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चूची से जीजाजी की गाण्ड मारी-1

चूची से जीजाजी की गाण्ड मारी-1

सुधा
हैलो दोस्तो, मेरा नाम वही है जो भारत की कुमारी कन्याओं का होता है। सुविधा के लिए चुदासी सहेलियाँ मुझे सुधारस की ख़ान बुला सकती हैं !
मेरी दीदी रेखा की शादी बुरहानपुर में अभी तीन महीने पहले हुई थी। मेरी बहन मुझसे दो साल बड़ी हैं।
शादी के बाद पहली बार मेरे मदन जीजाजी दीदी को विदा कराने महीने भर पहले आए थे, उस समय वो केवल एक दिन ही रुके थे।
उस समय उनसे बहुत बातें तो नहीं हुईं लेकिन मेरी भोली-भाली दीदी अपने पति के बारे में वह सब बता गई, जो नई-नई ब्याहता नहीं बता पातीं।
उसने बताया कि वे बड़े सेक्सी हैं और कामकला में पारंगत हैं, उनका ‘वो’(लौड़ा) बड़ा मोटा है। पहली बार बहुत दर्द हुआ था।
उस समय दीदी की बातें सुनकर ना जाने क्यों जीजाजी के प्रति मेरी उत्सुकता बहुत बढ़ गई थी। मैं सोचती उनका लौड़ा न ज़ाने कितना बड़ा और लंबा होगा..!
बात-बात में मैंने बड़े अंतरंग क्षणों में जीजाजी की यह बात अपनी सहेली कामिनी को बता दिया।
उसको तो सेक्स के सिवा कुछ सूझता ही नहीं था। उस बुर-चोदी ने मेरे साथ लैस्बो चुदाई का खेल खेलते हुए मुझे जीजाजी से चुदवाने के सभी गुर सिखाना शुरू कर दिए।
वह खुद भी अपने जीजाजी से फँसी है और उनसे चुदवाने का कोई अवसर नहीं छोड़ती है, उसने अपने ट्यूशन के टीचर को भी पटा रखा है, जिससे वह अपनी खुजली मिटवाती रहती है।
उससे मेरे बहुत अच्छे सम्बन्ध हैं। वह बहुत ही मिलनसार और हँस-मुख लड़की है लेकिन सम्भोग उसकी कमजोरी है और उसको वह बुरा नहीं मानती है।
उसका मानना है कि ईश्वर ने स्त्री-पुरुष को इसीलिए अलग-अलग बनाया है कि वे आपस में चुदाई का खेल खेलें; सेक्स करने के लिए ही तो नर और मादा को अलग-अलग बनाया है।
उसका यह भी मानना है कि यह सब करते हुए कुंवारी कन्या को बहुत चालाक होना चाहिए, नहीं तो वह कभी भी फंस सकती है और बदनाम भी हो सकती है।
कल मेरी मम्मी ने बताया कि रेखा का फोन आया था कि मदन एक हफ्ते के लिए ऑफिस के काम से यहाँ शुक्रवार को आ रहे हैं। रेखा उनके साथ नहीं आ पाएगी, उसके यहाँ कुछ काम है।
उन्होंने हिदायत देते हुए कहा- तेरे पापा तो दौरे पर गए हुए हैं, अब तुझे ही उनका ख्याल रखना होगा। रेखा का ऊपर वाला कमरा ठीक कर देना, परसों से मैं भी जल्दी कथा सुन कर आ जाया करूँगी। वैसे वह दिन में तो ऑफिस में ही रहेगा, सुबह-शाम मैं देख लूंगी।
जीजाजी परसों आ रहे हैं यह जानकर मन अनजानी ख़ुशी से भर उठा, मेरा बदन बार-बार बेचैन हो रहा था और पहली बार उनसे कैसे चुदवाऊँगी इसका ख्वाब देखने लगी।
दीदी से तो मैं यह जान ही चुकी थी कि वे बड़े चुदक्कड़ हैं।
मैं आपको बता दूँ कि मेरे पापा जो इंजीनियर हैं, उन्होंने मेरा और दीदी का कमरा ऊपर बनवाया है। ग्राउंड-फ्लोर पर मम्मी-पापा का बड़ा बेडरूम, ड्राइंग-रूम, रसोई, स्टोर, गेस्ट-रूम, बरामदा, लॉन तथा पीछे छोटा सा बगीचा है।
ऊपर और कमरे हैं जो लगभग खाली ही रहते हैं क्योंकि मेरे बड़े भैया-भाभी अमेरिका में रहते हैं और बहुत कम ही दिनों के लिए ही यहाँ आ पाते हैं।
वे जब भी आते हैं, अपने साथ बहुत सी चीज़ें ले आते हैं। इसलिए कंप्यूटर, टीवी, डीवीडी प्लेयर, हैंडी-कैम इत्यादि सभी चीज़ें हैं।
मेरी भाभी भी बड़े खुले विचारों की हैं और अमेरिका जाते समय अपने अलमारी की चाभी देते हुए बता गईं थीं कि देखो, अलमारी में कुछ एडल्ट सीडी, डीवीडी और एल्बम रखे हैं, पर तुम उन्हें देखना नहीं.. और उन्होंने मुस्कराते हुए चाभी मुझे पकड़ा दी थी।
जीजाजी शुक्रवार को सुबह 8 बजे आ गए, जल्दी-जल्दी तैयार हुए नाश्ता किया और अपने ऑफिस चले गए।
दोपहर ढाई बजे वे ऑफिस से लौटे, खाना खाकर ऊपर दीदी के कमरे में जाकर सो गए।
उसके बाद मम्मी मुझसे बोलीं- बबुआ जी सो रहे हैं, मैं सोचती हूँ कि जाकर कथा सुन आऊँ… चमेली आती ही होगी, तुम उससे बर्तन धुलवा लेना।
बबुआ जी सो कर उठ जाएँ, तो चाय पिला देना और अल्मारी से नास्ता निकाल कर करवा देना।
मुझे ये सब निर्देश देकर वो कथा सुनने चली गईं।
मेरी बर्तन मांजने वाली चमेली मेरी हम-उम्र है और हमेशा हँसती-बोलती रहती है।
मम्मी के जाते ही मैं ऊपर गई, देखा जीजाजी अस्त-व्यस्त से सो रहे हैं, उनकी लुंगी से उनका लण्ड झाँक रहा था। शायद सपने में वे ज़रूर बुर का दीदार कर रहे होंगे, तभी तो उनका लौड़ा खड़ा था।
मेरे पूरे शरीर में झुरझुरी सी फ़ैल गई। मैं कमरे से निकल कर बारजे में आ गई। सामने पार्क में एक कुत्ता-कुतिया की बुर चाट रहा था। फिर थोड़ी देर बाद वह कुतिया के ऊपर चढ़ गया और अपना लौड़ा उसकी बुर में अन्दर-बाहर करने लगा।
ओह क्या चुदाई थी..!
उनकी चुदाई देख कर मेरी बुर पनिया गई और मैं अपनी बुर को सहलाने लगी।
थोड़ी देर बाद कुत्ता के लण्ड को कुतिया ने अपनी बुर में फँसा लिया। कुत्ता उससे छूटने का प्रयास करने लगा। इस प्रयास में वह उलट गया। वह छूटने का प्रयत्न कर रहा था, लेकिन कुतिया उसके लौड़े को छोड़ नहीं रही थी। यह सब देख कर मन बहुत खराब हो गया। फिर जीजाजी की तरफ ध्यान गया और मैं जीजाजी के कमरे में आ गई।
जीजाजी जाग चुके थे, मैंने पूछा- चाय ले आऊँ..!
“नहीं..! अभी नहीं… सर दर्द कर रहा है, थोड़ी देर बाद..लाना..!” फिर मुस्करा कर बोले- साली के रहते हुए चाय की क्या ज़रूरत?”
“हटिए भी..! लाइए आप का सर दबा दूँ.!” मैं उनका सर अपनी गोद में लेकर धीरे-धीरे दबाने लगी।
फिर उनके गाल को सहलाते हुए बोली- क्या साली चाय होती है कि उसको पी जाएँगे?
जीजाजी मेरी आँखों मे आँखें डाल कर बोले- गर्म हो तो पीने में क्या हर्ज है?
और उन्होंने मुझे थोड़ा झुका कर कपड़े के ऊपर से मेरे चूचियों को चूम लिया।
मैंने शरमा कर उनके सीने पर सिर छुपा लिया।
उस समय मैं शर्ट व स्कर्ट पहनी थी और अन्दर कुछ भी नहीं। उनके सीने पर सर रखते ही मेरे मम्मे उनके मुँह के पास आ गए और उन्होंने कोई चूक नहीं की, उन्होंने शर्ट के बटन खोल कर मेरी करारी चूचियों के चूचुकों को मुँह में ले लिया।
मेरी सहेलियों मैं आप को बता दूँ कि मेरी सहेली कामिनी ने कई बार मेरी चूचियों को मुँह में लेकर चूसा है, लेकिन जीजाजी से चुसवाने से मेरे शरीर में एक तूफान उठ खड़ा हुआ।
मैंने जीजा जी को चूची ठीक से चुसवाने के उद्देश्य से अपना बदन उठाया तो पाया कि जीजाजी का लण्ड लुंगी हटा कर खड़ा होकर हिल रहा था, जैसे वह मुझे बुला रहा हो ..कि आओ मुझे प्यार करो..!
ओह माँ..! कितना मोटा और कड़क लौड़ा था। मैंने उसे अपने हाथों में ले लिया।
मेरे हाथ लगाते ही वह मचल गया कि मुझे अपने होंठों में लेकर प्यार करो।
मैं क्या करती, उसकी तरफ बढ़ना पड़ा क्योंकि मेरी मुनिया भी जीजाजी का प्यार चाह रही थी। जैसे ही मैंने लौड़े तक पहुँचने के लिए गोद से जीजाजी का सर हटाया और ऊपर आई, जीजाजी ने स्कर्ट हटा कर मेरी बुर पर हाथ लगा दिया और चूम कर उसे जीभ से सहलाने लगे।
ओह.. जीजाजी का लौड़ा कितना प्यारा लग रहा था, उसके छोटे से होंठ पर चमक रही प्री-कम की बूँदें कितनी अच्छी लग रही थीं कि मैं बता नहीं सकती। लौड़ा इतना गर्म था कि जैसे वह लावा फेंकने ही वाला हो।
उसे ठण्डा करने के लिए मैंने उसे अपने मुँह में ले लिया। लौड़ा लंबा और मोटा था इसलिए हाथ में लेकर मैं पूरे सुपारे को चूसने लगी। जीजाजी बुर की चुसाई बड़े मन से कर रहे थे और मैं जीजाजी के लौड़े को ज़्यादा से ज़्यादा अपने मुँह में लेने की कोशिश कर रही थी, पर वह मेरे मुँह मे समा नहीं रहा था।
मैंने जीजाजी के लौड़े को मुँह से निकाल कर कहा- हाय जीजाजी..! यह तो बहुत ही लंबा और मोटा है..!
“तुम्हें उससे क्या करना है?” जीजाजी चूत से जीभ हटा कर बोले।
अब मैं अपने आपे में ना रह सकी, उठी और बोली- अभी बताती हूँ चोदू लाल, मुझे क्या करना है..!
मैं अब तक चुदवाने के लिए पागला चुकी थी। मैंने उनको पूरी तरह नंगा कर दिया और अपने सारे कपड़े उतार कर उनके ऊपर आ गई। बुर को उनके लौड़े के सीध में करके अपने यौवन-द्वार पर लगा कर नीचे धक्का लगा बैठी लेकिन चीख मेरे मुँह से निकली- ओह माँ..! मैं मरी…!”
जीजाजी ने झट मेरे चूतड़ दोनों हाथों से दबोच लिए, जिससे उनका आधा लण्ड मेरी बुर में फंसा रह गया और वे मेरी चूची को मुँह में डालकर चूसने लगे।
चूची चूसे जाने से मुझे कुछ राहत मिली और मेरी चूत चुदाई के लिए फिर से कुलबुलाने लगी एवं चूतड़ हरकत करने लगे।
तब तो चुदवाने के जोश में इतना सब कुछ कर गई लेकिन लेकिन अब आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं हो रही थी लेकिन मुनिया चुदवाने के लिए लगातार मचल रही थी।
मैं जीजाजी के होंठ चूम कर बोली- जीजाजी ऊपर आ जाओ न..!
“क्या छोड़ोगी नहीं..?”
“नहीं छोडूँगी अपने चुदक्कड़ राजा को..!”
बिना बुर से लौड़ा निकाले वे बड़ी सफाई से पलटे और मैं नीचे और वे ऊपर और लण्ड मेरी बुर में…, जो अब थोड़ी नरम हो गई थी। उन्होंने मेरे होंठ अपने होंठ में ले लिए और बुर से लौड़ा निकाल कर एक जबरदस्त शॉट लगा दिया।
उनका पूरा लौड़ा सरसराते हुए मेरी बुर में घुस गया।

