Kaam Vaasna

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दोस्त की चालू गर्लफ्रेंड की चुदाई

दोस्त की चालू गर्लफ्रेंड की चुदाई

इधर मेरा दोस्त अपनी काम की वजह से व्यस्त रहने लगा था और उससे मिल नहीं पा रहा था और ज्यादा बात भी नहीं कर पाता था। वो मुझे कॉल करने लगी और हमारी काफी देर देर तक बाते होने लगी। मैं उससे हमेशा फ्लर्ट करता रहता था कॉल पर।

मेरी परीक्षा और मेरी चूत चुदाई-1

मेरी परीक्षा और मेरी चूत चुदाई-1

मौसी के कमरे में ही मैंने अपनी पढ़ाई शुरू कर दी… दोपहर में खाना खाने के बाद मैं और सौरभ थोड़ा घूमने चले गई और फिर रात का खाना बाहर ही खाकर आए। हमें वापस आने में रात के दस बज गए थे। मैं मौसी के कमरे में पढ़ाई करने चली गई और पढ़ाई करते करते सुबह के चार बज गए…

मेरी परीक्षा और मेरी चूत चुदाई-2

मेरी परीक्षा और मेरी चूत चुदाई-2

वह मुस्कुराते हुए दरवाज़ा खोलने चला गया।

मस्त शाम और कुसुम जैसा ज़ाम

मस्त शाम और कुसुम जैसा ज़ाम

अब मैं आपको कुसुम भाभी के बारे में कुछ बताना चाहूँगा। कुसुम भाभी की दो बेटियाँ हैं, दोनों अभी छोटी हैं… लेकिन भाभी तो क़यामत हैं। उनके जिस्म का सबसे आकर्षक भाग है उनकी चूचियाँ। यारो, क्या कमाल चूचियाँ हैं उनकी, वो चाहे कुछ भी पहन ले लेकिन उनकी चूचियों पर से नज़र हटाना नहीं बनता है। उनके फिगर के बारे में बताऊँ आपको तो 38-30-38 होगा… भारी नितम्ब और बड़ी बड़ी चूचियाँ। बस ऐसा समझ लीजिये कि एक बार मिल जाये तो आप सब कुछ भूल जायेंगे।

सपनों से हकीकत का सफर

सपनों से हकीकत का सफर

मैं जब कॉलेज में था तो अक्सर क्लास बंक कर दोस्तों के साथ ताश खेलने या फिर स्विमिंग पूल पर नहाने चला जाता था तो कभी सब दोस्त सिनेमा हॉल में मूवी का लुत्फ़ उठाते थे। बस जिंदगी का मजा ले रहे थे।

करन की सीमा

करन की सीमा

एक बार बारिश के मौसम में हमने सिनेमा हाल में व्यस्क मूवी देखने जाने का सोचा पर वहाँ ज्यादातर मर्द ही जाते हैं इसलिए मैंने अपनी पत्नी को रेनकोट पहना दिया, सर पर कैप और हम रात वाला शो देखने गए। उसने रेनकोट के अन्दर कुछ नहीं पहना क्योंकि अगर वो ब्रा पहनती तो किसी को शक हो जाता, बिना ब्रा के उसके चूचे रेनकोट से बाहर उभरे दिखाई नहीं दे रहे थे।

