड़ी में अच्छे से सान दिये।
मैं समझ गया था कि अब यह चाट चाट कर रबड़ी खायेगी।
उसके नाज़ुक, खूबसूरत हाथों से रबड़ी लगवाते लगवाते मेरा लण्ड अकड़ चुका था।
जब लौड़ा खड़ा हुआ तो उसका आकार बढ़ गया और चंदा रानी ने बची खुची रबड़ी भी लण्ड पर लबेड़ डाली।
फिर उसने जो चाटना चालू किया है, तो भगवान कसम, आनन्द इतना आया जिसका कोई हिसाब नहीं। मस्ती ने मुझे मतवाला कर दिया।
चंदा रानी ने बड़े मज़े में चटखारे ले लेकर पूरा लण्ड, टट्टे और झांटों को चाट डाला, और एकदम चकाचक साफ कर दिया।
‘अरे राजे… तेरा लण्ड तो फिर से अकड़ गया… लगता है बहुत मज़ा आया इस हरामी को रबड़ी में लथपथ हो के चटवाकर… साला हरामी लण्ड महाराज !’ चंदा रानी ने लौड़े को प्यार से एक हल्की सी चपत लगाई और फिर से चूसने में लग गई।
यारों चूसने में तो वा माहिर थी ही, तो ऐसा चूसा, ऐसा चूसा कि मस्ती से मेरी गांड फट गई।
कभी वो काफी देर तक लण्ड को पूरा जड़ तक मुँह में घुसाये रखती, तो कभी सिर्फ टोपे को मुँह में लिये लिये चूसती, और कभी वो टट्टे सहला सहला के नीचे से ऊपर तक लण्ड चाटती।
उसके मुखरस से लण्ड बिल्कुल तर हो चुका था।
कई दफा उसने अपनी चूची दबा के दूध की बौछारें लौड़े पर मारीं, जिससे मेरी ठरक सातवें आसमान पर जा पहुँची।
चंदा रानी ने मचल मचल के लौड़े को चूस चूस के तर कर दिया।
अब मैं ज़रा भी रुक नहीं पा रहा था। एक ज़ोर की सीत्कार भरते हुए मैंने अपनी कमर उछाली और झड़ गया।
चंदा रानी सारी की सारी मलाई पी गई। हमेशा की तरह, जब मैं बेहोश सा होकर बिस्तर पर गिर गया, तो उसने मेरे लण्ड को खूब भली प्रकार जीभ से चाट चाट के साफ किया और बोली- चल राजे, अब तुझे मैं स्वर्णरसपान कराऊँ… दोपहर दो बजे से रोक कर रखा है… आजा मेरे राजे… नीचे बैठ जा और अपनी मम्मा की चूत से मुँह लगा ले… आज बहुत गाढ़ा पीने को मिलेगा।
इतना कह कर चंदा रानी पलंग पर टांगे चौड़ी करके पैर फर्श पर टिका के बैठ गई, मैं नीचे घुटनों के बल बैठ गया और चंदा रानी की चूत के होंठों से अपने होंठ चिपका दिये।
कुछ ही देर में चंदा रानी के स्वर्णामृत की पहले चंद बूंदें और फिर तेज़ धार मेरे मुँह में आने लगी।
सच में बहुत ही गर्म और गाढ़ा रस था। एकदम स्वर्ण के रंग का ! अति स्वादिष्ट ! अति संतुष्टिदायक !!
मैं लपालप पीता चला गया। मेरी उस समय सिर्फ एक ही ख्वाहिश थी कि उस योनि-अमृत की एक भी बूंद नीचे न गिरने पाये, सो मैं उसी रफ़्तार से पीने की चेष्टा कर रहा था जिस रफ़्तार से वो प्यारी सी अमृतधारा मेरे मुँह में आ रही थी।
सच में बहुत देर से रूका हुआ रस था क्योंकि खाली करने में चंदा रानी को काफी वक़्त लगा। जब सारा का सारा रस निकल चुका तो मैंने अपने मुँह हटाया और जीभ से चारों तरफ का बदन चाट चाट के साफ सुथरा कर दिया।
मैं और चंदा रानी फिर एक दूसरे की बाहों में लिपट कर लेट गये और बहुत देर तक प्यार से भरी हुई बातें करते रहे।
हर थोड़ी देर के बाद हम एक गहरा और लम्बा चुम्बन भी ले लेते थे।
बीच में एक बार चंदा रानी का बच्चा जग गया और चिल्ला चिल्ला के दूध मांगने लगा।
चंदा रानी ने उसे दूध पिलाया, पहले एक चूची से और फिर दूसरी चूची से। मैं आराम से उन खूबसूरत मम्‍मोँ को निहारता रहा। जब चंदा रानी फारिग हो गई तो मैं गर्म हो चुका था, चूचुक निहार निहार के।
इसके बाद मैंने चंदा रानी को चोद के अपने को निहाल किया और फिर हम सो गये।
यारो, इन दो बहनों को आने वाले दिनों में मैंने कैसे चोदा और क्या क्या मज़े लिये, उसका हवाला मैं विस्तार से अगली कहानी में दूँगा।
समाप्त

मेरी चालू बीवी-52

मेरी चालू बीवी-52

मैं बहुत धीमे क़दमों से इधर उधर देखते हुए आगे बढ़ रहा था कि कहीं कोई देख ना ले !
सच खुद को इस समय बहुत बेचारा समझ रहा था…