जूही और आरोही की चूत की खुजली-4

जूही और आरोही की चूत की खुजली-4

पिंकी
आपके मेल आए ख़ुशी हुई दोस्तो, आपकी दोस्त आ गई है अपनी कहानी के नए भाग के साथ।
अब आपको समझ में आ जाएगा कि इस कहानी में आगे क्या होने वाला है।
अब तक आपने पढ़ा कि राहुल अपनी बहन को हीरोइन बनाने के बहाने से चोदना चाहता है और अपने दोस्त रेहान के साथ मिलकर वो प्लान बना रहा था। वो रेहान को भी दावत दे देता है कि आरोही की चूत का स्वाद वो भी चख ले।
अब आगे…
यह सुनकर रेहान की आँखों में चमक आ गई क्योंकि वो तो सुबह ही आरोही पर फिदा हो गया था और उसे इस बात का अफ़सोस भी था कि राहुल कैसा भाई है जो अपनी बहन को चोदना चाहता है, पर दिल में ख़ुशी भी थी, कि उसको एक कच्ची कली बिना मेहनत के मिल रही है।
राहुल- क्या सोचने लगा यार? अभी से मेरी बहन के ख्यालों में खो गया क्या?
रेहान- नहीं यार… वो बात नहीं है, पहले में आरोही से मिलूँगा, उसके बाद ही कुछ बता पाऊँगा कि तुम्हारा प्लान कितने दिन में पूरा होगा और हाँ, वहाँ उसके सामने मैं जैसा भी बर्ताव करूँ, तू ज़्यादा बीच में मत बोलना, ओके..!
राहुल- ओके.. यार बस तू उसको पटा लेना, एक बार वो ‘हाँ’ कर दे, तो मज़ा आ जाएगा।
रेहान- अब चलें, बात बहुत हो गई है..!
राहुल- हाँ चलो.. अभी जूही भी नहीं होगी.. तो आराम से उससे बात हो जाएगी।
रेहान- यह जूही कहाँ है?
राहुल- मेरी छोटी बहन जूही अपनी सहेली के यहाँ गई हुई है, रात तक ही आएगी, तब तक आरोही को पटाते हैं।
रेहान ने हाँ में सर हिलाया।
शाम के 6 बजे दोनों राहुल के घर पहुँच गए। राहुल अपने कमरे में रेहान को बैठा कर खुद आरोही के रूम में गया।
उस समय आरोही तैयार हो रही थी, शायद सोकर उठी होगी और नहा कर तैयार हो रही थी, उसके लंबे बाल भीगे हुए थे, वो उनको सुखा रही थी।
आरोही- अरे भाई आप.. आओ न..! कहाँ चले गए थे आप.. मैं आपके रूम में गई, तो आप नहीं थे..!
राहुल- मेरी स्वीट सिस्टर, तेरे लिए ही बाहर गया था। कोई अच्छा सा ड्रेस पहन कर मेरे रूम में जल्दी से आ जा। रेहान आया है तुमसे मिलने ! मैंने उससे तेरे लिए बात कर ली है।
आरोही- ओह.. वाउ.. भाई आप कितने अच्छे हो.. मैं बस अभी आई..!
राहुल- कोई अच्छी सी ड्रेस पहनना.. वो तेरा इंटरव्यू लेंगा। पहले तो उसने मना कर दिया था, पर मैंने दोस्ती का वास्ता दिया, तब यहाँ आया है। अब बाकी तुम संभाल लेना..!
आरोही- ओके भाई, अब आप जाओ वो अकेले बैठे होंगे। मैं बस 5 मिनट में तैयार होकर आई.. !
राहुल वापस रेहान के पास गया और उसे समझा दिया कि अब संभाल लेना.. वो आती होगी।
तकरीबन दस मिनट बाद आरोही कमरे में दाखिल हुई तो दोनों उसको देख कर बस देखते ही रह गये..
आरोही ने गुलाबी जालीदार टॉप पहना हुआ था, जिसमें से उसकी काली ब्रा भी साफ दिखाई दे रही थी और उसका गोरा बदन भी दिख रहा था।
नीचे एक काले रंग की शॉर्ट-स्कर्ट जो जरूरत से कुछ ज़्यादा ही छोटी थी। यूँ समझो कि बस चूत से कोई 2-3 इंच नीचे तक..
अगर कोई थोड़ा सा झुक कर देखे तो उसकी पैन्टी भी दिखाई दे जाए।
उसकी गोरी-गोरी जांघें क़यामत ढहाने को काफ़ी थीं।
रेहान- ओह वाउ… यू लुकिंग गॉर्जियस..!
आरोही- थैंक्स रेहान जी..!
राहुल भी बस उसकी खूबसूरती को देखता ही रह गया। दोनों के लौड़े पैन्ट में तन गए थे।
रेहान- आओ आरोही.. यहाँ बैठो..!
आरोही उन दोनों के सामने कुर्सी पर बैठ जाती है, जैसे उसका इंटरव्यू होने वाला हो।
राहुल- आरोही मैंने बड़ी मुश्किल से रेहान को यहाँ बुलाया है, ये कुछ पूछना चाहते हैं..!
रेहान- अब बस भी करो, तुम ही बोलते रहोगे या मुझे भी बोलने दोगे?
राहुल- सॉरी यार..!
रेहान- देख यार बुरा मत मानना, वैसे तो हम दोस्त हैं, पर काम के मामले में किसी तरह का दखल पसंद नहीं करता हूँ। अब चुप रहो, मुझे आरोही से बात करनी है।
आरोही- आप क्या पूछना चाहते हो?
रेहान- सबसे पहली बात तो यह कि इतनी कम उम्र में तुमको हीरोइन बनने का ख्याल कैसे आया?
आरोही- मेरी उम्र कम कहाँ है, पूरी 18 की हो गई हूँ, आलिया भट्ट भी तो इसी ऐज की होगी..! वो कैसे बन गई?
रेहान- ओहो आलिया की बराबरी कर रही हो जान.. उसका बाप डायरेक्टर है, समझी तुम..!
आरोही चुपचाप उसकी तरफ देखने लगी।
“ओहो.. सॉरी मैंने ‘जान’ बोल दिया.. दरअसल यह मेरी आदत है कि काम के समय बात करते समय सामने वाले को ‘जान’ बोलता हूँ।”
आरोही- कोई बात नहीं आपने जान ही तो बोला है न…! और रही बात मेरे  हीरोइन बनने की, तो आपकी इतनी पहचान कब काम आएगी..! प्लीज़ रेहान जी प्लीज़..!
राहुल- हाँ यार, मेरी बहन के लिए तुमको इतना तो करना ही होगा..!
रेहान- यार राहुल, प्लीज़ चुप रहो, हीरोइन बनना इतना आसान नहीं है एक्टिंग, डांस सब आना चाहिए और सबसे जरूरी बात फिल्म लाइन में बहुत कुछ करना होता है.. तुम मेरा मतलब समझ रहे हो न?
राहुल कुछ बोलता, इससे पहले आरोही बोल पड़ी- रेहान जी डांस मुझे बहुत अच्छा आता है, रही बात एक्टिंग की, आप अभी आजमा लो और जो आप कह रहे हो न.. मैं सब समझ रही हूँ, आप एक मौका तो दो..! प्लीज़ प्लीज़..!
रेहान- ओके कल मेरे साथ स्टूडियो चलो, वहाँ कुछ पिक लेंगे.. मैं किसी अच्छे डायरेक्टर से बात करूँगा। रही बात फाइनेंस की, वो मैं कर दूँगा, पर स्क्रीन टेस्ट के बाद ही मैं कुछ बता पाऊँगा..!
आरोही- ओहो थैंक्स.. थैंक्स.. रेहान जी, आप बहुत अच्छे हो, थैंक्स..!
इतना बोलकर आरोही उठ कर रेहान से चिपक जाती है, रेहान अपने हाथ उसकी कमर पर रखना चाहता था, पर उसने ऐसा किया नहीं, बस उसके नरम मम्मे और गर्म जिस्म का अहसास लेता रहा। राहुल पीछे से अंगूठा दिखा कर रेहान को विश कर रहा था कि प्लान काम कर रहा है।
रेहान- अरे अरे, यह क्या कर रही हो, ओके.. अब मैं जाता हूँ, लेट हो रहा हूँ।
राहुल- ओके.. मैं तुमको बाहर तक छोड़ आता हूँ..!
आरोही- आप खाना हमारे साथ खाइए न.. प्लीज़..!
रेहान- अभी बिज़ी हूँ.. फिर कभी जरूर आऊँगा पक्का..!
रेहान बाहर की तरफ़ चल देता है, राहुल भी उसके पीछे-पीछे चल पड़ता है।
दो कदम चलकर वो वापस मुड़ता है और आरोही के पास आकर राहुल को कहता है, “तुम दो मिनट बाहर जाओ, मुझे आरोही से कुछ जरूरी बात करनी है।
राहुल बिना कुछ बोले बाहर चला जाता है।
रेहान- आरोही तुम बहुत सुन्दर हो, एक हीरोइन का सुन्दर होना बहुत जरूरी है पर एक बात ध्यान से सुनो, आजकल की फिल्मों में बोल्ड सीन होते हैं, मुझे गलत मत समझना पर आज रात अच्छे से सोच लो फिर कल जवाब देना और राहुल को इस बारे में मत बताना..!
आरोही- रेहान जी मैं जानती हूँ आप बेफ़िक्र रहो, मैं कैसा भी सीन कर सकती हूँ..!
रेहान- अभी तुम जोश में बोल रही हो, कल तक सोच लो.. ओके..!
आरोही- इसमें सोचना क्या..! मेरी आज भी ‘हाँ’ है और कल भी ‘हाँ’ ही रहेगी..!
रेहान- ओके.. अब एक काम बताता हूँ कोई अच्छी फिल्म देखो और उसके कुछ डायलोग याद करो, कल टेस्ट देना है न.. कोई दमदार गुस्से वाले सीन याद करना, मैं देखना चाहता हूँ तुम गुस्से में कैसी दिखती हो। कल सुबह दस बजे तैयार रहना ओके.. बाय..!
आरोही- ओके रेहान जी, थैंक्स अगेन..!
रेहान बाहर चला जाता है। घर के बाहर जाकर राहुल खुश होकर रेहान को बोलता है, “यार तुम कमाल हो.. इतनी आसानी से उसको मना लिया..!”
रेहान- इतना खुश मत हो यार, अभी तो शुरूआत है इतनी जल्दी वो मानने वाली नहीं, तभी तो उसको फोटो शूट का कहा है। अब तुम सुबह तक ऐसी कोई हरकत मत करना जिससे बनता काम बिगड़ जाए। मैं कल सुबह दस बजे आ रहा हूँ.. ओके…! बाकी बातें कल बताऊँगा।
रेहान के जाने के बाद राहुल अन्दर आया, आरोही ने उसको भी ‘थैंक्स’ बोला और आगे की तैयारी के लिए अपने कमरे में चली गई। राहुल ने भी उससे ज़्यादा बात नहीं की।
रात को जूही भी आई।
राहुल ने आरोही को मना कर दिया था कि जूही को अभी कुछ मत बताना, तो उसने जूही को कुछ नहीं बताया, बस सुबह की शॉपिंग के बारे में बात की।
सब रात का खाना खाकर सो गए, पर आरोही को तो डायलोग्स याद करने थे, तो वो मूवी देख रही थी।
रात को करीब एक बजे वो भी सो गई।
सुबह के 8 बजे आरोही की आँख खुली, वो बाथरूम में चली गई, एक घंटा बाद वो एकदम तैयार होकर बाहर आई।
तब तक जूही और राहुल भी उठ गए थे। आरोही ने सिंपल सा ड्रेस पहना था ब्लू-जींस और क्रीम टी-शर्ट।
वो नहीं चाहती थी कि जूही को शक हो।
राहुल अपने कमरे से बाहर आया तो आरोही हॉल में सोफे पर बैठी थी।
राहुल- गुड-मॉर्निंग बहना.. जल्दी उठ गईं और यह क्या पहना है, कल जो पहना था, वैसा ही कुछ पहनती तो ज़्यादा खूबसूरत लगती, रेहान आता ही होगा..!
आरोही- सस्स चुप रहो.. जूही सुन लेगी..! मैंने बैग में अच्छे कपड़े डाल लिए हैं, फोटो शूट के दौरान वही पहन लूँगी !
वो दोनों बात कर रहे थे, तभी जूही आ गई। वो दोनों चुप होकर नाश्ता करने लगे।
उस दौरान आरोही ने राहुल से कहा- मेरी सहेली का फ़ोन आया था, मैं वहाँ जा रही हूँ।
जूही इस बात पर ज़्यादा गौर नहीं किया और बस नाश्ता करती रही।
करीब 9.45 को रेहान का फ़ोन आया कि वो बस 5 मिनट में आ रहा है।
राहुल ने उसे ‘ओके’ बोला और राहुल और आरोही घर के बाहर आ गए।
इतने में रेहान की कार भी आ गई, रेहान नीचे उतरा तो राहुल उसे एक तरफ़ ले गया।
राहुल- कहाँ जाना है हमें?
रेहान- हमें नहीं, बस आरोही मेरे साथ जाएगी स्टूडियो में, वहाँ उसके थोड़े फोटो निकाल कर वापस ले आऊँगा, बाद में तुमको फ़ोन करूँगा कि कुछ सेक्सी पिक चाहिए, तुम उसको बोलना और घर में ही उसके पिक लेने के बहाने जो चाहो करना, पर मुझे भूलना नहीं यार..!
बस दोस्तो, आज यहीं तक !
अब अगले भाग में पढ़िए कि आरोही की फोटो निकलती है या चीख..
आपके मेल का बेसब्री से इन्तजार रहेगा मुझे जल्दी से pinky14342@gmail.com पर मेल कीजिए न… और बताइए कि आज के भाग के बारे में आपकी क्या राय है?

मेरी चालू बीवी-30

मेरी चालू बीवी-30

इमरान
मधु ने अपना बिस्तर बाहर के कमरे में ही लगाया था..
मैं यही सोच रहा था कि रात को एक बार कोशिश तो जरूर करूँगा… यह अच्छा ही था कि सलोनी बैडरूम में रहेगी और मैं आसानी से मधु की बन्द चूत खोल पाऊँगा।
मगर फिर एक डर भी सता रहा था कि अगर वो ज़ोर से चिल्ला दी तो क्या होगा !
बहुत से विचार मेरे दिल में आ जा रहे थे… मैं बहुत सारी बातें सोच रहा था… कि मधु को ऐसे करके चोदूंगा, वैसे चोदूंगा..
यहाँ तक कि मैंने दो तीन चिकनी क्रीम भी ढूंढ कर पास रख ली थीं… मेरे शैतानी लण्ड ने आज एक क़त्ल का पूरा इंतजाम कर लिया था और वो हर हाल में इस काण्ड को करने के लिए तैयार था…
फिर काम निपटाकर सलोनी अंदर आई और उसने मेरे पुराने सभी विचारों पर बिंदु लगा दिया..
अहा… सलोनी ने यह क्या कर दिया…
पता नहीं मेरे फायदे के लिए किया… या सब कुछ रोकने के लिए… मगर मुझे बहुत बुरा लगा…
दरअसल हमारे घर में ऐ सी केवल बैडरूम में ही लगा है…
बाहर के कमरे में केवल छत का पंखा है जो सोफे वाली तरफ है, जहाँ मधु ने बिस्तर लगाया था वहाँ हवा बिल्कुल नहीं पहुँचती।
सलोनी ने वहाँ आते ही उसको कहा- अरे मधु, यहाँ तू कैसे सोयेगी? रात को गर्मी में मर जाएगी… चल अंदर ही सो जाना…
लगता है जैसे मधु मेरे से उल्टा सोच रही थी… जहाँ मैं उसको अलग आराम से चोदना चाह रहा था.. वहीं वो शायद मेरे पास लेटने की सोच रही थी.. क्योंकि वो एकदम से तैयार हो गई, उसने फटाफट अपना बिस्तर उठाया और बैडरूम में आ देखने लगी कि किस तरफ लगाना है..
मैं कुछ कहना ही चाह रहा था मगर तभी सलोनी ने एक और बम छोड़ दिया- यह कहाँ ले आई बेवकूफ, इसको बाहर ही रख दे.. यहीं बेड पर ही सो जाना…
अब मुझसे नहीं रुक गया, मैं बोला- अरे जान यहाँ..कैसे…
सलोनी- अरे सो जाएगी एक तरफ को जानू… वहाँ गर्मी में तो मर जायेगी सुबह तक…
मैं चुप करके अब इस स्थिति के बारे में विचार करने लगता हूँ… पता नहीं यह अच्छा हुआ या गलत…
पर जब मधु सलोनी के पास ही सोयेगी तब तो मैं हाथ भी नहीं लगा पाऊँगा…
मेरा दिल कहीं न कहीं डूबने लगा था और सलोनी को बुरा-भला भी कह रहा था।
हम तीनों बिस्तर पर आ गए, एक ओर मैं था, बीच में सलोनी एवं दूसरी तरफ मधु लेट गई… ऐ सी मधु वाली साइड में लगा था…
मैंने कमर में एक पतला कपड़ा बाँध लिया था और पूरा नंगा था… वैसे मैं नंगा ही सोता था पर आज मधु के कारण मैंने वो कपड़ा बाँध लिया था।
सलोनी अपनी उसी शार्ट नाइटी में थी जो उसके पैर मोड़ने से उसके कमर से भी ऊपर चली गई थी.. उसके मस्त नंगे चूतड़ मेरे से चिपके थे…
उधर मधु केवल एक समीज में लेटी थी..
हाँ उसमे अभी भी शर्म थी.. या वाकयी ठण्ड के कारण वहाँ रखी पतली चादर ओढ़ ली थी… उसका केवल सीने तक का ही बदन मुझे दिख रहा था..
करीब आधे घंटे तक मैं सोचता रहा कि यार क्या करूँ…
एक तो सलोनी के मस्त नंगे चूतड़ मेरे लण्ड को आमंत्रण दे रहे थे.. मगर उसे तो आज नई डिश दिख रही थी…
मेरा कपड़ा खुल कर एक ओर हो गया था और अब नंगा लण्ड छत की ओर तना खड़ा था, मेरे बस करवट लेते ही वो सलोनी के नंगे चूतड़ से चिपक जाता …
मगर ना जाने क्यों मैं सीधा लेटा मधु के बारे में सोच रहा था कि क्या रिस्क लूँ, उस तरफ जा मधु को दबोच लूँ..
मगर मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी… फिर मेरे दिमाग ने काम करना बंद कर दिया.. मैंने सलोनी की ओर करवट ले ली और सलोनी से पीछे से चिपक गया..
मेरे लण्ड ने सलोनी के चूतड़ के बीचों बीच अपनी जगह बना ली….
सलोनी ने भी थोड़ा सा खिसक कर अपने चूतड़ों को हिलाकर लण्ड को सही जगह सेट कर लिया।
अब मैंने अपना हाथ बढ़ा कर सीधे मधु की चादर में डाल दिया… मुझे पता था कि सलोनी आँखे खोले मेरे हाथ को ही देख रही है…
मगर मैंने सब कुछ जान कर भी अपने हाथ को मधु की चादर में डाल दिया और हाथ मधु के नंगे पेट पर रखा…
मधु की समीज उसके पेट से भी ऊपर चली गई थी..
मैं सलोनी की परवाह ना करते हुए अपना हाथ सीधे पेट से सरकाते हुए मधु की मासूम फ़ुद्दी तक ले गया जहाँ अभी बालों ने भी पूरी तरह निकलना शुरू नहीं किया था…
उसका यह प्रदेश किसी मखमल से भी ज्यादा कोमल था ….
मेरी उँगलियों ने उसकी फ़ुद्दी को सहलाते हुए जल्दी ही उसके बेमिसाल छेद को टटोल लिया…
यह कहानी आप कामवासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !
मधु कसमसाई, उसने आँखे खोली और सर घुमाकर सलोनी की ओर देखा…
सलोनी की भी आँखें खुलीं थी…
बस मधु बिदक गई और उसने तुरंत मेरा हाथ झटक दिया…
मधु- क्या करते हो भैया… सोने दो ना…
मैं पहले तो घबरा गया मगर फिर मेरे दिमाग ने काम किया, मैं बोला- अरे, मैं देख रहा हूँ कि तूने कहीं सूसू तो नहीं कर दिया… गद्दा खराब हो जायेगा…
सलोनी- हा हा.. और एक दम ऐसी के सामने लेटी है.. जरा संभलकर…
मधु- क्या भाभी आप भी… मैं नहीं बोल रही आपसे..
तभी सलोनी ने वो कर दिया जिसकी मुझे सपने में भी उम्मीद नहीं थी…
मधु की मक्खन जैसी फ़ुद्दी के छूने से मेरे लण्ड में जबरदस्त तनाव आ गया था जिसको सलोनी ने भी महसूस कर लिया था…
मेरी समझ से बिल्कुल परे था कि एक बीवी होकर भी वो अपने पति के सेक्सी रोमांस का मजा ले रही है… ना केवल मजे ले रही है बल्कि मेरे इस काम में सहयोग भी कर रही है…
अब ना जाने उसके मन में क्या था…
इन सब बातों को सोचने के बारे में मेरे दिल और दिमाग दोनों ने ही मना कर दिया था…
मधु की नाजुक जवानी को चखने के लिए उसमें इतना तनाव आ गया था कि दिल और दिमाग दोनों ही सो गए थे, उनको तो बस अब एक ही मंजिल दिख रही थी… चाहे उस तक कैसे भी जाया जाये…
मधु- ओह भाभी… भैया भी.. पापा की तरह परेशान कर रहे हैं…
सलोनी ने मधु का हाथ पकड़ कर खींच कर सीधे मेरे तने हुए लण्ड पर रख दिया और बोली- तू भी तो पागल है.. बदला क्यों नहीं लेती… तू भी देख ..कि कहीं तेरे भैया ने तो सूसू नहीं की.. हे हे हे हे…
सलोनी के इस करतब से मैं भौंचक्का रह गया.. और शायद मधु भी…
हाथ के खिंचने से वो सलोनी के ऊपर को आ गई थी.. सलोनी ने ना केवल मधु का हाथ मेरे लण्ड पर रखा बल्कि उसको वहाँ पकड़े भी रही कि कहीं मधु जल्दी से हटा न ले…
कहानी जारी रहेगी।
imranhindi@hmamail.com

