Kaam Vaasna

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तेरा साथ है कितना प्यारा-5

तेरा साथ है कितना प्यारा-5

हाययय… आहहह… मेरा पूरा बदन बुरी तरह कामोत्तेजित था। मेरी योनि में अजीब तरह की खुजली हो रही थी। हालांकि मेरे लिये यह खुजली नई नहीं थी परन्तु इतनी अधिक खुजली कभी महसूस नहीं हुई।

जूही और आरोही की चूत की खुजली-34

जूही और आरोही की चूत की खुजली-34

पिंकी सेन
गुड-मॉर्निंग फ्रेंड्स आप के मेल से पता चला कि आपको कहानी के क्लाईमेक्स की जल्दी नहीं है। सब यही चाहते हैं कि कहानी चलती रहे। तो आनन्द लीजिए।
अब तक आपने पढ़ा…
साहिल बड़े प्यार से जूही की चुदाई करता है और नीचे आकर जूही अन्ना से बात करने रूम में चली जाती है और अन्ना को डांटती है।
अब आगे…
जूही को गुस्से में देख कर अन्ना के होश उड़ जाते हैं।
अन्ना- बेबी हम तुम्हारे पैर पकड़ता जी प्लीज़ यहाँ किसी को कुछ मत कहना जी हम मर जाएगा जी प्लीज़…!
जूही- साले कुत्ते, तेरी इतनी हिम्मत हो गई है मेरी दीदी को गंदा कर दिया है। तुझे जरा भी डर नहीं लगा मेरा हाँ अब देख मैं क्या करती हूँ..! बहुत शौक है ना तुझे ब्लू-फिल्म बनाने का… अब तेरी फिल्म सबको मैं दिखा दूँगी और टीना को सब कुछ बता दूँगी मैं.. फिर देखती हूँ कितना बहादुर है तू…!
अन्ना- नहीं जी ऐसा मत करना… मैं कुछ नहीं करूँगा जी प्लीज़ अगर टीना को ये बात पता चल गई तो वो मर जाएगी प्लीज़…!
जूही- अगर मैं चाहूँ तो तुमको कब का मार देती, पर क्या करूँ मजबूर हूँ टीना मेरी बेस्ट-फ्रेंड है और तुमने तो बहुत कोशिश की कि मुझे रास्ते से हटा दो, पर कामयाब नहीं हुए क्यों…. मार दो मुझे… तुम्हारा डर ख़त्म हो जाएगा…!
अन्ना- नहीं जी तुम वो वीडियो किसके पास रखा जी बहुत हरामी होना वो.. अगर मैंने तुमको टच भी किया तो वो मेरी लाइफ बर्बाद कर देगा जी।
जूही- मन तो करता है, तुझे अभी जान से मार दूँ, पर तेरे जैसे गंदे आदमी के खून से मेरे हाथ ही गंदे होंगे। अब बाहर जाकर तेरे जो मन में आए वो झूट बोल और यहाँ से निकल जा.. मेरे भाई को मारा तुमने.. उसका बदला मैं बाद में लूँगी.. अभी तो मुझे रेहान और साहिल को मनाना है।
वहाँ साहिल और सचिन राहुल को गाड़ी से निकाल कर उस रूम में ले जाते हैं, जहाँ सब मौजूद थे।
राहुल- छोड़ो मुझे सालों एक-एक को देख लूँगा मैं…!
साहिल उसको कोने में लेजा कर धमकाने लगता है। सचिन भी कहाँ पीछे रहने वाला था, वो भी उसके साथ गालियाँ बकने लगा।
साहिल- साले मेरी बहन के साथ गंदा किया तूने… हाँ मादरचोद तेरे को जान से मार दूँगा मैं…!
संजू भाग कर उसको छुड़ाता है।
संजू- भाई… इससे हमको रेट भी तो पूछना है इसकी बहन का… जाने दो आप… हम देख लेंगे आप बाहर जाओ…!
सचिन- चल साहिल इसको ये सब बता देंगे बाहर चलते हैं।
वो दोनों बाहर आए तभी अन्ना और जूही भी बाहर आ जाते हैं।
अन्ना- रेहान जी हमको थोड़ा अर्जेंट काम होना जी हम जाता, आप का प्लान तो कामयाब हो गया जी… अब आप अपने हिसाब से बदला लो.. मेरे को जाने दो…!
रेहान- क्यों अन्ना आख़िर बात क्या है? मैं बहुत समय से देख रहा हूँ तुम जूही से नजरें नहीं मिला रहे हो और इसने ऐसा क्या कह दिया जो आरोही को
बिना चोदे जा रहे हो?
अन्ना- चोद लिया जी बस मन भर गया। आप मेरा बहुत अच्छा दोस्त होना जी।
प्लीज़ मुझ को जाने दो मैं तुमको नहीं बता सकता जी प्लीज़…!
साहिल- जूही, ऐसा क्या कह दिया तुमने..! ये क्यों जा रहा है? ऐसी क्या बात हुई तुम दोनों के बीच… हाँ…!
अन्ना- नहीं साहिल जी प्लीज़ इसको कुछ मत पूछो, मैं आपसे वादा करता हूँ समय आने पर खुद आपको बताएगा जी… अभी मैं जाता और जूही तुमको तुम्हारी माँ का कसम जी किसी को कुछ मत बताना जी..!
रेहान- अरे अन्ना ऐसा क्या हो गया जो तुम ऐसे घबरा रहे हो?
अन्ना- प्लीज़ रेहान जी मेरे को जाने दो बाद में सब मैं खुद बताएगा जी..!
अन्ना आपने आदमी लेकर वहाँ से चला जाता है। साहिल और सचिन बस जूही को देख रहे थे और रेहान कुछ सोच रहा था। आरोही अब भी वहीं खड़ी थी। रेहान सीधा उस रूम में जाता है जहाँ वो तीनों थे।
राहुल- रेहान ये सब क्या है? इन लोगों ने मुझे सब बता दिया है तुम बदला लेने के लिए इतना गिर जाओगे..! मैं सोच भी नहीं सकता।
रेहान- चुप बहनचोद मैं अपनी जान का बदला लेने के लिए तुम लोगों के साथ खेल रहा हूँ.. पर तू तो अपनी बहनों को चोद चुका है, तुझे शर्म नहीं आई..!
अंकित- क्या… इसने दोनों को चोदा है… हाय रे हमारी फूटी किस्मत…. साले हमें भी देदे ना अपनी दोनों रंडी बहनों को कसम से बड़े प्यार से चोदेंगे।
राहुल- चुप कर साले हरामी तेरी औकात में रह…!
संजू को गुस्सा आ गया और वो उठकर गया और उसने राहुल का कॉलर पकड़ लिया, अंकित भी साथ हो लिया। रेहान ने उनको रोका राहुल बेहाल सा होकर एक साइड में बैठ गया।
रेहान- साले अगर जीना चाहता है तो वहीं बैठा रह।
राहुल कुछ बोलना चाहता था, पर अभी उसे ठुकाई का डर उसको याद आ गया।
रेहान उन दोनों को समझा कर बाहर आ जाता है।
रेहान- जूही ऐसी क्या बात की तुमने अन्ना से कि वो दुम दबा कर भाग गया।
मैं पागल नहीं हूँ सब समझता हूँ तू मेरे को झूट बोली ना कि तू हमारे साथ है… साली छिनाल… अपनी बहन को बचाने के लिए तू तड़प रही है। अब देख तुम दोनों का क्या हाल करता हूँ मैं..!
जूही- नहीं रेहान जी आप गलत सोच रहे हो। मैं बस उस अन्ना से दीदी को नहीं चुदवाना चाहती थी। मुझे नफ़रत है उस आदमी से।
रेहान- क्यों उसने तेरी गाण्ड मारी थी क्या? जो नफ़रत है?
जूही- प्लीज़ अभी कुछ मत पूछो, आपके दोस्त की बदनामी होगी उसने आपको मना भी किया पूछने से…!
आरोही- रेहान प्लीज़ मुझे माफ़ कर दो, मैंने जो किया गुस्से में किया, प्लीज़ मुझे माफ़ कर दो…!
रेहान- साली, बहन की लौड़ी अब माफी माँग रही है, इतनी आसानी से तुझे माफी नहीं मिलेगी, पहले तेरा घमण्ड तोड़ूँगा मैं…!
जूही चुप खड़ी सब सुन रही थी और रेहान आरोही को गालियाँ दे रहा था। बस आरोही माफी माँगे जा रही थी, तभी संजू दवा लेकर आ गया। रेहान वो गोली लेकर पानी के गिलास में मिला देता है और संजू के साथ मिलकर ज़बरदस्ती आरोही को पिला देता है। आरोही बचने की बहुत कोशिश करती है, पर नाकाम रहती है। पाँच मिनट तक सब शान्त थे आरोही को चक्कर आने लगे।
रेहान- संजू जाओ अंकित को बुला ला…!
संजू अन्दर जाता है अंकित शराब पीकर मस्त था। संजू भी बोतल साथ ले आया और किसी भूखे कुत्ते की तरह वो आरोही को घूरने लगे।
आरोही- प्लीज़ रेहान जी मुझे माफ़ कर दो प्लीज़ साहिल तुम तो माफ़ कर दो मुझे… इन कुत्तों के हवाले मत करो… इन्होंने सिम्मी को बहुत तड़पाया था प्लीज़…!
ये सुनकर साहिल के रोंगटे खड़े हो गए, पर तभी रेहान बोल पड़ा।
रेहान- सालों जैसा उस दिन किया अगर आज वैसा नहीं हुआ ना तो तुम दोनों को जान से मार दूँगा मैं…!
संजू- हाँ भाई आप बस देखो दोनों बहनों को आज तड़पा-तड़पा कर चोदेंगे…!
जूही- प्लीज़ रेहान अब भी वक़्त है रोक लो इन्हें… दीदी को माफ़ कर दो.. आपने हमारे साथ जो किया आप उसको कैसा बदला समझा रहे हो…. हाँ… अरे आपने चोदा और सब से चुदवाया.. साथ में मेरी भी लाइफ बर्बाद कर दी। मेरा तो कोई कसूर ही नहीं था.. प्लीज़ समझो बात को.. दीदी जलन में अंधी हो रही
थी और आप बदले की भावना में अंधे हो रहे हो।
रेहान- चुप कर कुत्ती… सिम्मी मेरी जान थी…!
जूही- अरे तो उसकी मौत का कितना बदला लोगे… हाँ… हम दोनों बहनों की इज़्ज़त आपने दांव पर लगा दी.. ये दो कुत्ते जिन्होंने सिम्मी को बर्बाद किया। आप इनको दोबारा वो ही हैवानियत करने को बोल रहे हो… इससे अच्छा तो है मार दो..! हमें ताकि तुम्हारे दिल को सुकून मिले, अरे मैं तो कब से जानती हूँ पर मैं
चुप रही, क्योंकि मैं भी मानती हूँ दीदी ने गलत किया, पर कहाँ लिखा है? जो पाप करे उसके घर वालों को भी सज़ा मिलनी चाहिए..! अब तुमको जो
करना है करो, लेकिन मैं बेगुनाह हूँ, तुमने मेरे साथ जो किया उसका बदला मुझे देदो मेरी इज़्ज़त वापस देदो, फिर मार दो दीदी को..!
जूही रोए जा रही थी और बोल रही थी। आरोही को होश नहीं था, पर वो अन्दर से रो रही थी। राहुल भी बाहर आ गया और साहिल के पैर पकड़ लिए।
राहुल- प्लीज़ जूही की बात मान लो, माफ़ कर दो हमको, नादानी समझो या सेक्स की भूख हमसे ग़लती हुई है, प्लीज़ माफ़ कर दो…!
साहिल- भाई एक बात कहूँ जो हुआ गलत हुआ अब हम जो कर रहे हैं.. वो भी गलत है, जाने दो ना, इनको सज़ा मिलनी थी मिल गई, इन कुत्तों को सज़ा
दे दो, मैं नहीं रोकूँगा बस।
“ओके तुम कहते हो, तो मान लेता हूँ। ये माफी के काबिल तो नहीं है, पर जूही की बातों ने मुझे भी झकजोर दिया है।”
रेहान की बात सुनकर संजू और अंकित सन्न रह गए।
संजू- सालों हमें मारने का सोच रहे हो क्या? हम पागल हैं… भाग अंकित वरना ये साले छोड़ेंगे नहीं हमको…!
वो दोनों भागते इसके पहले साहिल ने उनको पकड़ लिया। नशे की हालत में कहाँ भागते कुत्ते। उन दोनों को वापस अन्दर बन्द कर दिया और सब रूम में आकर बैठ गए और बातें करने लगे।
सचिन- यार सही है, जो हुआ बहुत हुआ इतनी सज़ा काफ़ी है भाई उन वीडियो का क्या करना है अब…!
रेहान- ख़त्म कर दो सब, आज जूही ने हमें पाप करने से बचा लिया है।
साहिल- मगर भाई इस राहुल ने मेरी सिम्मी की गाण्ड मारी थी। इसको सज़ा तो मिलनी चाहिए ना…!
राहुल- अरे यार अब सब ठीक हो गया, प्लीज़ भूल जा ना और तू मेरी बहन की गाण्ड मार ले। हिसाब बराबर हो जाएगा… प्लीज़ यार हम सब एन्जॉय करेंगे न…!
रेहान- साला बहनचोद इतना बड़ा हरामी है ना तू इतना सब हो गया अब भी तेरी लार टपक रही है चूत पर…!
जूही- रेहान जी इसमें गलत क्या कहा भाई ने…! अब सब ठीक हो गया है तो चलो ना एक ग्रुप-सेक्स हो जाए मज़ा आएगा…!
राहुल- आरोही को देखो, उसको तो होश ही नहीं है, कहाँ शामिल हो पाएगी वो…!
जूही- मैं हूँ न.. सब मिलकर मुझे चोदो मेरा हाल से बेहाल कर दो ताकि दीदी ने जो किया, उसकी सज़ा के तौर पर मैं अपने आप को खुश समझूँगी कि मैंने
दीदी को बचा लिया।
साहिल- नहीं जूही तुम सह नहीं पाओगी। हम 4 हैं.. मर जाओगी और अब सज़ा किस बात की? सब ठीक हो गया ना?
जूही- अरे साहिल जी सज़ा नहीं, तो मज़ा ही सही… पर मेरा मन है, बस हम ग्रुप-सेक्स करेंगे..! चोदो मुझे सब मिल कर मज़ा लो मेरी जवानी का…!
राहुल- जा भाई साहिल इसकी गाण्ड पर तेरा हक़ है, तू तोड़ इसकी गाण्ड की सील..! मैं तो चूत से मन भर लूँगा।
रेहान- ये सही रहेगा, सचिन तुम इसके मुँह को चोदो मैं अन्ना के पास जाकर आता हूँ।
जूही- ओह रेहान जी आप के बिना मज़ा नहीं आएगा। सब से बड़ा हथियार तो आपके पास है।
साहिल- अरे यार जूही अब रेहान क्या तेरे कान में लौड़ा डालेगा? जाने दे ना उसको..!
जूही- नहीं, साहिल भाई आरोही को चोद लेगा वैसे भी मैंने उससे चुदाई करवा ली है। अब सचिन को चूत का स्वाद दूँगीं, आप गाण्ड मारना और रेहान जी के लौड़े का टेस्ट बहुत अच्छा है। मैं उसको चुसूंगी बस…!
राहुल- अरे वाह मैं अकेला आरोही को आराम से चोदूँगा, सोई हुई भी बड़ी मस्त लग रही है वो, पहले चूत से शुरू करता हूँ.. यार जूही वो तो सोई है, जल्दी से मेरा लौड़ा चूस कर गीला कर दे न.. प्लीज़…!
जूही- ओके ओके.. सब कपड़े निकाल दो, अब यहाँ कोई कपड़े में नहीं रहेगा। राहुल दीदी को भी नंगा कर दो जल्दी से…!
ओके फ्रेंड्स अब तो कोई राज नहीं रहा ना.. ओह शायद एक रह गया… कोई बात नहीं अगले पार्ट में बता दूँगी। वैसे मैंने स्टोरी को दोबारा सैट किया है क्योंकि
मार-काट यहाँ नहीं लिख सकती हूँ इसलिए प्यार से काम निपटा दिया ओके… अब ज़्यादा बात नहीं करूँगी, जल्दी से मेरी आईडी pinky14342@gmail.com पर बताओ आज का पार्ट कैसा लगा।