और मेरा चोदू बाबूलाल जाग गया

और मेरा चोदू बाबूलाल जाग गया

विजय
हैलो दोस्तो, मैं विजय हूँ। कामवासना की कहानियाँ पढ़ते-पढ़ते मैंने जूजा की लिखी हुई कहानियां पढ़ीं और उनसे फेसबुक पर जुड़ गया.
फिर मैंने जूजा जी से अपनी कहानी लिखने का निवेदन किया तो उन्होंने मेरी इस कहानी को शब्दों में बाँध कर मुझे आप सभी तक मेरी इस सच्ची घटना को पहुँचाने का काम किया है। आप सभी इस रसीली घटना का आनन्द लें।
मैं पिछले साल मैं सीमांचल एक्सप्रेस से जोगबनी से मुगलसराय आ रहा था।
ट्रेन के एसी-सेकण्ड में मेरी 36 नम्बर की बर्थ रिजर्व थी, रात को खाना आदि खा कर मैं अपनी बर्थ पर सो गया।
रास्ते में पूर्णिया से एक पति-पत्नी चढ़े, जिनकी एक बर्थ मेरे बगल में थी और दूसरी 5 नंबर पर थी।
वो चाहते थे कि दोनों साथ में रहें, पर कोई सीट बदलने को तैयार नहीं था।
वो मुझसे पूछने के लिए आए, अब चूंकि मैं सो चुका था फिर भी उन्होंने मुझे जगाया और मुझसे क्षमा मांगते हुए अपनी समस्या बताते हुए मुझसे मदद की गुहार लगाई।
मुझे उनकी समस्या वाजिब लगी और मैंने उनसे दूसरी बर्थ का नम्बर लिया और मैं वहाँ चला गया।
वहाँ पर एक नेपालिन भाभी बैठी थीं उनको भी शायद नींद नहीं आ रही थी, वे बैठी थीं। मेरी नींद भी अब खुल चुकी थी, सो मैंने उनसे ‘हैलो’ बोला प्रत्युतर में उन्होंने जरा खुल कर मुस्कुरा कर मेरी ‘हैलो’ का जबाब दिया। मुझे थोड़ा अटपटा तो लगा, पर मस्त गदराया माल देख कर मेरा बाबूलाल भी उठ-उठ कर ‘हैलो-हैलो’ करने लगा।
उसने बड़े गौर से मेरे बाबूलाल की उठती-गिरती हरकत देख भी ली। अब मुझे ये नहीं मालूम था कि ये भाभी जी अकेली हैं या कोई ‘बहादुर’ भी इनके साथ है।
खैर .. साब.. मैंने अपना बैग रखा और वहाँ बैठ गया। फिर जेब से अपना मोबाइल निकाला और नेपाली गाने चलाने लगा, गाने की आवाज तेज थी तो मैंने ईयर-फोन निकाले और मोबाइल में लगा कर गाने सुनने लगा। दरअसल मुझे गाने के बोल कुछ भी समझ में नहीं आ रहे थे, पर ये सब कुछ सिर्फ उन भाभी जी को इम्प्रैस करने के लिए मैंने जानबूझ कर पहले अपने मोबाइल में ईयर-फोन नहीं लगा कर, गाने चालू कर दिए थे ताकि उनको ये समझ आ जाए कि नेपाली गाने सुन रहा हूँ और फिर बाद में ईयर-फोन लगा कर उनकी गाने सुनने की उत्सुकता को बढ़ा दिया था।
मैं गाने सुनते-सुनते उनकी तरफ देखने लगा, वो मुझे बड़ी अधीरता से निहार रही थीं। उनकी शक्ल मुझे ठीक वैसी लग रही थी, जैसे किसी बच्चे के सामने टॉफ़ी दिखा कर और फिर उसका रैपर खोलने में समय लगाऊँ और बच्चा बड़ी बेचैनी से टॉफ़ी मिलने की आस में नजरें गड़ाए देखता रहे।
मैंने मुस्कुरा कर उनकी तरफ देखा और उनसे इशारे में पूछा कि क्या वे भी गाना सुनना चाहती हैं। उन्होंने ‘हाँ’ में अपनी गर्दन हिलाई। मैं अपने मकसद में कामयाब होने लगा था। मैंने अपने कान से एक प्लग निकाला और उनकी तरफ बढ़ा दिया। ईयर-फोन की लीड छोटी थी तो वे खुद मेरे पास सरक आईं और मुझसे सट कर बैठ गईं।
अब एक प्लग उनके कान में भी लग गया और वे भी गाना सुनने लगीं। मैं अपने अगले कदम की ओर बढ़ा। मैंने जानबूझ कर गाने की मस्त धुन का बहाना कर के हिलना शुरू कर दिया। अब मेरे हिलने से उनका प्लग बार-बार निकलने लगा।
वो और पास आ गईं और मुझसे धीमी आवाज में बोलीं- जरा कम हिलो न.. मेरा निकल रहा है…!
मेरा बाबूलाल गनगना गया, मैंने पूछा- क्या निकल रहा है?
मेरे सवाल पर भाभी जी मुस्कुरा कर बोलीं- ‘वो’ नहीं… ये प्लग निकल रहा है..!
मैंने भी अपनी खीसें निपोरीं और फिर पूछा- ‘वो’ मतलब..!
जवाब में उन्होंने मेरी जाँघ पर एक धौल जमाई और बोलीं- तुम भी न…!
मुझे उनकी ये हरकत ऐसी लगी कि जैसे हम दोनों एक-दूसरे से पुराने परिचित हों। मुझे अब कुछ लगने लगा था कि इसको भोगा जा सकता है। मैं उसकी तरफ ध्यान से देखने लगा। वास्तव में पहाड़ी दाना मस्त था, कमनीय काया, गोरा रंग, भरे हुए गाल, गालों में बार-बार पड़ते गड्डे, रसीले होंठ, सुतवां नाक, नागिन से लहराते खुले काले गेसू। मेरी नजर अब बेईमान होने लगी थी।