दीदी की गाण्ड चाटी और चोदी

दीदी की गाण्ड चाटी और चोदी

रॉक राजपूत
हैलो दोस्तो, मैं दिल्ली से हूँ, मेरा नाम रॉक राजपूत है, मेरी उम्र 23 साल, कद 5’6″ स्मार्ट हूँ, लंड का साइज़ 7″ से थोड़ा ज़्यादा है।
मुझे चूत चोदना और चाटना बहुत पसंद है, गाण्ड चाटने का मेरा बहुत मन करता है। मुझे चूत चाटने का भी बहुत मन करता है। चूत की महक और चूत का नमकीन पानी.. अय..हय.. क्या बताऊँ..! अगर ज़्यादा दिन ना मिले तो, मैं पागल हो जाता हूँ।
आज मैं आपको अपनी एकदम सच्ची घटना बताने जा रहा हूँ। यह घटना 3 साल पहले की है।
मेरे घर में 5 मेंबर हैं। मैं पापा, मम्मी, छोटा भाई और बड़ी दीदी जिनकी शादी हो गई थी। मेरी दीदी एकदम बेबो की तरह गठीले बदन वाली हैं। उन का 2 साल का लड़का है। उनकी चूची एकदम खड़ी रहती हैं। उनकी गाण्ड टाइट गठीली है और थोड़ी सी बाहर को निकली हुई है। उनकी उम्र 26 है। वो कुछ दिन के लिए घर आई हुई थीं। अब मैं अपनी बात पर आता हूँ। एक दिन घर पर कोई नहीं था। पापा-मम्मी मामा के यहाँ गए थे। दीदी कुछ काम से मार्किट गई थीं।
मेरा मन हुआ तो मैं निक्कर से अपने लंड को बाहर निकाल कर सहला रहा था, मुठ मार रहा था।
तो अचानक पता नहीं दीदी कब मार्केट से आ गईं, मैं चूतिया अपनी चुदास के चक्कर में गेट लगाना भूल गया था।
दीदी उसी वक्त मेरे रूम में आ गईं। मेरा मुँह दीवार की तरफ था। दीदी ने मुझे पीछे से देख लिया और मुझे बिना कुछ कहे बाहर निकल गईं। जब वो बाहर गईं, तब मुझे पता चला कि कोई अन्दर से बाहर गया है। मेरी तो गाण्ड फट गई। मैंने निक्कर ऊपर की और अन्दर ही बैठ गया, बाहर जाने की हिम्मत नहीं हो रही थी।
मैं दिल को थाम कर बाहर आया, तो देखा दीदी रसोई में थीं। मैं शर्म के मारे मर गया। यार आज क्या हो गया..! मैं वापस अपने रूम में घुस गया। मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी, कैसे दीदी के सामने जाऊँ।
शाम को दीदी मेरे लिए खाना लाईं और बिना बोले रख कर चली गईं। मैं अन्दर चुपचाप बैठा था, मुझे रोना आ गया। मैंने खाना नहीं खाया। रात को 10 बजे के करीब दीदी फिर रूम में आईं और खाना थाली में देख कर बोलीं- राज.. खाना क्यों नहीं खाया..!
मैंने नज़र झुका कर बोला- भूख नहीं है दीदी..!
और इतना बोल कर रोने लगा और दीदी के सामने हाथ जोड़ कर बोला- दीदी मुझे माफ़ कर दो मुझसे ग़लती हो गई। आगे ऐसा नहीं करूँगा।
मैंने कहा- दीदी आपने जो देखा वो किसी से मत बोलना, नहीं तो मैं मर जाऊँगा।
दीदी ने प्यार से मेरे सिर पर हाथ रख कर कहा- चुप हो.. नहीं बोलूँगी..पर प्रॉमिस कर, आगे ऐसा नहीं करेगा..!
मैं खुश हो गया और दीदी को ज़ोर से अपने गले से लगा लिया और बोला- प्रॉमिस, पक्का अब नहीं करूँगा। फिर हमने खाना खाया और टीवी देखने लगे।
फिर एकदम से दीदी बोलीं- राज तेरी कोई गर्ल-फ्रेंड नहीं है क्या..!
मैंने कहा- नहीं है दीदी..!
वो बोलीं- क्यों तू इतना तो स्मार्ट है।
और इतना बोल कर गाल पर चुम्बन कर लिया।
मैं सन्न रह गया, दीदी ने मुझे चुम्बन किया। मैंने भी हिम्मत करके दीदी के गाल पर चुम्बन करते हुए ‘थैंक्स’ बोला।
दीदी बोलीं- यह तूने क्यों किया?
मैंने कहा- जैसे आपने किया..!
वो बोलीं- अभी तो मैंने तो प्यार में चुम्बन किया !
मैं बोला- मैंने भी प्यार से चुम्बन किया।
तो वो मुस्कुराते हुए बोलीं- कौन सा वाला प्यार? दीदी वाला प्यार या ‘वो’ वाला प्यार?

चूची से जीजाजी की गाण्ड मारी-2

चूची से जीजाजी की गाण्ड मारी-2

सुधा
उनका पूरा लौड़ा सरसराते हुए मेरी बुर में घुस गया।
दर्द से मैं बेहाल हो गई..!
मेरी आवाज़ मेरे मुँह में ही घुट कर रह गई, क्योंकि मेरे होंठ तो जीजाजी के होंठ में फंसे थे।
होंठ चूसने के साथ वे मेरी चूचियों को प्यार से सहला रहे थे। फिर वे चूचियों को एक-एक करके चूसने लगे, जिससे मेरी बुर का दर्द कम होने लगा।
प्यार से उनके गाल को चूमते हुए मैं बोली- तुमने अपनी साली के बुर का कबाड़ा कर दिया ना..!
“क्या करता साली साहिबा अपनी बुर की झांट को साफ कर चुदवाने के लिए तैयार हुई जो बैठी थी..!”
“जीजाजी आप को ग़लतफहमी हो गई, मेरे बुर पर बाल है ही नहीं !”
“यह कैसे हो सकता है..! तुम्हारी दीदी के तो बहुत बाल है, मुझे ही उनको साफ करना पड़ता है..!”
“हाँ..! ऐसा ही है लेकिन वह सब बाद में पहले जो कर रहे हो उसे करो..!”
मेरे बुर का दर्द गायब हो चुका था और मैं चूतड़ हिला कर जीजाजी के मोटे लण्ड को एडजस्ट करने लगी थी, जो धीरे-धीरे अन्दर-बाहर हो रहा था।
जीजाजी ने रफ़्तार बढ़ाते हुए पूछा- क्या करूँ?”
मैं समझ गई जीजाजी कुछ गंदी बात सुनना चाह रहे हैं। मैं अपनी गांड को उछाल कर बोली- हाय रे साली-चोद..! इतना जालिम लौड़ा बुर की जड़ तक घुसा कर पूछ रहे हो कि क्या करूँ…! हाय रे कुंवारी बुर-चोद… अपने मोटे लौड़े से मथ कर मेरी मुनिया का सुधा-रस निकालना है, अब समझे… मेरे चुदक्कड़ राजा..!”
मैंने उनके होंठ चूम लिया। अब तो जीजाजी तूफान मेल की तरह चुदाई करने लगे। बुर से पूरा लण्ड निकालते और पूरी गहराई तक पेल देते थे।
मैं स्वर्ग की हवाओं में उड़ने लगी।
“हाय राज्ज्ज्जा…! और ज़ोर…सेईई … बड़ा मज्ज़ज़ज्ज्ज्ज्जा आ रहा है..और जोर्ररर सेई…… ओह माआ! हाईईईईई मेरी बुररर झड़ने वाली है……मेरी बुर्र्र्र्ररर के चिथड़े उड़ा दोऊऊऊऊ… हाईईईईई मैं गइईईई..!”
“रुक्कको मेरी चुदासी राआनी मैं भीईए आआआआअ रहा हूँ…!” जीजाजी ने दस-बारह धक्के लगा कर मेरी बुर को अपने गरम लावा से भर दिया। मेरी बुर उनके वीर्य के एक-एक कतरे को चूस कर तृप्त हो गई।
मेरे चूचियों के बीच सर रख कर मेरे ऊपर थोड़ी देर पड़े रह कर अपने सांसों को संयत करने के बाद मेरे बगल में आकर लेट गए और मेरी वीर्य से सनी बुर पर हाथ फेरते हुए बोले- हाँ..! अब बताओ अपने बिना बाल वाली बुर का राज..!
मैं इस राज को जल्दी बताने के मूड में नहीं थी, मैंने बात को टालते हुए कहा- अरे.. ! पहले सफाई तो करने दो, बुर चिपचिपा रही है इस साले लौड़े ने पूरा भीगा दिया है..!
मैं उठ कर बाथरूम में चली गई और बाथरूम में मेरे पीछे-पीछे जीजाजी भी आ गए। मैंने पहले जीजाजी के लौड़े को धोकर साफ किया, फिर अपनी बुर को साफ करने लगी।
जीजाजी गौर से देख रहे थे, शायद वे बुर पर बाल ना उगने का राज जानने के पहले यह यकीन कर लेना चाह रहे थे कि बाल उगे नहीं हैं कि इनको साफ किया गया है।
उन्होंने कहा- लाओ मैं ठीक से साफ कर दूँ..! वे बुर को धोते हुए अपनी तसल्ली करने के बाद उसे चूमते हुए बोले- वाकयी तुम्हारी बुर का कोई जवाब नहीं है।
और वे मेरी बुर को चूसने लगे। मैंने अपने पैरों को फैला दिया और उनका सर पकड़ कर बुर चुसवाने लगी, “ओह जीजाजी… क्य्आअ कार्रर्ररर रहीईई हैं… ओह …!”
तभी कॉल-बेल बजी।
मैं जीजा से अपने को छुड़ाते हुए बोली- बर्तन माँजने वाली चमेली होगी..!
और उल्टे-सीधे कपड़े पहन कर नीचे दरवाजा खोलने के लिए भागी, दरवाजा खोला तो देखा चमेली ही थी, मैंने राहत की सांस ली।
अन्दर आने के बाद चमेली मुझे ध्यान से देख कर बोली- क्या बात है दीदी..! कुछ घबराई कुछ शरमाई, या खुदा ये माजरा क्या है..! फिर बात बदल कर बोली- सुबह जीजाजी आए थे, कहाँ हैं..!
मैं बोली- ऊपर सो रहे हैं, मैं भी सो गई थी..!
“जीजाजी के साथ..!” हँसते हुए वो बोली
“तू भी ही सोएगी क्या..!” मैंने पलट वार किया। लेकिन वह भी मंजी हुई खिलाड़ी थी, बोली- हाय दीदी ! इतना बड़ा भाग्य मेरा कहाँ..!
उससे पार पाना मुश्किल था, बात बढ़ाने से कोई फ़ायदा भी नहीं था, क्योंकि वह मेरी हमराज़ थी, इसलिए मैं बोली- जा अपना काम कर, काम खत्म करके जीजाजी के लिए चाय बना देना, मैं देखती हूँ कि जीजाजी जागे कि नहीं।
नीचे का मैं दरवाजा बंद करके ऊपर आ गई। चमेली की तरफ से मैं निश्चिन्त थी वो बचपन से ही इस घर में आ रही है और सब कुछ जानती और समझती है।
उधर दीदी के कमरे में लुंगी पहन कर बैठे जीजाजी मेरा इंतजार कर रहे थे, जैसे ही मैं उनके पास गई मुझे दबोच लिया।
मैं उनसे छूटने की नाकाम कोशिश करते हुए बोली- चमेली बर्तन धो रही है, अब उसके जाने तक इंतजार करना पड़ेगा।
जीजाजी बोले- अरे.! उसे समय लगेगा तब तक एक क्या.. दो बाजी भी हो सकती हैं। वे मेरे मम्मों को खोलकर एक कबूतर की चौंच को अपने मुँह में लेकर चूसने लगे और उनका एक हाथ मेरी बुर तक पहुँच गया। बाथरूम में जीजाजी बुर चूस कर पहले ही गरमा चुके थे, अब मैं भी अपने को ना रोक सकी और लूँगी को हटा कर लौड़े को हाथ मे ले लिया।
मैं बोली- जीजाजी यह तो पहले से भी मोटा हो गया है…!
“हाँ जब यह अपनी प्यारी बुर को प्यार करेगा तो फूलकर कुप्पा न हो जाएगा..!”
“हाय..! मेरे चोदू सनम ! इस शैतान ने मेरी मुनिया को दीवाना बना दिया है… अब इसे उससे मिलवा दो…! मैंने उनके लौड़े को हाथ मारते हुए कहा।
यह कहानी आप कामवासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !
जीजाजी ने मेरे वे कपड़े उतार दिए जिससे मैं अपनी नग्नता छुपाए हुए थी और मुझे पलंग पर लिटा कर मेरे पैरों को फैला दिया। अब मेरी मदमस्त रसीली यौवन-गुहा उनके सामने थी। उन्होंने उसे फिर अपनी जीभ से छेड़ा।
कुछ देर तो उनकी दीवानगी का मज़ा लिया, लेकिन मैं परम-सुख के लिए बेचैन हो उठी और उन्हें अपने ऊपर खींच लिया और बोली- राजा अब उन दोनों को मिलने दो..!
जीजाजी मेरे चूचुकों को मुँह से निकाल कर बोले- किसको..!”
मैंने उनके लौड़े को बुर के मुँह पर लगाते हुए बोली- इनको… बुर और लण्ड को…! समझे मेरे चुदक्कड़ सनम…! मेरी बुर के चोदन-हार… अब चोदो भी…!”
इस पर उन्होंने एक जबरदस्त शॉट लगाया और मेरी बुर को चीरता हुआ पूरा लण्ड अन्दर समा गया।
“हाईईईईईईई मारररर डाला ओह मेरे चोदू सनम … मेरी मुनिया तो प्यार करना चाहती पर इस मोटू को दर्द पहुँचाने में ज़्यादा मज़ा आता है…! अब रुके क्यों हो? कुछ पाने के लिए कुछ तो सहना पड़ेगा…ओह..माआआ … अब कुछ ठीक लग रहा है…… हाँ अब ठीककक हाईईईईई…ईईईईई फाड़ डालो इस लालची बुर को…!” मैं चुदाई के उन्माद में नीचे से चूतड़ उठा-उठा कर उनके लण्ड को बुर में ले रही थी।
और जीजाजी ऊपर से कस-कस कर शॉट पर शॉट लगाते हुए बोल रहे थे, “हाय चुदासी रानीईईई तुम्हारी बिना झांट वाली बुर ने तो मेरे लण्ड को पागल बना दिया है…! वह इस साली मुनिया का दीवाना हो गया है…! इसे चोद-चोद कर जब तक यहाँ हूँ जन्नत की सैर करूँगा… रानी बहुत मज़ा आ रहा है…!”
मैं चुदाई के नशे में जीजाजी को कस-कस कर धक्के लगाने के लिए प्रोत्साहित कर रही थी, “हाँ राजा…! चोद लो अपनी साली के बुर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर को.. और जोर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर सेए फर्रर्र्र्र्ररर दो इस सालीइीईईईई बुर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर को ओह राज्ज्जज्ज्जाआअ मैं जन्नत क्ईईईई सैर कर रही हूऊओन…चोदो राजा चोद्द्द्दद्डूऊ और ज़ोर सीईईई…हाईईईईई कस कस कर मारो …ओह बस मैं आने वालिइीईईई हुन्न्ञणणन् उई माआअ मैं गइईईई……!”
मेरी बुर ने काम का सुधा-रस छोड़ दिया, पर जीजाजी धक्के पर धक्के लगाए जा रहे थे। वे झड़ने का नाम ही नहीं ले रहे थे।
मैंने कहा- जीजाजी ज़रा जल्दी..! चमेली चाय ले कर आती होगी..!
“मैं तो कब से चाय लेकर खड़ी हूँ.. चाय ठंडी हो गई और मैं गरम..!” यह चमेली की आवाज़ थी।
मैं चुदाई के तूफान में इस कदर खो गई थी कि चमेली की तरफ ध्यान ही नहीं गया। मैं जीजाजी को अपने ऊपर से हटाते हुए बोली- तू कब आई..!”
“जब आप अपने चोदू-सनम से चुदवा रही थीं और चुदक्कड़-रानी को जीजाजी चोद रहे थे..!”
“अच्छा..! ठीक है..! यह सब छोड़ जब तू यहाँ आकर मर ही गई तो बुर खुजलाना छोड़.. और इधर आ जीजाजी को सम्भाल..!”
मैं उठी और चमेली के सारे कपड़े उतार दिए और उसे जीजाजी के पास पलंग पर धकेल दिया। जीजाजी ने उसे दबोच लिया, उन्होंने अपना लण्ड उसके चूत में लगा कर धक्का दिया।
उसके मुँह से एक कराह सी निकली। मोटा लण्ड जाने से उसे मीठा दर्द हो रहा था। मैं धीरे-धीरे उसके उरोजों को मसलने लगी, जिससे उसकी उत्तेजना बढ़ती जाए और दर्द कम हो। धीरे-धीरे जीजाजी ने अपना पूरा लण्ड चमेली की बुर में घुसा दिया। अब उसकी तरफ से पूरा सहयोग मिल रहा था।
जीजाजी अब अपने लण्ड को चमेली की चूत में अन्दर-बाहर करने लगे और चमेली भी अपने कमर को उठा कर जीजाजी के लण्ड को अपने चूत में आराम से ले रही थी।
दोनों एक-दूसरे से गुंथे हुए थे।
चमेली बड़बड़ा रही थी, “दीदी..! जीजाजी मस्त चुदाई करते हैं… उई.. जीजाजी चोद दो… और ज़ोर से … और ज़ोर से… मुझे भी आने देना आज बहुत दिनों की प्यसस्स्स्स्सस्स बुझीईईईई गीईईई अब आ जाओ दीदी के चोदू-सनम …ओह माआअ मैं गइईई…!”
जीजाजी के अन्दर उबाल पहले से ही उठ रहा था, जो बाहर आने को बेचैन था। थोड़ी देर मे दोनों साथ-साथ खलास हो गए।
थोड़ी देर चमेली के शरीर पर पड़े रहने के बाद जब जीजाजी उठे।
तो मैं चमेली से बोली- गर्मी शांत हो गई..! जा अब चुदक्कड़ जीजाजी के लिए फिर से स्पेशल चाय बना कर ला.. क्योंकि जीजाजी ने तेरी स्पेशल चुदाई की है न..! “दीदी आप भी न …!”
वह अपने कपड़े उठाने लगी, तो मैंने च्यूँटी ली और बोली- जा ऐसे ही जा..!
“नहीं दीदी कपड़े दे दो, चाय लेकर जीजाजी के सामने नंगी आने में शरम लगेगी।”
मैं बोली- जा भाग..कर चाय लेकर आ, नंगी होकर चुदवाने में शरम नहीं आई..! अच्छा चल जा.. हम लोग भी यहाँ नंगे ही रहेंगे..!
शैतान चमेली यह कहते हुए नंगी ही भाग गई, “ये कहो कि नंगे रह कर चुदाई करते रहेंगे..!”
चमेली नीचे चाय बनाने चली गई जीजाजी मुझे चिढ़ाते हुए बोले- मालकिन की तरह नौकरानी भी जबरदस्त है..!
मैं बोली- जीजाजी उसे ज़्यादा भाव ना दीजिएगा नहीं तो वह जौंक की तरह चिपक जाएगी.. पर जीजाजी वह है बड़ी भली, बस चुदाई के मामले में ही थोड़ी लंगोटी से कमजोर है।
“आने दो देखता हूँ.. कमजोर है या खिलाड़ी है..!”
प्रिय पाठकों आपकी मदमस्त सुधा की रसभरी कहानी जारी है। आपके ईमेल की प्रतीक्षा में आपकी सुधा बैठी है।
alishachuddakad@gmail.com