गणित का ट्यूशन-3

गणित का ट्यूशन-3

वो फाइल ले कर मेरे पास एकदम सट कर बैठ गए- अगर तुम मदद करोगी तो तुम्हारे पिताजी को तरक्की मिल जाएगी।
‘क…क…क्या करना होगा?’ मैंने कांपती आवाज़ में कहा और मेरी आँखों के आगे अंधेरा छाने लगा।

पेट

पेट

मजदूरी करते रज्जो थकी नहीं थी क्योंकि यही उसका पेशा था। बस सड़क की सफाई करते ऊब सी गई थी।
अब वह किसी बड़े काम की तलाश में थी जहाँ से ज्यादा पैसा कमा सके जिससे वह अपने निठल्ले पति का पेट भरने के साथ ही उसकी दारू का भी इंतजाम कर सके।
शहर से कुछ दूर एक बहुमंजिला अस्पताल का निर्माण हो रहा था, रज्जो की नजर बहुत दिनों से वहाँ के काम पर थी, वहाँ अगर काम मिल जाए तो मजे ही मजे।
एक बार काम से छुट्टी होने पर वह वहाँ पहुँच गई लेकिन बात नहीं बनी क्योंकि फिलहाल वहाँ किसी मर्द की जरूरत थी। उस दिन देर से घर पहुँची तो इन्तजार बबुआ ने पूछ लिया- इत्ती देर कहाँ लगा दी?
रज्जो एक नजर खसम के चेहरे पर डालते हुए बोली- अस्पताल गई थी।
‘काहे? बच्चा लेने?’ खोखली हंसी हंसते बबुआ ने पूछा।
‘और का… अब तू तो बच्चा दे नहीं सकता, वहीं कहीं से लाऊंगी।’ रज्जो ने भी मुस्कराते हुए उसी अंदाज में उत्तर दिया।
‘बड़ी बेशरम हो गई है री…’ बबुआ ने खिलखिलाते हुए कहा।
‘चल काम की बात कर… ‘
‘कब से तेरा रास्ता देखते आंखें पथरा गई। हलक सूखा जा रहा है। भगवान कसम, थोड़ा तर कर लूं। ला, दे कुछ पैसे…’ बबुआ बोला।
रज्जो बिना किसी हीला हवाली के अपनी गांठ खोल बीस रुपए का मुड़ा-तुड़ा नोट उसकी ओर बढ़ाते हुए कहा- ले मर…’
खींस निपोरते हुए बबुआ नोट लेकर वहाँ से चला गया।
थोड़ी देर में वह लौटा तो हमेशा की तरह नशे में धुत्त था। रज्जो मन मसोसकर रह गई और चुपचाप थाली परोसकर उसके सामने रख दी, भूखे जानवरों सा वह खाने पर टूट पड़ा।
खाना खाते-खाते बबुआ ने एक बार फिर पूछा- सच्ची बता री तू अस्पताल काहे गई थी?
रज्जो उसकी बेचैनी पर मुस्कराते हुए बोल-, क्यों पेट पिराने लगा? अरे मुए… मैं वहाँ काम के जुगाड़ में गई थी। सुना है वहाँ जादा मजदूरी मिले है… एक सौ पचास रुपए रोज।’
‘एक सौ पचास रुपए?’ बबुआ की बांछें खिल गई।
‘बोल… करेगा तू काम? तेरे लिए वहाँ जगह है।’ रज्जो ने पूछा।
बबुआ खिलखिला पड़ा- मैं और काम… काहे? तू मुझे खिला नहीं सकती क्या?
‘अब तक कौन खिला रहा था, तेरा बाप?’ रज्जो ने पलटकर पूछ लिया।
‘देख रज्जो सच बात तो यो है कि मेरे से काम न होए है, तू तो जानत है हमार हाथ-पैर पिरात रहत हैं।’
‘रात को हमरे साथ सोवत समय नाही पिरात? तेरे को बस एक ही काम आवे है वह भी आधा-आधूरा… नामर्द हीजड़ा कहीं का।’ रज्जो उलाहना देते हुए बोली पर बबुआ पर इसका कोई असर नहीं हुआ।
‘ठीक है तू मत जा, मैं चली जाऊं वहाँ काम पर?’ रज्जो ने पूछा।
नशे में भी बबुआ जैसे चिंता में पड़ गया- कौन ठेकेदार है?
‘हीरालाल…’
‘अरे वू… वू तो बड़ा कुत्ता-कमीना है।’ बबुआ बिफर पड़ा।
‘तू कैसे जाने?’
‘मैंने उसके हाथ के नीचे काम किया है।’ बबुआ ने बताया।
‘मुझे तो बड़ा देवता सा लागे है वो… ‘ रज्जो ने प्रशंसा की।
‘हूं, शैतान की खोपड़ी है पूरा… ‘ बबुआ गुस्से में बहका।
‘फिर ना जाऊं?’ रज्जो ने पूछा।
बबुआ सोच में पड़ गया। उसके सामने पचास-पचास के गुलाबी नोट फड़फड़ाने लगे और इसके साथ ही विदेशी दारू की रंग-बिरंगी बोतलें भी घूमने लगी इसलिए उसने इजाजत के साथ चेतावनी भी दे डाली- ठीक है चली जा पर संभलकर रहियो वहाँ, बड़ा बदमाश आदमी है हीरालाल।
एक दिन समय निकालकर और हिम्मत जुटाकर रज्जो फिर ठेकेदार हीरालाल के पास पहुँच गई। इस बार वह निर्माण-स्थल के बजाय उसके डेरे पर गई थी।
‘क्या बात है? फिर आ गई… ‘ हीरालाल ने पूछा।
‘काम चाहिए और का?’ रज्जो मुस्कराते हुए बोली।
‘तेरे लिए काम कहाँ है? मेरे को चौकीदारी के लिए मरद चाहिए… अब तुझे चौकीदार रखूंगा तो मुझे तेरी चौकीदारी करनी पड़ेगी।’ रज्जो के जिस्म के मस्त बड़े बड़े उभारों पर ललचाई नजरें फिसलाते हुए हीरालाल भौंडी हंसी में खिलखिला लगा।
‘मेरा मरद तो काम करना ही न चाहे।’ रज्जो ने बताया।
‘तो मैं क्या करूं?’ हीरालाल लापरवाही से बोला।
रज्जो निराश नहीं हुई। उसे वहाँ काम करने वाली मजदूरनी की नसीहतें याद आ गई। उसने बताया था कि अगर तू थोड़ा गिड़गिड़ाएगी, मिन्नतें करेगी तो ठेकेदार पिघल जाएगा, रज्जो ने वही पैतरा अपनाया- बाबूजी आप नौकरी नहीं देंगे तो हम भूखों मर जाएगें।
‘देख भाई इस दुनिया में सभी भूखे हैं। तू भूखी है तो मैं भी भूखा हूँ। ऐसा कर तू मेरी भूख मिटा मैं तेरा और तेरे परिवार की भूख मिटाता हूँ।’ आँख मटकाते हुए हीरालाल ने सीधा प्रस्ताव किया।
रज्जो सोच में पड़ गई।
‘सोचती क्या है… काम मेरे घर करना, हाजिरी वहाँ लग जाया करेगी।’
‘अपने मरद से पूछकर बताऊंगी।’ रज्जो ने कहा।
‘अरे उस बबुआ के बच्चे को मैं तैयार कर लूंगा।’ हीरालाल ने विश्वास पूर्वक कहा।
अगले दिन ठेकेदार हीरालाल ने विदेशी शराब की एक पेटी बबुआ के पास भेज दी। इतनी सारी बोतलें एक साथ देख बबुआ निहाल हो गया। उसने सपने में भी नहीं सोचा था कि वह सपने में भी एक साथ इतनी सारी बोतलें पा जाएगा। हीरालाल तो सचमुच ही देवता आदमी निकला।
वायदे के मुताबिक हीरालाल ठेकेदार ने रज्जो के भरे-पूरे गदराये जवान जिस्म से अपने जिस्म की वहशी भूख मिटाकर बबुआ की भूख-प्यास मिटाई। कुछ ही दिनों में उसने रज्जो कि मर्दाना सुख के लिए तड़फती बेचैन जवानी को इस तरह तृप्त किया कि एक भावी मजदूर उसकी कोख में पलने लगा। बरसो की प्यासी जवानी का रूप यौवन एक मर्द की मर्दाना सिंचाई पा कर अपने पूरे शवाब पर खिल उठा।
अपनी घरवाली का दिनों दिन पेट बढ़ता देख बबुआ को चिंता सताने लगी। उसने जरा सा छूट दी थी इसका मतलब यह थोड़े कि…!!
वह ठेकेदार हीरालाल के पास गया ही था कि विदेशी दारू की पेटी की एक और खेप उसके पास पहुँच गई।
अंधा क्या चाहे दो आंखें… . उसके विचार बदलने लगे- हीरालाल तो देवता है, प्रसाद देगा ही… रज्जो ही कुलछणी है… लेना भी न आया। आजकल तो इतने सारे साधन हैं कि…!!
एक दिन नशे में धुत्त बबुआ रज्जो पर फट पड़ा, दिल की बात जुबान आ गई- हरामजादी यह क्या कर आई?
रज्जो बेशरमी से अपने पेट पर हाथ फेरते हुए कहा- बुढ़ापे में तेरी-मेरी देखभाल करने वाला ले आई हूँ और का…?
पर यह हरामी का पिल्ला तो हीरालाल…!!
रज्जो ने उसकी बात काट दी- चीज किसी का हो, मेरी कोख में पल रहा है इसलिए यह मेरा बच्चा है। मेरा बच्चा यानि तेरा…
बबुआ जब कुछ देर तक कुछ नहीं बोला तो रज्जो उसकी ओर नजर उठाकर देखा। बबुआ नशे में एक ओर लुढ़का पड़ा था।

तेरा साथ है कितना प्यारा-6

तेरा साथ है कितना प्यारा-6

अब मायके में मेरे दिन महीने ऐसे ही कटने लगे, अनेको बार फैसले की बातें हुई। आशीष लेने भी आये पर मेरे पापा थे कि मुझे भेजने को तैयार ही नहीं हुए।

मेरी चालू बीवी-65

मेरी चालू बीवी-65

मेरे दिल को एक हल्का सा धक्का ही लगा…
मैंने उस ओर देखा ….
वहां एक कमरा था और तीन अजीब से आदमी आधे नंगे दिखे, उनके नीचे के शरीर पुरे नंगे थे..

