Kaam Vaasna

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जंगल में मंगल

जंगल में मंगल

जो भी हमारे कामवासना के पाठक इन्दौर से हैं, वो सभी रालामंडल का नाम ज़रूर जानते होंगे, ये एक जंगली इलाका है जो पर्यटक-स्थल भी है, वहाँ जंगली जानवर आदि भी हैं। रालामंडल प्रेम-परिन्दों के लिए यानि कि युगलों के लिए स्वर्ग है। लड़के-लड़कियाँ दिनभर वहाँ जोड़े बनाकर प्रेमालाप में तल्लीन रहते हैं – बिना रोक-टोक। कोई पूछने वाला नहीं होता, कौन क्या कर रहा है और क्यों कर रहा है।

अजनबी शहर में कामवाली

अजनबी शहर में कामवाली

मैं उसकी बात सुनकर उससे थोड़ा और चिपक गया। इससे पहले कि वो कुछ कहती मैं उसकी दोनों चूचियों को एक बार ज़ोर से दबा दिया और फिर सहलाने लगा। पहले तो उसे बहुत डर लगा, लेकिन बाद में धीरे-धीरे सहलाने से उसे मज़ा आने लगा और वो आँखें बन्द कर मज़े लेने लगी। मैंने लोहा गरम होते देख उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और उसे चूमने लगा। मैंने धीरे से अपना हाथ उसकी पैन्टी में डाल दिया और उससे पहले कि वह कुछ विरोध कर, मैंने उसकी चूत में उँगली डाल दी, और ज़ोर-ज़ोर से आगे-पीछे करने लगा। वो अब सब कुछ भूल कर मदहोश होने लगी।

ससुराल गेंदा फ़ूल-1

ससुराल गेंदा फ़ूल-1

उसके आते ही मुझे कमला ने पास ही सब्जी मण्डी से सब्जी लाने भेज दिया। मैं जल्दी से बाहर निकली और थोड़ी दूर जाने के बाद मुझे अचानक याद आया कि कपड़े भी प्रेस कराने थे…मैं वापस लौट आई।

ससुराल गेंदा फ़ूल-2

ससुराल गेंदा फ़ूल-2

‘हाय… कश्मीर की वादियाँ भी इतनी सुन्दर नहीं होंगी जितनी सुडौल ये पहाड़ियाँ है… ये तराशा हुआ बदन… ये कमर… कही कोई अप्सरा उतर आई हो जैसे…’ मैंने अपनी आखें बन्द किये ही अपने हाथ नीचे कर लिये… मेरे उभार अब उसके सामने थे। साहिल मेरे बहुत नज़दीक आ गया था… अब मुझसे सहन नहीं हो रहा था… मैं घबरा उठी।

सर्दी में पार्टी

सर्दी में पार्टी

मेरे घर में मेरे एक अंकल जिन्हें मैं चाचू कहती थी (वो मेरे दूर के रिश्ते में चाचा थे, उनकी उम्र ३३-३४ साल थी) जो काफी समय से आते थे, जो अक्सर मुझे अपनी गोद में लेने की कोशिश किया करते थे (मैं बाद में समझी कि वो ऐसा क्यों करते थे)

संगीत शिक्षक से चुदवाया-1

संगीत शिक्षक से चुदवाया-1

मुझे संगीत का बहुत शौक है क्यूंकि मुझे संगीत वाले सर बहुत पसंद थे, जो चीज़ प्रीति को अच्छी लगे, प्रीति उसको पाने के बाद ही दम लेती है।