चूत चुदाई की ट्यूशन

चूत चुदाई की ट्यूशन

चूत चुदाई की ट्यूशन
प्रेषक : श्रेयान्स ठाकुर
मेरा नाम श्रेयान्स है। मैं स्नातक का छात्र हूँ।
मेरे घर के बगल में एक मिश्रा परिवार रहता है, जिसमें दिव्या रहती है, वह 12वीं में पढ़ती है, उसका छोटा भाई जो अभी एक साल का है, उसकी मम्मी हैं और पापा हैं।
वो यहाँ दो साल से रह रहे हैं, हमारे परिवार की उनसे काफ़ी अच्छी पटती है। दिव्या अक्सर मुझसे सवाल पूछने मेरे घर पर आ जाती है। कभी-कभी मैं भी उसके घर चला जाता हूँ।
एक बार दिव्या की मम्मी ने मुझसे कहा- बेटा क्या तुम इसको घर पर ट्यूशन पढ़ा दोगे..!
मैं कुछ कहता इससे पहले उन्होंने कहा- अच्छा कितनी फ़ीस लोगे..!
तो मैंने कहा- इसमें फ़ीस वाली क्या बात..! ये जब चाहे मुझसे सवाल पूछ सकती है।
तो उन्होंने कहा- नहीं.. इस बार इसका बोर्ड की परीक्षा है और मैं कोई लापरवाही नहीं चाहती..!
मैंने कहा- ठीक है आंटी.. आप जो चाहे फ़ीस दे देना।
उन्होंने कहा- ठीक है, तो तुम आज से ही पढ़ाना शुरु कर दो।
मैंने कहा- ठीक है, दिव्या तुम शाम को 5 बजे तैयार रहना..!
तो उसने कहा- ठीक है।
अब मैं आपको अपनी दिव्या के बारे में बता दूँ, मुझे यकीन है, उसके बारे में जान कर आप आप अपनी मुठ्ठ मारना नहीं भूलोगे।
दिव्या देखने में एकदम माल लगती है, उसकी चूची एकदम मस्त हैं, मन करता की मुँह में भर लूं और बाहर ही ना निकालूँ। उसकी चूची का साइज 30 है। उस पर वो जब काली ब्रा पहन लेती है, तो अय.. हय.. क्या लगती है..!
अब मैं रोज दिव्या को पढ़ाने उसके घर जाने लगा। पहले मैं दिव्या को इस नजर से नहीं देखता था, लेकिन एक दिन जब मैं जब दिव्या से उसके पेपर के बारे में जानने उसके घर पहुँचा, तो उस वक्त उसकी मासिक परीक्षा चल रही थी।
उस वक्त दोपहर के दो बजे थे, मैंने घन्टी बजाई, दिव्या ने दरवाजा खोला।
मैंने कहा- दिव्या मम्मी कहाँ हैं।
उसने कहा- सो रही हैं। आप दो मिनट रुकिए मैं कपड़े बदल कर आती हूँ।
मैंने कहा- ठीक है.. मैं यहीं इन्तजार करता हूँ, जाओ जल्दी आना..!
वो चली गई, थोड़ी देर बाद मुझे पता नहीं क्या हुआ मैं भी उसके पीछे हो लिया। मैंने दरवाजे के छेद से देखा, वो अपनी स्कर्ट उतार रही थी। अब वो सिर्फ़ ब्रा और पैन्टी में थी।
क्या लग रही थी… वो सफ़ेद ब्रा और पैन्टी में..! उसको इसी तरह देखे जा रहा था कि कब दरवाजा खुला, मुझे पता ही नहीं चला।
दिव्या ने कहा- क्या हुआ सर?
मैंने कहा- कुछ नहीं तुम्हें देर लग रही थी, तो मैंने सोचा में ही देखता हूँ कि क्या बात है।
तो उसने कहा- झूट मत बोलो.. मैं सब जानती हूँ.. तुम मुझे कब से यहाँ खड़े हो कर देख रहे थे।
मैं तो ये सुन कर एकदम डर गया। मैंने सोचा आज तो मैं गया काम से..!
मैंने कहा- तुम गलत समझ रही हो।
उसने कहा- मैं सब समझती हूँ। श्रेयान्स मैं तुमसे प्यार करती हूँ। मुझे अपना लो मैं कब से तुम से ये बात कहना चाहती थी, पर डरती थी कि कहीं तुम इन्कार ना कर दो, पर तुमने जब इस तरह मुझे देख ही लिया है तो मुझे अपना बना लो।
मैंने सोचा चलो कि मुफ़्त में चोदने के लिये माल मिल रहा है तो मना क्यों किया जाए।
उसके बाद हम एक दिव्य चुम्बन में खो गए। फ़िर थोड़ी देर बाद जब हमें होश आया तो वो मेरी बांहों में थी। उसकी साँस काफ़ी तेज चल रही थी। अब कहीं उसकी मम्मी न ये सब देख ले तो हम शान्त हो गए।
मैं दिव्या से पूछने लगा- उसका पेपर कैसा हुआ?
उसने कहा- एकदम ठीक..!
मैंने कहा- तुम खाना खा लो.. हम शाम को मिलेंगे।
मैं वहाँ से चला गया। घर जाते ही उसके नाम की एक मुठ मारी। मैं बहुत खुश था, शाम को पढ़ाने उसके घर पहुँचा तो देखा दिव्या एकदम तैयार बैठी थी।
उस दिन उसने पीले रंग का सूट पहन रखा था। क्या लग रही थी वो उस सूट में..! शायद उसे पता था कि आज उसके साथ क्या होने वाला है।
मैंने कहा- दिव्या तुम बहुत सुन्दर लग रही हो..! तो उसने मुझे चुम्बन करते हुये कहा- मम्मी बाहर गई हैं, कुछ देर में आयेंगी।
तो मैंने कहा- इरादा क्या है?
“जो तुम कहो !” उसने कहा।
इतना सुनते ही मैंने उसके होंठों को अपने होंठों से सटा दिया।
मैंने बिना देर किए उससे उसके एक-एक कपड़े को अलग कर दिया।
उसका एक-एक अंग मानो भगवान ने साँचे में ढाल कर बनाया हो।
फ़िर हम बेड पर आ गए, थोड़ी देर तक हम 69 की पोजीशन में थे।
मैंने अपनी उंगली से उसकी चूत की फ़ांकों को अलग किया और अपनी जीभ से चूसने लगा।
उसकी अंगुलियाँ मेरे बालों में फ़िरने लगीं और अपनी चूत उठा-उठा कर मुझसे चुसवाने लगी।
उसने कहा- अब बर्दाश्त नहीं हो रहा है, मुझे अपना बना लो। प्लीज़ मुझे मत तड़पाओ, डाल दो न अब..!
मैंने झटके से लंड उसकी चूत में डाल दिया। वो दर्द से चीख उठी, उसकी झिल्ली फट गई और उसकी चूत से खून बहने लगा।
वो मछली की तरह छटपटा रही थी। मैं कुछ देर ऐसे ही थमा रहा।
उसकी आँखों से आँसू निकल आए, मैंने अपने होंठ उसके होंठों से मिला दिए।
उसका दर्द कुछ कम हुआ तो मैं धीरे-धीरे ऊपर-नीचे होने लगा। उसको अभी भी दर्द हो रहा था, लेकिन दर्द के साथ मज़ा भी आ रहा था।
वो बिस्तर पर इधर-उधर होने लगी और उसका शरीर अकड़ने लगा, वो झटके खाने लगी और ‘आहें’ भरते हुए झड़ने लगी।
वो लगातार, ‘आआ… आअह… उई… ईई… ईईइ… आआ…’ कर रही थी।
उसकी ‘आआह ऊउई ईईई म्मम्म म्मह..’ की आवाजों से कमरा गूंज रहा था।
अब उसका दर्द जाता रहा और वो भी मेरा साथ देने लगी, वो अपने चूतड़ उठा-उठा कर मेरा साथ देने लगी।
साथ ही वो सेक्सी आवाजें भी निकाल रही थी, “आअह हिस्स हम्म आह हाहा..” कर रही थी।
मेरा लंड बड़ी तेज़ी के साथ उसकी चूत को चोदे जा रहा था। अचानक उसकी चूत में मेरे लंड पर दबाव बना लिया और उसकी सिसकारियाँ चीखों में बदल गईं- और जोर से.. ! और जोर से.. ! फाड़ दो मेरी चूत को.. आ अह.. उई ईइ मा आ आ अह.. मैं मर गई..!
फ़िर हम दोनों ही एक साथ झड़ गए में उसकी चूत में झड़ गया।
उस दिन मैंने उससे दो बार चोदा, फ़िर हम बाथरुम गए, एक-दूसरे को साफ़ किया और फ़िर पढाई करने लगे।
अब जब भी मौका लगता है। हम चुदाई करते हैं। उस साल दिव्या अच्छे नम्बरों से पास हुई। उसने मुझे ‘धन्यवाद’ बोला।
मैंने कहा- ऐसे काम नहीं चलेगा.. तुम्हें पार्टी देनी पड़ेगी।
उसने कहा- ठीक है, जानू आज हम डिनर पर चलेंगे।
हमारा ये सिलसिला यूँ ही चलता रहा। मैंने कभी नहीं सोचा था कि दिव्या से अलग होना पड़ेगा, पर वो अशुभ दिन भी आया जब मुझे दिव्या से अलग होना पड़ा। उसके पापा का ट्रान्स्फ़र हो गया। वो जाने से पहले मुझसे लिपट कर बहुत रोई, लेकिन मैंने उसे समझया। आज भी अक्सर उसका फ़ोन आ जाता है और हम घंटों बात करते हैं।
दिव्या से मैं बाद में मिला तो कैसे उसकी चुदाई की, यह मैं आप को फिर कभी सुनाऊँगा।
मैंने पहली बार कोई कहानी लिखी है मेरा हौसला जरुर बढ़ाईएगा, आप मुझे ईंमेल कर सकते हैं।
shreyans019@gmail.com

मेरी चालू बीवी-31

मेरी चालू बीवी-31

इमरान
सलोनी ने मधु का हाथ पकड़ कर खींच कर सीधे मेरे तने हुए लण्ड पर रख दिया और बोली- तू भी तो पागल है.. बदला क्यों नहीं लेती… तू भी देख ..कि कहीं तेरे भैया ने तो सूसू नहीं की.. हे हे हे हे…
सलोनी के इस करतब से मैं भौंचक्का रह गया.. और शायद मधु भी…
हाथ के खिंचने से वो सलोनी के ऊपर को आ गई थी.. सलोनी ने ना केवल मधु का हाथ मेरे लण्ड पर रखा बल्कि उसको वहाँ पकड़े भी रही कि कहीं मधु जल्दी से हटा न ले…
मधु का छोटा सा कोमल हाथ मेरे लण्ड को मजे दे ही रहा था कि अब मधु ने भी मेरी समझ पर परदा डालने वाली हरकत की…
उसने कसकर अपनी छोटे छोटे हाथ से बनी जरा सी मुट्ठी में मेरे लण्ड को जकड़ लिया…
मधु- हाँ भाभी, आप ठीक कहती हो… क्या अब भी भैया सूसू कर देते हैं बिस्तर पर?
सलोनी- हा हा… हाँ बेटा… तुझे क्या पता कि ये अब भी बहुत नालायक हैं.. ना जाने कहाँ कहाँ मुत्ती करते हैं… मेरे कपड़े तक गीले कर देते हैं…
मैंने मधु के हाथ को लण्ड से हटाने की कोई जल्दी नहीं की… लेकिन कुछ प्रतिवाद का दिखावा तो करना ही था इसलिए..
मैं- तुम दोनों पागल हो गई हो क्या?? यह क्या बकवास लगा रखी है?
तभी मधु मेरे लण्ड को सहलाते हुए अपना हाथ लण्ड के सुपाड़े के टॉप पर ले जाती है.. उसको कुछ चिपचिपा महसूस हुआ… मेरे लण्ड से लगातार प्रीकम निकल रहा था…
मधु- हाँ भाभी.. आप ठीक कह रही हो… भैया ने आज भी सूसू की है.. देखो कितना गीला है…
सलोनी- हा हा हा…
मैं- हा हा… चल पागल…फिर तो तूने भी की है ..अपनी देख वहाँ भी कितनी गीली है…
शायद सलोनी जैसी समझदार पत्नी बहुत कम लोगों को मिलती है… मेरा दिल कर रहा था कि जमाने भर की खुशियाँ लाकर उसके कदमों में डाल दूँ…
मेरे लण्ड और मधु की चूत के गीलेपन की बात से ही वो समझ गई कि हम दोनों अब क्या चाहते हैं… उसने बिना कुछ जाहिर करे मधु को एक झटके से अपने ऊपर से पलटकर मेरी ओर कर दिया और खुद मधु की जगह पर खिसक गई।
फिर बड़े ही रहस्यमयी आवाज में बोली- ..ओह तुम दोनों ने मेरी नींद का सत्यानाश कर दिया… तू इधर आ और अब तुम दोनों एक दूसरे की सूसू को देखते रहो.. कि किसने की और किसने नहीं की सूसू…

दोस्त की बीवी की जम कर चूत मारी

दोस्त की बीवी की जम कर चूत मारी

यह देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया। हम दोनों एक ही बिस्तर पर बैठे थे।
रात के करीब 11 बजे थे, तो मैंने कहा- मैं जा रहा हूँ।
तो वो बोली- आप यहीं पर सो जाओ।