जूही और आरोही की चूत की खुजली-35

जूही और आरोही की चूत की खुजली-35

पिंकी सेन
नमस्कार दोस्तों आपकी दोस्त पिंकी आज एक मेगा पार्ट के साथ आपकी खिदमत में हाजिर है। उम्मीद है आज आपको भरपूर मज़ा मिलेगा और लेट पार्ट आने की आपकी शिकायत भी दूर हो जाएगी तो आनन्द लीजिए।
अब तक आपने पढ़ा…
जूही ने अन्ना को किसी बात के लिए धमकाया तो वो वहाँ से भाग गया और रेहान को भी जूही ने अपनी बातों से समझा लिया कि आरोही को माफ़ कर दो।
रेहान और साहिल ने सब कुछ भुला दिया अब जूही सब के साथ चुदने के लिए तैयार है।
जूही- ओके ओके सब कपड़े निकाल दो, अब यहाँ कोई कपड़े में नहीं रहेगा। राहुल जल्दी से दीदी को भी नंगा कर दो…!
अब आगे..
राहुल ने जल्दी से आरोही को नंगा कर दिया और खुद भी नंगा हो गया। इतनी देर में वो तीनों भी नंगे हो गए थे।
जूही- वाउ क्या बात है… कितने लौड़े मेरी नज़रों के सामने हैं…. भाई आपका 6 का, सचिन का 7.30 के लगभग होगा, साहिल आपका 8 का और सबसे बड़ा रेहान जी का 9″ का, ऐसा लग रहा है, जैसे लौड़ों की दुकान लगी हो। हर साइज़ के मिल रहे हैं हा हा हा हा…!
रेहान- दुकान नहीं लगी है रंडी, आज तेरी ठुकाई ऐसे होगी कि आज के बाद तू हाथी का लौड़ा भी अपनी चूत में लेने से नहीं डरेगी हा हा हा हा…!
सब के सब रेहान की बात सुनकर हँसने लगे।
जूही- रेहान जी मैं कच्ची कली हूँ… आप मुझे रंडी क्यों बोल रहे हो…!
रेहान- प्यार से मेरी जान, सेक्स के समय जितनी गालियाँ दो, प्यार का मज़ा आता है, मगर तुम मुझे गाली मत देना क्योंकि मुझे गाली सुनना पसन्द नहीं है।
हाँ देनी है, तो तेरे हरामी भाई को दे देना।
राहुल- हाँ बहना मुझे चाहे जितनी गाली दो, अब कोई फरक नहीं पड़ता। अब जल्दी से लौड़ा चूस न.. ऐसे क्या बातों में समय खराब कर रही है यार…!
जूही- ओके..ओके.. सब गोल घेरा बना कर खड़े हो जाओ, मैंने एक इंग्लिश फिल्म में देखा है, एक लड़की सब के लौड़े कैसे चूसती है।
रेहान- अच्छा मेरी रानी को इंग्लिश पोज़ बनाना है… साली अभी जब लौड़ा चूत और गाण्ड में जाएगा न.. तो इंग्लिश तो दूर हिन्दी भी भूल जाओगी..! बस उईई आईईइ करेगी जैसे कोई चाइना की बिल्ली करती है हा हा हा हा हा…!
दोस्तों उस कमरे का माहौल ऐसा हो गया, जैसे कभी कुछ हुआ ही ना हो। सही कहते हैं सज़ा देने वाले से माफ़ करने वाला ज़्यादा बड़ा होता है। सब गोल घेरा बना कर खड़े हो गए। तकरीबन सब के लौड़े तने हुए थे। जूही एक-एक करके सब के लौड़े चूस रही थी। जीभ से चाट रही थी। आरोही बेहोश नहीं थी, बस उसकी आँखें बन्द थीं। वो सब सुन रही थी मगर उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी कुछ बोलने की और जूही लौड़ों का रस लेने में बिज़ी थी।
साहिल- उफ्फ तेरे होंठों का कमाल है जूही आ क्या मज़ा आ रहा है…!
राहुल- अरे बहना साली… मेरा लौड़ा थोड़ी देर लेती है, तेरे यार सचिन का ज़्यादा चूस रही है।
जूही- चुप साले बहनचोद मेरा यार सचिन नहीं साहिल है समझे…!
रेहान- साली मादरचोद रंडी रात तक तो तेरा यार मैं था… अब साहिल हो गया। लगता है साली लौड़े के साथ ही तेरा यार बदल जाता है।
जूही- ही ही ही ही सॉरी रेहान जी मजाक कर रही थी, आप तो मेरे यार से बढ़ कर हो। आपने तो इस क़ाबिल बनाया कि आज लौड़े नहीं, लौड़ों को चूस रही
हूँ ही ही ही ही…!
जूही को हंसता देख साहिल ने जल्दी से उसके खुले मुँह में पूरा लौड़ा फँसा दिया और बाल पकड़ कर झटके मारने लगा।
राहुल- बस भाई मुझ से अब बर्दाश्त नहीं होता मैं तो चला आरोही को चोदने।
सचिन- अब बस भी कर साहिल, इसके मुँह में झड़ने का इरादा है क्या? कर दे साली की गाण्ड का मुहूरत…!
रेहान- चल छिनाल, अब चुदने को तैयार हो जा। सचिन नीचे लेट जा और इसकी चूत में लौड़ा डाल दे।
सचिन सीधा लेट जाता है, जूही उसके लौड़े पर बैठ जाती है, ‘सर्रर्र’ से लौड़ा चूत में समा जाता है।
जूही- आईईईई उफफफफ्फ़ ककककक…!
रेहान- बस रंडी, अभी से नाटक मत कर अभी तेरी गाण्ड बाकी है। साहिल अच्छे से थूक लगा कर डाल दे।
साहिल- हाँ भाई आप अपना बम्बू इसके मुँह में डाल दो ताकि साली ज़्यादा शोर ना मचाए।
जूही सचिन पर लेट गई। आगे से रेहान ने अपना लौड़ा उसके मुँह में डाल दिया और अब उसकी गाण्ड का गुलाबी सुराख साहिल के सामने था। साहिल ने लौड़े पर अच्छे से थूक लगाया और उसकी गाण्ड पर थूक कर छेद में ऊँगली से थूक डाल दिया। जूही मस्ती में रेहान का लौड़ा चूस रही थी। सचिन अपना लौड़ा डाले शान्त
पड़ा रहा, ताकि साहिल आराम से गाण्ड में लौड़ा घुसा दे। साहिल ने ऊँगली से गाण्ड को खोंला और अपनी टोपी फंसा कर जोरदार धक्का मारा…. आधा लौड़ा गाण्ड को फाड़ता हुआ अन्दर घुस गया, जूही बस “गूं गूं अईयू” करती रही, मुँह में जो लौड़ा फँसा हुआ था। साहिल ने देर ना करते हुए लौड़ा पीछे खींचा और दोबारा पूरी ताक़त से लौड़ा अन्दर डाला। अबकी बार पूरा 8″ का लौड़ा गाण्ड की गहराइयों में खों गया। जूही को इतना दर्द हुआ, अगर लौड़ा मुँह में नहीं होता, तो उसकी चीखों से पूरा फार्म गूँज जाता।
रेहान- उईईई साली काटती क्यों है, आ..हह.. यार साहिल आराम से डाल ना देख कैसे आँखों में आँसू आ गए बेचारी के…!
नीचे से सचिन धका-धक चोदने में बिज़ी था।
सचिन- उह उह आ..हह.. इसी को आह…आह शौक चढ़ा था, ग्रुप-चुदाई का आह आहा…!
साहिल भी अब दे दना-दन शॉट मार रहा था। उधर राहुल आरोही की चूत में लौड़ा पेले जा रहा था। वो भी एकदम मस्ती में था।
राहुल- आ आ..हह.. चोदो आ..हह.. मेरी दोनों बहनों को एक साथ चुदाई करो उफ्फ मज़ा आ रहा है, आरोही माय डार्लिंग काश तुम होश में होतीं… उफ्फ देखो जूही
का कैसे गैंग-बैंग हो रहा है।
पन्द्रह मिनट तक जूही की गाण्ड और चूत में धक्के लगते रहे और रेहान उसके मुँह को चोदने में बिज़ी था। जूही इस तिहरी चुदाई से दो बार झड़ गई थी।
अब साहिल का बाँध भी टूटने वाला था, वो फुल स्पीड से दोनों को चोदने लगा।
साहिल- आह आह उहह उहह मैं गया आ..हह.. इसकी गाण्ड बहुत मस्त है आ… साहिल ने पूरा पानी गाण्ड में भर दिया और लौड़ा निकाल कर साइड में लेट गया।
लौड़ा निकलते ही ‘पुच्छ’ की आवाज़ आई और जूही को असीम दर्द का अहसास हुआ। जूही ने रेहान का लौड़ा मुँह से निकाल दिया।
जूही- आइ उफ्फ आ..हह.. रेहान जी आ..हह.. डाल दो लौड़ा गाण्ड में… उफ्फ ये दर्द अब मज़ा देने लगा है… आप भी मेरी गाण्ड का मज़ा लो आ..हह….!
जैसे ही रेहान ने लौड़ा गाण्ड में घुसाया,
जूही- आईईईई उइ मा मर गई आ..हह.. ससस्स आह सचिन आह उफ़फ्फ़ ज़ोर से चोदो आ..हह.. मैं गई उफ़फ्फ़ आईईइ…!
सचिन और ज़ोर से चोदने लगा। वो भी झड़ने के करीब था।
सचिन- आ..हह.. ले साली छिनाल आ..हह.. उह उह आ..हह.. एयाया उफफफफ्फ़…!
सचिन भी झड़ गया, पर रेहान तो गाण्ड का भुर्ता बनाने में लगा हुआ था। राहुल एकदम स्पीड बढ़ा देता है और अपना पूरा पानी आरोही की चूत में छोड़ देता है।
राहुल- आह उफ़फ्फ़ मज़ा आ गया रेहान सब झड़ गए… अब तू भी पानी निकाल दे यार.. क्यों मेरी बहन की गाण्ड की गंगोत्री बना रहा है।
रेहान- आ..हह.. उह उह अबे चुप साले मादरचोद इस रंडी को पूछ… मज़ा आ रहा है या नहीं… उह उह कहाँ ऐसा लौड़ा मिलेगा इसको… उह आ आ…!
जूही- आ..हह.. उ आ..हह.. हा भाई उफ्फ दर्द तो बहुत है पर आ आ..हह.. सच में ऐसा तगड़ा आ..हह.. लौड़ा कहाँ मिलेगा आ..हह…..!
रेहान अब ज़ोर-ज़ोर से झटके मारने लगा था शायद उसके लौड़े में झनझनाहट हो गई थी।
जूही- आ..हह.. उफ्फ तेज़ रेहान जी आ..हह.. प्लीज़ लौड़ा आ आ..हह.. मेरी चूत में डाल कर ही पानी निकालना आ..हह.. मेरा भी आह निकलने वाला है आ..हह.. उ…!
रेहान ने जल्दी से लौड़ा गाण्ड से निकाला और जूही की चूत में पेल दिया।
जूही- आइ आइ कितना चुदवा कर भी आ आपका लौड़ा तो चूत में आ..हह.. दर्द ही करता है…उईई अब फास्ट प्लीज़ आ..हह.. फास्ट मैं गई आ आ..हह.. आह…!
दोनों एक साथ झड़ जाते हैं।
राहुल- वाउ यार जूही की गाण्ड तो देखो कैसे लाल हो गई है और छेद देखो कैसे खुला हुआ है, यार रेहान तेरा लौड़ा बहुत भारी है कसम से मेरी बहनों की तो लॉटरी निकल गई.. ऐसा लौड़ा पाकर…!
साहिल- बस कर साले कुत्ते, अभी भी मेरे दिमाग़ में सिम्मी घूम रही है, साले तेरी जान ले लूँगा मैं अब…!
सचिन- भाई उन दो कुत्तों का क्या करना है अब..!
रेहान- रहने दो उनको वहीं पर। थोड़ा रेस्ट कर लो सब.. बाद में बात करेंगे…!
सब नंगे ही वहाँ सो गए जैसे यहाँ कोई सेक्स का मेला लगा हो जूही को नींद नहीं आ रही थी। उसकी गाण्ड में बहुत दर्द था, वो उठकर बाथरूम में चली गई और गर्म पानी करके टब में गाण्ड और चूत सेंकने लगी। करीब आधा घंटा वो वहीं बैठी रही। फिर नहाकर रूम में आकर बेड पर लेट गई। चुदाई की थकान से उसको भी नींद आ गई। दोपहर तक सब के सब सोते रहे। सबसे पहले आरोही की आँख खुली अब दवा का असर जाता रहा। आरोही ने सब पर निगाह मारी और सीधी बाथरूम में चली गई। बीस मिनट बाद फ्रेश होकर वो नंगी ही बाहर आई, तब साहिल नींद में जूही के ऊपर पैर डाले पड़ा था और उसका लौड़ा जूही की जाँघों पर चढ़ा हुआ था।
आरोही- उहह कुत्ता बोलता है कि मेरे साथ सेक्स नहीं करेगा। अभी बताती हूँ हरामी को।
