Kaam Vaasna

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गीता की चुदाई

गीता की चुदाई

मेरा नाम आकाश है। मैं गुडगाँव में रहता हूं। ये मेरी पहली स्टोरी है। ये कहानी ४ साल पहले की है, जब मेरी ज़िंदगी में एक १८ साल की लड़की आई। वो १० वीं क्लास में पढ़ती थी। मेरा दोस्त अपने लिए एक हाउस की कन्स्ट्रशन करवा रहा था तो में वहाँ अक्सर जाता रहता था। उसी घर के पास में एक लड़की रहती थी उसका नाम गीता था। वो मुझे स्कूल से आते हुए दिखाई देती थी। वहाँ पर मेरे और दोस्त भी होते थे हम सभी उसको देखते थे। उसका रंग सांवला था लेकिन फिर भी वो सेक्सी दिखती थी। उसके बूब्स अनार की तरह गोल और एक दम तने हुए थे, वो अपनी गंड को मटका-२ के चलती थी, उसको देखते ही हम सब दोस्तों का दिल उसको छेड़ने का करता था।


एक दिन वो स्कूल से आ रही थी तो मैने उसको प्रपोज़ किया लेकिन वो बिना कुछ कहे चली गयी, ३ -४ दिन के बाद उसने मेरे से दोस्ती कर ली। धीरे-२ हमारी मुलाक़ातों का सिलसिला शुरू हो गया। एक दिन मैने उसको सेक्स करने के लिए मना लिया और जब वो स्कूल जा रही थी तो मैने उसकी छुट्टी करवाकर अपने साथ एक रूम पे ले गया। कमरे में जाते ही मैने उसको अपनी बाहों में भर कर बिस्तर पे लेटा लिया और उसके होठों का रूस चूसने लगा काफ़ी देर तक उसको होठों के चूसने के बाद मैने उसके टॉप में हाथ डाल कर उसके सेक्सी बूब्स को दबाने लगा अब वो धीरे धीरे गरम हो रही थी, मैने उसका टॉप उतर दिया ओर उसकी ब्रा में हाथ डाल कर उसके बूब्स दबाए फिर मैने उसकी ब्रा भी उतर दी।

चाची के साथ सुहागरात

चाची के साथ सुहागरात

चाची एक दम मुझ से लिपट गयी और बोली मुझे डर लग रहा है। मैने कहा- डर कैसा? पर मुझे करंट सा लगा जब उनके बूब्स मेरी छती से छुये। उनकी एक टांग मेरे उपर थी। मैने भी उनकी टांग पर एक पैर रख दिया और उनकी पीठ पर हाथ रखते हुए कहा- सो जाओ चाची। चाची धीरे धीरे मेरी बाहों मे सिमटती जा रही थी और मुझे मजा आ रहा था। धीरे से मैने उनके हिप्स पर हाथ रखा और धीरे धीरे सहलाने लगा। चाची को मजा आ रहा था। फ़िर चाची सीधी लेट गयी और मेरा हाथ अपने पेट पर रखते हुए कहा कि तुम मुझ से चिपट कर सोना, मुझे डर लग रहा है। अब मै भी उनसे चिपट गया और उनके बूब्स पर सिर रख लिया। मेरा लन्ड खड़ा हो चुका था। मै धीरे धीरे उनका पेट औए फ़िर जांघ सहलाने लगा।

जीजाजी, दीदी और मैं-2

जीजाजी, दीदी और मैं-2

अब वे मेरे चूची को दबाने लगे और धक्के लगा कर चोदने लगे। अब मेरी टाँगो को नीचे रख दिया और एक चूची को मुख में डाल कर चूसने लगे। ज्यों ज्यों धक्का मार रहे थे मुझे अपना स्तन चुसवाने में और मजा आ रहा था। अब मेरे सब दर्द ग़ायब हो चुके थे। मैं बोल रही थी और ज़ोर से धक्के मारो मेरे अच्छे जीजाजी। आप सचमुच में मर्द हो। आज पहली बार ज़िंदगी का मजा आ रहा है फिर दीदी आ गई। उस समए हम दोनो मस्ती में थे। दीदी कहने लगी, अरे मुझे भूल गये क्या उसे अब थोड़ी जलन होने लगी थी। दीदी कहने लगी अब तो मुझे भी नहीं रहा जाता।

शो रूम की नौकरी

शो रूम की नौकरी

काफ़ी देर हम बातें करते रहे। बात करते करते उसने अपना पल्लू गिरा दिया। उसकी चूचियां ब्लाउज से बाहर झांक रही थी। मैने उसे बेड पर लिटा लियाऔर उसके होठों को चूमने लगा। करीब १५ मिनट के बाद मै उसके ब्लाउज के हुक खोलने लगा। जैसे ही मैने उसका ब्लाउज उतारा, आगे का नज़ारा देख मै पागल हो गया और ब्रा के उपर से ही जोर जोर से उसकी चूची दबाने लगा। फ़िर ब्रा उतार कर चूचियां चूसने लगा. अब वो भी गर्म हो गयी थी। मैने उसकी साड़ी और फ़िर पेटिकोट उतार दिया। वो सिर्फ़ पैन्टी में बहुत मादक दिख रही थी। उसने मेरे कपड़े भी उतार दिये। हम पूरे नंगे हो गये। उसने मेर 8” लम्बा लन्ड मुंह मे ले लिया और मै ६९ कि पोजिशन मे उसको मजा देने लगा। वो एकदम पागल हो चुकी थी।