मेरी और नीचे निगाह गई तो हल्के गुलाबी रंग की सिफोन की साड़ी में साफ़ दिखता गहरे गले का ब्लाउज, जिसमें उसकी दूधिया घाटी के कामुक नज़ारे हो रहे थे। मेरी नजर उससे टकराई तो उसने अपने होंठ दांतों से काटते हुए अपना आँचल सरका दिया।
हय… उसके मस्त मम्मे मेरे बाबूलाल को आग लगाने लगे थे। मैंने उसकी आँखों में आँखें डाल कर अपने एक हाथ को उसके पीछे ले जाकर उसके कन्धों के ऊपर सीट की पुस्त पर रख दिया।
उसने जो हाथ मेरी जाँघ पर रखा था, वो अभी भी वहीं पर था। मैं उसकी आँखों में आँखें डाले हुए थोड़ा और करीब को खिसका। अब उसके मस्त मम्मे मेरी छाती से छूने लगे थे। उसके मन में भी वासना भड़क रही थी वो मेरी छाती से सट गई।
जैसे ही वो मुझसे सटी मैंने उसके कंधे पर हाथ रख दिया। अब बात बहुत कुछ साफ़ हो चली थी। मैंने उसके कान में फुसफुसाया, “क्या तुम अकेली हो..!”
उसके जबाब ने मेरे बाबूलाल अकड़ा दिया, बोली, “हाँ….अकेली हूँ, लोगे मेरी..!”
मैंने अपना हाथ झट से उसके मम्मों पर धर दिया, “लपक कर लूँगा…मेरी जान..!”
तभी उसने मेरा हाथ हटाया और बोली- सामने की सीट पर वो बुढ़ऊ घूर रहा है उसको निपटाना होगा।
मैंने कहा- उसको माँ चुदाने दो तुम तो बाथरूम जाओ, मैं वहीं आता हूँ।
वो उठी और बाथरूम चली गई। एक मिनट बाद मैं भी उठा, बुढ़ऊ को एक आँख मारी, बुढ़ऊ ‘सकपका’ गया। मैं हंसता हुआ बाथरूम की तरफ चला गया।
मैंने देखा एक बाथरूम में वो खड़ी थी, दरवाजा थोड़ा सा खुला था। मैं अन्दर घुस गया। अन्दर घुसते ही उसको अपनी बाँहों में भर लिया। उसने भी खुद को समर्पित कर दिया। हम दोनों गुत्थमगुत्था हो गए।
मैंने उसकी साड़ी खोल दी और ब्लाउज के चटकनी बटनों को एक झटके में खोल कर, उसकी गुलाबी ब्रा को पीछे से हाथ डाल कर हुक खोल दिया। उसके दोनों कबूतर फुदक कर बाहर आ गए।
मैंने बड़ी बेरहमी से उसे चूचुकों को अभी अपने होंठों से दबाया ही था कि एक मीठे दूध की धार मेरे मुँह में आई।
आह…हह.. मेरी दूध पीने की आस आज पूरी हो चली थी।
मैंने खूब दबा-दबा कर उसके थनों को निचोड़ा। उसकी लगातार मादक सीत्कारें निकल रही थीं।
उसने बताया कि उसका बच्चा अब दूध नहीं पीता है इसलिए उसके स्तन भरे हुए हैं।
अब मैंने उसको वाश-वेसिन पर उसको बैठा दिया और उसके पेटीकोट को ऊपर कर के उसकी पैन्टी को खींच कर उतार दिया। एकदम सफाचट गोरी बुर, जो कभी-कभी ही देखने मिलती है। मेरे बाबूलाल को अब सब्र नहीं हो रहा था। मैंने अपनी पैन्ट खोल कर घुटनों तक की और चड्डी को भी नीचे सरकाया। मेरा बाबूलाल ‘गोरी-फूलन’ के नशे में झूम रहा था।
मैंने उसके दोनों पैर अपने हाथों से उठा कर लौड़े के निशाने पर उसकी चूत को लिया और जरा सा धक्का लगाया। मेरा सुपारा उसकी ‘फूलन’ की दरार में फंस गया। एक हल्की सी ‘आह’ निकली मैंने उसके एक बुब्बू को चूसा और दूसरा धक्का मारा तो वो भी मेरी ओर को आ गई। श्रीमान बाबूलाल जी आधे अन्दर प्रवेश कर चुके थे। मेरे अंतिम प्रहार ने उनको पूर्ण रूप से घुसेड़ दिया और अब धकापेल चालू हो गई।
चूंकि एसी के टॉयलेट का वाश-वेसिन जरा कम ऊँचाई का होता है, सो मैंने उसको अपने लौड़े पर बैठा लिया था और उसके चूतड़ वास-वेसिन से टिका दिए थे। वो भी अपने हाथ मेरे गले में फँसा कर मुझसे लटकी थी। करीब 10-12 मिनट की चुदाई में उसका पानी निकलने लगा और उसके पानी की गर्मी से मेरा बाबूलाल भी पसीज गया और मैंने उसकी फूलन में ही अपना माल छोड़ दिया। वो निढाल हो कर मुझसे चिपक गई।
एक-दो मिनट बाद हम दोनों अलग हुए और मैंने टॉयलेट में लगी नैपकिन के रोल से अपना और उसका ‘आइटम’ साफ़ किया। मैं अपनी चड्डी और पैन्ट पहन कर बाहर आ गया। थोड़ी देर बाद वो भी अपने कपड़े पहन कर बाहर आ गई।
सीट पर आकर उसने मुझे अपने बारे में बताया। उसका नाम पुच्छी थापा था और अपने पति के पास वाराणसी जा रही थी। बाद में मेरा उससे कोई संपर्क नहीं हो पाया।
दोस्तों ये मेरे साथ घटी एक सच्ची घटना थी जो मैं आप सब तक पहुंचाई है इसके बाद भी कई बार मेरे साथ और भी कई वाकिये हुए हैं वे सब आपको फिर कभी लिखूँगा।
आप सभी के विचारों का स्वागत है।
मुझे मेल करने के लिए लिखें।
fewa@india.com
मुझे ईमेल करके आप मुझसे फेसबुक पर भी जुड़ सकते हैं।