आरोही धीरे से साहिल को सीधा कर देती है और उसके लौड़े को मुँह में लेकर चूसने लगती है। साहिल गहरी नींद में था, उसको पता भी नहीं चला कि उसका लौड़ा आरोही चूस रही है। दो मिनट में ही वो अकड़ कर अपने आकार में आ गया। दोस्तों आदमी भले ही नींद में हो, पर ये लंड बड़ी कुत्ती चीज होता है। जरा सा अहसास हुआ नहीं कि अकड़ने लगता है। जब लौड़ा पूरा कड़क हो गया, तो आरोही बेड पर आ गई और साहिल के दोनों तरफ पैर निकाल कर लौड़े को चूत मैं डाल लिया और खुद उकडूँ बैठ कर ऊपर-नीचे होने लगी और धीरे-धीरे बोलने लगी।
आरोही- आ..हह.. उई ले कुत्ते मैंने तेरा लौड़ा चूत में डाल लिया, अब बोल क्या बोलता है…!
साहिल को अब कुछ अहसास हुआ तो उसकी नींद टूटी उसने आँखें खोल दीं, तभी आरोही झट से उसके ऊपर लेट गई और उसके बोलने से पहले उसके होंठों को
अपने होंठों से जकड़ कर चूसने लगी। अब साहिल क्या करता लौड़ा चूत में है और नर्म मुलायम होंठ उसके होंठों पर, सो लग गया वो भी, नीचे से झटके मारने और आरोही का किस में साथ देने। अब कोई कुछ भी कहे ऐसी पोजीशन में आदमी का दिमाग़ कहाँ काम करता है। बस लौड़ा अपना काम करता है। जो कर भी रहा है। साहिल को मज़ा आने लगा था। वो नीचे से गाण्ड उठा कर झटके मार रहा था। बेड हिलने लगा था।
आरोही- आआ उ फक मी आह फक मी उ फास्ट फास्ट आ..हह.. मज़ा आ गया…!
बेड के हिलने से सब की आँख खुल गई और ये नजारा देख कर सब के लौड़े कड़क होने लगे। जूही अभी भी सो रही थी।
सचिन- ये साली रंडी कब उठी और उठते ही चुदने लगी.. रुक राण्ड मैं आता हूँ…!
सचिन ने अपने लौड़े पर थूक लगाया और आरोही की गाण्ड में पीछे से धक्का मार दिया। बेचारी दर्द से तिलमिला गई। कहाँ राहुल के 6″ लौड़े से गाण्ड मरवाई थी, अब ये लौड़ा तो दर्द ही करेगा न..! सचिन ने एक ही झटके से पूरा अन्दर डाल दिया था। ‘फ़च्छ’ की आवाज़ के साथ लौड़ा गाण्ड में समा गया। अब दोनों धका-धक चोद रहे थे। राहुल की नज़र रेहान पर गई। उसका लौड़ा भी अपने शबाब पर आ गया था। राहुल अपने लौड़े को हाथ से सहला रहा था और जूही को देख रहा था। वो
करवट लेकर सोई हुई थी। उसकी गाण्ड राहुल को अपनी और आकर्षित कर रही थी।
रेहान- अबे साले गंदी नाली के कीड़े … सोच क्या रहा है बहनचोद, दिल में तेरे इसकी गाण्ड मारने की तमन्ना है। लौड़ा तेरा तना हुआ है अब क्या इस रंडी के उठने
का इंतजार करेगा… डाल दे साली की गाण्ड में दर्द होगा तो अपने आप उठ जाएगी…!
राहुल- बात तो आपने सही की, लेकिन बम्बू तो आपका भी तना हुआ है उसका क्या करोगे…!
रेहान- अबे साले ये तेरी गाण्ड में डालूँगा…. चल चुपचाप गाण्ड मार उसकी। मेरा मन तो मेरी जान आरोही की गाण्ड मारने को कर रहा है बड़ी जालिम
है साली…!
राहुल- ही ही ही आप भी ना कसम से पक्के चोदू हो, मेरी दोनों बहनों की चूत का भोसड़ा बना दिया, अब गाण्ड की गंगोत्री बनाने पर तुले हुए हो…!
साहिल- अहहुह उहह भाई आ मज़ा आ रहा है साली रंडी की चूत बहुत मस्त है आ आ…!
सचिन- आ आ..हह.. भाई मेरा पानी निकलने ही वाला है आ..हह.. आ जाओ आप आराम से मार लो साली की गाण्ड आ आ..हह…..!
साहिल- मेरा भी निकलने वाला है उफ्फ अब चाहे चूत मारो या गाण्ड सब आपका है…!
आरोही- ओह फास्ट यू बास्टर्ड आह मेरी गाण्ड को खोल दो अभी तुम्हारा बाप मोटा लौड़ा डालेगा उसके लिए जगह बनाओ आ..हह.. फास्ट उफ्फ सीसी आ..हह…..!
सचिन- उहह उहह ले रंडी आ..हह.. साली गाली देती है मादरचोद ले आ उह उह…!
तेज झटकों की बौछार आरोही की चूत और गाण्ड पर होने लगी। वो बर्दाश्त ना कर पाई और झड़ गई। वो दोनों भी झड़ गए थे। अब सुकून में आ गए थे।
इधर राहुल इन लोगों की चुदाई देख कर बहुत ज़्यादा उत्तेज़ित हो गया था। उसने लौड़े पर थूक लगाया और जूही की गाण्ड में ठोक दिया। जूही को दर्द हुआ तो उसकी आँख खुल गई। तब तक राहुल झटके मारने लगा था।
जूही- आ आ..हह.. उई भाई आ..हह.. क्या है ठीक से सोने भी नहीं देते उफ्फ सीईई उईई अब आ..हह.. फास्ट करो ना आ…!
आरोही- हटो भी दोनों पानी निकाल कर भी मेरे ऊपर ही पड़े हो… मेरे राजा रेहान को आने दो उनका लौड़ा तना हुआ है, उनको मेरी गाण्ड मारने दो अब…!
सचिन ऊपर से हट कर एक साइड हो गया।
साहिल- वो तो हट गया साली छिनाल अब तू भी तो मेरे ऊपर से हट… अब क्या दोबारा चुदाने का इरादा है?
आरोही ऊपर से हट कर बड़बड़ाती है।
आरोही- उहह तेरे से कौन चुदेगा… बोलता था, मैं ऐसी रंडी के साथ नहीं करूँगा.. अब क्यों मज़े लेकर चोद रहे थे?
साहिल- चुप साली मादरचोद… मैंने कब तेरे को कहा कि आओ चुदो… साली मैं तो आराम से सो रहा था… तू खुद आई चुदने के लिए। अब चूत में लौड़ा घुसने
के बाद कोई पागल ही होगा जो चोदने को मना करे।
जूही- आ भाई मज़ा आ रहा है… जल्दी करो मेरे साहिल को गुस्सा आ रहा है, मैं उनका लौड़ा मुँह में लेके उनको शान्त करूँगी…!
रेहान- अब बन्द करो ये लड़ाई… कुत्तों की तरह भौंक रहे हो सब के सब…!
सचिन- मैं तो चला बाथरूम।
सचिन के जाने के बाद साहिल भी दूसरे रूम के बाथरूम में चला जाता है। इधर राहुल भी जूही की गाण्ड को पानी से भर देता है और एक साइड लेट जाता है।
आरोही उठकर रेहान के पास आकर उसके लौड़े को चूसने लगती है।
रेहान- उफ्फ तेरी यही अदा तो मुझे पसन्द है साली क्या चूसती हो।
राहुल- भाई मुझे घर जाना होगा, पापा का फ़ोन आने वाला है हम सब यहाँ हैं.. कहीं उनको कुछ शक ना हो जाए साली नौकरानी बोल देगी कल से
हम गायब हैं…!
रेहान- अबे साले तीनों के फ़ोन तो यहाँ हैं घर पर क्यों…!
जूही- वो दरअसल बात ये है रेहान जी पापा मोबाइल पर नहीं घर के फ़ोन पर फ़ोन करते हैं ताकि उन्हें पता रहे कि हम सब घर में ही हैं वो हमें ज़्यादा
बाहर जाने से मना करते हैं…!
राहुल- मैं जाऊँगा तो उनसे बात कर लूँगा, इनके बारे में पूछेंगे तो कह दूँगा सो रही हैं या बाथरूम में हैं।
आरोही लौड़े को मुँह से निकाल लेती है।
आरोही- मुझे भी साथ ले चलो भाई, पापा मेरे से बात करने की ज़िद करेंगे। तुम तो जानते हो ना मेरे से बात किए बिना उनको चैन ना आएगा।
रेहान- साली छिनाल कोई चाल तो नहीं चल रही है ना मेरे साथ…!
आरोही- नहीं रेहान मैं कोई पागल नहीं हूँ आपके पास इतने वीडियो हैं, पेपर साइन किया हुआ अन्ना के पास है। मैं आपसे दोबारा माफी मांगती हूँ मैं शर्मिन्दा हूँ कि मेरी जलन की वजह से सिम्मी की जान गई। आप चाहो तो अब भी मुझे मार दो, मैं उफ्फ नहीं करूँगी, पर पहले माफ़ कर दो बाद में मार देना…!
जूही- रेहान जी दीदी सही कह रही हैं, इनकी आँखों में आए आँसू इनकी सच्चाई की गवाही दे रहे हैं..!
रेहान- अच्छा तुम दोनों चले जाओगे तो मेरे इस खड़े लौड़े का क्या होगा…!
जूही- मैं हूँ ना रेहान जी आपकी लिटल जान.. अभी इसको शान्त कर देती हूँ।
सब उसकी बात पर हँसने लगते हैं। तभी सचिन और साहिल भी आ जाते हैं।
रेहान- तुम दोनों वो सारे वीडियो नष्ट कर दो मैं नहीं चाहता किसी के हाथ लगें और कोई उनका मिस यूज़ करे और उन कुत्तों का क्या करना है मैं बाद में
बताऊँगा। अभी उनको वहीं रहने दो… समझ गए ना जाओ…!
साहिल- ओके भाई जैसा आप कहो…!
रेहान- और जूही तुम भी जाओ पहले फ्रेश हो जाओ। मैं बाद में तुम्हें आराम से चोदूँगा.. साली पता नहीं क्या जादू कर दिया है तुम दोनों बहनों ने, लौड़ा है कि बैठने का नाम ही नहीं लेता।
सचिन- भाई ये चूतें नहीं भूल-भुलैयां हैं… हम सब के लौड़े खो गए हैं इनमें….!
सब ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगते हैं। सब के जाने के बाद रेहान एलईडी में कुछ देखता है और बेड पर लेट जाता है। पन्द्रह मिनट में जूही फ्रेश होकर नंगी ही बाहर आ जाती है।
रेहान- अबे साली कपड़े तो पहन कर आती, ऐसे ही आ गई..!
जूही- लो जी अब कपड़े पहनने की मेहनत करूँ आप निकालने की मेहनत करो… आख़िर में होना तो नंगी ही है, तो ऐसे में क्या बुराई है… हाँ..!
रेहान- साली पक्की रंडी है तू, इतना चुद कर भी तेरे को सब्र नहीं…!
जूही- ओ हैलो… मेरी चूत और गाण्ड की बैंड-बाजी हुई है। ये तो आपका लौड़ा खंबे जैसा खड़ा है। इसके लिए बोल रही हूँ।
रेहान- आजा मेरी रानी यहाँ बैठ इसका इलाज बाद में करना पहले मेरे दिमाग़ में जो चल रहा है, उसका इलाज कर…!
जूही- क्या रेहान जी…!
रेहान- देख अन्ना मेरा दोस्त है और उसने ऐसा क्या किया है जिसकी तू गवाह है?
जूही- रहने दो ना, आपने कहा वो आपका दोस्त है तो अब क्यों उसके राज को जानना चाहते हो?
रेहान- देखो जूही तुम अच्छे से जानती हो इस घर के कोने-कोने में कैमरे लगे हैं, मुझे इतना तो पता है कुछ तो उसने गलत किया, पर आदमी की फ़ितरत ही ऐसी होती है कि उसको पूरी बात जानने की खुजली होती है। अब बता भी दे ना क्या बात है..!
ओके माय ऑल फ्रेंड्स, आज आपको मेगा पार्ट दे दिया। अब तो आपको शिकायत नहीं है ना… किसी बात की….! ये आख़िरी राज है अन्ना और जूही का ये भी अगले पार्ट में आपको बता दूँगी और कोशिश करूँगी कि स्टोरी का एक अच्छा सा हैप्पी एंड हो ओके… अब आप मेरी आईडी pinky14342@gmail.com पर मेल करो और बताओ कि आज मज़ा आया ना आपको…!