चूची से जीजाजी की गाण्ड मारी-3

चूची से जीजाजी की गाण्ड मारी-3

सुधा
मैं बोली- जीजाजी उसे ज़्यादा भाव ना दीजिएगा नहीं तो वह जौंक की तरह चिपक जाएगी.. पर जीजाजी वह है बड़ी भली, बस चुदाई के मामले में ही थोड़ी लंगोटी से कमजोर है।
“आने दो देखता हूँ.. कमजोर है या खिलाड़ी है..!”
चमेली के जाने के बाद साफ-सफाई के लिए हम दोनों बाथरूम में आ गए। मैंने फव्वारा खोल दिया। हम दोनों के नंगे जिस्म पर पानी की फुहार पड़ने लगी।
बाथरूम में लगे बड़े शीशे में मैं देख रही थी, फव्वारे के नीचे मेरे उत्तेजक बदन पर पानी पड़ रहा था।
मेरे तने हुए मम्मों से टपकता पानी जो पैरों के बीच मेरी बुर से होता हुआ पैरों पर छोटी-छोटी धार बनाते हुए नीचे गिर रहा था।
मेरी सुपुष्ट चूचियों से गिरता हुआ पानी आज बहुत अच्छा लग रहा था।
जीजा के चौड़े सीने से बहता पानी उनके लौड़े से धार बनाकर बह रहा था, जैसे वे मूत रहे हों।
मैंने उनका लण्ड हाथ में ले लिया और सुपारे को खोलने और बंद करने लगी। उनका लण्ड भी मेरे हाथ में आते ही सजग हो गया और मेरी बुर को देख कर अकड़ने लगा।
मैंने मदन जीजाजी के नंगे सुपुष्ट शरीर को अपनी छाती से चिपका कर उनके होंठ अपने होंठों में ले लिया।
मेरी कसी हुई चूचियाँ जीजाजी के सीने में रगड़ खाने लगीं।
मैंने उनके शिश्न को पकड़ कर अपनी बुर से सटा लिया और थोड़ा पैर फैला कर उसे अपने यौवन-द्वार पर रगड़ने लगी।
जीजाजी मेरे मम्मों को दबाते और सहलाते हुए मेरे होंठों को चूस रहे थे और उनका लण्ड को मेरी मुनिया अपने होंठों से सहला रही थी। बैठकर नहाने के लिए रखे स्टूल पर मैंने अपना एक पैर उठा कर रख लिया और उनके लण्ड को बुर में आगे बढ़ने का मौका मिल गया। शीशे में दिख रहा उनका लण्ड अन्दर-बाहर होते हुए मेरी प्यारी बुर से खिलवाड़ कर रहा था।
मेरी मुनिया उसे पूरा अपने मुँह में लेने की कोशिश कर रही थी।
कुछ देर बाद मैं अपने को छुड़ा कर बाथटब को पकड़ कर झुक गई। मेरे चूतड़ उठे हुए थे और मेरा यौवन-द्वार दिखने लगा था। जीजाजी ने उस पर अपने तनतनाए हुए लण्ड को लगा कर धक्का दिया, पूरा लण्ड ‘गॅप’ से बुर में समा गया।
फिर क्या था लण्ड और चूत का खेल शुरू हुआ। सामने शीशे में जैसे ब्लू-फिल्म चल रही हो, जिसकी हेरोइन मैं थी और हीरो थे मेरे मदन जीजा।
जीजाजी का लण्ड मेरी बुर में अन्दर-बाहर हो रहा था, जिससे बुर बावली हो रही थी पर मुझे शीशे में लण्ड का घुसना और निकलना बहुत ही कामुक लग रहा था।
फव्वारे से पानी की फुहार हम दोनों पर पड़ रही थी। हम लोग उसकी परवाह ना कर तन की तपिश मिटाने में लगे थे।
जीजाजी पीछे जब मेरी चूचियाँ पकड़ कर बराबर धक्के लगाए जा रहे थे।
शीशे में अपनी चुदाई देख कर मैं काफ़ी गरम हो चुकी थी, इसलिए मैं अपने चूतड़ को आगे-पीछे कर गपा-गप लौड़े को बुर में ले रही थी और बोलती जा रही थी, “जीजाजी..! बहुत अच्छा लग रहा है…इस चुदाई में… चोद दो मेरे सनम.. जिंदगी का पूरा मज़ा ले लो …हाय.. ! मेरे चोदू-बलम… तुम्हारा लौड़ा बड़ा जानदार है… मारो राजा धक्का… और ज़ोर से… हाय राजा और ज़ोर से… और ज़ोर से…… हाय..! इस जालिम लौड़े से फाड़ दो मेरी बुर्र्र्र्र्र्र्ररर ब्ब्ब्बबबाहुत अच्छाआआ लगगगग रहा हाईईईईई…!”
पीछे से चुदाई में मेरे हाथ झुके-झुके दुखने लगे थे।
मैंने जीजाजी से कहा- राजा ज़रा रूको, इस तरह पूरी चुदाई नहीं हो पा रही है, लेट कर चुदने में पूरा लौड़ा घुसता है और झड़ने में बहुत मज़ा आता है..!”
मैंने फव्वारे को बंद किया और वहीं गीले फर्श पर लेट गई और बोली- अब ऊपर
आ कर चुदाई करो..!”
अब जीजाजी मेरे ऊपर थे और मेरी बुर में लण्ड डालकर भरपूर चुदाई करने लगे अब मेरी बुर में लौड़ा पूरा का पूरा अन्दर-बाहर हो रहा था और मैं नीचे से सहयोग करते हुए बड़बड़ा रही थी, “आह.. अब चुदाई का मज्जा मिल रहा है … मारो राजा…मारो धक्का… और ज़ोर से… हाँ..! राजा इसी तरह से… भर दो अपने मदन रस से बुर को… अहह इसस्स्स्स्स्स ओह..!
जीजाजी कस-कस कर धक्का मार कर मेरी बुर को चोद रहे थे। थोड़ी देर बाद उनके लण्ड से लावा निकला और मेरी बुर की गहराई में झड़ गए और मैं भी साथ-साथ खलास हो गई। मैं सेफ पीरियड में थी, इसलिए परवाह नहीं थी।
कुछ देर पड़े रहने के बाद मैं बुर को साफ कर जल्दी बाहर निकल आई, बाहर आकर बिस्तर को ठीक किया, कमरा व्यवस्थित किया और भाभी के कमरे से एक ब्लू-फिल्म की सीडी लाकर ड्रेसिंग टेबल के दराज में डाल दी।
तब तक जीजाजी तौलिया लपेटे कर बाथरूम से बाहर आ गए।
वे फ्रेश दिख रहे थे शायद वे साबुन लगा कर ठीक से नहा लिए थे।
उन्हें देख कर, “मैं भी फ्रेश हो कर आती हूँ।” कह कर बाथरूम में घुस गई।
इसी बीच चमेली चाय लेकर ऊपर आई और कमरे के बाहर से आवाज़ दी, “जीजाजी आँखे बंद करिए.. मैं चाय लेकर आई हूँ..!”
मैं बाथरूम से निकल कर बाहर आने वाली थी, तभी सोचा, देखें ये लोग क्या करते हैं।
मैं दरवाजे के शीशे के प्रतिबिम्ब से इन दोनों को देखने लगी।
जीजाजी बोले- आँख क्यों बंद करूँ..!”
चमेली बड़ी मासूमियत से बोली- मैं नंगी हूँ ना..!”
जीजाजी बोले- अब आ भी जाओ, सुधा बाथरूम में है.. मुझसे क्या शरमाना..!”
चमेली चाय लेकर नंगी ही अन्दर आ गई। इस बार चाय केतली में थी।
चाय मेज पर रख कर अपनी चूचियों और चूतड़ों को एक अदा से हिलाया मानो कह रही हो ‘मंगता है तो राजा ले ले… नहीं तो.. मैं ये चली..!’
फिर उसने जीजा जी की तौलिया को खींच लिया। जीजाजी ने उसे अपनी बाँहों में भर लिया।
वह अपने को छुड़ाती हुए बोली- फिर चाय ठंडी करनी है क्या..!”
“सुधा को बाथरूम से आ जाने दे साथ-साथ चाय पिएँगे, तब तक तू दराज से सिगरेट निकाल कर ले आ..!”
चमेली ने दराज से सिगरेट और माचिस निकाली एक सिगरेट को अपने मुँह में लगा कर सुलगा दिया और एक लम्बा कश लगा कर सिगरेट को अपनी बुर के मुँह में खोंस कर बोली- जीजाजी अब मेरी बुर से सिगरेट निकाल कर पियो मस्ती आ जाएगी।
मदन जीजा ने सिगरेट बुर से निकाल कर उसकी चूत को चूम लिया और फिर आराम से सिगरेट पीने लगे।
चमेली बोली- तब तक मैं अपना सिगार पीती हूँ..!
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और उसने मदन के लौड़े को अपने मुँह में ले लिया। मदन ने सिगरेट खत्म होने तक लौड़ा चुसवाने का मज़ा लिया, फिर उसे लिटा कर उसके ऊपर चढ़ गए और अपना लौड़ा उसकी चूत में पेल दिया।
पहले तो चमेली तिलमिलाई फिर हर धक्के का मज़ा लेने लगी- जीजाजी आप आदमी नहीं सांड हैं..! जहाँ चूत देखी पिल पड़े… अब जब मेरी बुर में घुसा ही दिया है तो देखूँगी कि तुम्हारे लौड़े में कितना दम है… चोदो राजा चोदो इस बार चुदाई का पूरा सुख उठाऊँगी… हय मेरे चुदक्कड़ जीजा फाड़ कर लाल कर दो इस कमीनी बुर को … और ज़ोर से कस-कस कर धक्का मारो … ओह अहह इसस्स्स्सस्स बहुत मज़ा आ रहा है..!”
चमेली जानती थी कि मैं बाथरूम में हूँ इसलिए मेरे निकलने के पहले झड़ लेना चाह रही थी।
जब कि मैं बाथरूम से निकल कर इन दोनों की चुदाई का खेल बहुत देर से देख रही थी। चमेली गंदे-गंदे शब्दों का प्रयोग करके जीजाजी को जल्दी झड़ने पर मजबूर कर रही थी और नीचे से चूतड़ उठा-उठा कर मदन के लण्ड को अपनी बुर में निगल रही थी। जबकि जीजाजी कई बार चोद कर झड़ चुकने के कारण झड़ ही नहीं रहे थे। एक बार चमेली झड़ चुकी थी, लेकिन जीजाजी उसकी बुर में लण्ड डालकर चोदे जा रहे थे।
मैं उन दोनों के पीछे खड़े हो कर उनकी घमासान चुदाई देख रही थी। मेरी बुर भी फिर से पनिया गई, पर मेरी हिम्मत इस समय और चुदवाने की नहीं हो रही थी इसलिए चमेली को नीचे से मिमियाते देख बड़ा मज़ा आ रहा था।
चमेली ने एक बार फिर साहस बटोरा और बोली- ओह माँ..! कितनी ही बार झड़ाओगे मुझे लेकिन मैं मैदान छोड़ कर हटूँगी नहीं… चोदो राजा और चोदो …बड़ा मज़ा आ रहा है… चोदू..ऊऊ ओह बलम.. हरजाई …और कस-कस कर चोदो और ज़ोर से मारो धक्के.. फाड़ दो बुर… ओह अहह इसस्स्स्सस्स हाँ..! सनम आ भी जजाऊऊऊ चूत का कबाड़ा कर के ही दम लोगे क्या..! अऊऊऊ अब आ भी जाओ..!”
जीजाजी ऊपर से बोले- रूको रानी अब मैं भी आ रहा हूँ..!”
और दोनों एक साथ झड़ कर एक-दूसरे में समा गए।
जीजाजी चमेली के ऊपर थे उनका लौड़ा चमेली के बुर में सिकुड़ रहा था, मदन की गाण्ड कुछ फैल गई थी। मैंने पीछे से जाकर जीजाजी की गाण्ड में अपनी चूची लगा दी।
जीजाजी समझ गए बोले- क्या करती हो..!”
मैंने चूची की नोक से से दो-तीन धक्के उनकी गाण्ड के छेद में लगाए और बोली- अपने चोदू लाल की गाण्ड मार रही हूँ। जहाँ बुर देखी पिल पड़ते हैं..!
चमेली जीजाजी के नीचे से निकलती हुई बोली- दीदी मैं भी मारूँगी.. मेरी तुमसे बड़ी है..!
सब हँसने लगे।
चमेली की चुदाई देख कर मैं गर्म हो गई थी लेकिन मम्मी के आने का समय हो रहा था, फिर चाय भी पीनी थी, इसलिए मन पर काबू करते हुए बोली- अब सब लोग अपने-अपने कपड़े पहन कर शरीफ बन जाइए, मम्मी के आने का समय हो रहा है।
फिर हम लोग अपने-अपने कपड़े ठीक से पहन कर चाय की मेज पर आ गए।
चमेली केतली से चाय डालते हुए बोली- दीदी देख लो, चाय ठंडी हो गई हो तो फिर से बना लाऊँ।
जीजाजी चाय पीते हुए बोले- ठीक है, चमेली इस बार केतली में चाय इसीलिए बना कर लाई थी कि दुबारा चाय गर्म करने के लिए नीचे ना जाना पड़े और दीदी अकेले-अकेले…!
जीजाजी चमेली की तरफ गहरी नज़र से देख कर मुस्काराए।
“जीजाजी आप बड़े वो हैं..!” चमेली बोली।
“वो क्या..!”
प्रिय पाठकों आपकी मदमस्त सुधा की रसभरी कहानी जारी है। आपके ईमेल की प्रतीक्षा में आपकी सुधा बैठी है।
alishachuddakad@gmail.com

बस में मिली अनीता की सील तोड़ी

बस में मिली अनीता की सील तोड़ी

राहुल
हैलो दोस्तो, आज मैं पहली बार अपनी आपबीती आप सबको बताने जा रहा हूँ। मैं राहुल म.प्र. का रहने वाला हूँ और मैं दिखने में सामान्य सा लड़का हूँ। मेरी उम्र 28 साल है।
आगे मैं अपनी घटना बताने जा रहा हूँ, जो आपको बिल्कुल झूठ लगेगी मगर सच है।
यह उस समय की घटना है, जब मैं भोपाल में कंप्यूटर कोर्स कर रहा था।
मैंने आज तक सारे त्यौहार कभी भी घर से बाहर नहीं मनाए थे। अभी होली की त्यौहार आने वाला था और मैं अपना कंप्यूटर क्लास करके शाम को भोपाल से बस में घर आने के लिए बैठ गया।
मेरे शहर तक पहुँचने में बस से करीबन चार घंटे लगते हैं। मुझे बस में सफर करना अच्छाट लगता है इसलिए बस में बैठ गया। लेकिन मुझे मालूम नहीं था कि यह सफर इतनी खुशनुमा होगा। मैं बस में खिड़की के पास बैठ गया और करीबन आधा सफर पूरा कर लिया था।
फिर एक जगह कुछ देर के लिए बस रूकी तो मैं सिगरेट पीने नीचे आया और जब चढ़ा तो देखा कि एक साँवली सी लड़की मेरी सीट के आगे वाली सीट पर बैठी हुई है‍। तब से मेरा मन उस पर मचल उठा।
वो लड़की 18 साल की थी, देखने में साँवली लड़की थी, मगर उसका फिगर जबरदस्त था। गोलाई का आकार लिए संतरे उसको देखने में सेक्स-बम बना रहे थे। नीचे टाइट जींस और ऊपर गुलाबी रंग का टॉप पहने हुई थी।
अब बस आगे बढ़ने लगी, तो मैं अपना पैर धीरे से आगे ले गया और उस लड़की के पैर में हल्का सा छुआ तो उसने अपना पैर आगे कर लिया।
मेरे मन में थोड़ा डर और थोड़ी उत्सुकता ने घर बना लिया था। फिर मैं अपना हाथ सीट से होते हुए उसके बालों को सहलाने लगा। सामने से कुछ रिस्पांस नहीं आया तो थोड़ा डर लगने लगा कि कहीं चिल्लाने न लगे।
फिर कुछ दूर जाने के बाद एक बार फिर अपना हाथ उसके गर्दन पर ले गया। लड़की तब भी कुछ नहीं बोली, इससे मुझे थोड़ी और हिम्मत आ गई।
फिर जब वह कुछ नहीं बोली, तो एक बार फिर उसके गर्दन, बाल और उसके बालियों से खेलने लगा। मुझे यह नहीं पता था कि वो लड़की कहाँ उतरने वाली थी, इसलिए मैंने बस टिकट पर अपना नम्बर लिख कर सामने बैठी उस लड़की को दे दिया क्योंकि मुझे पता था कि लड़की अब कुछ नहीं बोलेगी।
उसने वह टिकट जिस पर मेरा नम्बर था, लेकर मेरे हाथों को अपने हाथ में जकड़ लिया, उसकी वो बात मुझे बहुत अच्छी लगी।
जब यह सब हुआ तो मैं सीट की बगल से हाथ आगे ले जाकर उसके संतरे जैसे आकार वाली चूचियों से खेलने लगा।
करीबन आधे घंटे के सफर के बाद वो उतर गई और उतरते समय वो कातिल निगाहों से देख कर मुस्कुरा कर चल दी।
मैं अब बस में बैठ कर उसके साथ सफर के बारे में सोचने लगा। लड़की बहुत ही अच्छी थी और मुझे यह समझ में नहीं आ रहा था कि लड़की इतनी जल्दी कैसे पट गई।
उसी के बारे में सोचते-सोचते कब घर पहुँचा, कुछ समझ में नहीं आया। अब रात को उसके बारे में सोच कर दो बार मुठ भी मार चुका था। अगले दिन होली मनाने के बाद घर में दो दिन और रूका फिर भोपाल आ गया।
मुझे लगने लगा कि वो लड़की कभी फोन नहीं करेगी और उसको एक खूबसूरत सपना समझ कर भूल गया।
मगर मुझे अच्छे से याद है मैं और मेरा दोस्त शुक्रवार को एक फिल्म देखने गए थे, तब एक अनजान नम्बर से फोन आया।
पहले तो मैंने सोचा कि फोन न उठाऊँ मगर पता नहीं क्या हुआ, मैंने बाहर आकर फोन रिसीव किया और दूसरी तरफ से एक लड़की की आवाज आई और उसने अपना नाम अनीता (बदला हुआ नाम) बताया। वो लड़की क्रिश्चियन थी।
मैंने पूछा- कौन अनीता?
तो उसने मुझे बस वाले सफर के बारे में बताया। मैं बहुत खुश था, अब फिल्म भी बेकार लगने लगी थी। रात में जाकर मैं बाथरूम में गया और फिर मुठ मारी और सो गया।
कुछ दिनों तक फोन पर ही बात करने के बाद उसने अपने घर का पता दिया और मुझसे मिलने का समय दोपहर को 2 बजे का तय किया क्योंकि उसके बाद उसके घर में और कोई नहीं रहता था।
दोस्तो, जब फोन पर बात हो रही थी, तब उसने बताया कि उसके साथ उस दिन उसके पिताजी भी थे। यह सुनकर तो मेरा दिल और ‘धक’ से रह गया। मगर वो बात बीत चुकी थी, इसलिए ज्यादा डरने की बात नहीं थी।
मैं अगले दिन 2 बजे उसके घर पहुँचा। घर ढूँढने में थोड़ी परेशानी हुई, लेकिन आँखों में चुदाई के सपने लिए घर से निकला था तो खाली हाथ तो वापस नहीं आने वाला था।
रास्ते में कंडोम का एक पैकेट और चाकलेट ले गया था, क्योंकि पहली बार खाली हाथ जाना अच्छा नहीं लग रहा था।
मैं जब उसके घर पर गया तो वो मुझे बैठने के लिए बोली और मेरे लिए पानी एक गिलास लाकर मुझे पकड़ाने लगी तो मैंने उसको पकड़ कर उसको अपनी गोदी में बिठा लिया और धीरे-धीरे उसके गालों चूमने लगा।
वो ना-नुकुर कर रही थी, मगर फिर भी मैं उसको चूमने लगा।
उसके बाद उसके होंठों को फिर उसकी सुराहीदार गरदन को।
मेरे इन मदमस्त चुम्बनों से वो थोड़ी गर्म होने लगी और मैंने एक हाथ से उसकी चूचियों को मसलने लगा।
धीरे-धीरे चुम्बन का कार्य भी प्रगति पर था और हमारे शरीर से कपड़े भी धीरे-धीरे अलग हो रहे थे।
फिर मैंने उसको अपना लण्ड चूसने के लिए बोला, तो वो मना करने लगी।
फिर धीरे से वो मेरा लण्ड चूसने लगी, मगर ज्यादा देर तक चूस नहीं पाई। मैं उसकी चूत को सहलाने लगा और सहलाते-सहलाते वो इतनी उत्तेजित हो गई कि एक बार वो झड़ गई थी।
अब वो कहनी लगी, “प्लीज राहुल, अब करो…! मैं अब और नहीं सह सकती।”
वो अपने मुँह से सीत्कारें निकाल रही थी। मुझे डर लग रहा था कि कोई सुन कर अन्दर ना आ जाए।
मेरा लण्ड भी तन गया था और अब मुझ में भी उसे रोकने की क्षमता नहीं रही। मैंने अपना लण्ड अनीता के चूत में जैसे ही डाला उसकी चूत गीली होते हुए भी मेरा लण्ड बाहर फिसल गया।
तब मैंने अनीता से पूछा- क्या  तुमने पहले किसी के साथ चुदाई की है..!
तो उसने मना कर दिया और कहने लगी, “ये मेरी पहली चुदाई है।”
कुछ देर रूक कर मैंने पहले अपने लण्ड पर तेल लगाया और थोड़ा तेल उसकी चूत पर भी मल दिया। उसके बाद धीरे-धीरे मैंने अपने लण्ड महाराज को उसकी चूत महारानी में प्रवेश कराया।
जैसे ही मैंने लौड़ा अन्दर डाला, उसकी आँखों से आँसू निकल आए। उसकी दर्द मिश्रित तेज आवाज हमारे होंठ मिले होने के कारण बाहर नहीं निकल पाई।
जब मेरा लण्ड उसकी चूत में घुस गया, तो बिस्तर पर खून के धब्बे दिखाई देने लगे।
हम थोड़ा सा डर गए, लेकिन मैंने कहीं पढ़ा था कि जब लड़की पहली बार चुदती है तो उसकी चूत से खून निकलता है।
जब वो थोड़ा कंफर्टेबल हुई तो फिर हम दोनों अपनी चुदाई की रफ़्तार बढ़ाते चले गए।
वो भी मेरा साथ देने लगी और कमरे में चुदाई की ‘फच-‘फच की आवाज गूंज रही थी और उसके मुँह से सीत्कारें निकल रही थीं।
उसकी मादक आवाजें माहौल को जोशीला बना रही थीं।
करीबन 20 मिनट की चुदाई के दौरान वो दो बार झड़ चुकी थी। अब मेरा लण्ड शांत होने लगा और कुछ देर के बाद फिर हमारे बीच काम-क्रीड़ा चालू हुई।
मैं 2 से 4 बजे के बीच में उसको दो बार चोद चुका था। वो भी बेहाल हो चुकी थी और मैं भी बेहाल हो चुका था।
मगर इस चुदाई के बाद मुझे जो शांति मिली उसके बारे में मैं कुछ नहीं बता सकता। मौसम एकदम से सुहाना लगने लगा।
मैं जब पेशाब करने गया तो मेरा लण्ड खून से हल्का लाल दिख रहा था। हमने कुछ देर आराम किया और फिर मैं अपने घर चला गया।
मगर इस चुदाई के बाद मुझे पता चला कि चुदाई कितनी जरूरी है।
अनिता और उसकी सहेली की चुदाई की कहानी फिर कभी।
तो दोस्तो, मेरी पहली कहानी कैसी लगी जरूर बताइए।
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मेरी चालू बीवी-32