मेरी बास रचना

मेरी बास रचना

मैडम घूम कर कम्प्यूटर लैब की तरफ चल दी और मैं भी मन्त्रमुग्ध सा उनके पीछे पीछे चल दिया। पूरे माहौल में उनके जिस्म की खुशबू थी। जब हम कॉरीडोर में थे तो मैंने उनकी पिछाडी पर गौर किया। हाय क्या फिगर था। हालांकि मैं कोई एक्सपर्ट नहीं हूं पर यह दावे के साथ कह सकता हूं कि अगर रचना मैडम किसी ब्यूटी कॉन्टेस्ट में भाग ले तो अच्छे अच्छों की छुट्टी कर दें और देखने वाले अपने लन्ड संभालते रह जाएं। उनकी मस्तानी चाल को देख कर यूं लग रहा था मानो फैशन शो की रैम्प पर कैट वॉक कर रही हो। उनके चूतड पेन्डुलम की तरह दोनों तरफ झूल रहे थे। उन्होंने गहरे नीले रंग का डीप गले का चोलीनुमा ब्लाउज मैचिंग पारदर्शी साडी के साथ पहना था। उनकी पीठ तो मानो पूरी नंगी थी सिवाय एक पतली सी पट्टी के जो उनके ब्लाउज को पीछे से संभाले हुई थी। उन्होंने साडी भी काफी नीची बांधी हुई थी जहां से उनके चूतडों की घाटी शुरू होती है। बस यह समझ लो कि कल्पना के लिए बहुत कम बचा था। सारे पत्ते खुले हुए थे।

मेरी कहानी – 3

मेरी कहानी – 3

भाभी ने कहा इसकी मालिश नहीं करोगे? मैने कहा क्यों नहीं, यह कह कर मैने चूत की मालिश शुरु कर दी चूत के दोनो भाग खोल कर देखे तो उनसे रस बह रहा था मैने उसका स्वाद चखने के लिए अपने होंठों को सही जगह फ़िट कर दिया वाह! क्या स्वाद था दुनिया की किसी चीज में ऐसा नशा नहीं होता जो मुझे मिल रहा था नमकीन स्वाद मेरे मुंह में भर गया और तभी भाभी ने अपने हिप्स को आगे पीछे ढकेलना शुरु कर दिया करीब ७ मिनट बाद भाभी ने मेरे सिर को पीछे ढकेल दिया और निढाल हो गई मैने उनके बूब्स छूने चाहे तो उन्होंने मना कर दिया, कुछ देर तक हम उसी तरह रहे फ़िर भाभी ने कपड़े पहनने शुरु कर दिये मैने भी अपने कपड़े पहन लिए फ़िर मैने कहा मेरा मन तुम्हारी चूत को चोदने को कर रहा है भाभी ने कहा फ़िर किसी दिन करेंगे मैं जब चलने लगा तो भाभी ने मुझे अपनी बाहों में भर लिया हम दोनो एक दूसरे को पकड़ कर काफ़ी देर तक खड़े रहे तभी घड़ी ने ४ बजे की घंटी बजाई तो भाभी ने छूटते हुए कहा अब घर जाओ कल मैं नहीं रहूंगी जब मैं आ जाउंगी तो तुम आना। दूसरे दिन मुझे भाभी की याद आती रही। आगे की कहानी बाद में।

मौसी के साथ मस्ती की

मौसी के साथ मस्ती की

थोड़ी देर तक तो मैने सहन किया उसके बाद मैने कहा कि आप लोग दूसरे कमरे मैं चले जायें तो उन्होंने कहा कि तुम ऊपर वाले कमरे में जाकर सो जाओ और साथ मैं मौसी से भी कहा कि तुम भी जाकर सो जाओ।

ममता की चुदाई – कमरे में

ममता की चुदाई – कमरे में

किस करते समय उसने अपनी जीभ से मेरी जीभ चाटने लगी ये मेरे लिये पहला एक्सपेरिएंस था मेरा लंड खड़ा हो गया और उसकी चूत के पास छूने लगा मुझे लगा वो बुरा मान जायेगी मगर वो धीरे से बोली संजु क्या पहले ही दिन ये सब ठीक रहेगा। मैं बोला क्यों क्या मतलब वो बोली अच्छा चलो कोई बात नहीं मैं तो तुम्हारी ही हूँ जो करना चाहो करो। अब मेरे समझ में न आये कि क्या करूं? कैसे करते हैं? वो बोली सामान तो दिखाओ और मैंने अपनी जीन्स की ज़िप खोल दी। उसके मुलायम गोरे हाथों से मेरा ७” इंच लम्बा मोटा लंड बाहर निकाला तो आँख मार कर बोली यार ये तो बहुत बड़ा है मैं अब पूरे जोश में था। मैं उसको बेड पर ले गया और जींस उतार दी सिर्फ़ अंडरवियर में था। मैने उसके होंठों को कसकर चूमने लगा। मेरे हाथ में उसके बूब्स थे गोरे गोरे गोल गोल भूरे रंग की भुंडी, ब्रा नही पहने हुए थी सलवार का नाड़ा पकड़ कर खोला। तो वो शरमाकर आँखें बंद कर ली। मैं बोला डियर अब काहे की शरम मैं आपका पति हूँ वो बोली तो मैं कुछ कह रही हूँ क्या……..अब आप ही मेरे सबकुछ हो…. मेरा सबकुछ आपका ही है जो चाहो करू……… उसे विश्वास था कि हम लोगों की शादी हो जायेगी क्योंकि हम एक ही जाति के थे