वह मेरे बीज से माँ बनी

वह मेरे बीज से माँ बनी

जैसा शादी वाले घर में अक्सर होता है कि अधिक मेहमानों के आ जाने से घर में जगह की कमी होने जाती है।
इसलिए मेरे दोस्त ने मेरे सोने की व्यवस्था अपने घर के बिल्कुल साथ के घर में रहने वाले पड़ोसी विकास के घर कर दी थी।

भाई की सालियों संग चुदाई-लीला-1

भाई की सालियों संग चुदाई-लीला-1

जय
नमस्कार पाठको, मैं जय ग्रेटर नोएडा से सबसे पहले आप सबका धन्यवाद करता हूँ कि आप सभी को मेरी पिछली कहानी काफी पसंद आई और आपके सुझावों और सराहना के लिए शुक्रिया।
उस समय की बात है, जब मैं अपने भैया की ससुराल गया था। मैं उस समय 20 साल का था। मेरे भैया की दो सालियाँ है, नीरू और प्रभा। नीरू 19 साल की और प्रभा 18 साल की थी। मैं पहले भी कई बार भैया की ससुराल जा चुका था। प्रभा बहुत ही चंचल थी, लेकिन नीरू उससे भी बढ़ कर चंचल थी। वो मुझसे बहुत मजाक करती थी। नीरू ने कई बार मजाक-मजाक में मेरे गालों को काट भी लिया था।
एक दिन उन दोनों ने कहा- जय, चलो आज पिक्चर देखने चलते हैं।
मैंने कहा- ठीक है.. चलो।
पिक्चर हाल वहाँ से बहुत दूर था।
हमें शाम का शो देखना था, इसलिए हम तीनों पिक्चर देखने के लिए 2 बजे ही घर से निकल गए। मैंने एक ऑटो लिया। हम ऑटो में बैठे तो नीरू और प्रभा बहुत मुस्कुरा रही थीं।
मैंने पूछा- क्या बात है.. तुम दोनों बहुत मुस्कुरा रही हो?
तो नीरू बोली- कुछ नहीं ऐसे ही…!
मैंने कहा- ज़रूर कोई बात है..!
नीरू बोली- अभी थोड़ी देर में मालूम हो जाएगा।
मुश्किल से एक किमी. जाने के बाद नीरू ने एक घर के सामने ऑटो को रुकवा दिया और बोली- मेरी एक सहेली भारती यहाँ रहती है, वो भी पिक्चर देखने जाना चाहती है। आओ अन्दर चल कर उसे भी साथ ले लेते हैं।
मैंने ऑटो वाले को पैसे दिए और प्रभा और नीरू के साथ भारती के घर पर चला गया। भारती ने नीरू को देखा तो मुस्कुराते हुए बोली- ले आई तुम जय को?
नीरू ने कहा- हाँ, मैं ले आई हूँ।
नीरू और प्रभा भारती के पास सोफे पर बैठ गई नीरू और भारती ने गपशप शुरू कर दी। भारती की उम्र भी लगभग 18 साल की थी। वो नीरू की सहेली थी।
करीब पंद्रह मिनट गुजर गए तो मैंने नीरू से कहा- पिक्चर नहीं जाना है क्या? बहुत देर हो रही है।
वो बोली- जय जी, असली शो तो यहाँ होगा..! पिक्चर तो एक बहाना था, असल में तो हम तीनों को तो आपसे चुदवाना था।
मैं सकते में आ गया, लेकिन अन्दर ही अन्दर बहुत खुश था। आज मुझे एक ही दिन में तीन चूतों को चोदने का मौका मिलने वाला था।
उन तीनों ने टाप और मिनी स्कर्ट पहन रखा था। चुदाई के बारे में सोच कर मेरा लंड पैन्ट के अन्दर ही खड़ा हो गया।
मैंने उसे दबाना चाहा तो भारती बोली- अजी पैन्ट के अन्दर क्या छुपा रहे हैं जरा देखूं तो?
वो मेरे पास आई और मेरे पैन्ट की चैन खोलने लगी। मैंने अन्दर आज चड्डी नहीं पहनी थी। चेन खोलने के बाद उसने मेरे लंड को अपने हाथों में पकड़ लिया और बोली- आपका मुन्ना तो बहुत बड़ा है… आज तो खूब मज़ा आएगा…!
मेरा पूरा लौड़ा अभी बाहर नहीं निकला था।
मैंने कहा- अगर तुम तीनों को मुझसे चुदवाना है, तो पहले तुम तीनों अपने कपड़े उतार दो और एकदम नंगी हो जाओ।
वो तीनों बहुत ही जोश में थीं।
नीरू बोली- हम सभी अपने कपड़े अभी उतार देती हैं।
वो तीनों अपने कपड़े उतारने लगीं और दो मिनट में ही मेरे सामने एकदम नंगी हो गईं। नंगी होने के बाद वो तीनों किसी मॉडल की तरह अलग-अलग स्टाइल में अपने बदन को मुझे दिखाने लगीं।

तेरा साथ है कितना प्यारा-7

तेरा साथ है कितना प्यारा-7

इतना झुकने के कारण मेरे गोरे सुन्दर स्तनों की पूरी गोलाई मुकुल के सामने थी और मुकुल मुझसे नजर बचाकर लगातार मुझे ही घूर रहा था, मैं भी मुकुल को पूरा मौका देना चाहती थी इसीलिये जानबूझ कर उसकी तरफ नहीं देख रही थी।