जूही और आरोही की चूत की खुजली-24

जूही और आरोही की चूत की खुजली-24

पिंकी सेन
हाय दोस्तो, क्यों, क्या सोचा आपने.. कि अब क्या होगा…! यार इतने मेल आए कि क्या बताऊँ… मज़ा आ गया। आप सब के बहुत ज़्यादा रिस्पोन्स के बाद मैंने ये भाग बड़ी मुश्किल से लिखा है, क्योंकि मुझे आउट ऑफ टाउन जाना था, इसलिए मैंने कहा था कि अगला भाग थोड़ा लेट आएगा, पर आप कहाँ मानने वाले हो, मैंने अपना प्रोग्राम आगे कर दिया लो आप के प्यार के लिए यह भाग हाजिर है।
देख लो राहुल मारता है या कुछ नया ट्विस्ट आपको मिलता है, एन्जॉय दोस्तो।
अब तक आपने पढ़ा…
रेहान दोबारा जूही को खूब मज़े से चोदता है और उधर राहुल और आरोही जूही का हाल जानने रेहान के रूम में आ जाते हैं।
जहाँ थोड़ी मस्ती मजाक के बाद रेहान गन निकाल कर राहुल पर तान देता है।
रूम में खौफ का माहौल बन जाता है। तीनों की गाण्ड फट जाती है कि ये क्या हो गया।
अब आगे…
रेहान राहुल के सर पर गन लगा देता है। राहुल को कुछ समझ नहीं आता है कि ये क्या हो रहा है।
रेहान- एक गोली और तेरा भेजा बाहर हा हा हा हा…!
राहुल को एसी रूम में भी पसीना आने लगता है।
आरोही- रेहान जी क्या हो गया… प्लीज़ राहुल के सर से गन हटाओ, ये कोई मजाक नहीं है। अगर चल गई तो…!
रेहान- चुप साली रंडी तुम दोनों वहीं रहो वरना आज इसका खेल खत्म कर दूँगा हा हा हा हा हा…!
जूही- प्लीज़ रेहान जी मुझे बहुत डर लग रहा है प्लीज़…!
जूही की आँखों में आँसू आ गए, तब रेहान ने गन हटाई और ज़ोर से हँसने लगा। राहुल को कुर्सी पर बिठाते हुए बस वो हँस रहा था।
रेहान- हा हा हा हा अरे यार तुम तो सच में डर गए, मैं तो आरोही की फिल्म का एक सीन कर रहा था। अन्ना ने स्टोरी सुनाई थी मुझे, बस वो ही कर रहा था…!
तीनों की जान में जान आती है।
राहुल- अरे बाप रे, मेरी तो गाण्ड फट गई थी कि आज तो गया…!
रेहान- अबे साले पागल है क्या..! तू तो मेरा यार है, तुझे थोड़ी ना मारूँगा मैं..!
आरोही- उफफफ्फ़ सच में रेहान जी हालत खराब कर दी आपने तो…!
जूही- हाँ और नहीं तो क्या… बताना तो चाहिए न एक्टिंग है…!
रेहान- अगर बता देता तो इतनी रियल एक्टिंग नहीं होती, कैसा खौफ आ गया था तुम्हारी आँखों में..!
राहुल- अच्छा ठीक है भाई… अब चलो बेड पर मुझे जूही का रस पीकर ही चैन आएगा मेरा गला सूख गया है।
रेहान- नहीं राहुल हम फिल्म का सीन करेंगे मान लो रियल में मैंने तुमको गन पॉइंट पर रखा है और तेरी दोनों बहनों को नंगा लेसबो कराने को कहा, मज़ा आएगा…!
आरोही और जूही भी खुश हो जाती हैं।
राहुल- ओके यार मज़ा आएगा, जब दोनों गर्म हो जाएँगी, तब हम दोनों इनको ठंडा करेंगे।
रेहान- हाँ यार तुम दोनों शुरू हो जाओ, तब तक हम थोड़ी बाहर जाकर पी लेते हैं।
दोनों वहीं बाहर बैठ कर पीने लगते हैं और आरोही जूही के मम्मों को दबाने लगती है।
जूही- आ…हह.. उई दीदी आ…हह.. आराम से… आज रेहान ने बहुत मसला है इनको… उफ़फ्फ़…!
रेहान और राहुल बाहर पीने में मस्त थे और दोनों के ही लौड़े तनाव में आने
लगे थे, उनको लैसबो करते देख कर।
आरोही- सस्स आ…हह.. जूही तुम मेरी चूत चाटो मैं तुम्हारी चाटती हूँ।
दोनों 69 के पोज़ में हो जाती हैं।
आरोही- वाउ.. जूही तुम्हारी चूत पहले कितनी टाइट और वाइट थी, आज तो पूरी लाल हो रही है और खुल भी गई है, रेहान ने मज़ा दिया या नहीं…!
जूही- अई अ..औच दीदी.. चूत में बहुत दर्द है, आ…हह.. दबाओ नहीं.. प्लीज़ कककक आ…हह.. सस्स रेहान ने तो वो मज़ा दिया है कि आपको बता नहीं सकती मैं…!
आरोही- आ…हह.. क्या चूत है जूही.. तुम्हारी आ…हह.. कैसे रस छोड़ रही है।
जूही- आई ईइआ उ दीदी आ…हह.. आपकी चूत तो एकदम खुल गई है एइ.. पूरी 3 ऊँगली आराम से जा रही हैं… भाई ने खूब खोल दिया है…!
आरोही- आ…हह.. उफ्फ जूही की बच्ची आ…हह.. चाटने को कहा था.. ऊँगली करने को नहीं.. उफ्फ सी.. चूत का ये हाल भाई ने नहीं, रेहान ने किया है.. उफ्फ उसका लौड़ा नहीं पूरा बम्बू है, जो चूत को फाड़ कर भोसड़ा बना देता है… अई आह..चाटो उफ्फ आह आ…हह…..!