पम्मी आंटी की चूत

पम्मी आंटी की चूत

मुझे थोड़ा बुरा भी लगा कि मैं बिना खटखटाये रूम में चला गया, लेकिन दिल में एक खुशी भी थी चलो इसी बहाने मैंने पम्मी को नंगा तो देखा। जिस दिन से मैंने पम्मी आंटी को नंगा देखा तब से तो उसको चोदने की तम्मना और ज्यादा बढ़ गयी। रात को बस वो ही सपनों में आती थी।

बचपन की भाभी को जवानी में चोदा

बचपन की भाभी को जवानी में चोदा

पूनम भी शायद मुझे इतना करीब पाकर इतनी उत्तेजित हो रही थी कि उसकी चूत से बुरी तरह से पानी निकल रहा था और वो कमर उठा उठा कर अपने बुर को चटवा रही थी। अचानक उसने अपने दोनो जांघों से और अपने हाठों से मेरे सर को पूरी ताकत से अपनी बुर पर दबाने लगी। मैं समझ गया कि उसकी चूत से पानी झड़ने वाला है। मैं भी उसके मुँह पे लंड ज़ोर ज़ोर से मारना शुरु कर दिया। और फिर अचानक लंड की गरमी और बुर की गरमी एक साथ बाहर निकलने लगी। मेरे लंड के पानी से उसका पूरा मुँह भर गया था जो उसने बड़े प्यार से पी लिया। लंड से पानी गिरने के बाद मैने पूनम को उल्टा लेटने को कहा तो वो उल्टा लेट गयी। उसकी गांड बिल्कुल मेरे सामने थी। मैं पहली बार उसकी गांड देख रहा। उसकी गांड इतनी चिकनी थी कि मेरा लंड गांड दर्शन करके फिर से तैयार हो गया था चुदाई के लिये।

मामा की लड़की की चुदाई-1

मामा की लड़की की चुदाई-1

दोस्तों शादी का घर था, ये अपना रोज रोज का प्रोग्राम हो गया था, मौका पा कर मैने शीला की चूत और गांड दोनो को मैने जी भर के मारा, जिसकी दास्तान आपको अगली बार बताउंगा।

दिल्ली की वरजिन गर्ल की चुदाई-1

दिल्ली की वरजिन गर्ल की चुदाई-1

और वो फ़्राइडे को मुझसे चुदवाने के लिये तैयार हो गयी। मैंने अभी तक उसको देखा भी नहीं था, न ही उसकी आवाज सुनी थी। मैं फ़ुल एक्साइटेड था कि मुझे फ़्राइडे एक सील पैक चूत मिलने वाली थी सील तोड़ने के लिये।
और वो दिन आ गया मैं पौने नौ बजे ही वहाँ चला गया और मेडिकल की दुकान से दो कोहिनूर कन्डोम लिये और उसका इन्तजार करने लगा.

दिल्ली की वरजिन गर्ल की चुदाई-2

दिल्ली की वरजिन गर्ल की चुदाई-2

थोड़ी देर बाद मैंने अपना हाथ उसके चड्डी से निकाला, उसकी चड्डी निकालने लगा वो शर्मा रही थी। मैंने उसकी चड्डी उसके पैरों से अलग कर दी और उसकी चूत देखने लगा।
तभी उसने अपने दोनों पैर एक के ऊपर एक रख दिये और चूत छुपाने की कोशिश करने लगी. मैंने उसके दोनों पैर अलग कर के उसे पकड़ लिये और मुझे उसकी चूत दिखने लगी.
क्या चूत थी वो… एक दम कोरी चूत, चूत पूरी तरह से सील पैक थी।

रोंग नम्बर पे चुदाई

रोंग नम्बर पे चुदाई

१ दिन मिलने के लिये टाइम भी फ़िक्स हो गया जब हमारा सामना हुआ तो स्टोरी बदल चुकी थी, वो मेरे दोस्त की बहन थी और उसने अपने बारे में जो भी बताया सब गलत था, मैने उसे कहा क्या इरादा है अगर तुम मेरे साथ नहीं चलोगी तो मैने तुम्हारी सब बातें जो मोबाइल में रिकोर्ड की हैं तुम्हारे भाई को सुना दूंगा, वो डर गयी और मेरे साथ चलने के लिए मान गयी।