मेरी चालू बीवी-66

मेरी चालू बीवी-66

और वो मोटा, काला आदमी पूरा नंगा उसके आगे जमीन पर बैठा था…

जूही और आरोही की चूत की खुजली-36

जूही और आरोही की चूत की खुजली-36

पिंकी सेन
हैलो दोस्तो, क्या हाल है आप सबके मेल आए, बड़ा अच्छा लगा मन को अब आपके लिए आज का यह भाग लाई हूँ उम्मीद है, यह भी आपको अच्छा लगेगा, तो अब आप आनन्द लीजिए।
अब तक आपने पढ़ा…
सब के सब चुदाई का मज़ा लेते हैं। राहुल और आरोही घर चले जाते हैं। साहिल और रेहान भी चले जाते हैं। तब रेहान जूही को अन्ना के राज़ के बारे में पूछता है।
अब आगे..
रेहान अभी भी नंगा ही बैठा था, उसका लौड़ा सो गया था। उसको तो बस अन्ना का राज जानना था।
रेहान- मुझे इतना तो पता है कुछ तो उसने गलत किया, पर आदमी की फ़ितरत ही ऐसी होती है कि उसको पूरी बात जानने की खुजली होती है। अब बता भी दे ना.. क्या बात है…?
जूही उसके लंड पर हाथ रख कर सहलाती हुई बोलती है।
जूही- सही कहा आपने, ये चूत की खुजली होती ही ऐसी है कि आदमी से क्या से क्या करवा देती है।
रेहान- अरे यार मैं अपने दिमाग़ की बात कर रहा हूँ तू चूत की खुजली को लेके बैठी है।
जूही- आप समझे नहीं मैं आपको वो ही बता रही हूँ आप बात को समझे नहीं…!
रेहान- अरे साली ये लौड़े को छेड़ना बन्द कर अभी खड़ा हो जाएगा तो बात बीच में अधूरी रह जाएगी।
जूही- ओके बाबा नहीं हाथ लगाती, आप अन्ना की बात सुनो कि कैसे वो मुझसे डरता है।
रेहान- ओके… बता तू।
जूही- रेहान जी मैं आपको शुरू से बताती हूँ हमारा फ्रेंड-ग्रुप है जिसमें मेरे खास फ्रेंड का आपको नाम बताती हूँ। सबसे बेस्ट फ्रेंड टीना उम्र 18.. उसके
विसल, स्वाती, रागिनी, राजू, आशा, और मैं… हम सब अच्छे घरों से हैं और थोड़े बिगड़े हुए भी… हमको बाहर वाइन, सिगरेट इन सब की लत लग गई, तो हम अक्सर पार्टी करते हैं और खूब एन्जॉय करते हैं। सेक्स के बारे मैं हमने कभी सोचा नहीं, हाँ कई बार स्वीमिंग के समय सब लड़कियां ब्रा-पैन्टी में और लड़के चड्डी में होते, तो सेक्सी कमेंट्स पास कर देते थे। राजू कभी-कभी हम लड़कियों के मम्मों को टच करता था, बस इससे ज़्यादा कुछ नहीं…!
रेहान- गुड ये तो तुम सब दोस्तों की बात हुई अन्ना का रोल बताओ इस कहानी में।
जूही- आप सुनो तो, हम सब किसी ऐसी जगह पार्टी करते हैं जहाँ कोई ना हो, इसलिए कभी किसी दोस्त के यहाँ तो कभी किसी के यहाँ..! ऐसे ही एक शाम हम
सब टीना के फार्म पर गए पार्टी करने। हम लोगों ने एक-एक राउंड बाहर का लगा कर स्वीमिंग करने का सोचा और सब एक साथ वहाँ नहाने चले गए।
उस दिन राजू और साहिल नहीं आए थे। बस हम लड़कियां ही थीं। सो हम हंसी-मजाक में लग गए। इसी बीच आशा ने मेरी ब्रा निकाल दी मैं उसको मारने उसके पीछे भागी। तभी दो आदमी मेन-गेट से अन्दर आ गए। जिनमें एक अन्ना था। दोस्तों ऐसे जूही के मुँह से सुनकर मज़ा नहीं आ रहा हो, तो चलो हम उस दिन
क्या हुआ वहीं चलते हैं तो ज़्यादा मज़ा आएगा।
अन्ना और उसका दोस्त अन्दर आ जाते हैं। उनकी नज़र आशा और जूही पर जाती है। जूही का गोरा बदन पानी से भीगा हुआ देख कर दोनों के लौड़े तन जाते
हैं और ऊपर से जूही सिर्फ़ पैन्टी मेंथी उसके बड़े-बड़े मम्मे उनका ईमान खराब करने के लिए काफ़ी थे। उनको देखते ही जूही ज़ोर से चिल्ला कर वहाँ से भाग जाती है। आशा भी उसके पीछे-पीछे भाग जाती है।
टीना- अरे क्या हुआ ऐसे चिल्ला कर क्यों भागी तुम दोनों…!
आशा- वो वो वहाँ कोई दो आदमी आ रहे हैं..!
टीना- ओह माय गॉड शायद पापा होंगे चलो सब जल्दी से अन्दर.. कपड़े पहनो नहीं तो आज खैर नहीं हमारी…!
सब भाग कर अन्दर चली जाती हैं। अन्ना को दूर से सब दिख जाती हैं।
अन्ना- अईयो नीलेश… ये क्या जी ये सब छोकरी पागल होना जी.. कैसे आधा नंगा होकर नहाना जी..!
नीलेश- बच्चियां हैं अन्ना भाई, इनको क्या पता हम आ जाएँगे, चलो अब अन्दर सबने कपड़े पहन लिए होंगे…!
रेहान- चुप क्यों हो गई आगे बोलो क्या हुआ।
जूही- हा हा हा आपके लौड़े को देख रही हूँ बात सुन कर कैसे अकड़ रहा है। कहो तो पहले ठंडा कर दूँ, उसके बाद बता दूँगी आगे की बात…!
रेहान- नहीं, इसको आदत है ऐसी बातों से कड़क होने की… तू पूरी बात बता…!
जूही- ओके बाबा बताती हूँ, हम सब वहाँ से सीधे रूम में चले गए। मैं आपको बता दूँ, वैसे तो ये अपने मुँह अपनी तारीफ होगी, मगर हमारे ग्रुप में सबसे सुंदर मैं ही हूँ और हॉट एंड सेक्सी भी पार्टी के समय हमारा ड्रेस कोड होता है। कभी क्या कभी क्या… उस दिन सबने येल्लो टॉप और पिंक स्कर्ट पहना था। बस मैं सबसे हटके थी, तो मैंने ऊपर से ब्लू-जैकेट भी डाला हुआ था।
रेहान- हम्म ये बात तो पक्की है कि तुम हो बड़ी झक्कास आइटम… उसके बाद क्या हुआ…?
जूही- ओके, अब बीच में मत बोलना, बस सुनते रहो…!
जूही बताना शुरू करती है कि आगे क्या हुआ तो चलो दोस्तों हम भी सीधे वहीं चलते है।
अन्ना- टीना कहाँ हो, बाहर आओ बेबी…!
टीना और सब डरते-डरते रूम के बाहर आए, उनसे एक गलती हो गई थी। वाइन और बियर जिस कार्टून में थीं, वो बाहर हॉल में ही रखा हुआ था और शायद अन्ना और उसके दोस्त ने सब देख लिया था।
टीना- जी अप्पा, आप कैसे आ गए यहाँ…!
अन्ना- हमको पता चला तुम अपनी फ्रेंड के साथ इधर होना, गणेश ने फ़ोन पर बताया कि सब नौकर को तुम छुट्टी दिया इसलिए हम देखने आया कि तुम इधर क्या करता?
टीना- सॉरी अप्पा, हम बस स्वीमिंग कर रहे थे…!
अन्ना- ये कोई तरीका होना..! सब लड़कियाँ अकेली हो, नौकर तो रखना चाहिए ना.. तुम लोगों का सेफ्टी के लिए…!
नीलेश- अरे जाने दो, अन्ना बच्चे हैं मस्ती मजाक कर रहे हैं चलो हमारा यहाँ क्या काम..!
नीलेश बोलते समय बस जूही को घूर रहा था। हालाँकि जूही ने कपड़े पहने थे, मगर उसे अब भी उसके मम्मों नंगे ही दिख रहे थे। उसकी पैन्ट का उभार साफ बता रहा था कि उसके मन में क्या है।
जूही- हाँ अंकल सॉरी हमें ऐसे नहीं करना चाहिए था।
जूही के बोलते ही नीलेश जल्दी से आगे बढ़ा और उसके पास जाकर उसके कंधे पर हाथ रख दिया।
नीलेश- अरे नहीं तुम लोग डरो मत, एन्जॉय करो… हम जाते हैं बस ये बताओ कब तक यहाँ रुकोगे…!
टीना- वो हम सोच रहे थे, आज रात यहीं रहेंगे सुबह चले जाएँगे।
अन्ना- ओह बेबी, तुम सब बहुत छोटा होना जी कोई सेफ्टी नहीं.. इधर पार्टी के बाद सब घर जाओ, यहाँ ठीक नहीं बाबा…!
नीलेश- अरे अन्ना जी आप भी ऐसे ही डरते हो.. घर में कैसा डर… चलो यहाँ से, इनको मज़ा करने दो… ओके बच्चों कोई बात नहीं मज़े करो सब.. चलो अन्ना हम भी चलते हैं।
दोस्तों नीलेश बात के दौरान अपना हाथ जूही के कंधे से नीचे ले आया था। उसकी ऊँगलियाँ मम्मों को टच कर रही थीं। जाते-जाते भी उसने मम्मों को
हल्का सा दबा दिया।
रेहान- साला हरामी.. तुमने कुछ कहा नहीं, उसको जब उसने तेरे मम्मों को टच किया?
जूही- ओहो रेहान जी उस समय मैंने इतना ध्यान नहीं दिया और इतनी तो पागल मैं भी नहीं हूँ समझ तो सब आ रहा था मुझे, पर उसने मुझे
बिना ब्रा के देखा था। मेरी उससे नजरें मिलाने की हिम्मत नहीं हो रही थी और वैसे भी वो वहाँ से जल्दी चले गए थे।
रेहान का लौड़ा झटके खाने लगा था। उसको कंट्रोल करना मुश्किल हो रहा था।
जूही- हा हा हा आप क्यों परेशान हो रहे हो, मेरी बातें आपको सेक्सी लग रही हैं क्या? देखो तो कैसे लौड़ा झटके मार रहा है…!
रेहान- हाँ साली एक तो नंगी इसके सामने बैठी है और ऊपर से ऐसी बातें मेरी उत्तेजना बढ़ा रही है, चल घोड़ी बन जा पहले इसको ठंडा करता हूँ, बाद में तेरी कहानी सुनूँगा।
जूही- बन जाऊँगी मेरे रोनू… पहले मुझे इसको चूसने तो दो… कैसी बूँदें झलक रही हैं… इसका स्वाद तो लेने दो…!
रेहान- लेले साली तेरा ही तो है… आजा चूस.. नीचे बैठ जा मैं ऐसे ही बेड पर बैठा रहूँगा…!
जूही झट से रेहान के पैरों के पास बैठ कर लौड़े पर जीभ घुमाने लगती है।
रेहान- उफ्फ साली क्या गर्म होंठ है तेरे… मज़ा आ गया, पता नहीं तेरे बाप ने क्या खाकर तेरी माँ को चोदा होगा, जो ऐसी हॉट आइटम पैदा हुई…!
जूही कुछ ना बोली बस आँखों से इशारा कर दिया, जैसे उसको हँसी आ रही हो और वो लौड़े को चूसने लगी।
रेहान- आ..हह.. चूस साली उफ्फ चूस इतने सालों में कभी इस लौड़े ने इतने मज़े नहीं किए, जितने इन कुछ दिनों में कर लिए कककक आ काट मत रंडी…
आराम से पूरा मुँह में ले.. उफ्फ हाँ ऐसे उफ्फ होंठों को टाइट करके अन्दर-बाहर कर… मज़ा आ रहा है आ..हह.. उफ़फ्फ़ ऐसा लग रहा है जैसे चूत चोद रहा हूँ
उफ्फ…!
दस मिनट तक जूही लौड़े को चूस-चूस कर मज़ा लेती रही, अब उसका मुँह दुखने लगा था, तो उसने मुँह हटा लिया।
रेहान- थक गई क्या… मेरी जान, आजा मेरी गोद में बैठ जा.. आज तुझे नई स्टाइल से चोदता हूँ..!
जूही दोनों पैर रेहान के साइड से निकाल कर बैठ जाती है। रेहान अपने हाथ से लौड़ा पकड़ कर चूत पर सैट कर देता है, जैसे ही जूही बैठी, लौड़ा चूत में घुस जाता है।
जूही- ओई उफफफ्फ़…!
रेहान- साली इतनी बार चुद चुकी है, अब भी उई उई कर रही है…!
जूही- आ..हह.. क्या करूँ मैं कौन सा रोज चुदती हूँ? कल रात से लेकर अब तक चुदाई तो बहुत हो गई, पर चूत सूज कर ‘बड़ा-पाव’ बन गई है और आपका
लौड़ा कोई मामूली तो है नहीं, घोड़े जैसा मोटा है दर्द तो होता ही है।
रेहान नीचे से झटके मारने लगता है जूही को दर्द के साथ-साथ मज़ा भी आ रहा था, वो भी लौड़े पर उछल रही थी और रेहान ने उसके होंठों को चूसना शुरू कर दिया था। रूम में बड़ा ही रोमांच पैदा हो रहा था। दस मिनट तक रेहान गोद में बैठा कर जूही को चोदता रहा। उसकी जांघें दुखने लगीं, तब उसने जूही को बेड पर लेटा दिया और कंधे पे पैर डालकर चोदने लगा।
जूही- आ आ..हह.. उफ्फ रोनू तेज और तेज आ..हह.. मेरा पानी निकलने वाला है ओई उ उफ्फ मई गईई…!
रेहान पहले से ही उत्तेज़ित था, इतनी देर की लंड चुसाई और चूत चुदाई के बाद उसका पानी बस निकालने ही वाला था कि जूही ने उसकी उत्तेजना और बढ़ा दी।
वो धका-धक लौड़ा पेलने लगा और दोनों एक साथ झड़ गए। काफ़ी देर तक रेहान उसके ऊपर पड़ा हांफता रहा।
दोस्तों इनको थोड़ा आराम करने दो, चलो हम राहुल और आरोही को देख आते है कि वो अब तक घर पहुँचे या नहीं…!
दोनों घर पहुँच गए थे और रूम में बैठे बात कर रहे थे।
राहुल- बहुत थकान हो रही है आज, तो वैसे आरोही तुमने क्या सोचा है, अब क्या करना है…!
आरोही- क..क्या करना से तुम्हारा क्या मतलब है… थके हुए हो, फिर भी चुदाई से मन नहीं भरा क्या…!
राहुल- ओह अरे नहीं रे, आप समझी नहीं, मेरे कहने का मतलब है कि रेहान ने जो इतना बड़ा गेम खेला है, उसको जवाब तो देना पड़ेगा ना…!
आरोही- चुप रहो राहुल, इतना सब होने के बाद भी तुमको समझ नहीं आया क्या..! मैंने जो किया उसका मुझे पछतावा है और रेहान ने जो किया वो तो
आप भी चाहते थे।
राहुल- अरे मेरे पर इल्जाम क्यों लगा रही हो? मैंने क्या किया..? मैं क्या चाहता था… हाँ..!
आरोही- शर्म करो भाई, थोड़ी तो शर्म करो… मान लो रेहान बदला नहीं लेना चाहता था, सिम्मी की बात को एक तरफ रख दो, उसके बाद सोचो आपने ही रेहान
के साथ प्लान किया था ना.. कि मुझे फिल्म का झांसा देकर आप मुझे चोदना चाहते थे और रेहान को किसने कहा था कि तुम भी चूत का स्वाद
चख लेना…!
राहुल- व..व्व..वो तो बस तुम हाँ.. इसमें तुम्हारी ही ग़लती है, पता है घर में जवान भाई है और तुम इतने सेक्सी कपड़े पहनती थी, खेल में मेरा लौड़ा टच करती थी… तुम खुद चुदना चाहती थी या आसान शब्दों में कहूँ तो तुम अपनी चूत की प्यास मिटाना चाहती थीं..!
आरोही- अब बस भी करो, इस ज़िद-बहस का कोई फायदा नहीं है। तुम चोदना चाहते थे और मैं चुदाना… तो रेहान ने क्या गलत कर दिया..! अब बस सब
भूल जाओ, आज के बाद सब मिलकर प्यार से चुदाई करेंगे…!
राहुल- ओके मान जाता हूँ, पर उस साले सचिन और अन्ना की कौन सी बहन थी सिम्मी, उन लोगों ने फ्री में मज़े लिए। उनसे तो बदला लूँगा मैं और हाँ
जूही के पास कुछ तो राज़ है अन्ना का, तभी साला चुपचाप चला गया, वरना हरामी वो जूही के भी मज़े लेता।
आरोही- अच्छा बाबा ले लेना बदला, पर सिर्फ़ उनके घर की किसी लड़की को चोद कर… बस इससे ज़्यादा कुछ नहीं ओके…!
राहुल- ओके बहना… अच्छा मैं बाथरूम जाकर आता हूँ.. पापा का फ़ोन आए तो आवाज़ देना…!
आरोही- अच्छा ठीक है जाओ…!
राहुल बाथरूम चला जाता है और आरोही वहीं बेड पर बैठी सुसताने लगती है।
ओके फ्रेंड आज के लिए इतना काफ़ी है। अब अगले पार्ट में बताऊँगी कि क्या हुआ? आज दोबारा जूही की चुदाई में मज़ा आया न…! अब जल्दी से मेरी आईडी
pinky14342@gmail.com पर मेल करो और बताओ अब तो आप का दिल खुश है ना… ओके बाय…!