ये सब देख कर तो राहुल का तो हाल खराब हो गया, उसका लौड़ा एकदम टाइट हो गया था, जब उसकी नज़र रेहान के खड़े लौड़े पर गई तो।
राहुल- वाउ यार तेरा हथियार तो बहुत भारी है, तभी मेरी दोनों बहनें तेरे गुण गा रही हैं।
रेहान- हा हा हा चल अब मुझसे भी बर्दाश्त नहीं होता, ये बियर की बोतल साथ ले आज तुझे नये तरीके से बियर पिलाता हूँ।
राहुल- कौन सा तरीका यार…!
रेहान- अबे साले बहनचोद तेरी जो दो रंडी बहनें है ना.. उनकी चूत पर बियर डाल कर चाट.. बहुत मज़ा आएगा तुझे हा हा हा हा…!
रेहान की बात सुनकर राहुल भी हँसने लगा और आरोही भी हँसने लगी।
राहुल- यार एक बात तो है, मैंने सुना है गलियाँ देकर सेक्स करने में बहुत मज़ा आता है।
रेहान- हाँ आता है, इसी लिए तो दे रहा हूँ। अब चल और तुम दोनों भी अपनी रासलीला बन्द करो, सीधी लेट जाओ.. हम आ रहे हैं।
दोनों सीधी अपनी टाँगें खोल कर लेट जाती हैं।
आरोही- आ आ…हह.. जाओ रेहान जी मेरी चूत आपका इन्तजार कर रही है।
जूही- ससस्स भाई जल्दी आ…हह.. आ जाओ आपका लौड़ा मुझे चूसना है… आ…हह.. बहुत मन हो रहा है।
रेहान- आ रहा हूँ साली कुतिया… आज तुझे कुतिया बनाकर ही चोदूँगा मैं और साली छिनाल तेरा मन नहीं भरा मेरा लवड़ा चूस कर जो इस हरामी भाई को बुला रही है।
राहुल- आ रहा हूँ मेरी बहना, अब ये लौड़ा तेरा हो गया, जब चाहो मुँह में ले लेना।
दोनों बेड पर चढ़ गए और उनकी चूतों पर बियर डाल कर चूसने लगे।
रेहान अपनी जीभ से आरोही की चूत को चाट रहा था, वहीं राहुल ने तो जूही के मम्मों से लेकर चूत तक बियर डाल दी थी और बड़े ही बेसबरे अंदाज में चूस रहा था।
आरोही- आ आ…हह.. उई रेहान जी आ…हह.. आप कितना अच्छा आ…हह.. चूसते हो आ…हह.. उफ्फ…!
रेहान- क्यों साली राण्ड अभी तो चुसवा और चुदवा कर आई है अपने भाई से… वो अच्छा नहीं चूसता क्या…!
जूही- अई उफ्फ भाई अई आप तो बड़े बेसबरे अई उई हो.. क्या चूत को खा जाओगे.. क्या.. पहले ही बहुत दर्द है आ…हह.. उफ्फ सी ससस्स आ…!
राहुल- चुप साली एक ने तो अपने यार से सील तुड़वा ली और अभी तूने अपने यार से सील तुड़वा ली… उस समय तेरे को दर्द नहीं हुआ, जो अब उई उई कर रही है आ…हह.. उफ़फ्फ़ क्या रस आ रहा है तेरी चूत से आ…हह…..!
दस मिनट तक दोनों ने चूतों को इतनी ज़बरदस्त चूसा कि उनका पानी निकल गया, पर उनका सेक्स भी चरम सीमा पर आ गया। अब उनकी चूत लौड़े लेकर ही शान्त होने वाली थी। तो दोनों ने उनको हटाया और उनके लौड़े झट से मुँह में ले लिए।
राहुल- आह उफ्फ जूही आ…हह.. मज़ा आ गया.. तुम भी बहुत अच्छा चूस रही हो आ…हह.. आरोही ने तो आ…हह.. कमाल किया ही आ…हह.. तुम भी आ…हह.. कम नहीं हो आ…हह…..!
रेहान- उफ्फ आरोही आ…हह.. सुना तुमने.. तेरा भाई क्या बोल रहा है.. उफ्फ दाँत मत लगाओ न.. जान साले ऐसी एटम-बम्ब बहनें हैं तेरी.. तो ऐसे ही मज़ा देगी न…!
राहुल- आ…हह.. उफ़फ्फ़ ऐसी बहनें आ…हह.. नसीब वालों को मिलती हैं आ आ…हह.. काश ऐसी दस बहनें होतीं तो मज़ा आ जाता।
राहुल की बात सुनकर आरोही से रहा नहीं गया और लौड़ा मुँह से निकाल कर कहती है।
आरोही- भाई हम दो ही आप पर भारी पड़ जाएंगी, दस का क्या अचार डालना है, होता तो कुछ है नहीं आपसे… ये तो रेहान जी ने आपको इस लायक बना दिया कि आज आप हमें चोद रहे हो, नहीं तो बस खेल-खेल में ही मज़ा लेते, अगर आप में हिम्मत होती तो आज दोनों की सील आप ही तोड़ते… समझे…!
रेहान- अरे जान गुस्सा क्यों होती हो, इसने तो ऐसे ही बोल दिया था, आ…हह.. हरामी अब चुपचाप जूही के मज़े ले, मेरी रानी को गुस्सा मत दिला।
राहुल- सॉरी बहना.. आ…हह.. जूही अब बस भी कर आ चल, अब तेरी चूत का स्वाद चखने दे, मेरे लौड़े को।
जूही को लेटा कर राहुल अपना लौड़ा चूत पर टिका देता है, वो भी एकदम गर्म थी एक ही झटके में राहुल पूरा लौड़ा चूत में घुसा देता है।
जूही- एयाया आआआ… मर गई उ..मा एयाया भाई आआ…हह.. एक साथ ही पूरा अई डाल दिया उफ़फ्फ़ ककककक…!