मेरी चालू बीवी-32

इमरान
मधु ने सलोनी की ओर देखते हुए अपने चूतड़ को उठाकर अपने हाथ और पैर से समीज को पूरा निकाल दिया…
सलोनी अपने नंगे चूतड़ को उठा हमारी ओर करवट लिए वैसे ही लेटी थी… उसकी साँसें बता रही थी कि वो सो गई है या सोने का नाटक कर रही है…
मेरा कमर से लिपटा कपड़ा तो कब का खुलकर बिस्तर से नीचे गिर गया था…
अब मधु भी पूरी नंगी हो गई थी…
नाईट बल्ब की नीली रोशनी में उसका नंगा बदन गजब लग रहा था…
मैंने नीचे झुककर उसकी एक चूची को पूरा अपने मुँह में ले लिया…
उसकी पूरी चूची मेरे मुँह में आ गई… मैं उसको हल्के हल्के चूसते हुए अपनी जीभ की नोक से उसके नन्हे से निप्पल को कुरेदने लगा…
मधु पागल सी हो गई… उसने अपनी मुट्ठी में मेरे लण्ड को पकड़ उमेठ सा दिया…
मैंने अपना बायां हाथ उसकी जांघों के बीच ले जाकर सीधे उसकी फ़ुद्दी पर रखा और अपनी उंगली से उसके छेद को कुरेदते हुए ही एक उंगली अंदर डालने का प्रयास करने लगा…
मधु कुनमुनाने लगी…
लगता है उसको दर्द का अहसास हो रहा था…
मुझे संशय होने लगा कि इतने टाइट छेद में मेरा लण्ड कैसे जायेगा…
वाकयी उसका छेद बहुत टाइट था… मेरी उंगली जरा भी उसमें नहीं जा पा रही थी…
मैंने अपनी उंगली मधु के मुँह में डाली… उसके थूक से गीली कर फिर से उसके चूत में डालने का प्रयास किया..
मेरा बैडरूम मुझे कभी इतना प्यारा नहीं लगा… मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कि ज़िंदगी इतनी रंगीन हो सकती है…
मेरे सामने ही बेड के दूसरे छोर पर मेरी सेक्सी बीवी लगभग नंगी करवट लिए लेटी है… उसकी अति पारदर्शी नाइटी जो खड़े होने पर उसके घुटनो से 6 इंच ऊपर तक आती थी… इस समय सिमट कर उसके पेट से भी ऊपर थी… और मेरी जान अपने गोरे बदन पर कच्छी तो पहनती ही नहीं थी… उसके मस्त चूतड़ पीछे को उठे हुए मेरे सेक्स को कहीं अधिक भड़का रहे थे…
अब तक मजेदार भोजन खिलाने वाली मेरी बीवी ने आज एक ऐसी मीठी डिश मेरे सामने रख दी थी कि जिसकी कल्पना शायद हर पति करता होगा मगर उसे मायूसी ही मिलती होगी…
और खुद सोने का नाटक कर रही थी…
मधु के रसीले बदन से खेलते हुए मैं अपनी किस्मत पर रश्क कर रहा था…
इस छोटी सी लोंडिया को देख मैंने कभी नहीं सोचा था कि यह इतनी गर्म होगी और चुदाई के बारे में इतना जानती होगी…
मेरा लण्ड उसके हाथों में मस्ती से अंगड़ाई ले रहा था और बार-बार मुँह उठाकर उसकी कोमल फ़ुद्दी को देख रहा था, जैसे बोल रहा हो कि आज तुझे जन्नत की सैर कराऊँगा…
उसकी फ़ुद्दी भी मेरी उँगलियों के नीचे बुरी तरह मचल रही थी… वो सब कुछ कर गुजरने को आतुर थी…
शायद उसकी फ़ुद्दी होने वाले कत्लेआम से अनभिज्ञ थी…
मेरे और मधु के बदन पर एक भी कपड़ा नहीं था, मधु बार-बार मेरे गठीले एवं संतुलित बदन से कसकर चिपकी जा रही थी…
मेरा मुँह उसकी दोनों रसीली अम्बियों को निचोड़ने में ही लगा था… मैं कभी दाईं तो कभी बायीं चूची को अपने मुँह में लेकर चूस रहा था…
मधु कुछ ज्यादा ही मचल रही थी… उसने मेरी तरफ घूम कर अपना सीधा पैर मेरी कमर पर रख दिया…
मैंने भी अपना हाथ आगे उसकी फ़ुद्दी से हटा कर उसके मांसल चूतड़ों पर रख उसको अपने से चिपका लिया।
इस अवस्था में उसकी रसीली चूत मेरे लण्ड से चिपक गई…
शाम से हो रहे घटनाक्रम से मधु सच में सेक्स लिए पागल हो रही थी… वो अपनी चूत को मेरे लण्ड से सटा खुद ही अपनी कमर हिला रही थी.. उसकी रस छोड़ रही चूत मेरे लण्ड को और भी ज्यादा भड़का रही थी…
मैंने एक बात और भी गौर की कि मधु शुरू शुरू में बार बार सलोनी की ओर घूमकर देख रही थी, उसको भी कुछ डर सलोनी का था…
मगर अब बहुत देर से वो मेरे से हर प्रकार से खेल रही थी, उसने एक बार भी सलोनी की ओर ध्यान नहीं दिया था… या तो वासना उस पर इस कदर हावी हो चुकी थी कि वो सब कुछ भूल चुकी थी या अब वो सलोनी के प्रति निश्चिंत हो चुकी थी !
हाँ, मैं उसी की ओर करवट से लेटा था तो मेरी नजर बार बार सलोनी पर जा रही थी…
कमाल है.. उसने एक बार भी ना तो गर्दन घुमाई थी और ना उसका बदन जरा भी हिला था…
सलोनी पूरी तरह से मधु का उद्घाटन करवाने को तैयार थी…
मेरा लण्ड इस तरह की मस्ती से और भी लम्बा, मोटा हो गया था…
मैं अपने हाथ से उसके चूतड़ों को मसलते हुए अपनी ओर दबा रहा था और मधु अपने कमर को हिलाते हुए मखमली चूत को मेरे लण्ड पर मसल रही थी…
मेरे मुँह में उसकी चूची थी… हम दोनों बिल्कुल नहीं बोल रहे थे..
मगर फिर भी मेरे द्वारा चूची चूसने की ‘पुच पिच’ जैसी आवाजे हो ही रही थीं…
मधु की बेकरारी मुझे उसके साथ और भी ज्यादा खेलने को मजबूर कर रही थी…
मैंने उसको सीधा करके बिस्तर पर लिटा दिया…
मगर इस बार अब मैं उसके ऊपर आ गया, एक बार उसके कंपकंपाते होठो को चूमा, फिर उसकी गर्दन को चूमते हुए जरा सा उठकर नजर भर मधु की मस्त उठानों को देखा…
दोनों चूचियाँ छोटे आम की तरह उठी हुई जबरदस्त टाइट और उन पर पूरे गुलाबी छोटे से निप्पल…
जानलेवा नजारा था…
मैंने दोनों निप्पल को बारी बारी से अपने होंटों से सहलाया..
फिर नीचे सरकते हुए उसके पतले पेट तक पहुँचा, अब मैंने उसके पेट को चूमते हुए अपनी जीभ उसकी प्यारी सी नाभि पर रख दी…
मैं जीभ को नाभि के चारों ओर घुमाने लगा…
मधु मचल रही थी, उसके मुख से अब हल्की हल्की आहें निकलने लगी- अह्ह्हाआ… ह्ह्ह्ह… आ…
मैं थोड़ा और नीचे हुआ… मैंने मधु के पैरों को फैलाया और उसकी कोमल कच्ची कली फ़ुद्दी को पहली बार इतनी नजदीक से देखा…
उसकी दोनों पत्तियाँ कस कर एक दूसरे से चिपकी थी…
पूरे वस्तिक्षेत्र पर एक भी बाल नहीं था… कुछ रोयें से थे बस…
सलोनी की चूत भी गजब की है बिल्कुल छोटी बच्ची जैसी, मगर उस पर बाल तो आ चुके ही थी… भले ही वो कीमती हेयर रेमूवर से उनको साफ़ कर अपनी चूत को चिकना बनाये रखती थी…
और फिर लण्ड खाने से उसकी चूत कुछ तो अलग हो गई थी…
मगर मधु की चूत बिलकुल अनछुई थी, उस पर अभी बालों ने आना शुरू ही किया था… जिस चूत में अंगुली भी अंदर नहीं जा रही थी उसका तो कहना ही क्या…
इतनी प्यारी कोमल मधु की चूत इस समय मेरी नाक के नीचे थी… उसकी चूत से निकल रहे कामरस की खुशबू मुझे मदहोश कर रही थी…
मैंने अपनी नाक उसकी चूत के ऊपर रख दी…
कहानी जारी रहेगी।
imranhindi@hmamail.com

जूही और आरोही की चूत की खुजली-5

जूही और आरोही की चूत की खुजली-5

पिंकी
दोस्तो, मैं एक बार फिर आ गई हूँ अपनी कहानी के अगले भाग के साथ।
अब तक अपने पढ़ा कि रेहान ने राहुल को बताया कि वो आरोही को स्टूडियो में ले जाएगा, वहाँ उसके थोड़े फोटो निकाल कर वापस ले आएगा, बाद में फ़ोन करेगा कि कुछ सेक्सी फ़ोटो चाहिए, तो राहुल आरोही को बोल कर घर में ही उसके पिक लेने के बहाने जो चाहे कर सकता है।
अब आगे…
रेहान की बात सुनकर राहुल के चेहरे पर ख़ुशी आ जाती है, राहुल- अरे यार, कैसी बात कर रहा है मैं तुमको कैसे भूल जाऊँगा और
वाह यार मान गया तेरे दिमाग़ को, मज़ा आ गया, अब तुम लोग जाओ मुझे भी एक काम से जाना है, बाद में बात करते हैं।
रेहान आरोही को लेकर वहाँ से चला जाता है।
रेहान- इस बैग में क्या है आरोही?
आरोही- फोटो निकालने के लिए अलग-अलग ड्रेस चाहिए न..! इसलिए मैंने अपने अच्छे-अच्छे ड्रेस ले लिए हैं..!
रेहान- गुड, वेरी स्मार्ट-गर्ल, पर जान.. कपड़ों का बंदोबस्त मैंने कर लिया है, चलो देखते हैं तुम क्या लाई हो..! अगर कुछ अच्छे ड्रेस हुए तो वो भी पहन लेना..!
कार सड़क पर दौड़ती रही, दोनों के बीच ज़्यादा बात नहीं हुई, बस सामान्य बातें ही होती रही।
लगभग 15 मिनट बाद कार एक बड़े से विला के सामने रुकी।
आरोही- यह कहाँ आ गए हम, आप तो स्टूडियो लेकर जा रहे थे न?
रेहान- अरे यार, मैं कोई छोटा-मोटा आदमी तो हूँ नहीं, जो किसी भी स्टूडियो में तुमको ले जाऊँ, यह मेरा विला है और इसमें स्टूडियो है। हम यहीं फोटो निकालेंगे।
आरोही- ओके रेहान जी.. जैसी आपकी मर्ज़ी..!
अन्दर जाकर रेहान ने आरोही को एक बड़े से कमरे में बैठाया। आरोही को अजीब सा लगा कि इतने बड़े घर में कोई नहीं दिखाई दे रहा है।
रेहान- क्या सोच रही हो आरोही?
आरोही- कुछ नहीं.. आपका घर इतना बड़ा है और यहाँ कोई नहीं है.. क्या आप अकेले रहते हो?
रेहान- अरे यार, पूरी फैमिली दुबई में है और यहाँ सब नौकर संभालते हैं। आज मैंने सब को छुट्टी दे दी है ताकि आराम से तुम्हारा टेस्ट ले सकूँ। यह लो पेप्सी पियो, चिल मारो यार..!
आरोही- ओके, जैसा आप ठीक समझो।
रेहान- आरोही आओ, अब काम शुरू करते हैं। बाद में डायरेक्टर साब भी आते होंगे तुम्हारा स्क्रीन टेस्ट वो ही लेंगे। मैं बस तुम्हारी अच्छी सी पिक निकाल कर उनको दे दूँगा।
आरोही यह बात सुनकर खुश हो जाती है।
रेहान- अपनी ड्रेस दिखाओ, कौन-कौन सी है, मैं बताता हूँ वो पहनो..!
आरोही बैग से कपड़े निकाल कर रेहान के सामने रख देती है। उन सब को रेहान गौर से देखता है, उनमें कुछ जींस टी-शर्ट और स्कर्ट थे।
रेहान- नहीं यार इनमें तो वो बात नहीं कि कोई हीरोइन पहने !
आरोही- सॉरी रेहान जी, मुझे यही अच्छे लगे तो मैं ले आई। अब आप बताओ मैं क्या पहनूँ?
रेहान ने उसे एक लिबास देकर कहा- वो सामने बाथरूम है, पहन कर आओ, मैं कैमरा सैट करता हूँ।
आरोही ने उस ड्रेस को पहन लिया।
दोस्तो, वो एक ब्लू हाफ-पैन्ट या यूं कहो कि चड्डी थी, क्योंकि जाँघ पूरी दिख रही थीं, बस चूत और चूतड़ों को ढका हुआ था और ऊपर के लिए एक हरी जैकेट जो इतना छोटी थी कि बस मम्मे ही छुप सकें, वो भी आधे..! बाकी ऊपर की गहराई साफ दिख रही थी।
आरोही वैसे तो खुले दिमाग़ की लड़की थी और ऐसे कपड़े पहनने में उसको कोई परेशानी नहीं हुई, पर रेहान के सामने वो भी ऐसी जगह जहाँ उन दोनों के अलावा कोई नहीं था, उसको थोड़ा अजीब लग रहा था।
पर वो अपने दिमाग़ से सारी बातें झटक कर बाहर आ गई।
रेहान- ओहो वाउ.. क्या मस्त लग रही हो.. गुड..!
उस ड्रेस में आरोही बहुत सेक्सी लग रही थी। रेहान का लौड़ा तन गया था, पर वो जल्दबाज़ी नहीं करना चाहता था।
उसने आरोही के 5-6 पिक लिए और पोज़ बताने के बहाने से कभी उसके लिप्स को टच करता तो कभी मम्मे को, उसके पीछे आकर उसके कूल्हों पर लौड़ा छुआ देता और हाथ उसके मम्मे पर रखता कि ऐसा पोज़ बनाओ, हाथ थोड़ा ऊपर करो, हाँ.. ऐसे ही..! इस तरह बस वो आरोही को छू कर मज़ा ले रहा था।
आरोही को थोड़ा अजीब तो लग रहा था, पर वो सब बातों को अनदेखा कर रही थी।
रेहान- गुड शॉट.. जान, अब दूसरा ड्रेस पहनो.. ये लो..!
आरोही उस ड्रेस को देखती है, वो एक जालीदार बॉडी फिट मैक्सी थी। जिसमें जाली इस टाइप की थी कि बड़े-बड़े होल हों और बहुत पतली मैक्सी थी। उसमें से बदन साफ दिखाई दे।
आरोही- रेहान जी ये कुछ ज़्यादा ही पतली और खुली नहीं है क्या..!
रेहान- ओहो जान.. मैंने पहले ही कहा था, आजकल की फिल्मों में जितना बॉडी को दिखाओगी उतना ही लोग एंजाय करेंगे और उस हीरोइन की उतनी ही अधिक डिमांड होगी। अब तुम अभी से ऐसा कर रही हो, तो आगे क्या पता किसी फिल्म में बिकनी का पोज़ देना पड़े, तब क्या करोगी..! तुमसे नहीं होगा, जाने दो।
आरोही- सॉरी.. सॉरी.. रेहान जी, मैं बस पूछ रही थी, अब आप जैसा कहो मैं करूँगी।
रेहान- यहाँ आओ.. मेरे पास बैठो और गौर से मेरी बात सुनो..!
आरोही- वहाँ आ जाती है और बेड पर बैठ जाती है।
रेहान- देखो आरोही, इसीलिए मैं राहुल को साथ नहीं लाया, क्योंकि शायद उसके सामने तुम ऐसे कपड़े नहीं पहनती और ये कुछ भी नहीं हैं, कभी-कभी बाथरूम में नहाने का सीन आएगा, तो तुम्हें ब्रा-पैन्टी के भी पोज़ देने होंगे। अभी में तुम्हारी एक मस्त सी एल्बम बना कर डायरेक्टर को दूँगा ताकि वो मना ना कर पाए। इसलिए अभी बोल दो क्योंकि इस लाइन में बहुत कुछ सहना पड़ता है। तुम बात को समझ रही हो न..!
आरोही- हाँ रेहान जी, मैं समझ रही हूँ। आप निश्चिन्त हो जाओ, अब मैं कोई शिकायत का मौका नहीं दूँगी।
उसके बाद रेहान ने अलग-अलग पोशाकों में आरोही के फ़ोटो खींचे, यहाँ तक कि ब्रा-पैन्टी के पोज़ भी ले लिए और इस दौरान कई बार आरोही के मम्मे और चूतड़ छूए।