यादगार सफ़र

यादगार सफ़र

कुछ देर इंतजार करने पर एक छोटा ट्रक आया जिस पर हम सब लोग सवार हो गए।

बदतमीज़ की बदतमीज़ी : हरिगीतिका छन्द में

बदतमीज़ की बदतमीज़ी : हरिगीतिका छन्द में

शब्दार्थ
कन्दर्प : काम के देवता अर्थात् कामदेव
रती : कामदेव की पत्नी

रिटायरिंग-रूम की छत पर

रिटायरिंग-रूम की छत पर

किन्तु चारों कमरे बुक थे। किसी नेता ने चार दिनों के लिए बुकिंग करवाई थी। लेकिन रेलवे कर्मचारी ने बताया कि डोरमेट्री में जगह मिल सकती है। मैं देखने गया तो एक हॉलनुमा कमरे में सिर्फ छः बेड लगे हुए थे और सारे खाली थे। उन लोगों ने कहा कि आमतौर पर रिटायरिंग रूम भी खाली ही रहता है मगर इत्तेफाक से रूम अभी मिल नहीं सकता। खैर मैंने डोरमेट्री में बिस्तर की बुकिंग के बारे पूछ तो उन लोगों ने कहा आप यहीं रुकिए अभी बुकिंग इंचार्ज के आने पर आपका काम हो जाएगा।

बदतमीज़ की बदतमीज़ी-2

बदतमीज़ की बदतमीज़ी-2

रंडी बनें जो नारियाँ ना छोड़िए उनको कभी।
कुछ कीजिए तूफान ठण्डी रंडियाँ होंगी तभी।
ऐसी चुदाई कीजिए बुर हो चकित मुँह खोल दे।
‘अब बस करो’ ‘अब बस करो’ जो चुद रही वो बोल दे।

वकील के बाद उसके मुंशी के साथ

वकील के बाद उसके मुंशी के साथ

वो आ भी गया, एक खाली सड़क पर जाकर मैंने उसके लंड को जम कर चूसा, उसका रस निकाल दिया। वो गदगद हो उठा और मुझे चोदने को तड़पने लगा। मैंने दुबारा खड़ा करना चाहा ही था कि शीशे से उसने दूर से आ रही पेट्रोलिंग गाड़ी देखी और हम अलग हुए। उसने कार भगाई और मैंने कपड़े पहने। मिलन अधूरा रह गया था।

शालिनी ने जो चाहा वो पाया-1

शालिनी ने जो चाहा वो पाया-1

ऐसा ही एक वाकया मुझे मेरी एक पाठिका ने बताया जिसका नाम शालिनी है। उसका सरनेम और शहर में यहाँ नहीं लिखूँगा।

शालिनी ने जो चाहा वो पाया-2

शालिनी ने जो चाहा वो पाया-2

रसोइया घबरा गया- क्या बात है मेम साब, सब ठीक तो है, किसी से कोई गुस्ताखी तो नहीं हुई न?

शालिनी ने जो चाहा वो पाया-3

शालिनी ने जो चाहा वो पाया-3

शालिनी के डैडी के एक दोस्त कर्नल साब का बंगला थोड़ी ही दूर पर था और वहाँ एक शराब-कवाब की पार्टी थी, वहाँ यह सिस्टम था कि जब भी किसी के यहाँ कोई पार्टी होती थी, आस पास के बंगले के नौकर वहाँ काम करने जाते थे, उनके यहाँ से भी नौकर जाने थे, लेकिन शालिनी के घर पर रहने की वजह से उसके डैडी ने एक नौकर को उसकी हिफाज़त और चाकरी के लिए वहाँ छोड़ने का निर्णय किया, और सब नौकरों में राजेश ही जवान और हट्टा कट्टा था तो शालिनी ने उसका ही नाम सुझाया।

शालिनी ने जो चाहा वो पाया-4

शालिनी ने जो चाहा वो पाया-4

उस वहशी हो चुके नौकर ने जोर से उसके चूतड़ों पर हाथ मारा और उसकी केप्री में अंदर तक हाथ घुसा के उसे खींच लिया, पर वो फिर भी रुकी नही, नतीज़ा यह हुआ कि ‘चररर च्रर्र करते हुए उसकी केप्री भी पूरी तरह से फट गई, पर शालिनी भागने में कामयाब हो गई लेकिन भागते भागते उसकी केप्री के चीथड़े उसके नितम्बों-जांघों से अलग होकर राजू के हाथ में रह गये।