हाईप्रोफाइल होता सेक्स कारोबार

हाईप्रोफाइल होता सेक्स कारोबार

हाईप्रोफाइल होती राजधानी में अब सेक्स का कारोबार भी हाईप्रोफाइल हो रहा है।
इस हाईप्रोफाइल सेक्स कारोबार में दलालों, कालगर्ल और ग्राहकों के बीच संपर्क का माध्यम अब मोबाइल और इंटरनेट है।
इस धंधे के दलाल भी बड़ी कम्पनियों के एक्जक्यूटिव सरीखे हाईप्रोफाइल हैं और इन दलालों का नेटवर्क केवल राजधानी तक ही सीमित नहीं बल्कि देश के तमाम शहरों में दलालों के तार हैं।
महंगी कारों के माध्यम से कालगर्ल की डिलीवरी करने वाले यह दलाल ग्राहक की मांग पर किसी भी शहर में देशी व विदेशी कालगर्ल उपलब्ध कराने में सक्षम हैं।
ब्लैक स्किन, व्हाइट स्किन और रेड स्किन आदि हर तरह का स्वाद ग्राहकों को कीमत देने पर उपलब्ध होता है।
राजधानी में गली मोहल्लों से सिमट कर यह धंधा अब बड़ी कोठियों, फार्म हाऊस और बड़े होटलों तक पहुँच गया है।
मौज मस्ती और अय्याशी के लिए अब किसी रेडलाइट एरिया या किसी पतली गली के किसी कोठे पर जाने की जरूरत नहीं, बस मोबाइल पर एक काल और इंटरनेट पर एक क्लिक में मन चाही कालगर्ल उपलब्ध है।
हालांकि मजदूर वर्ग, ड्राईवर वर्ग व लोप्रोफाइल लोगों के लिए अब भी रेडलाइट एरिया की गलियाँ खुली हैं लेकिन सेक्स के खेल में डूब रहे हाईप्रोफाइल लोगों ने इस धंधे को भी हाईप्रोफाइल बना दिया है।
अब तक सेक्स के इस कारोबार में गरीब व मजबूर लड़कियाँ ही देखी जाती थी लेकिन अब इस कारोबार में न केवल विदेशी लड़कियाँ भी शामिल हैं बल्कि माडल, कालेज गर्ल और बहुत जल्दी ऊंची छलांग लगाने की महत्वाकांक्षा रखने वाली मध्यमवर्ग की लड़कियों की संख्या बढ़ रही है।
पिछले दिनों विदेशी कालगर्ल के एक राकेट का पर्दाफाश कर आधा दर्जन विदेशी कालगर्ल को पकड़ने वाले पुलिस अधिकारी के अनुसार अब कालगर्ल और दलालों की पहचान मुश्किल हो गई है क्योंकि दलालों और कालगर्ल की वेशभूषा, पहनावा व भाषा हाईप्रोफाइल है और उनका काम करने का ढंग भी पूरी तरह सुरक्षित है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार राजधानी में उज्बेकिस्तान, अजरबेजान, युक्रेन व रशिया से ट्रेवल एजेंटों के माध्यम से टूरिस्ट वीजा पर लड़कियाँ आती हैं और बड़े उद्योगपतियों, अधिकारियों व विदेशी मेहमानों की मांग पूरी करती हैं।
कालगर्ल्ज़ और दलालों का नेटवर्क दो स्तरों पर है, एक अत्यंत हाईप्रोफाइल है जिसमें माडल, फेशनेबल, फर्राटेदार अंग्रेजी बोलने वाली और आधुनिक वेशभूषा पहनने वाली कालगर्ल शामिल हैं और दूसरा नेटवर्क महाराष्ट्र, सिक्किम, पश्चिमी बंगाल, बिहार, नेपाल और भूटान से लाई गई लड़कियों का है।
ग्राहक की मांग के अनुसार ही कालगर्ल उपलब्ध कराई जाती है। कालगर्ल को भुगतान भी अब मासिक वेतन या फिर कान्ट्रेक्ट के आधार पर किया जाता है।
अमूमन बिहार नेपाल, भूटान, उत्तरप्रदेश, पश्चिम बंगाल आदि से लाई जाने वाली लड़कियों को दो से तीन लाख रुपये में छह माह के ठेके पर लाया जाता है जबकि हाईप्रोफाइल कालगर्ल को लाख से दो लाख रुपये प्रति माह की निश्चित रकम दलाल की ओर से अदा की जाती है।
समूचा कारोबार इंटरनेट या मोबाइल से ही चलता है और किसी भी ग्राहक को दलाल या कालगर्ल का पता नहीं दिया जाता। जगह की व्यवस्था करने का रिस्क दलाल अब कतई नहीं लेते, ग्राहक को स्वयं करनी होती है और किसी भी नये ग्राहक को कालगर्ल की डिलीवरी नहीं दी जाती।
ग्राहक को एक निश्चित स्थान पर कालगर्ल की डिलीवरी किसी मंहगी कार के माध्यम से कर दी जाती है और फिर वहाँ से ग्राहक अपने वाहन से ही कालगर्ल को मनचाहे स्थान पर ले जाता है।
अकसर ये स्थान बड़े होटल, बड़ी कोठियाँ या फिर फार्महाऊस होते हैं। सभी दलालों और कालगर्ल के नियमित ग्राहक हैं और दलाल नियमित ग्राहकों के पास ही कालगर्ल भेजना पसंद करते हैं।
यह दलाल इंटरनेट की पोर्न वेबसाइटों के जरिए एक दूसरे से सम्पर्क साध कर अपने नेटवर्क को मजबूत बनाते हैं।
नार्थजोन के पुलिस उपायुक्त देवेश चंद श्रीवास्तव के अनुसार कालगर्ल सीधी डील नहीं करती और दलाल भी केवल विश्वसनीय डील ही करते हैं, किसी भी कीमत पर किसी नये ग्राहक से डील नहीं की जाती, पुराने सम्पर्क के आधार पर ही डील की जाती है।
यही कारण है कि ये लोग पुलिस की पकड़ से बाहर रहते हैं।
उन्होंने बताया कि दलालों के अपने कोडवर्ड हैं जिनका इस्तेमाल कर वह ग्राहकों से बातचीत करते हैं।
वह कहते हैं कि दलालों और कालगर्ल्ज़ का ट्रेंड बदल जाने के कारण ही पुलिस को इन तक पहुँचने के लिए मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।

भाई की सालियों संग चुदाई-लीला-2

भाई की सालियों संग चुदाई-लीला-2

जय
पन्द्रह मिनट की चुदाई के बाद मैं उसकी चूत में ही झड़ गया और अपना लंड उसकी चूत से बाहर निकाल लिया। नीरू भी इस बीच दो बार झड़ चुकी थी। नीरू उठी और उसने मेरा लंड देखा, मेरे लंड पर कुछ खून भी लग गया था।
वो मुझे बाथरूम ले गई और मेरे लंड को साबुन लगा कर साफ किया और उसके बाद अपनी चूत को साफ करने लगी।
थोड़ी देर मे हम दोनों बाथरूम से वापस आ गए। प्रभा और भारती एक-दूसरे की चूत को चाटने में मस्त थीं।
मुझे देखते ही उन दोनों ने मुझे पकड़ कर बेड पर लिटा दिया। वो दोनों बहुत ही जोश में थीं और उन दोनों ने मेरे लंड को चूसना शुरू कर दिया।
भारती ने मुझसे कहा- जय, अब आप मुझे चोदो..! प्रभा बोली- नहीं.. पहले मैं चुदवाउंगी..!
भारती बोली- ठीक है.. पहले तुम ही चुदवा लो..!
नीरू ने प्रभा से मेरे ऊपर 69 की पोजीशन में होने को कहा। प्रभा मेरे ऊपर 69 की पोजीशन में हो गई और मेरे लंड को सहलाने लगी। उसकी चूत एकदम मेरे मुँह के पास थी।
नीरू ने प्रभा से मेरा लंड चूसने को कहा, तो प्रभा ने मेरे लंड को चूसना शुरू कर दिया। प्रभा ने अपने मुँह से मेरा लंड बाहर निकाला, तो नीरू मेरे लंड को चूसने लगी, दोनों बहनें बारी-बारी से मेरा लंड चूसने लगीं।
भारती बैठ कर एक हाथ से अपनी चूत को सहला रही थी और दूसरे हाथ से अपनी चूचियों को मसल रही थी।
मैं प्रभा की चूत को चाटने लगा, नीरू और प्रभा मेरा लंड चूस रही थी। मैं भी पहली बार एक साथ दो लड़कियों से अपना लंड चुसवाने का मज़ा ले रहा था।
मैंने अपनी एक उंगली प्रभा की चूत में डालने की कोशिश की, उसकी चूत बहुत ही टाईट थी, मेरी उंगली उसकी चूत में केवल एक इन्च ही घुस पाई। मैं समझ गया कि प्रभा को चोदने मे मुझे ज्यादा मेहनत करनी पड़ेगी।
मैंने अपनी उंगली उसकी चूत से निकाल ली और अपने मुँह में डाल कर एकदम गीला कर दिया। उसके बाद मैंने अपनी उंगली उसकी चूत में डालने की कोशिश करने लगा। प्रभा मेरा लंड चूसते हुए अपने चूतड़ों को आगे-पीछे कर रही थी।
वो भी मेरी उंगली को अपनी चूत के अन्दर लेना चाहती थी। मैंने अपनी उंगली पर थोड़ा सा ज़ोर दिया, तो मेरी आधी उंगली उसकी चूत में घुस गई।
प्रभा को दर्द हुआ, तो वो चिल्लाने लगी। मैंने अपनी आधी उंगली उसकी चूत में धीरे-धीरे अन्दर-बाहर करनी शुरू कर दी, तो वो जोश में आ गई और शांत हो गई।
वो जैसे ही शांत हुई तो मैंने अचानक अपनी पूरी उंगली उसकी चूत में घुसा दी। वो ज़ोर से चीख उठी, तो मैं फिर रुक गया।
थोड़ी देर बाद जब वो कुछ शांत हुई, तो मैंने अपनी उंगली उसकी चूत में अन्दर-बाहर करनी शुरू कर दी।
वो और ज्यादा जोश में आ गई, वो सिसकारियाँ भरते मेरे लंड को तेज़ी के साथ चूसने लगी। प्रभा की चूत एकदम गीली हो चुकी थी और वो चुदवाने के लिए तैयार हो गई।
नीरू ने प्रभा से कहा- अब तू अपनी चूत के अन्दर जय का लंबा और मोटा लंड लेने के लिए तैयार हो जा, थोड़ा दर्द होगा.. बर्दाश्त कर लेना.. ज्यादा चिल्लाना मत..!
प्रभा बोली- ठीक है जय, ज़रा धीरे-धीरे डालना.. प्लीज..!
प्रभा की चूत बहुत ज्यादा टाइट थी। मैं जानता था कि उसकी चूत में लंड घुसाने के लिए उसकी चूत और मेरे लंड को एकदम गीला करना पड़ेगा।
मैंने नीरू और भारती से कहा- तुम दोनों अपने थूक से मेरा लंड और प्रभा की चूत को एकदम गीला कर दो।
उन दोनों ने वैसा ही किया। मैंने प्रभा की चूत के बीच अपना लंड रखा और अन्दर दबाने लगा। मैंने बहुत थोड़ा सा ही दबाया कि वो बहुत ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाने लगी।
नीरू मुझसे बोली- ज़रा धीरे-धीरे करो.. इसकी उम्र अभी कम है.. और इसकी चूत भी बहुत टाइट है…!
मैंने थोड़ा और दबाया, तो प्रभा रोने लगी। मैं रुक गया, मेरा लंड अभी प्रभा की चूत में केवल दो इन्च ही घुसा था। मैंने नीरू और भारती से कहा- तुम दोनों इसकी चूचियों को चूसो और मसलो, तभी ये शांत होगी।
वो दोनों उसकी चूचियाँ चूसने और मसलने लगीं। मैं भी ठहर गया तो वो थोड़ी देर मे कुछ शान्त हो गई।
अब मैंने अपना लंड धीरे-धीरे अन्दर-बाहर करना शुरु कर दिया। जब मेरा लंड उसकी चूत में दो इन्च तक आराम से अन्दर-बाहर होने लगा, तो मैंने थोड़ा सा और अन्दर दबा दिया। वो फ़िर चीख उठी और रोने लगी, अब तक उसकी चूत ने मेरा लंड 4 इन्च तक निगल लिया था।
मैंने फ़िर धीरे-धीरे अपना लंड 4 इन्च ही अन्दर-बाहर करना शुरु कर दिया। 5 मिनट बाद उसका दर्द जाता रहा और वो मस्त हो कर चुदवाने लगी।
मैंने अब ज्यादा देर करना ठीक नहीं समझा और पूरी ताकत लगाते हुए, एक बहुत ही जोरदार धक्का लगा दिया। मेरा लंड उसकी चूत में एकदम ज़ड़ तक समा गया, वो बहुत तेज़-तेज़ चिल्लाने और रोने लगी।
वो अपना हाथ भी पटकने लगी, नीरू ने मुझसे कहा- तुमने ये क्या कर दिया, ये अभी कमसिन है और इसकी चूत बहुत छोटी है… मैंने तुमसे धीरे-धीरे डालने को कहा था, लेकिन तुमने एक झटके से ही अपना पूरा लंड इसकी चूत में डाल दिया।
मैंने कहा- जब वो मेरा लंड 4 इन्च तक अन्दर ले चुकी है, तब ज्यादा देर करना ठीक नहीं था, वरना यह मेरा पूरा लंड अपनी चूत के अन्दर नहीं ले पाती। अब जब ये मेरा पूरा लंड अपनी चूत में ले चुकी है, तो इसका सारा दर्द अभी थोड़ी ही देर में खत्म हो जाएगा।
मैंने धीरे-धीरे धक्का लगाते हुए उसे चोदना शुरू कर दिया। दस मिनट की चुदाई के बाद ही वो एकदम शांत हो गई और वो अपना सारा दर्द भूल गई, अब वो अपने चूतड़ों को उठा-उठा कर मेरा साथ देने लगी।
मैंने अपनी स्पीड थोड़ा और तेज़ कर दी, तो वो अपने चूतड़ों को और तेज़ी के साथ ऊपर उठाने लगी।
अब वो मेरे हर धक्के का जवाब दे रही थी। मैंने उसको साथ देते देखा तो अपनी स्पीड बहुत तेज़ कर दी और उसे एक आंधी की तरह चोदने लगा। नीरू उसकी चुदाई देख कर बहुत खुश थी।
वो प्रभा की चूचियाँ चूसने और मसलने लगी। प्रभा भी बहुत जोश में आकर चुदवा रही थी। वो अपने हाथ से मेरा सर पकड़ कर मेरे बालों को सहला रही थी।
कुछ देर बाद उसने मुझे बहुत ज़ोर से पकड़ लिया, तो मैं समझ गया कि वो अब झड़ने वाली है, मैंने खूब तेज़ धक्के लगाने शुरू कर दिए 8-10 धक्कों के बाद ही वो झड़ गई।
झड़ने के बाद वो कुछ देर के लिए सुस्त हो गई, लेकिन मैंने उसकी चुदाई जारी रखी।
मैंने प्रभा को लगभग बीस मिनट तक चोदा और उसकी चूत में ही झड़ गया। इस दौरान वो तीन बार झड़ चुकी थी। प्रभा की चूत में झड़ने के बाद मैं हट गया।
नीरू प्रभा की चूत को देखने लगी, उसकी चूत एकदम चौड़ी हो चुकी थी।
नीरू प्रभा की चूत को सहलाते हुए बोली- दर्द हो रहा है..!
प्रभा बोली- दीदी, आज मुझे जो मज़ा आया, उसके आगे ये दर्द कुछ भी नहीं है। मैं नहीं जानती थी कि चुदवाने में इतना मज़ा आता है। पहले जब थोड़ा सा दर्द हुआ तो मैं घबरा गई थी, तुमने आज मुझे ज़िंदगी का वो मज़ा दिलाया है कि मैंने ज़िंदगी भर नहीं भूल पाउंगी।
प्रभा फिर मुझसे बोली- जय, मुझे ये मज़ा लेने के लिए दीदी ने राजी किया था, आपने ही मुझे ये मज़ा दिया है। मैं आपको ज़िंदगी भर याद रखूंगी, आप ही मेरे पहले पति हैं..!
दो सीलें तोड़ने के बाद मैं पन्द्रह मिनट तक बैठ कर आराम करता रहा। उसके बाद मैंने भारती से कहा- अब तुम्हारी बारी है, पहले बाथरूम चल कर मेरा लंड साबुन से साफ करो उसके बाद मैं तुम्हारी चुदाई करता हूँ।
भारती मेरे साथ बाथरूम गई उसने मेरे लंड पर साबुन लगा दिया और खूब रगड़-रगड़ कर साफ किया। इस बार मेरे लंड पर कुछ ज्यादा ही खून लगा था। मैं भारती के साथ बाथरूम से वापस आया। साबुन लगा कर खूब रगड़ने की वजह से मेरा लंड फ़िर से खड़ा हो गया था।
मैं बेड पर बैठ गया, भारती मेरी टांगों के बीच बैठ गई और मेरा लंड मुँह में ले कर चूसने लगी। पाँच मिनट चूसने के बाद मेरा लंड एकदम तन गया, मैंने भारती को बेड पर लिटा दिया और उसके ऊपर 69 की पोजीशन में हो गया। मैंने भारती की चूत को चाटना शुरू कर दिया और वो मेरा लंड चूसने लगी। थोड़ी देर तक उसकी चूत को चाटने के बाद मैंने एक उंगली भारती की चूत में डाल दी। उसकी चूत भी एकदम टाइट थी, लेकिन प्रभा की तरह नहीं मेरी उंगली उसकी चूत में पूरी घुस गई और मैंने अपनी उंगली अन्दर-बाहर करनी शुरू कर दी। दो मिनट में ही उसकी चूत एकदम रसीली हो गई, वो अब चुदवाने के लायक हो चुकी
थी। मैं उसके ऊपर से हट गया और उसकी टांगों के बीच आ गया।
भारती बोली- जय, आप लेट जाओ, मैं आपका लंड अपनी चूत में घुसाऊँगी।
मैंने कहा- ठीक है…!
मैं बेड पर लेट गया। भारती मेरे ऊपर आ गई, उसने मेरे लंड के सुपारे को अपनी चूत के बीच रखा और धीरे-धीरे रगड़ने लगी। थोड़ी देर तक वो अपने चूत को मेरे लंड पर रगड़ती रही।
उसके बाद वो अपने पूरे बदन का भार डालते हुए एक झटके से ही मेरे लंड पर बैठ गई। उसके मुँह से एक जोरदार चीख निकली और वो अपने सर का बाल नोंचने लगी। मैं भारती को देखता ही रह गया, मेरा लंड उसकी चूत में एकदम ज़ड़ तक घुस चुका था। नीरू और प्रभा भी भारती को देखती ही रह गई। उसकी चूत से खून निकल आया था।
नीरू ने भारती से कहा- तू जय के लंड पर एक झटके से क्यों बैठ गई..! तुझे धीरे-धीरे अन्दर लेना चाहिए था…!
भारती बोली- तुम दोनों को चुदवाते हुए देख कर मैंने जोश से एकदम बेकाबू हो गई थी। मैंने जय का लंड एक झटके से ही अन्दर लेना चाहती थी, इसलिए अचानक उनके लंड पर बैठ गई… दर्द तो बहुत हो रहा है, लेकिन ये अभी खत्म हो जाएगा..!
थोड़ी देर भारती मेरे लंड पर बैठी रही और उसके बाद उसने मेरा लंड अपनी चूत मे धीरे-धीरे अन्दर-बाहर करना शुरू कर दिया। कुछ देर के बाद जब उसकी चूत में मेरे लंड की जगह बन गई, तो उसका दर्द कम हो गया। भारती ने थोड़ा
तेज़ धक्के लगाने शुरू कर दिए और दो मिनट बाद ही वो झड़ गई।
झड़ने के बाद वो मेरे ऊपर से हट गई और बोली- जय अब आप मेरी चुदाई करो..!
भारती बेड पर घोड़ी की तरह बन गई और मुझसे पीछे आकर चोदने को कहने लगी। नीरू और प्रभा दोनों भारती को देख रही थीं। मैंने भारती के पीछे आ गया। मैंने उसकी चूत में अपना लंड डाल कर भारती की चुदाई शुरू कर दी। घोड़ी की तरह होने से उसकी चूत एकदम चिपक गई थी इसलिए उसे थोड़ी देर दर्द हुआ लेकिन दो मिनट की ही चुदाई के बाद उसका सारा दर्द खत्म हो गया और वो अपने चूतड़ों को आगे-पीछे करते हुए मुझसे चुदवाने लगी। उसे बहुत मज़ा आ रहा था।
वो सिसकारियाँ भरते हुए मुझसे चुदवा रही थी। पाँच मिनट तक चुदवाने के बाद वो दूसरी बार फ़िर झड़ गई।
भारती ने प्रभा और नीरू से कहा- तुम दोनों ने जय से पहले ही चुदवाया है। मैंने बहुत सबर इसलिए किया कि जब जय तुम दोनों को चोद लेंगे, तो जल्दी झड़ेंगे नहीं और मैं खूब मज़ा लूंगी। अब तुम दोनों बैठ कर मेरी चुदाई देखो..!
भारती बहुत ही चालू थी। मैं एक घंटे में दो बार झड़ चुका था, इसलिए इस बार मेरा पानी जल्दी कहाँ निकलने वाला था..!
मैंने भारती को चोदना जारी रखा, वो खूब मजे ले-ले कर मुझसे चुदवाती रही। लगभग एक घंटे तक चोदने के बाद मैं भारती की चूत में ही झड़ गया।
इस दौरान वो 4 बार और झड़ चुकी थी।
भारती की चूत में पूरा पानी निकालने के बाद मैं हट गया। भारती ने इस बार मेरा लंड अपनी जीभ से चाट-चाट कर साफ किया, साबुन से नहीं..!
अब तक शाम के 6 बज चुके थे, पिक्चर के शो का खत्म होने का समय हो गया था।
प्रभा ने नीरू से कहा- मैं एक बार जय से और चुदवाना चाहती हूँ…!
नीरू ने कहा- जब तक जय यहाँ हैं, हम डेली पिक्चर देखने जायेंगे…!
मैं समझ गया कि जब तक मैं यहाँ हूँ, मुझे रोज़ ही इन तीनों को चोदने का मज़ा मिलेगा। हम सबने चाय पी, उसके बाद वापस घर आ गए। मैं 7 दिनों तक भाई और अब तो मेरी भी ससुराल में रहा और डेली ‘पिक्चर’ देखने जाने के बहाने उन तीनों को चोदता रहा। मैं आज भी उन तीनों को चोदने का कोई मौका नहीं छोड़ता। जब कभी मौका मिलता है, मैं उनको चोद देता हूँ और वो मुझसे बड़े प्रेम से चुदवाती हैं।
आपको मेरी कहानी कैसी लगी अपनी राय जरुर दे मेरी ईमेल आईडी है।
tanhaawara2@gmail.com