चूची से जीजाजी की गाण्ड मारी-4

चूची से जीजाजी की गाण्ड मारी-4

सुधा
जीजाजी चाय पीते हुए बोले- ठीक है, चमेली इस बार केतली में चाय इसीलिए बना कर लाई थी कि दुबारा चाय गर्म करने के लिए नीचे ना जाना पड़े और दीदी अकेले-अकेले…! जीजाजी चमेली की तरफ गहरी नज़र से देख कर मुस्काराए।
“जीजाजी आप बड़े वो हैं..!” चमेली बोली।
“वो क्या..!”
“बड़े चोदू हैं..!” सब हँस पड़े।
तभी नीचे कॉल-बेल बजी।
“मम्मी होंगी..!”
मैं और चमेली भाग कर नीचे गई दरवाजा खोला तो देखा तो कामिनी थी- अरे कामिनी तू? आ अन्दर आ जा..!
चमेली बोली- बस आप की ही कमी थी..!
“क्या मतलब?”
“अरे छोड़ो भी कामिनी.. उसकी बात को, वह हर समय कुछ ना कुछ बिना समझे बोलती रहती है.. चल ऊपर अपने जीजाजी से मिलवाऊँ..!”
कामिनी बोली- मेरी बन्नो बड़ी खुश है, लगता है जीजाजी से भरपूर मज़ा मिला है..!”
फिर चमेली से बोली- तू भी हिस्सा बंटा रही थी क्या..!
चमेली शरमा गई, “वो कहाँ, वो तो जीजाजी…!”
मैंने उसे रोका- अब चुप हो जा… हाँ..! बोल कामिनी, क्या बात है?”
कामिनी बोली- चाची नहीं है क्या? मम्मी ने जीजाजी को कल रात को खाने पर बुलाया है।”
चमेली से फिर रहा ना गया बोली- कामिनी दीदी, सिर्फ जीजाजी को… कल की …दावत देने आई हैं।”
कामिनी बोली- चल तू भी साथ आ जाना हाँ..! जीजाजी कहाँ है…चलो उनसे तो कह दूँ..!”
मैं बोली- मुझे तो नहीं लगता कि मम्मी इसके लिए राज़ी होंगी, हाँ..! तू कहेगी तो जीजाजी ज़रूर मान जाएँगे..!”
कामिनी ने कहा- पहले यह बता, तुम दोनों को तो कोई एतराज नहीं, बाकी मैं देख लूँगी..!
“मुझे क्या एतराज हो सकता है और चमेली की माँ से भी बात कर लेंगे, पर…!”
कामिनी बोली- बस तू देखती जा, कल की कॉकटेल पार्टी में मज़ा ही मज़ा होगा..!”
इसी बीच मम्मी भी आ गईं।
कामिनी चाचीजी-चाचीजी कह कर उनके पीछे लग गई।
उनकी तबीयत के बारे में पूछा, दीदी की बातें की, फिर अवसर पाकर कहा- चाचीजी, एक बहुत ज़रूरी बात है.. आप मम्मी से फोन पर बात कर लें।
उसने झट अपने घर फोन मिला कर मम्मी को पकड़ा दिया।
मेरी मम्मी कुछ देर उसकी मम्मी की आवाज़ सुनती रहीं फिर बोलीं- ऐसी बात है, तो चमेली को कल रात रुकने के लिए भेज दूँगी.. उसकी मम्मी मेरी बात नहीं टालेगी… बबुआ जी (मदन) को बाद में सुधा के साथ भेज दूँगी… अभी कैसे जाएगी… अरे भाभी..! ये बात नहीं है… जैसा मेरा घर वैसा आप का घर…, ठीक है कामिनी बात कर लेगी…! हमें क्या एतराज हो सकता है… इन लोगों की जैसी मर्जी… आप जो ठीक समझें.. ठीक है ठीक… सुधा प्रोग्राम बना कर आपको बता देगी… चमेली तो जाएगी ही … नमस्ते भाभी।” कह कर मम्मी ने फोन रख दिया।
मम्मी मुझसे बोलीं- कामिनी की मम्मी तुम सब को कल अपने घर पर बुला रही हैं। तुम सब को वहीं खाना खाना है, उन्हें कल रात अपने मायके जागरण में जाना है, भाई साहब कहीं बाहर गए हैं, कामिनी घर पर अकेली होगी, सो वे चाहती हैं कि तुम सब वहीं रात में रुक जाओ..। तुम्हारे जीजाजी रुकना चाहें तो ठीक, नहीं तो तुम उनको लिवा कर आ जाना, चमेली रुक जाएगी।”
मैं कामिनी की बुद्धि का लोहा मान गई और मम्मी से कहा- ठीक है मम्मी..! जीजाजी जैसा चाहेंगे, वैसा प्रोग्राम बना कर तुम्हें बता दूँगी।
हम तीनों को तो जैसे मन की मुराद मिल गई। जीजाजी हम लोगों को छोड़ कर यहाँ क्या करेंगे !
“चलो..! जीजाजी से बात कर लेते हैं..!” कह कर हम दोनों ऊपर जीजाजी से मिलने चल दिए।
सीढ़ी पर मैंने कामिनी से पूछा- यह सब क्या है? तूने तो कमाल कर दिया अब बता प्रोग्राम क्या है?”
मेरे कान में धीरे से बोली- सामूहिक चुदाई…! अब बता जीजाजी ने तेरी चूत कितनी बार मारी?
“चल हट.. यह भी कोई बताने की बात है..!”
“चलो तुम नहीं बताती तो जीजू से पूछ लूँगी..!”
हम दोनों ऊपर कमरे में आ गए। जीजाजी दराज से सीडी निकाल कर ब्लू-फिल्म देख रहे थे। स्क्रीन पर चुदाई का सीन चल रहा था। उनके चेहरे पर उत्तेजना साफ झलक रही थी।
कामिनी धीरे से कमरे में अन्दर जा कर बोली- नमस्ते जीजाजी..! क्या देख रहे हैं?
कामिनी को देख कर वे हड़बड़ा गए। कामिनी रिमोट उठा कर सीडी प्लेयर बंद करती हुई बोली- ये सब रात के लिए रहने दीजिए, कल शाम को मेरे घर आपको आना है, मम्मी ने डिनर पर बुलाया है, सुधा और चमेली भी वहाँ चल रही हैं..
जीजाजी सम्भलते हुए बोले- आप कामिनी जी है ना..! मेरी शादी में गाली (शादी के समय गाए जाने वाले लोकगीत) आप ही गा रही थीं..!”
“अरे वाह जीजाजी आप की याददाश्त तो बहुत तेज है।”
जीजाजी बोले- ऐसी साली को कैसे भुलाया जा सकता है, कल जश्न मनाने का इरादा है क्या..!
“हाँ.. जीजाजी..! रात वहीं रुकना है, रात रंगीन करने के लिए अपनी पसंद की चीज़ आपको लाना है…कुछ… हॉट …हॉट बाकी सब वहाँ होगा…!”
“रात रंगीन करने के लिए आप से ज़्यादा हॉट क्या हो सकता है?” जीजाजी उसे छेड़ते हुए बोले और उसका हाथ खींच कर अपने पास कर लिया। जीजा जी कुछ और हरकत करते मैं बीच में आकर बोली- जीजा जी, आज नहीं.. दावत कल है..!”
जीजाजी ललचाई नज़र से कामिनी को देख रहे थे, सचमुच कामिनी इस समय अपने रूप का जलवा बिखेर रही थी, उसमें सेक्स अपील बहुत है।
कामिनी ने हाथ बढ़ाते हुए कहा- जीजाजी ! कल आपको पक्के में आना है।”
जीजाजी ने हाथ मिलाते हुए उसे खींच लिया और उसके गाल पर एक चुम्बन जड़ दिया।
मैं जीजाजी को रोकते हुए बोली- जीजाजी, इतनी जल्दी ठीक नहीं है..!
तभी नीचे से चमेली नाश्ता लेकर आ गई और बोली- चलिए सब लोग नाश्ता कर लीजिए, मम्मी ने भेजा है।”
सब ने मिल कर नाश्ता किया।
कामिनी उठती हुई मुझसे बोली- सुधा..! अब चलने दे, चलें..! घर में बहुत काम है, फिर कल की तैयारी भी करनी है, कल जीजाजी को लेकर ज़रा जल्दी आ जाना।
और जीजा जी के सामने ही मुझे अपने बाँहों में भरकर मेरे होंठ चूम लिए, फिर जीजाजी को देख कर एक अदा से मुस्करा दी, जैसे कह रही हो यह चुम्बन आपके लिए ही है..!
कामिनी के साथ हम सब नीचे आ गए। कामिनी मम्मी से मिल कर चली गई।
चमेली भी यह बोलते हुए चली गई कि माँ को बता कर कल सुबह एक दिन रहने के लिए आ जाएगी।
जीजाजी मम्मी से बातें करने लगे और मैं किचन में चली गई। जल्दी-जल्दी खाना बना कर खाने की मेज पर लगा दिया और हम लोगों ने खाना खाया।
रात का ख़ाना खाने के बाद मम्मी मन-पसंद सीरियल देखने लगीं। जीजाजी थोड़ी देर तो टीवी देखते रहे, फिर यह कह कर ऊपर चले गए कि ऑफिस के काम से ज़्यादा बाहर रहने के कारण वे रेग्युलर सीरियल नहीं देख पाते, इसलिए उनका मन सीरियल देखने में नहीं लगता।
फिर मुझसे बोले- सुधा.. कोई नई पिक्चर की सीडी है क्या..!”
बीच में ही मम्मी बोल पड़ीं- अरे.. कल रेणुका (मेरी पड़ोसन) देवदास की सीडी दे गई थी, जा कर लगा दे, और हाँ..! अपने जीजाजी को सोने के पहले दूध ज़रूर पिला देना..!”
मैंने कहा- जीजाजी आप ऊपर चल कर कपड़े बदलिए, मैं आती हूँ।
और मैं अपना मनपसंद सीरियल देखने लगी।
सीरियल खत्म होने पर मम्मी अपने कमरे में जाते हुए बोलीं- तू ऊपर अपने कमरे में सो जाना और जवाँई जी का ख्याल रखना।
मैं सीडी और दूध लेकर पहले अपने कमरे में गई और सारे कपड़े उतार कर नाईटी पहन ली और देवदास को एक कोने में रख कर दूसरी सीडी अपने भाभी के कमरे से निकाल लाई, मैं जानती थी कि जीजाजी साली के साथ क्या देखना पसंद करेंगे।
जब ऊपर उनके कमरे में गई तो देखा जीजाजी सो गए हैं। दूध को साइड की मेज पर रख कर एक बार हिला कर जगाया।
जब वे नहीं जागे तो उनकी बगल में जाकर लेट गई और नाईटी का बटन खोल दिया।
मैं नीचे कुछ भी नहीं पहने थी अब मेरी चूचियाँ आज़ाद थीं, फिर थोड़ा उठ कर मैंने अपनी एक चूची की चूचुक से जीजाजी के होंठ सहलाने लगी और एक हाथ को चादर के अन्दर डाल कर उनके लण्ड को सहलाने लगी।
उनका लौड़ा सजग होने लगा शायद उसे उसकी प्यारी मुनिया की महक लग चुकी थी।
अब मेरी चूची की चौंच जीजाजी के मुँह में थी और वे उसे चूसने लगे थे।
जीजाजी जाग चुके थे, मैंने कहा- जीजाजी दूध पी लीजिए।
यह कहानी आप कामवासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !
वे चूसते ही बोले- पी तो रहा हूँ..!
“अरे..! ये नहीं काली भैंस का दूध, वो रखा है गिलास में।”
“जब गोरी साली का दूध पीने को मिल रहा है, तो काली भैंस का दूध क्यों पियूं..!” जीजाजी चूची से मुँह अलग कर बोले और फिर उसे मुँह में ले लिया।
मैंने कहा- पर इसमें दूध कहाँ है..!
यह कहते हुए उनके मुँह मे से अपनी चूची छुड़ा कर उठी और दूध का गिलास उठा लाई और उनके मुँह में लगा दिया। जीजाजी ने आधा गिलास पिया और गिलास लेकर बाकी पीने के लिए मेरे मुँह में लगा दिया।
मैंने मुँह से गिलास हटाते हुए कहा- जीजाजी मैं दूध पी कर आई हूँ।
इस बीच दूध छलक कर मेरी चूचियों पर गिर गया। जीजाजी उसे अपनी जीभ से चाटने लगे, मैं उनसे गिलास लेकर अपनी चूचियों पर धीरे-धीरे दूध गिराती रही और जीजाजी मज़ा ले-ले कर उसे चाटते गए। चूची चाटने से मेरी बुर में सुरसुरी होने लगी।
प्रिय पाठकों आपकी मदमस्त सुधा की रसभरी कहानी जारी है। आपके ईमेल की प्रतीक्षा में आपकी सुधा बैठी है।
alishachuddakad@gmail.com

ख्वाहिश पूरी हो गई

ख्वाहिश पूरी हो गई

एक दिन दीपक मुझे एक ऐसे रास्ते पर लेकर गया, जहाँ पर कोई आता जाता नहीं था.
उस दिन मैंने टी-शर्ट और जींस की पैन्ट पहनी हुई थी. एकान्त में पहुँच कर दीपक ने स्कूटी को खड़ा किया और मुझे चूमने लगा.
मैं भी दीपक का साथ देने लगी.