राहुल- आ…हह.. मज़ा आ गया, जूही रेहान के बम्बू से चुदने क बाद भी तेरी चूत कितनी टाइट है आ…हह.. मज़ा गया।
जूही- आह..प्प पागल हो आप आ…हह.. मेरी दर्द से जान निकल रही है आआ..आपको अई आ..आ…हह.. मज़े की पड़ी है।
राहुल- चुप कर साली कुतिया, अभी मूसल जैसा लौड़ा चूत में घुसवाई है। फिर भी नाटक कर रही है… उहह उहह ये ले आ…हह.. उहह उहह ले ले…!
दरअसल राहुल आरोही के गुस्सा हो जाने से नाराज़ था और गुस्सा जूही पर निकाल रहा था।
जूही- आआ आआ आ…हह.. भाई आ…हह.. आराम से आ…हह.. मानती हूँ रेहान का लौड़ा अई आ…हह.. बड़ा है अई अई पर चूत सूजी हुई है अई आह…!
रेहान- उफ्फ बस भी करो जान, अब घोड़ी बन जाओ आज घोड़ी बना कर चोदूँगा। देख राहुल कैसे मज़ा ले रहा है, चल बन जा जल्दी से…!
राहुल- आ आ…हह.. उहह उहह चूत सूजी हुई है, तो आ…हह.. मैं क्या करूँ आ…हह.. मुझे तो मज़ा आ रहा है… जूही क्या टाइट चूत है आ…हह.. आरोही ने तो चुदवा चुदवा कर ढीली करवा ली, पर आ…हह.. तेरी बहुत टाइट है आह…!
अब इतने झटकों के बाद जूही का दर्द कम हो गया था, वो भी मस्ती में आ गई थी और अब राहुल का साथ देने लगी।
रेहान ने लौड़े को आरोही की चूत में डाल कर उसकी गाण्ड पर गौर किया।
रेहान- जान क्या बात है, इस हरामी ने तेरी गाण्ड भी मार ली.. क्या..! होल खुला हुआ है…!
राहुल- उह ओह आ…हह.. हाँ यार सील तो नहीं मिली तो आ…हह.. गाण्ड का ही मुहूरत कर दिया.. उहह आ…हह….!
रेहान- अच्छा किया तूने, आरोही की गाण्ड बहुत मस्त है, मेरा बहुत मन था मारने का आज सोचा मारूँगा, पर तूने पहले ही इसको खोल दिया। कोई बात नहीं, अब मुझे ज़्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ेगी, आ…हह.. अभी तो चूत से काम चलाता हूँ आ आ…हह.. जूही की चूत बहुत टाइट थी यार, अब इसकी गाण्ड मारूँगा तो लौड़ा दर्द करने लगेगा, आ…हह.. चूत से ही आ आ…हह.. काम चलाता हूँ।
आरोही- आ आ…हह.. उफ्फ कितनी बार भी अई आ…हह.. मरवा लूँ आ…हह.. मगर तुम्हारा लौड़ा घुसते ही आ आ…हह.. जान निकल जाती है, आ…हह.. उफ्फ उह…
रेहान- आ…हह.. ले उफ्फ साली आ…हह.. दोनों की दोनों आ जलवा हो आ…हह.. ले।
दोस्तों 35 मिनट तक ये धाकड़ चुदाई चलती रही, रूम में आ…हह.. आह एयाया
उईईई उफफफ्फ़ सस्स्सस्स ककककक पूछ पूछ आह पूछ ठाप ठाप ठाप फक मी आ फक मी आ उफ़फ्फ़ बस ऐसी आवाजें आती रहीं और चारों झड़ गए व बेड पर ही ढेर हो गए।
दोस्तों एक तो शराब और बियर की वजह से और दूसरी चुदाई की थकान ने चारों को जल्दी ही नींद के आगोश में ले लिया।
रात के 2 बजे थे, ये चारों मस्त नींद में थे, तभी रूम का डोर खुलता है, साहिल और सचिन अन्दर आते हैं और आरोही के पास आकर खड़े हो जाते हैं। आरोही नंगी सोई थी, उसके मम्मों को और चूत देख कर साहिल आपने लौड़े को पैन्ट के ऊपर से दबा रहा था।
सचिन ने साहिल को आँखों से इशारा किया और दोनों ने आरोही को हाथ-पांव पकड़ कर उठा लिया और वहाँ से बाहर ले गए।
सचिन- ये लो साहिल लगा लो घूँट और चोद दो साली को यही है वो मस्त रंडी, जिसके कारण हमारे लौड़े तन्ना रहे हैं।
सचिन ने एक बोतल साहिल के हाथ में दे दी और मुस्कुराने लगा।
उप्स,.. सॉरी दोस्त भाग यहीं रोकना पड़ेगा। अब आगे का हाल तो अगले भाग में ही पता चलेगा, लेकिन आज का ट्विस्ट कैसा लगा? मज़ा आया ना..! राहुल बच भी गया और लैस्बो के साथ ग्रुप सेक्स का मज़ा भी मिल गया आपको।
पर लास्ट में ये क्या पंगा हो गया? अब साहिल क्या करने वाला है? क्या इसने वो वीडियो देख लिया, जिसमें आरोही और राहुल सिमी के बारे में बात कर रहे थे।
ये बोतल में क्या है? अब क्या होगा? आप दिमाग़ लगाओ और मुझे मेल करके बताओ रेहान के मना करने के बाद ये दोनों बाहर क्यों आए?
ऐसे ही बहुत सारे सवाल आपके दिमाग़ में आएँगे, तो इन सब का जवाब आपको आगे के भाग में मिलेगा।
अब आप प्लीज़ जल्दी से आप मेरी आईडी pinky14342@gmail.com पर मेल करो और अपनी राय दीजिए।
आज के भाग के बारे में और आगे के भाग के लिए कोई सुझाव हो, तो वो भी जरुर दीजिए।
ओके दोस्तों बाय।