सेक्स का जादुई बटन

सेक्स का जादुई बटन

शिश्न की ही तरह, भगशिश्निका की भी अग्र-त्वचा (foreskin) और एक दंड (shaft) भी होता है। लेकिन भगशिश्निका को सहलाने के कई तरीके होते हैं जो कि हर महिलाओं में अलग-अलग होते हैं। इसके लिए आपको स्वयं तलाशना होगा कि कौन सा तरीका आपकी महिला-साथी के लिये सबसे बेहतर हो सकता है। सबसे सही और शीघ्रता वाला तरीका तो यही है कि उसे कहें कि वह स्वयं अपने भगशिश्निका को सहला कर दिखाए, फिर आप उसके तरीके की नकल कर लें। कई महिलाएँ तो भगशिश्निका को सहला कर ही हस्तमैथुन की क्रिया को पूरा करतीं हैं। इसी दौरान आपको देखना होगा कैसे वह परम आनंद की ओर जाती है।

पहली बार ममेरी बहन के साथ

पहली बार ममेरी बहन के साथ

शादी के दो दिन पहले की रात थी। हम सब लेट कर बातें कर रहे थे कि मैंने अचानक अपने पैरों पर कुछ महसूस किया। हाथ लगा कर देखा तो उसका पैर था।

मुझे तुम्हारी जरूरत है

मुझे तुम्हारी जरूरत है

वो लड़की कॉलेज में भी मेरे साथ ही पढ़ती थी, उसका नाम ऋचा था। उसका अक्सर हमारे घर आना जाना था। हम दोनों में कब प्यार हो गया, पता ही नहीं चला।

मजा या सजा

मजा या सजा

मैंने पलट कर देखा तो सुधीर दूर पान की दुकान पर कुछ लड़कों के साथ खड़ा था, जो पहनावे से ठीक नहीं लग रहे थे। सुधीर भागता हुआ आया

सहेली के साथ एक नया समलिंगी अनुभव

सहेली के साथ एक नया समलिंगी अनुभव

अचानक उस ने मुझे कहा- मैं तेरे बदन पर अपना पेशाब करना चाहती हूँ!

मीना की चुदाई

मीना की चुदाई

हमने फैसला किया कि हम एक-दूसरे के शहर मे नहीं बल्कि किसी अन्य शहर में मिलेंगे। उस वक्त हमारा सेक्स करने की कोई योजना नहीं थी। हम दोनों मिलने के लिए घर से निकल पड़े।

मेरी सीधी सरल भाभी

मेरी सीधी सरल भाभी

दूसरे दिन जब भाभी अपने कमरे में थीं तो मैं वहाँ पहुँच गया और भाभी से बात की और कहा – “बड़े घर में बहुत कुछ होता है, मेरा एक दोस्त तो अपनी भाभी से बहुत नज़दीक रहता है, वो दोनों हाथ पकड़ कर बात करते हैं। एक-दूसरे को चूमते हैं, और गले भी लगते हैं।

किरण आंटी की गाण्ड मारी

किरण आंटी की गाण्ड मारी

फिर एक दिन हिम्मत करके मैं छत पर गया। मैंने किरण आंटी को नेहा के साथ टहलते छत पर पाया। किरण आंटी ने मेरी ओर घूर कर देखा फिर दोनो रेलिंग से सट कर मेरी ओर पीठ कर खड़ी हो गई। नेहा जीन्स तथा किरण आंटी मैक्सी पहने हुई थी। वे रेलिंग पर झुककर बातें करने लगी। इस दौरान मैं उनकी गाण्ड निहारता रहा।

पापा के दोस्त ने मुझे चोदा

पापा के दोस्त ने मुझे चोदा

बातों में समय क्या हो गया, पता ही नहीं चला। मां जी उनको बचपन से जानती थी। मुझे भी मालूम था कि वो विह्स्की के शौकीन हैं, आज पापा नहीं थे तो मैंने नेपाली को विह्स्की सर्व करने के लिए कह दिया।

मज़ा ही मज़ा

मज़ा ही मज़ा

मैं कॉलेज जाने से पहले उसके घर चला गया। बाहर बरामदे में एक सुन्दर सी लड़की झाड़ू लगा रही थी। मैंने अन्दाज़ा लगाया कि यह सु्धीर की बहन होगी। जैसे ही मैं फ़ाटक के अन्दर घुसा… उसने मेरी तरफ़ देखा और देखती ही रह गई।