जूही और आरोही की चूत की खुजली-6

जूही और आरोही की चूत की खुजली-6

पिंकी
दोस्तो, मैं एक बार फिर आप सबका मनोरंजन करने अपनी कहानी का अगला भाग लेकर आपके सामने हूँ। इसी के साथ आपको पता चल जाएगा कि हीरोइन कैसे बनते हैं- हा हा हा हा…!
अब आप आगे का हाल खुद ही पढ़ कर जान लीजिए प्रस्तुत है।
अब तक आपने पढ़ा-
रेहान फोटो के बहाने से आरोही को अपने घर ले जाता है और उसकी अध-नंगी तस्वीरें खींचने लगता है, उसके शरीर को छू कर मज़ा लेने लगता है, आरोही भी उसकी बातों में फँसती जा रही थी।
अब आगे-
रेहान- अरे यार, सब रियल होता है.. अब भी बोल दो कि करना है या नहीं..!
आरोही- अब यहाँ तक आकर मैं पीछे नहीं हटूँगी, अब जो होगा देखा जाएगा।
रेहान- तुम राहुल की बहन हो इसलिए मैं इतनी मेहनत कर रहा हूँ, वरना मेरे पास समय नहीं होता है। अब एक सीन और समझाता हूँ यह बहुत जरूरी है क्योंकि अभी मेरे साथ कर लोगी तो आगे तकलीफ़ नहीं होगी। डायरेक्टर चैक करेगा, बाद में हीरो के साथ भी करना है तो अभी से आदत डाल लो ओके..!
आरोही- ओके, मैं रेडी हूँ क्या करना है…!
रेहान- एक और रोमॅंटिक सीन करेंगे और जो मैं करूँगा, तुम बस मेरा साथ देना…!
आरोही- फिर से वही सीन..! कोई नॉर्मल करते है ना…!
रेहान- अरे यार नॉर्मल तो कोई भी कर लेगा.. यह जरूरी है ताकि तुम्हें पता लग जाए कि आगे क्या करना है और अबकी बार हमारा यह सीन रिकॉर्ड होगा, वो देखो वीडियो कैमरा, मैंने सैट किया हुआ है ताकि डायरेक्टर को सीधा ये टेप ही दे देंगे।
आरोही ‘हाँ’ में गर्दन हिलाई और रेहान ने वीडियो ऑन करके उसके पास आकर उसे बांहों में भर लिया।
रेहान- आओ जान.. इस दुनिया से दूर हम एक अलग दुनिया बसाएँगे।
आरोही- हाँ मेरे सपनों के राजा, ले चलो मुझे कहीं दूर यहाँ से..!
रेहान- आओ आज हम अपने प्यार में ऐसे खो जाते हैं कि कोई हमें जुदा न कर सके। आज इन दो जिस्मों को एक कर लेंगे हम।
इतना बोलकर रेहान ने आरोही को गोद में उठा कर बेड पर लिटा दिया और खुद उसके ऊपर लेट गया।
अब रेहान आरोही को चूमने लगा, अपना लौड़ा उसकी चूत पर रगड़ने लगा।
आरोही पहले ही बहुत गर्म हो रही थी, अब वो लंबी-लंबी साँसें लेने लगी और रेहान उसके जिस्म से खेलने लगा, कभी उसकी गर्दन पर चुम्बन करता तो कभी होंठों पर…!
अब रेहान के हाथ आरोही के मम्मों पर आ गए थे। वैसे तो कपड़े के नाम पर बस वो पतला सा कपड़ा था, जो हो या ना हो कोई फर्क नहीं पड़ता था।
आरोही- सी..सी आ.. आप.. आह.. ये क्या कर रहे हो आ…ह !
रेहान- जान यह रोमान्स का सीन है, ऐसे बहुत मौके आएँगे लाइफ में.., इसलिए आज अच्छी तरह सीख लो…!
आरोही- आ..ह लेकिन ये ठीक नहीं है आप तो मेरे आ…ह..!
आरोही की बात पूरी होती, इससे पहले रेहान बोल पड़ा।
रेहान- यार मैंने पहले ही सब समझा दिया था अब बार-बार नहीं समझाऊँगा मैं..! अब करो या उठ जाओ…!
आरोही- स..स.. सॉरी रेहान जी.. अब नहीं बोलूँगी, आप करते रहो.. मैं पागल हूँ, जो बार-बार भूल जाती हूँ कि आप मुझे सिखा रहे हो।
रेहान- ओके, अब बस फील करो कि तुम अपने बॉय-फ्रेंड के साथ मस्ती कर रही हो और यार तुम भी थोड़ा कुछ करो..! रियल लगना चाहिए.. तभी तो हीरोइन बनोगी…!
अब आरोही भी रेहान को चुम्बन करने लगी थी और रेहान कपड़े के ऊपर से ही आरोही के निप्पल चूसने लगा था। आरोही बहुत गर्म हो गई थी। उसकी चूत में खुजली होने लगी थी, वो बार-बार अपने हाथ से चूत को सहला रही थी।
रेहान- ऐसे ही जान.. ऐसे ही… गुड उम्म.. उम्म आ उम्म…!
आरोही- सी.. आ उम्म.. उम्म्म आ…!
रेहान दोनों निप्पलों को चूसता-चूसता अब आरोही के पेट पर चुम्बन करने ल्गा और अपना हाथ अब आरोही की चूत पर ले जाकर उसकी चूत को दबाने लगा।
आरोही- आ सी सी आह यहाँ आ.. यहीं करो अफ आ..!
रेहान- जान, यह कपड़ा बीच में आ रहा है तुम कहो तो हटा दूँ…!
आरोही पर सेक्स का खुमार चढ़ चुका था। उसके सोचने की ताक़त ख़त्म हो चुकी थी।
आरोही- आह निकाल दो.. आह..मेरे बदन में कुछ हो रहा है आ…ह..!
रेहान- कहाँ जान.. मुझे बताओ मैं सब ठीक कर दूँगा…!
आरोही चूत पर हाथ लगा कर बोलती है, “यहाँ..!”
रेहान- अभी लो जान मैं सब ठीक कर दूँगा।
इतना बोलकर रेहान वो कपड़ा पूरा हटा देता ही आरोही एकदम नंगी रेहान की नज़रों के सामने थी। उसके 32″ के गोल-गोल मम्मों और एकदम डबल-रोटी जैसी फूली हुई चूत और वो गोरा बदन जिसे छूते ही बदन में करंट दौड़ जाए। रेहान का लौड़ा पैन्ट को फाड़कर बाहर आने को बेताब था।
आरोही- सी सी आह.. रेहान आह… कुछ करो न… मेरा जिस्म गर्म हो रहा है…!
रेहान पागलों की तरह आरोही पर टूट पड़ा उसके निप्पलों को चूसने लगा और मम्मों को दबाने लगा।
आरोही-. आ आह.. प्लीज़ आराम से दबाओ ना.. आह.. दुखता है आह.. उफ सीसी आ आप नीचे कुछ करो न.. आ.ह..!
रेहान- जान ऐसे कहो.. मेरी चूत में कुछ करो अब खुल कर बोलो यार…! तुम हीरोइन बनने वाली हो…!
आरोही- आह.. प्लीज़ आह.. मेरी चूत को शान्त कर दो आ.ह…!
रेहान ने पास में रखी आयल की बोतल से उंगली पर तेल लगाया और आरोही की चूत की फाँक खोल कर अपनी उंगली अन्दर घुसाने लगा।
चूत बहुत टाइट थी, उंगली जा नहीं रही थी, पर वो थोड़ी सी उंगली घुसा कर हिलाने लगा।
आरोही- आह… सस्स… उफ़फ्फ़… ओह… आ रेहान… आ बहुत आग लग रही है आह …चूत में… आ ज़ोर से करो ना आ थोड़ा और अन्दर करो ना आ.हह..!
रेहान जानता था कि अगर उंगली ज़्यादा अन्दर की, तो इसकी सील आ जाएगी.. और इसका पानी निकल जाएगा और ये शांत हो जाएगी, इसके बाद इसे चोदना मुश्किल हो जाएगा।
आरोही- उफ करो ना.. रेहान प्लीज़ आ..ह..!.
रेहान- मेरी जान उंगली से कुछ नहीं होगा.. अब तो तुम्हारी चूत की प्यास लौड़े से ही मिट सकती है.. कहो तो निकालूँ.. लौड़ा बाहर…!
आरोही- आ..ह अब जो निकालना है आ उफ निकाल लो.. मेरे जिस्म में आग लग रही है प्लीज़ आह.. जल्दी कुछ करो…!
रेहान तो इसी इन्तजार में था।, एक मिनट में ही पूरे कपड़े निकाल दिए।
आरोही की नज़र रेहान के लौड़े पर गई तो उसकी सांस अटक गई उसे देख कर क्योंकि रेहान का लौड़ा 9″ लंबा और 3″ मोटा था, किसी घोड़े के लंड जैसा लग रहा था।
आरोही- ओह माई गॉड.. आह.. रेहान ये क्या है इतना बड़ा और मोटा ओफ…!
रेहान- हाँ जान यही तुम्हारी चूत की प्यास बुझाएगा अब…!
आरोही- नहीं.. नहीं.. रेहान मैं मर जाऊँगी प्लीज़ ऐसे ही उंगली से कुछ कर दो..! आ मेरी चूत में आ…ह..!
रेहान- अरे जान कुछ नहीं होगा.. बस मैं थोड़ा सा डालूँगा तुम्हारी चूत को शान्त करने के लिए…!
आरोही- ओके.. पर आराम से.. आ ह.. मेरा फर्स्ट टाइम है…!
रेहान- डर मत जान.. आज तेरी सील तोड़ कर तुझे स्वर्ग की सैर करा दूँगा मैं.. पहले इसे चुम्बन तो कर ले…!
रेहान आरोही के मुँह के पास लौड़ा ले जाता है। आरोही बहुत गर्म थी और फिर उसने सेक्सी वीडियो में भी देखा था कि कैसे लौड़े को चूसते हैं। बस उसने भी लौड़े पर जीभ फेरना शुरू कर दिया, लंड के सुपारे को मुँह में लेकर चूसने लगी। उसने पूरा मुँह खोला, तब कहीं जाकर लौड़ा अन्दर गया। बहुत मोटा था ना..!
दो मिनट अच्छे से चूसने के बाद आरोही ने लौड़ा मुँह से निकाल दिया और रेहान को कहा- अब बर्दाश्त नहीं होता.. डाल दो इसे चूत में…!
रेहान पास पड़े तेल को लौड़े पर अच्छे से लगाया और आरोही की चूत में भी अन्दर तक तेल डाल दिया।
रेहान- जान अब मैं लौड़ा चूत में डालने जा रहा हूँ थोड़ा दर्द होगा, बर्दाश्त कर लेना.. बाद में मज़े ही मज़े हैं।
आरोही- उफ आह… डाल दो आह.. जो होगा देखा जाएगा ऊ.. आ…ह..!
रेहान लौड़े को चूत पर टिका कर एक हाथ से चूत की फाँकें खोली और दूसरे हाथ से लौड़ा पकड़ कर उसकी टोपी चूत में फँसा दी। आरोही को थोड़ा दर्द हुआ, उसने थोड़ा हिलना चाहा पर रेहान ने उसको मौका नहीं दिया और जल्दी से एक झटका मार दिया !
लौड़ा चूत की दीवारों को चीरता हुआ आरोही की सील को तोड़ता हुआ 4″ अन्दर घुस गया।
आरोही की चूत की माँ चुद गई ..!
आरोही- आआआआआ… आआआआअ आआआ एयाया…
आरोही की चीख इतनी तेज थी कि पूरे घर को हिला कर रख दिया।
रेहान ने जल्दी से अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए और उनको चूसने लगा।
आरोही की आँखों में आँसू आ गए थे, वो दर्द से चीखना चाहती थी, पर मजबूर थी।
वो रेहान को हटाना चाहती थी, पर रेहान ने कस कर उसके हाथ पकड़ रखे थे।
लगभग 5 मिनट तक रेहान ने लौड़े को कोई हरकत नहीं दी, बस उसी अवस्था में आरोही के होंठ चूसता रहा।
जब उसे लगा कि आरोही का विरोध बन्द है तब उसने अपने होंठ हटा दिए।
आरोही- उउउ उउउ.. प्लीज़ आह रेहान आ बहुत दर्द हो रहा है प्लीज़ निकल लो उउउ उउउ आह आह…!
रेहान- अरे जान प्लीज़ तुम रो मत.. मैं कुछ नहीं करूँगा.. बस तुम चुप हो जाओ…!
आरोही- आ..ह.. मेरी चूत में आ.अ बहुत दर्द है… प्लीज़ आप निकाल लो ना आ..अ..प्लीज़ रेहान जी प्लीज़…!
रेहान- अरे जान, अभी तो तुमने कहा था कि अब पीछे नहीं हटूँगी और तुम्हारी चूत की खुजली भी ऐसे ही मिटेगी.. तुम बस थोड़ा सा बर्दाश्त कर लो जान…!
आरोही- आ आ अ..ओके.., पर आपका बहुत बड़ा है.. आअ. अपने एक साथ क्यों डाल दिया आ आह…!
रेहान अगर आरोही को बोलता कि अभी उसका आधा लौड़ा भी नहीं गया तो वो फिर से चिल्लाने लगती, इसलिए उसने झूट कहा।
रेहान- जान, सॉरी लेकिन पूरा नहीं गया है बस थोड़ा सा और है पर तुम फिकर मत करो मैं बस इतने से ही तुमको आराम-आराम से चोदूँगा…!
आरोही- आअ.. ओके अफ उ आ…!
अब रेहान अपने लौड़े को धीरे-धीरे हिलाने लगा।
आरोही का दर्द से बुरा हाल था, और वो आहें भर रही थी, मगर रेहान को कुछ नहीं बोल रही थी। उसकी चूत में जो खुजली हो रही थी, वो मिट चुकी थी, क्योंकि दर्द ज़्यादा था और मज़ा कम..
मगर अब वापस उसकी चूत फड़फड़ाने लगी थी, वो ओर्गज्म के करीब थी…!
आरोही- आ आह आईईइ आईईइ.. रेहान आ मेरी चूत में दर्द के साथ-साथ आ अफ कककक आ गुदगुदी आ हो रही है..!
रेहान- आअ.. जान तुम झड़ने वाली हो.. आ आ रोको मत… निकल जाने दो अपना पानी…!
आरोही- आ..अ.. रेहान आ..अ.. थोड़ा स्पीड में हिलो.. आ..अ..आ अई आआ..!
रेहान समझ गया कि आरोही झड़ रही है उसकी चूत का पानी रेहान अपने लौड़े पर महसूस करता है और पानी छूटने से चूत पूरी गीली हो गई थी और आरोही ने चूत को ढीला छोड़ दिया था।
इस मौके का फायदा उठा कर रेहान ने अपने होंठ आरोही के होंठों पर रखे और अपने लौड़े को टोपी तक बाहर निकाल कर एक जोरदार झटका मारा, पूरा 9″ का लौड़ा चूत को फाड़ता हुआ चूत में समा गया।
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इस शॉक से बेख़बर आरोही तो अपने ओर्गज्म में खोई हुई थी, पर जैसे ही लौड़ा दनदनाता हुआ अन्दर गया, आरोही की आँखें चढ़ गईं, उसे दुनिया घूमती हुई दिखने लगी।
उसके होंठ बन्द थे, पर वो इतनी ज़ोर से चिल्ल्लाई, अगर उसका मुँह बन्द ना होता, तो शायद बाहर तक उसकी आवाज़ जाती। उसकी आँखों के आगे अँधेरा छा गया और वो धीरे-धीरे बेहोशी के आलम में जाने लगी।
जब रेहान को लगा आरोही बेहोश हो गई है वो स्पीड से उसको चोदने लगा ताकि बेहोशी में उसको दर्द का अहसास ना हो और उसकी चूत भी ‘फ्री’ हो जाए।
रेहान का चोदने का अंदाज निराला था। वो पूरा लौड़ा बाहर निकालता और एक झटके में पूरा अन्दर डाल देता और स्पीड इतनी थी कि 5 सेकंड में लौड़ा दो बार अन्दर-बाहर हो रहा था।
रेहान का स्टेमिना बहुत स्ट्रोंग था। लगभग 5 मिनट तक वो लगातार ऐसे ही झटके मारता रहा।
उसने आरोही की चूत को रेलगाड़ी बना दिया था। उसका लौड़ा चूत की जड़ तक चोट मार रहा था। अब आरोही होश में आने लगी थी। पूरे दस मिनट बाद उसको होश आया था। रेहान वैसे ही लगा हुआ था।
आरोही- अई..आह आह ऊउउ उउउ उ मर गई आआ आह आ आ…!
रेहान- ऊऊआ क्यों जान आ आ..ह.. जाग गई नींद से आ आ…ह..!
आरोही- आ..अ..आ आ.. आप बहुत ग…गंदे हो आ कितना द..द..दर्द कर दिया उउउ उउउ आ प्लीज़ निकाल लो आ मैं दर्द से आह मर जा.उंगी आ.ह..!
रेहान- कुछ नहीं होगा जान.. आ उहह.. अब पूरा लौड़ा चूत में समा गया है..! ये लो आ बस थोड़ी देर की बात है.. आ..ह.. मेरा गरमा-गरम पानी तेरी चूत के दर्द को मिटा देगा उहह उहह…!
आरोही- अईए इ उफ़फ्फ़ ससस्स कककक आह आ प्लीज़ आह ओ ओो बहुत आह दर्द आ हो रहा है..!
करीब 5 मिनट तक आरोही ऐसे ही चीखती रही, अब वो दोबारा अपने चरम पर आ गई थी अब उसको थोड़ा मज़ा आने लगा था।
आरोही-. अई.. आह ज़ोर से करो आ या या फक मी.. आ फक हार्ड ओफफ्फ़.. फू..ओ आ फास्ट आ फास्ट स्वीट-हार्ट.. आह आ.ह..!
रेहान- ये हुई ना बात आ.. उहह ये लो आ एयाया आआ आआ अई…!
रेहान का लौड़ा अब इतनी गर्म और कच्ची चूत की गर्मी बर्दाश्त नहीं कर सका और पिचकारी मारने लगा।
आरोही की चूत की दीवारों पर जब पहली बार पुरुष के वीर्य ने छुआ तो उसका बाँध भी टूट गया, उसको इतना मज़ा आया, रेहान के पानी की पिचकारी के अहसास से वो चूत को भींच और खोल कर झड़ रही थी और रेहान भी लगातर पानी छोड़ रहा था, जैसे आज पूरी चूत को पानी से भर देगा और आरोही भी ऐसे झड़ रही थी जैसे जिंदगी में दोबारा कभी मौका नहीं मिलेगा।
तकरीबन 2-3 मिनट तक दोनों के पानी का संगम होता रहा और उसके बाद दोनों शान्त पड़ गए। रेहान उसी अवस्था में आरोही पर पड़ा रहा।
बस दोस्तो, आज के लिए इतना काफ़ी है वैसे भी आज का मेगा-पार्ट आपको उत्तेज़ित करने के लिए काफ़ी है। अब आप भी आराम करो और इनको भी करने दो अगले भाग में देखना कि क्या होता है आरोही के साथ !
और राहुल को जब यह पता चलेगा तो उसका क्या हाल होगा।
यह सब जानने के लिए इन्तजार कीजिए और मेरी आईडी pinky14342@ gmail.com पर आप पता कर सकते हो कि अगला भाग कब आएगा।
मेरे जो खास दोस्त हैं आप जैसे हमेशा मेल करके मेरा साथ देते हो.. वैसे देते रहना बाय दोस्तो ..!