बॉस नौकरी से निकालने की धमकी दे रहा है

बॉस नौकरी से निकालने की धमकी दे रहा है

शुरू में मैंने उनकी बातों पर ध्यान नहीं दिया।

भिलाई की रेखा को चोदा

भिलाई की रेखा को चोदा

रोहन पाण्डे
मैं रोहन अपनी पहली सेक्स कथा लिखने जा रहा हूँ।
बात उस समय की है जब मैं भिलाई में बारहवीं की परीक्षा दे रहा था। मैं भिलाई के सुप्रसिद्ध पब्लिक स्कूल में पढ़ता था। मेरी मुलकात रेखा नाम की एक लड़की से हुई। वह मेरी क्लासमेट थी। मैं उसे बहुत पहले से लाइन मारता था।
एक दिन वो मुझे स्कूल के बाहर रोते हुए मिली। तब मैंने सहानभूति दिखाते हुए उससे पूछा, तो उसने बताया कि त्रैमासिक परीक्षा में वह फेल हो गई है, इस कारण उसे मास्टर जी ने बाहर भगा दिया है।
तब मैंने उसे समझाते हुए कहा- इसमें रोने की कोई बात नहीं है, ये सब तो होता रहता है।
उस दिन मैंने भी स्कूल से बंक मार दिया क्योंकि मैं भी एक ‘टनाका’ माल को कैसे रोते हुए छोड़ सकता था।
फिर मैंने उससे कहा- चलो कहीं चलते हैं।
फिर मैंने उसको भिलाई सिविक सेंटर ले गया वहाँ हम दोनों ने खूब पानी पूरी खाईं, उसके बाद मैंने उसे उसके हॉस्टल पर छोड़ दिया। मैं मन ही मन उसकी चूचियों के बारे में ही सोच रहा था।
फिर अगले दिन उसने मुझे स्कूल में ‘हाय’ किया। इस प्रकार धीरे-धीरे हम दोनों अच्छे दोस्त हो गए।
एक दिन फिर हम दोनों की मुलाक़ात सिविक सेंटर में हुई। हम दोनों के बीच बातचीत शुरू हो गई। मैं तो केवल उसके मम्मों का दीवाना था।
फिर मैंने उसे अपने पॉइंट पर लाने के लिए बातों ही बातों में उससे पूछा- तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड नहीं है क्या?
पहले तो उसने ‘नहीं’ कहा, पर थोड़ी देर के बातचीत के बात उसने मुझे बताया कि उसका एक बॉयफ्रेंड है। वो हमारी ही क्लास में है। और वो लड़का मेरा ही फ्रेंड निकला।
मैंने उससे पूछा- अगर वो तुम्हें मेरे साथ देख लेगा, तो क्या होगा..!
फिर उसने बताया- मेरा बॉय फ्रेंड बहुत ही बेवकूफ टाइप का है।
मैंने पूछा- वो कैसे?
उसने मुझे बताया- जब भी मुझे वह फ़ोन करता है, तब मुझे बहुत पकाता है और रात को तो हद ही कर देता है। वो मुझे रात फ़ोन करके तरह-तरह के खाना पकाने की तरकीब बताते रहता है और मुझे तो वो दिखने में भी कोई ख़ास नहीं लगता है।
मैंने उससे कहा- मेरे बारे में क्या ख्याल है?
उसने कहा- यार तुम्हारी तो बात ही अलग है।
शायद रेखा मुझे पसंद करने लगी थी।
यहाँ से मेरी कहानी चालू होती है।
16 दिसम्बर जो कि मेरा जन्म दिन है, मैंने रेखा को अपने बर्थ-डे पर पार्टी पर इनवाईट किया।
मैंने रायपुर के होटल सेलिब्रेशन में अपनी पार्टी रखी थी, रेखा भिलाई से रायपुर मेरे पार्टी में आई।
केक कटने के बाद मेरे सभी दोस्तों ने खाना खाया और सभी चले गए।
मैंने रेखा से कहा- हम दोनों कार से साथ-साथ रायपुर चलेंगे।
पर मेरी किस्मत इतनी अच्छी थी कि तभी मेरे ड्राईवर का फ़ोन आया। उसने बताया कि कार ख़राब हो गई है, करीब रात के आठ बजे तक ही ठीक हो पाएगी।
देखते ही देखते रेखा से बात करते हुए रात के आठ कैसे बज गए पता ही नहीं चला।
तब मैंने ड्राईवर से फ़ोन पर बात की, उसने कहा- कुछ समय और लग जाएगा।
अब रात के 10:30 हो चुके थे, तब रेखा ने मुझे कहा- यार प्लीज, मुझे बस-स्टैंड तक छोड़ दो, मैं चली जाऊँगी।
मैंने उससे कहा- यार बहुत रात हो चुकी है आज हम यहीं रूक जाते हैं। फिर सुबह दोनों साथ ही चलेंगे।
वो मान गई, तब मैंने उसी होटल में दो कमरे बुक कर दिए।
दोनों अपने-अपने कमरे में चले गए। फिर अचानक रात को 12:30 को मेरे दरवाजे पर किसी ने दस्तक दी।
मैंने देखा तो वो रेखा थी, मैंने उसे अन्दर आने को कहा।
उसने कहा- यार मुझे अभी नींद नहीं आ रही है।
लेकिन मुझे तो नींद आ रही थी, पर जब एक विशाल ‘चूची-धारी’ यौवना रात के एक बजे किसी के सामने हो, तो वह कैसे सो सकता है।
तब मैंने टीवी ऑन कर दिया।
वो तो बड़े मन से टीवी पर सास-बहू का एपिसोड देख रही थी, मैं मन ही मन उसको चोदने की सोच रहा था। तब मैंने अपने मोबाइल पर एक ब्लू-फिल्म ऑन करके, पॉज करके, टीवी के रिमोट के पास रख कर बाथरूम की ओर चला गया।
तब जब मैं लौटा तो मैंने देखा कि रेखा मोबाइल को बड़े ध्यान से देख रही है।
अचानक उसकी नज़र मुझ पर पड़ी। उसने मुझे देखते ही मोबाइल जमीन पर पटक दिया।
तब मैं समझ गया कि भाई मेरी तो आधी बात बन गई।
मैं रेखा के करीब जाकर बैठ गया और उससे पूछा- तुम क्या देख रही थीं।
वह तो शरमा गई।
मैंने कहा- यार इसमें शरमाने की क्या बात है..! यह तो जीवन की कला है।
फिर हम दोनों के बीच एडल्ट बातें शुरू हो गईं। बातों ही बातों में मैंने उससे उसकी चूचियों का साइज़ पूछ लिया।
अब तक हम दोनों बहुत खुल चुके थे।
उसने भी एक मुस्कान दी और बताया- 32..
फिर क्या दोस्तो, मैंने उसकी टाँगों को धीरे-धीरे सहलाना शुरू किया।
धीरे धीरे वह भी गर्म हो गई, अचानक उससे रहा नहीं गया, उसने मुझे अपनी बांहों में भर लिया और मुझे चूमने लगी।
मैं उसे जोर से अपने बांहों में जकड़ कर चूमने लगा। फिर धीरे से मैंने उसकी ब्रा के अन्दर हाथ डाल दिया और उसकी चूचियों को मसलने लगा।
भाइयों मुझे लग रहा था कि मक्खन के कटोरे में मैंने अपना हाथ डाल दिया है।
मैंने झट से उसकी टी-शर्ट उतार दी, वो काले रंग की ब्रा पहने हुई थी, अब मैं दोनों हाथों से उसके मम्मों को दबा रहा था और उसे चूम रहा था।