चालू मैथिली की चुदाई

चालू मैथिली की चुदाई

प्रवीण
हाय दोस्तो, सभी पाठकों को मेरा हाथ में लंड लेकर नमस्कार।
मेरा नाम प्रवीण है, 20 साल का हूँ, पुणे (नारायणगांव) रहता हूँ।
मैं कामवासना का 2 साल से नियमित पाठक हूँ। कामवासना पर कहानियाँ पढ़कर मेरा लंड आउट ऑफ कंट्रोल हो जाता है।
12वीं की परीक्षा खत्म होने के बाद मुझे एक सॉफ्टवेयर कंपनी में काम मिला था। कम्प्यूटर ऑपरेटिंग सिस्टम और सॉफ्टवेअर के बारे में सभी प्रॉब्लम मैं 2-3 मिनट में ही ठीक कर दिया करता था।
अभी मैं एक प्रायवेट इंजीनियरिंग कॉलेज पढ़ता हूँ। बात आज से एक साल पुरानी है। मेरे घर के पीछे नए किराएदार रहने के लिए आए थे। उनमें एक लड़की भी थी।
उसका नाम मैथिली था। दिखने में तो किसी हिरोइन से कम नहीं थी। उसकी आखों पर काला चश्मा उसके जवानी को सूट करता था। उसकी हाइट 5.2″ की थी, और उसकी फिगर 36-32-36 की है।
वो हमेशा मेकअप करके ही रहती है, अक्सर लाल लिपस्टिक लगाती है और आँखों में काजल जरूर लगाती है। मैं उसको हमेशा इम्प्रेस करने कि कोशिश करता था।
मगर मैथिली बहुत चालू किस्म की लड़की थी। हमारे यहाँ नए होने के कारण मैथिली, उसकी माँ और मेरी माँ हर रोज बाज़ार में सब्जी खरीदने, शॉपिंग के लिए साथ में जाते थे। इसी बहाने मैथिली और मेरी दोस्ती हो गई।
हम अच्छे दोस्त होने के कारण हमारे घर में उसका आना-जाना रहता था और मैं भी उनके घर में जाता था। हर सन्डे के दिन छुट्टी होने के कारण मैं घूमने जाता था और उस दिन घूमने के लिए जा ही रहा था।
तभी मैथिली मेरे घर पर आ गई और मुझसे कहने लगी- प्रवीण मेरे कम्प्यूटर में कुछ प्रॉब्लम की वजह से मेरी एक पीपीटी (पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन) की फाइल ओपन नहीं हो रही है, उसे ठीक कर दो ना प्लीज। कल कॉलेज में सुबह 9 बजे सेमीनार है और आज सन्डे होने के कारण सभी कम्प्यूटर रिपेयरिंग स्टोर बंद हैं।
तो मैंने उसे हाँ कर दिया और मैं उसके साथ उसके घर चला गया।
उसके मम्मी और पापा कुछ काम से बाहर गए थे। मैंने उसका कम्प्यूटर ऑन किया तो विंडोज एक्सपी की दो फाइल्स करप्ट हो गई थीं। तो मैंने पीसी की वो एरर सोल्व कर दीं और उसका पीसी ऑन हो गया तो मैंने उसे वो पीपीटी फाइल ओपन कर दी जिसके ऊपर कल मैथिली का सेमीनार था। वो बहुत ही खुश हो गई।उसी खुशी के मौके पर वो रसोई में जाकर चाय बना रही थी और मैं कम्प्यूटर पर बैठ कर इन्टरनेट यूज़ कर रहा था।
तभी मैंने उसकी कल की हिस्टरी चेक की, तो उसमें पोर्न-साईट की हिस्टरी दिखाई दी और साथ में डाउनलोड फोल्डर में कुछ पोर्न-वीडियो भी दिखे।
तो मैंने मैथिली से पूछा- इस कम्प्यूटर पर कल कौन बैठा था?
तो उसने रसोई से जवाब दिया- मैं ही बैठी थी और इस कम्प्यूटर पर मेरे अलावा कोई भी नहीं बैठता..!”
मैं तो बहुत खुश हो गया और मेरे मन में लड्डू फूटने लगे। तो मैं उसी मौके का फायदा उठाते हुए रसोई में चला गया और उसको पीछे से पकड़ा और अपना हाथ उसके वक्ष पर रखा। तो मैथिली ने मुझे धक्का दिया और मुझसे दूर हो गई।
मैथिली बोली- तुम्हें शर्म नाम की कोई चीज़ है क्या?
तो मैंने उसे कहा- ज्यादा होशियार बनने की कोशिश मत करो। मैंने तुम्हारे कम्प्यूटर मैं सब कुछ देखा है कि कल तुमने पोर्न-साईट ओपन की थी और उसके साथ में पोर्न-वीडियो भी देखे थे। मैं इसके बारे मैं तुम्हारे मम्मी को बता दूंगा।
तो मैथिली थोड़ी सी घबरा गई और मुझसे कहने लगी- तुम यह बात मेरे मम्मी को मत बताना प्लीज..! तुम मेरे साथ जो चाहे वो करो।
बस मुझे इसी मौके की तलाश थी।
मैंने फिर से उसके वक्ष पर हाथ फेरना शुरू कर दिया और उनको धीरे से मसलने लगा, इससे वो और उत्तेजित हो गई तो उसने मुझसे कुछ भी नहीं कहा और मेरा साथ देने लगी।

तेरा साथ है कितना प्यारा-8

तेरा साथ है कितना प्यारा-8

यह सोचकर मैंने अपनी आँखें खोली तो पाया वो तो बिल्कुल मेरे सामने ही था।
शायद मेरी आँखें खुलने का ही इंतजार कर रहा था।