फिर मैंने उसकी जीन्स की ज़िप खोली, तब उसने मुझे कहा- प्लीज रोहन.. बस रहने दो, यह सब गलत है।
तब मैंने उसे समझाया- देखो रेखा.. मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ और प्यार की शुरूआत सेक्स से ही होती है।
फिर मैंने उसके सर पर हाथ रख कर कसम खाई- यार मैं कहाँ तुमसे धोखा करने जा रहा हूँ’.. मैं शादी करूँगा, तो सिर्फ तुमसे और किसी से नहीं।
वह मेरी बातों में आ गई। फिर मैंने एक झटके से उसकी जीन्स खोल दी। अब वो सिर्फ अपने चड्डी और ब्रा में थी।
भाइयों क्या कहूँ.. चड्डी और ब्रा में वो कितनी कमाल लग रही थी। उसके मम्मों के उभार तो ना जाने हिमालय से भी ऊँचे लग रहे थे और उसका उभरा हुआ पिछवाड़ा तो मानो तबले के जैसा मस्त था।
कुछ देर चूचियों और गाण्ड से खेलने के बाद मैंने उसे उसके अंत: वस्त्रों से मुक्त कर दिया।
उसके सुन्दर-सुन्दर दो मखमल के गुब्बारों और उन पर दो काली-काली बौंड़ियां उगी देखकर मेरे तो होश ही उड़ गए थे।
मैंने आज तक किसी लड़की को अपने सामने टॉपलैस नहीं देखा था। उसकी फुद्दी के ऊपर हल्के भूरे बाल थे।
फिर क्या… मैंने उसकी दोनों टाँगों को फैलाया और उसकी फुद्दी को निहारने लगा।
उसकी फुद्दी की दीवारें तो मानो एक-दूसरे से चिपकी हुई थीं। वो पूरी तरह से खिला-माल थी।
तब मैंने उसके फुद्दी की दीवारों को अपने उंगली से अलग करने की कोशिश की, वो सहम सी गई।
फिर मैंने ब्लू-फिल्म के चुदक्कड़ों के जैसे उसकी फुद्दी के पास अपना मुँह ले गया। उसकी फुद्दी की मादक गंध ने तो मुझे पूरी तरह से पागल कर दिया और मैं तुरन्त ही उसकी फुद्दी को चाटने लगा।
वह धीरे-धीरे सिसकने लगी- हा हा हुई हुई…!
फिर अचानक से पाँच मिनट बाद वो उठ खड़ी हुई।
मैंने उससे पूछा- क्या हुआ..!
उसने कहा- जानू जोर की ‘आई’ है..!
तब मैंने कहा- यार तुम मेरे ऊपर मूत दो, मुझे बड़ा मजा आएगा।
मैं उसके नीचे जमीन पर लेट गया, उसने मेरे मुँह पर मूतना शुरू किया। ना जाने उसके मूत की नूनिया स्वाद ने मुझे पागल कर दिया। मेरी हालत तो ऐसी थी कि अगर वो कहती उसे दो नंबर आया है, तो मैं उसकी टट्टी तक खा जाता।
भाइयों लड़की को अपने मुँह में मुतवाने का कुछ अलग ही मज़ा है।
फिर मैं उसे अपने बिस्तर पर लिटा कर, फिर से उसकी चूत चाटने लगा, वो झड़ चुकी थी।
फिर मैंने उसे अपना लण्ड चूसने को कहा, उसने मेरा लण्ड अपने मुँह में लिया और तुरंत बाहर निकाल दिया।
शायद उसे मेरे लण्ड का स्वाद अच्छा नहीं लगा।
फिर मैंने उसके गाण्ड के नीचे एक तकिया रख दिया और उसके ऊपर चढ़ गया। वह थोड़ी डरी, मैंने अपना थूक उसकी चूत पर रखा और जोर मारा, मेरा लण्ड फिसल गया।
मेरा भी पहली बार था, मुझे भी पता नहीं था कि छेद कहाँ पर होता है।
फिर मैंने फिर से कोशिश की, इस बार मेरा लण्ड उसकी फुद्दी में आधा घुस गया।
मेरे लण्ड का चमड़ा ऊपर आने के कारण मुझे थोड़ा दर्द हुआ, पर रेखा तो चिल्ला उठी।
मैंने पास रखे टिशू पेपर उसके मुँह में ठूँस दिए और पूरी ताकत से अपना लण्ड घुसाने लगा।
रेखा तो दर्द के मारे छटपटाने लगी।
अब मेरा पूरा लण्ड उसकी फुद्दी के अन्दर था। मैंने धीरे-धीरे धक्के लगाना शुरू किया। कुछ देर बाद रेखा भी शायद मजा लेने लगी, मैंने उसके मुँह से पेपर निकाला और उसे जोर-जोर से चोदने लगा।
वह भी मजे से सिसकारियाँ मारने लगी- ही.. हिस्स ही ही हय्य्य..!
फिर करीब 20 मिनट की चूत-लीला के बाद मैं झड़ गया।
मैंने लन्ड का सारा पानी उसकी चूत के अन्दर ही छोड़ दिया। इसी तरह हम पाँच मिनट एक-दूसरे के ऊपर पड़े रहे।
जब मैंने अपना लण्ड बाहर निकाला तो मैं डर गया पूरा बिस्तर खून से सना था, उसकी चूत पूरी लाल हो चुकी थी।
मेरे लण्ड का चमड़ा फट गया था, उससे भी खून आ रहा था।
रेखा की चूत फट चुकी थी, वहाँ से भी खून आ रहा था।
हम दोनों का दर्द से बड़ा बुरा हाल था।
मुझे तो रेखा से ज्यादा अपने बाबा जी की चिंता हो रही थी। मुझे डर लगने लगा कि कहीं मेरे बाबा का हिसाब चुकता तो नहीं हो गया… यह फिर से दोबारा खड़ा हो पाएगा या नहीं…!
यही सोचते हुए मैं रेखा की गांड पर हाथ फेर रहा था कि तभी मेरे बाबाजी में कुछ हलचल हुई, मैं यह देख कर बड़ा ही खुश हुआ।
तब मैं रेखा को उल्टा लिटा कर उसकी गांड के छेद को चाटने लगा, अचानक रेखा ने मेरे मुँह पर पाद दिया और जोर से हँसने लगी। तब मैंने सोचा कि इस शरारती को तो सबक सिखाना ही होगा, मैंने उसकी गांड में अपना थूक डाल दिया, फिर मैंने अपना लण्ड उसकी गांड के ऊपर रखा और जोर से झटका दिया, मेरा पूरा लण्ड उसकी गांड की गहराई में समां गया।
वो चीख उठी- उई मम्मी मम्मी..!
मैं उसकी एक न सुनते हुए जोर-जोर से उसकी गाण्ड मारने लगा, फिर उसे चोदते-चोदते मैं उसकी गाण्ड में ही झड़ गया।
यह सब करते हुए सुबह के 5 बज चुके थे।
सुबह के 6 बजते तक एक बार फिर मैंने रेखा का फुद्दी को चोदा और फिर सात बजे तक हम दोनों भिलाई के लिए निकल गए।
रेखा और हम दोनों दर्द के मारे ठीक से चल नहीं पा रहे थे।
इसके बाद हमने आने वाले पाँच महीनों तक खूब चुदाई की, जब भी समय मिलता मैं और रेखा अपनी भूख मिटा लेते।
इन दिनों रेखा दिल्ली में यूपीएससी की तैयारी कर रही है। पिछले एक साल से मैंने उसे नहीं चोद सका हूँ।
तो दोस्तो, यह थी मेरी चुदाई की कहानी, रेखा के साथ। प्लीज यकीन करें यह मेरी सच्ची कहानी है, आप लोगों को कहानी कैसी लगी, प्लीज अपना कमेंट जरुर दें।
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